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यूरोलॉजी

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery): सवाल और जवाब

यह जानकारी जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) को आसान भाषा में समझाती है। इसमें बताया गया है कि प्रक्रिया से पहले, उसके दौरान और बाद में क्या ध्यान रखना है।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी को समझना

इस भाग में बताया गया है कि यह सर्जरी क्यों की जाती है और पथरी को कैसे निकाला जाता है।

यूरेटेरोस्कोपी और DJ स्टेंटिंग में क्या होता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरोस्कोपी और DJ स्टेंटिंग एक न्यूनतम इनवेसिव ऑपरेशन है जो यूरेटर से पथरी निकालने के लिए किया जाता है। एक पतला स्कोप यूरेथ्रा और ब्लैडर से होता हुआ पथरी तक पहुँचता है। एक होल्मियम लेज़र पथरी को धूल या छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है। फिर सर्जन यूरेटर के अंदर एक अस्थायी प्लास्टिक स्टेंट रखते हैं, जिसे DJ स्टेंट कहते हैं, ताकि ठीक होने के दौरान यूरेटर खुला रहे।

विस्तार से

यह प्रक्रिया पथरी की जगह के अनुसार सेमीरिजिड या फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोप से की जाती है। सेमीरिजिड स्कोप निचले और बीच के यूरेटर की पथरी के लिए होते हैं। फ्लेक्सिबल स्कोप किडनी के पास ऊपर की पथरी तक पहुँचते हैं।

लेज़र फाइबर पथरी को तोड़ता है, और बड़ी टुकड़ियों के लिए बास्केट इस्तेमाल हो सकती है। ज्यादातर मरीज़ों को स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) दी जाती है। ऑपरेशन आमतौर पर 45 से 90 मिनट चलता है।

ज्यादातर मामलों में DJ स्टेंट डाला जाता है ताकि सूजन से यूरिन का बहाव न रुके या पथरी के टुकड़े न अटकें। स्टेंट कुछ दिन से दो हफ्ते तक रहता है और बाद में एक छोटी क्लिनिक विज़िट में निकाला जाता है।

एक आम धारणा

कई लोग सोचते हैं कि इसमें स्किन पर चीरा लगता है।

असल में क्या होता है

ऐसा नहीं है। पूरी प्रक्रिया यूरेथ्रा से होती है, इसलिए पेट पर न टाँके होते हैं न निशान।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आप OPD में अपने सर्जन से मिलकर इमेजिंग देखेंगे और सर्जरी की योजना बनाएंगे। प्री-ऑपरेटिव टेस्ट में यूरिन कल्चर, ब्लड काउंट और किडनी फंक्शन शामिल हैं। हॉस्पिटल स्टे आमतौर पर डेकेयर या एक रात का होता है।

आप 3 से 5 दिन में डेस्क वर्क पर लौट सकते हैं। स्टेंट निकालने का समय छुट्टी से पहले तय हो जाता है। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि अपनी पथरी और सटीक स्टेप्स पर चर्चा कर सकें।

मेरा डॉक्टर यूरेटेरोस्कोपी और DJ स्टेंटिंग की सलाह क्यों दे सकता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में आपका डॉक्टर यूरेटेरोस्कोपी और DJ स्टेंटिंग की सलाह दे सकता है अगर आपके यूरेटर में 5 से 20 मिलीमीटर की पथरी है जो अपने आप निकलने की संभावना नहीं रखती या दर्द, रुकावट, संक्रमण या यूरिन में खून पैदा कर रही है। यह प्रक्रिया एक ही सिटिंग में पथरी निकालती है और रुकावट दूर करती है।

विस्तार से

यूरेटेरोस्कोपी यूरेटर की उन पथरियों का मानक इलाज है जो अपने आप निकलने के लिए बहुत बड़ी हैं या जिन पर मेडिकल एक्सपल्सिव थेरेपी असर नहीं करती।

यह तब भी इस्तेमाल होती है जब पथरी बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, लगातार दर्द या रुकावट से किडनी की सूजन पैदा करती है। लेज़र पथरी को असरदार ढंग से तोड़ता है और स्टेंट यूरेटर के ठीक होने तक ड्रेनेज पक्का करता है।

अध्ययनों में फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोपी और लेज़र लिथोट्रिप्सी ने ऊपरी यूरेटर और किडनी के पास की पथरियों के लिए हाई स्टोन-फ्री रेट दिखाई हैं। यह प्रक्रिया न्यूनतम इनवेसिव है और कोई बाहरी चीरा नहीं लगता। आपका सर्जन पथरी का आकार, जगह, संरचना और आपकी सेहत देखकर यह विकल्प सुझाएगा।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ उम्मीद करते हैं कि दवा से पथरी निकल जाएगी।

असल में क्या होता है

5 से 10 मिलीमीटर से बड़ी या कॉम्प्लिकेशन पैदा करने वाली पथरियों के लिए इंतज़ार अक्सर ज्यादा दर्द, इन्फेक्शन या किडनी डैमेज की वजह बनता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अगर आपको यह प्रक्रिया कराने की सलाह दी गई है, तो अपनी इमेजिंग और ब्लड रिपोर्ट कंसल्टेशन में लाएं। टीम एनेस्थीसिया के लिए आपकी फिटनेस देखेगी और सर्जरी प्लान करेगी। ज्यादातर मरीज़ 3 से 5 दिन में डेस्क वर्क पर लौट आते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि पता चल सके कि यह इलाज आपके लिए सही है या नहीं।

डॉक्टर कैसे तय करेंगे कि मुझे यूरेटेरोस्कोपी और DJ स्टेंटिंग की ज़रूरत है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में सर्जन पथरी के आकार, जगह और आपके लक्षणों के आधार पर फैसला लेते हैं। CT स्कैन या अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) जैसी इमेजिंग से साफ पता चलता है कि पथरी कहाँ है और कितनी बड़ी है। ब्लड टेस्ट और यूरिन कल्चर किडनी फंक्शन जांचते हैं और इन्फेक्शन रूल आउट करते हैं। यूरेटर में 5 से 20 मिलीमीटर की पथरियाँ आमतौर पर इसके लिए उपयुक्त होती हैं।

विस्तार से

फैसला इमेजिंग नतीजों और आपकी क्लिनिकल तस्वीर को मिलाकर होता है। अगर पथरी निचले या बीच के यूरेटर में है, तो आमतौर पर सेमीरिजिड यूरेटेरोस्कोप चुना जाता है। पेल्वि-यूरेटेरिक जंक्शन के पास ऊपर की पथरी के लिए फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोप बेहतर पहुँच देता है।

सर्जन पथरी की संरचना (अगर पता हो), पिछली सर्जरी और एनाटॉमिकल वेरिएशन भी देखते हैं। यूरिन कल्चर अनिवार्य है क्योंकि पॉजिटिव कल्चर प्रक्रिया के बाद यूरोसेप्सिस का खतरा बढ़ाता है।

अगर इन्फेक्शन है, तो पहले एंटीबायोटिक दी जाती हैं और पथरी का इलाज बाद में हो सकता है। कुछ मामलों में अगर यूरेटर बहुत टाइट है, तो पहले स्टेंट डालकर पैसिव डाइलेशन कराया जाता है और फिर फाइनल लेज़र प्रक्रिया होती है।

एक आम धारणा

सिंपल X-रे छोटी पथरियाँ मिस कर सकता है या सटीक जगह न दिखाए।

असल में क्या होता है

CT इमेजिंग पसंद की जाती है क्योंकि यह पथरी और यूरेटर एनाटॉमी का साफ 3D व्यू देती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आपको हाल की इमेजिंग चाहिए, आमतौर पर CT KUB या अल्ट्रासाउंड, साथ में बेसिक ब्लड वर्क और यूरिन कल्चर। सर्जन OPD में इन्हें देखकर अप्रोच समझाते हैं। आम खर्च ₹60,000 से ₹1,50,000 के बीच होता है। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि आपके स्कैन रिव्यू हों और प्लान बने।

क्या मैं यूरेटेरोस्कोपी और DJ स्टेंटिंग को सुरक्षित रूप से टाल सकता हूँ, और अगर टालूं तो क्या हो सकता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरोस्कोपी और DJ स्टेंटिंग टालना जोखिम भरा हो सकता है अगर पथरी किडनी ब्लॉक कर रही हो या इन्फेक्शन पैदा कर रही हो। ब्लॉक्ड किडनी समय के साथ फंक्शन खो सकती है। बुखार के साथ पथरी इन्फेक्टेड यूरिन का इशारा करती है, जो यूरोसेप्सिस जैसी जानलेवा हालत में बदल सकता है। आपके स्कैन और ब्लड वर्क देखने के बाद आपका सर्जन अर्जेंसी बताएगा।

विस्तार से

सबूत दिखाते हैं कि रुकावट के साथ इन्फेक्शन एक सर्जिकल इमरजेंसी है। बुखार न भी हो, तो लंबी रुकावट लॉन्ग-टर्म किडनी डैमेज कर सकती है। कई हफ्तों से न हिलने वाली पथरियाँ अपने आप निकलने की संभावना नहीं रखतीं।

प्री-ऑपरेटिव स्टेंटिंग अगर डेफिनिटिव इलाज से बहुत पहले की जाए तो यूरोसेप्सिस का खतरा बढ़ाती है। डायबिटीज, बढ़ती उम्र, हार्ट डिजीज और हाई BMI इन्फेक्शन कॉम्प्लिकेशन का खतरा बढ़ाते हैं। अध्ययनों में पोस्ट-ऑपरेटिव यूरोसेप्सिस की संयुक्त घटना लगभग 5 प्रतिशत है।

स्टेंट डिसकम्फर्ट और यूरिन में खून जैसी छोटी जटिलताएँ आम हैं पर मैनेज हो जाती हैं। यूरेटरल इंजरी या सेप्सिस जैसी बड़ी जटिलताएँ कम होती हैं पर गंभीर होती हैं।

  • अध्ययनों में पोस्ट-ऑपरेटिव यूरोसेप्सिस की संयुक्त घटना लगभग 5 प्रतिशत है।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ हफ्तों तक घरेलू नुस्खे या पेनकिलर आजमाते हैं।

असल में क्या होता है

10 मिलीमीटर से बड़ी पथरियों के लिए अपने आप निकलना असंभव सा है, और देरी सिर्फ कॉम्प्लिकेशन का चांस बढ़ाती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अगर आपको बुखार, ठंड लगना या अनकंट्रोल्ड दर्द है, तो तुरंत इमरजेंसी डिपार्टमेंट जाएं। स्थिर पथरियों के लिए सर्जन मेडिकल एक्सपल्सिव थेरेपी का छोटा ट्रायल दे सकते हैं। अपने डॉक्टर की तय समयसीमा से आगे इंतज़ार न करें। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि आपके केस के लिए सेफ विंडो तय हो सके।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी की तैयारी

इस भाग में आपके ऑपरेशन की तैयारी के ज़रूरी कदम बताए गए हैं।

यूरेटेरोस्कोपी और DJ स्टेंटिंग से पहले मुझे कौनसे टेस्ट और स्कैन चाहिए?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरोस्कोपी और DJ स्टेंटिंग से पहले आपको आमतौर पर पथरी का पता लगाने के लिए CT स्कैन या अल्ट्रासाउंड, किडनी फंक्शन और इन्फेक्शन मार्कर के लिए ब्लड टेस्ट, यूरिन रूटीन और कल्चर, और एनेस्थीसिया के लिए बेसिक फिटनेस टेस्ट जैसे ECG और चेस्ट X-रे (अगर ज़रूरी हो) चाहिए।

विस्तार से

इमेजिंग पथरी का आकार, जगह और रुकावट की डिग्री तय करती है। नॉन-कंट्रास्ट CT सर्जिकल प्लानिंग का मानक है। ब्लड टेस्ट में सीरम क्रिएटिनिन, यूरिया, कम्पलीट ब्लड काउंट और कोएगुलेशन प्रोफाइल शामिल हैं।

यूरिन कल्चर किसी इन्फेक्शन की पहचान करता है जिसका इलाज सर्जरी से पहले होना चाहिए ताकि यूरोसेप्सिस का खतरा कम रहे। सबूत दिखाते हैं कि प्री-ऑपरेटिव UTI का इलाज और एंटीबायोटिक प्रोफिलैक्सिस इन्फेक्शन कॉम्प्लिकेशन घटाते हैं।

उम्र और कोमॉर्बिडिटी के हिसाब से एनेस्थीसिया टीम ECG, चेस्ट X-रे या दूसरी क्लीयरेंस मांग सकती है। सभी रिपोर्ट हाल की होनी चाहिए, आमतौर पर प्लांड प्रोसीजर के दो हफ्ते के अंदर।

एक आम धारणा

मरीज़ कभी-कभी यूरिन कल्चर छोड़ देते हैं अगर उन्हें ठीक लगता है।

असल में क्या होता है

सबूत दिखाते हैं कि अनट्रीटेड यूरिन इन्फेक्शन प्रोसीजर के बाद गंभीर सेप्सिस का खतरा बढ़ाता है, इसलिए कल्चर ज़रूरी है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सभी हाल की रिपोर्ट इकट्ठा करके अपने प्री-ऑपरेटिव विज़िट में लाएं। नर्सिंग टीम किसी अतिरिक्त टेस्ट के लिए गाइड करेगी। फास्टिंग के निर्देश और दवा एडजस्टमेंट उसी समय बताए जाएंगे। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि आपकी प्री-ऑपरेटिव चेकलिस्ट मिले और ज़रूरी जांच शेड्यूल हों।

यूरेटेरोस्कोपी और डीजे स्टेंटिंग से पहले के दिनों में मुझे कैसे तैयारी करनी चाहिए?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरोस्कोपी और डीजे स्टेंटिंग से पहले के दिनों में, दवाओं, पानी पीने और पेट साफ़ करने के बारे में अपने सर्जन के खास निर्देशों का पालन करें। खून पतला करने वाली दवाएँ (ब्लड थिनर) तभी बंद करें जब लिखने वाले डॉक्टर और सर्जिकल टीम कहें। जब तक किसी बीमारी के लिए पानी पीना मना न हो, भरपूर पानी पिएँ।

विस्तार से

आपके यूरिन कल्चर के नतीजे के आधार पर सर्जरी से एक दिन पहले एंटीबायोटिक शुरू करने को कहा जा सकता है। अध्ययन बताते हैं कि एंटीबायोटिक प्रोफिलैक्सिस यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन और यूरोसेप्सिस का खतरा कम करता है।

अगर आप एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल, एपिक्साबैन या दूसरी एंटीकोगुलेंट लेते हैं, तो टीम ब्लीडिंग के खतरे और दवा बंद करने के खतरे को तौलेगी। हर्बल सप्लीमेंट जैसे जिन्कगो, लहसुन या जिनसेंग ब्लीडिंग बढ़ा सकते हैं, इनके बारे में बताएँ।

बिना पूछे नए विटामिन या सप्लीमेंट शुरू न करें। एनेस्थीसिया टीम स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया के लिए आपकी फिटनेस जाँचेगी। आपको उपवास के निर्देश मिलेंगे, आमतौर पर प्रक्रिया से छह घंटे पहले मुँह से कुछ न लें।

अगर रात भर रुकना तय है तो एक अटेंडेंट साथ रहने का इंतज़ाम करें। ढीले आरामदायक कपड़े और डिस्चार्ज के बाद ज़रूरी नियमित दवाएँ साथ रखें।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर अपनी दिल या स्ट्रोक की दवाएँ खुद बंद कर देते हैं।

असल में क्या होता है

यह खतरनाक हो सकता है। किसी भी नियमित दवा को बदलने से पहले हमेशा अपने कार्डियोलॉजिस्ट और यूरोलॉजी टीम, दोनों से तालमेल करें।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सर्जरी की सुबह, केवल वही दवाएँ लें जिन्हें एनेस्थेटिस्ट ने मंजूरी दी हो, एक घूँट पानी के साथ। अगर कहा जाए तो एंटीसेप्टिक साबुन से नहाएँ। गहने, कॉन्टैक्ट लेंस और डेंचर निकाल दें। ऑपरेशन 45 से 90 मिनट चलता है।

आपको रिकवरी में एक से दो घंटे निगरानी में रखा जाएगा। ज्यादातर मरीज़ उसी दिन या अगली सुबह घर चले जाते हैं। स्टेंट आमतौर पर दो हफ्ते के अंदर निकाला जाता है।

क्या यूरेटेरोस्कोपी और डीजे स्टेंटिंग से पहले उपवास करना ज़रूरी है, और मुझे कब खाना-पीना बंद कर देना चाहिए?

संक्षेप में

हाँ, जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरोस्कोपी और डीजे स्टेंटिंग से पहले उपवास ज़रूरी है क्योंकि प्रक्रिया स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया में की जाती है। आमतौर पर ठोस खाना 6 घंटे पहले और साफ़ तरल (क्लियर फ्लुइड) 2 घंटे पहले बंद कर दिए जाते हैं। सटीक समय एनेस्थीसिया टीम कन्फर्म करेगी।

विस्तार से

उपवास एनेस्थीसिया के दौरान एस्पिरेशन का खतरा कम करता है। अध्ययन पुष्टि करते हैं कि जनरल एनेस्थीसिया के लिए खाली पेट सुरक्षा के लिए ज़रूरी है।

अगर आपकी सर्जरी सुबह है, तो आमतौर पर आधी रात के बाद खाना बंद कर दें और सुबह जल्दी तक पानी पी सकते हैं।

दोपहर के स्लॉट के लिए, हल्का नाश्ता लेने की छूट हो सकती है और फिर क्लियर फ्लुइड की विंडो दी जाती है। एनेस्थेसियोलॉजिस्ट प्री-ऑपरेटिव चेक में सटीक निर्देश देंगे।

अगर आप बीपी जैसी ज़रूरी सुबह की दवाएँ लेते हैं, तो आपको एक घूँट पानी के साथ लेने को कहा जा सकता है। खुद से समय तय न करें; हमेशा हॉस्पिटल से कन्फर्म करें।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ सोचते हैं कि एक कप चाय या एक बिस्किट से फर्क नहीं पड़ता।

असल में क्या होता है

एनेस्थीसिया सुरक्षा नियमों के कारण थोड़ी मात्रा भी सर्जरी में देरी या कैंसिलेशन की वजह बन सकती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सर्जरी से एक दिन पहले एडमिशन डेस्क पर कॉल करके अपना उपवास शुरू होने का समय दोबारा कन्फर्म करें। अपनी नियमित दवाओं की लिस्ट साथ लाएँ।

अगर आप गलती से तय विंडो के बाहर कुछ खा-पी लें, तो टीम को तुरंत बताएँ क्योंकि सुरक्षा के लिए सर्जरी दोबारा शेड्यूल करनी पड़ सकती है।

यूरेटेरोस्कोपी और डीजे स्टेंटिंग से पहले मुझे कौन-सी दवाएँ, सप्लीमेंट या हर्बल प्रोडक्ट डॉक्टर से डिस्कस करने चाहिए?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरोस्कोपी और डीजे स्टेंटिंग से पहले अपने सर्जन को हर दवा के बारे में बताएँ, खासकर ब्लड थिनर जैसे एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल, एपिक्साबैन या वारफारिन, डायबिटीज की दवाएँ जैसे इंसुलिन या मेटफॉर्मिन, और कोई भी हर्बल या आयुर्वेदिक प्रोडक्ट। कुछ सप्लीमेंट ब्लीडिंग का खतरा बढ़ाते हैं या एनेस्थीसिया से असर डालते हैं।

विस्तार से

ब्लड थिनर सबसे अहम ग्रुप हैं। इन्हें रोकना या छोटी अवधि वाली दवा से ब्रिज करना पड़ सकता है, लेकिन सिर्फ आपके कार्डियोलॉजिस्ट और सर्जिकल टीम की साझा सलाह से।

हर्बल प्रोडक्ट जैसे जिन्कगो, लहसुन, अदरक, जिनसेंग और ज्यादा मात्रा में हल्दी क्लॉटिंग पर असर डाल सकते हैं। आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवाओं में अघोषित तत्व हो सकते हैं। विटामिन ई और फिश ऑयल बड़ी मात्रा में ब्लीडिंग बढ़ाते हैं।

एनेस्थीसिया टीम प्री-ऑपरेटिव असेसमेंट में आपकी पूरी लिस्ट देखती है। कोई भी निर्धारित दवा खुद बंद न करें। असली बोतलें या डोज़ के साथ लिखी लिस्ट ओपीडी विज़िट में लाएँ।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर हर्बल सप्लीमेंट या कभी-कभी ली जाने वाली पेनकिलर बताना भूल जाते हैं।

असल में क्या होता है

यहाँ तक कि आम नुस्खे जैसे ज्यादा मात्रा में हल्दी या फिश ऑयल भी लेज़र लिथोट्रिप्सी के दौरान ब्लीडिंग बढ़ा सकते हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

प्री-एनेस्थीसिया चेक आमतौर पर सर्जरी से एक या दो दिन पहले होता है। बदलाव दर्ज करके ऑपरेटिंग टीम को भेज दिए जाते हैं। आमतौर पर हॉस्पिटल स्टे डेकेयर या एक रात का होता है।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी के जोखिम और परिणाम

इस भाग में संभावित जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) और सर्जरी के बाद मिलने वाले परिणामों की जानकारी दी गई है।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी और शुरुआती रिकवरी में कितना दर्द होता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया में की जाती है, इसलिए ऑपरेशन के दौरान आपको दर्द नहीं होता। सर्जरी के बाद ज्यादातर मरीज़ हल्के से मध्यम डिस्कमफर्ट बताते हैं जिसे खाने वाली पेन रिलीफ से कंट्रोल किया जाता है। यूरेटर में लगाया गया स्टेंट कुछ दिनों तक सुस्त दर्द या ब्लैडर में जलन पैदा कर सकता है।

विस्तार से

प्रक्रिया में यूरेटेरोस्कोप यूरेथ्रा से डालकर पथरी तक पहुँचाया जाता है। होल्मियम लेज़र पथरी को धूल या छोटे टुकड़ों में तोड़ता है, जिन्हें फिर निकाल दिया जाता है या फ्लश कर दिया जाता है।

सूजन बैठने तक यूरेटर खुला रखने के लिए अस्थायी डीजे स्टेंट आमतौर पर लगाया जाता है।

अध्ययन बताते हैं कि स्टेंट से जुड़े लक्षण जैसे पेशाब करते वक्त फ्लैंक पेन, बार-बार पेशाब आना, और पेशाब में खून आम हैं लेकिन स्टेंट निकलने के बाद आमतौर पर सुधर जाते हैं। अध्ययनों के मुताबिक बड़ी जटिलताएँ असामान्य हैं, और ज्यादातर डिस्कमफर्ट पहले हफ्ते में ठीक हो जाता है।

एक आम धारणा

कई मरीज़ तेज दर्द की उम्मीद करते हैं, लेकिन स्टेंट से सुस्त दर्द या ब्लैडर की जलन होती है, सर्जिकल तेज दर्द नहीं।

असल में क्या होता है

यह आमतौर पर कुछ दिन में बैठ जाता है और स्टेंट निकलने के बाद बहुत बेहतर हो जाता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

डिस्चार्ज से पहले आपको पेन टैबलेट और ज़रूरत हो तो एंटीबायोटिक का छोटा कोर्स दिया जाएगा। रोज़ दो से तीन लीटर पानी पिएँ ताकि टुकड़े निकल जाएँ और स्टेंट की जलन कम हो। एक हफ्ते भारी वजन न उठाएँ। स्टेंट आमतौर पर एक से दो हफ्ते बाद ओपीडी में छोटी सी विज़िट में निकाला जाता है।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी के आम साइड इफेक्ट और कम आम लेकिन गंभीर जटिलताएँ क्या हैं?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी के बाद आम साइड इफेक्ट में पेशाब में खून, पेशाब करते वक्त हल्की जलन, बार-बार पेशाब आना, और स्टेंट से फ्लैंक डिस्कमफर्ट शामिल हैं। ये आमतौर पर कुछ दिन में ठीक हो जाते हैं। कम आम लेकिन गंभीर जटिलताओं में यूरेटेरिक इंजरी, खास ब्लीडिंग जिसमें दखल देना पड़े, और यूरोसेप्सिस शामिल हैं, जिनमें तुरंत हॉस्पिटल इलाज की ज़रूरत होती है।

विस्तार से

प्रक्रिया में यूरेटेरोस्कोप यूरेथ्रा से पथरी तक पहुँचाया जाता है, होल्मियम लेज़र से पथरी तोड़ी जाती है, और डीजे स्टेंट लगाया जाता है। अध्ययन बताते हैं कि स्टेंट से जुड़े लक्षण जैसे हीमैच्यूरिया, डिस्यूरिया, और फ्लैंक पेन सबसे ज्यादा रिपोर्ट होते हैं।

इन्फेक्शन से जुड़ी जटिलताएँ जैसे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन और यूरोसेप्सिस कुछ मरीज़ों में होती हैं; रिस्क फैक्टर में प्री-ऑपरेटिव इन्फेक्शन, लंबा ऑपरेटिव टाइम, डायबिटीज, और लंबे समय तक स्टेंट रहना शामिल हैं। बड़ी जटिलताएँ जैसे यूरेटेरिक पेरफोरेशन या स्ट्रिक्चर कम प्रतिशत में रिपोर्ट होती हैं।

ज्यादातर इन्फेक्शन जटिलताएँ मामूली होती हैं और एंटीबायोटिक से ठीक हो जाती हैं, लेकिन यूरोसेप्सिस जल्दी इलाज न होने पर मल्टी-ऑर्गन फेल्योर तक बढ़ सकती है।

एक आम धारणा

कई लोग लेज़र से यूरेटर को नुकसान की चिंता करते हैं, लेकिन अध्ययन बताते हैं बड़ी इंजरी दुर्लभ हैं।

असल में क्या होता है

बड़ी चिंता इन्फेक्शन की है, खासकर अगर सर्जरी से पहले यूरिन इन्फेक्शन था या स्टेंट ज्यादा समय तक रहा। इसलिए हम पहले किसी भी इन्फेक्शन का इलाज करते हैं और स्टेंट जल्दी निकालते हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

डिस्चार्ज पर आपको एंटीबायोटिक और पेन रिलीफ दी जाएगी। खूब तरल पिएँ और एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा करें। 38°C से ऊपर बुखार, कंपकंपी, पेशाब न आना, या थक्कों के साथ भारी ब्लीडिंग पर तुरंत ध्यान दें। स्टेंट आमतौर पर एक से दो हफ्ते बाद ओपीडी में निकाला जाता है।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) में मेरे लिए जोखिम किन चीज़ों से बढ़ सकता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) का जोखिम कई चीज़ों से बढ़ सकता है। इनमें सक्रिय पेशाब का संक्रमण (इन्फेक्शन), डायबिटीज़, अधिक उम्र, दिल की बीमारी, हाई बीएमआई, न्यूरोजेनिक ब्लैडर, महिला होना, और लंबे समय से लगा हुआ प्री-ऑपरेटिव स्टेंट शामिल हैं। लंबा ऑपरेशन टाइम और अधिक पथरी का बोझ भी जोखिम बढ़ाते हैं।

विस्तार से

कई अध्ययन (स्टडी) बताते हैं कि प्री-ऑपरेटिव यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, पॉज़िटिव यूरिन कल्चर, डायबिटीज़ मेलिटस, इस्कीमिक हार्ट डिजीज़, अधिक चार्ल्सन कॉमॉर्बिडिटी इंडेक्स, और लंबे समय तक प्री-स्टेंटिंग, ऑपरेशन के बाद यूरोसेप्सिस के स्वतंत्र जोखिम कारक हैं।

अधिक उम्र के मरीज़ों और न्यूरोजेनिक ब्लैडर वालों में संक्रामक जटिलताओं (कॉम्प्लिकेशन) की दर अधिक होती है। लंबी प्रक्रिया, जो अक्सर बड़ी या कई पथरियों के लिए ज़रूरी होती है, सेप्सिस के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी है।

एक संकीर्ण यूरेटर जो स्कोप को समायोजित नहीं कर सकता, उसे शुरुआती स्टेंटिंग और विलंबित यूरेटेरोस्कोपी के साथ चरणबद्ध उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

आपका सर्जन प्री-ऑपरेटिव मूल्यांकन के दौरान इन कारकों का आकलन करेगा और आगे बढ़ने से पहले आपकी स्थिति को अनुकूलित कर सकता है।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर सोचते हैं कि पथरी का आकार ही एकमात्र जोखिम कारक है, लेकिन अध्ययन (स्टडी) दिखाते हैं कि डायबिटीज़ और प्री-एक्सिस्टिंग स्टेंट की अवधि जैसे रोगी कारक उतने ही मायने रखते हैं।

असल में क्या होता है

संकीर्ण यूरेटर को भी टू-स्टेज दृष्टिकोण की आवश्यकता हो सकती है, जिसकी योजना आपका सर्जन बनाएगा।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सर्जरी से पहले, आपका यूरिन कल्चर, खून की जाँच, और इमेजिंग होगी। किसी भी संक्रमण (इन्फेक्शन) का पहले इलाज किया जाता है। यदि आपको डायबिटीज़ या दिल की बीमारी है, तो आपका चिकित्सक दवाएं एडजस्ट कर सकता है।

सर्जिकल टीम का लक्ष्य ऑपरेटिव टाइम कम रखना और स्टेंट ड्वेल न्यूनतम रखना होता है। आपको बताया जाएगा कि एनेस्थीसिया (बेहोशी) से पहले कब खाना-पीना बंद करना है।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी के बाद रिकवरी और फॉलो-अप

इस भाग में रिकवरी (ठीक होना) की प्रक्रिया और डॉक्टर से दोबारा मिलने के बारे में समझाया गया है।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद रिकवरी (ठीक होना) में आमतौर पर कितना समय लगता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में अधिकांश मरीज़ उसी दिन या एक रात बाद घर चले जाते हैं। आप आमतौर पर तीन से पांच दिनों में डेस्क वर्क पर लौट सकते हैं। स्टेंट हटाने सहित पूरी रिकवरी (ठीक होना) में लगभग एक से दो सप्ताह लगते हैं। भारी सामान उठाना और ज़ोरदार गतिविधि कम से कम एक सप्ताह तक टालनी चाहिए।

विस्तार से

ऑपरेशन स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) के तहत 45 से 90 मिनट लेता है। संक्षिप्त अवलोकन अवधि के बाद, आपको दर्द निवारक और आवश्यकता पड़ने पर एंटीबायोटिक्स के साथ छुट्टी दे दी जाती है।

सर्जरी के दौरान लगाया गया डीजे स्टेंट यूरेटर को ठीक होने और टुकड़ों को निकलने देने के लिए एक से दो सप्ताह तक रहता है।

साक्ष्य दिखाते हैं कि इस अवधि के दौरान स्टेंट-संबंधी लक्षण जैसे फ्लैंक पेन, पेशाब की बार-बार इच्छा, और पेशाब में खून आम हैं लेकिन स्टेंट हटाने के बाद सुधर जाते हैं।

अधिकांश मरीज़ एक सप्ताह के भीतर सामान्य दैनिक गतिविधियाँ फिर से शुरू करते हैं, हालांकि शारीरिक परिश्रम स्टेंट निकलने तक सीमित रखना चाहिए। पथरी निकासी की पुष्टि के लिए फॉलो-अप इमेजिंग की व्यवस्था की जा सकती है।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ लंबे बेड रेस्ट की उम्मीद करते हैं, लेकिन यह डेकेयर या एक रात की प्रक्रिया है।

असल में क्या होता है

मुख्य सीमा स्टेंट है, जो निकलने तक मूत्र संबंधी लक्षण पैदा करता है। एक बार स्टेंट निकल जाने पर, रिकवरी (ठीक होना) आमतौर पर पूरी हो जाती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

रोज़ दो से तीन लीटर पानी पिएं ताकि टुकड़े निकल जाएं और स्टेंट की जलन कम हो। निर्धारित दर्द की गोलियां लें और एंटीबायोटिक कोर्स पूरा करें। स्टेंट एक छोटी ओपीडी विज़िट में हटाया जाता है, आमतौर पर बिना एनेस्थीसिया (बेहोशी) के।

बुखार, ठंड लगना, भारी रक्तस्राव, या पेशाब न कर पाने पर ध्यान दें — इनमें तत्काल समीक्षा की आवश्यकता होती है।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद कौन से लक्षण अपेक्षित हैं और किनके लिए तत्काल चिकित्सा ध्यान की आवश्यकता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद अपेक्षित लक्षणों में खून मिला पेशाब, पेशाब करते समय हल्की जलन, पेशाब की बार-बार इच्छा, और फ्लैंक असुविधा विशेषकर पेशाब करते समय, स्टेंट के कारण शामिल हैं। ये आमतौर पर कुछ दिनों में सुधर जाते हैं। तत्काल ध्यान देने योग्य संकेत हैं 38°C से ऊपर बुखार, ठंड लगना, थक्कों के साथ भारी रक्तस्राव, पेशाब न कर पाना, या गंभीर अनियंत्रित दर्द।

विस्तार से

प्रक्रिया यूरेटर को खुला रखने के लिए एक डीजे स्टेंट लगाती है जबकि सूजन कम होती है। साक्ष्य दिखाते हैं कि स्टेंट-संबंधी लक्षण जैसे हीमेच्यूरिया, डिस्यूरिया, अर्जेंसी, और फ्लैंक पेन बहुत आम हैं और आमतौर पर स्टेंट हटाने के बाद ठीक हो जाते हैं।

संक्रामक जटिलताएं (कॉम्प्लिकेशन) अल्पसंख्यक में होती हैं; एक पूल्ड विश्लेषण ने ऑपरेशन के बाद यूरोसेप्सिस लगभग पांच प्रतिशत मामलों में बताया। जोखिम कारकों में प्री-ऑपरेटिव संक्रमण (इन्फेक्शन), डायबिटीज़, लंबा ऑपरेटिव टाइम, और लंबा स्टेंट ड्वेल शामिल हैं।

यूरोसेप्सिस तेजी से मल्टी-ऑर्गन फेल्योर में बढ़ सकता है, इसलिए कंपकंपी वाली ठंड के साथ किसी भी बुखार का तत्काल मूल्यांकन आवश्यक है।

यूरेटेरिक चोट या महत्वपूर्ण रक्तस्राव दुर्लभ है लेकिन बढ़ते फ्लैंक पेन या स्पष्ट रक्त के थक्के जो कैथेटर या पेशाब की धारा को अवरुद्ध करते हैं, के रूप में प्रस्तुत हो सकते हैं।

एक आम धारणा

कई मरीज़ सोचते हैं कि पेशाब में कोई भी खून खतरनाक है, लेकिन कुछ दिनों तक हल्का गुलाबी पेशाब अपेक्षित है।

असल में क्या होता है

वास्तविक खतरा संक्रमण (इन्फेक्शन) है — बुखार के साथ ठंड लगना संभावित यूरोसेप्सिस का मतलब है और घर पर इंतज़ार करने के बजाय तत्काल अस्पताल देखभाल की आवश्यकता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सभी निर्धारित एंटीबायोटिक्स और दर्द निवारक लें। खूब तरल पदार्थ पिएं। यदि आपको बुखार, ठंड लगती है, पेशाब नहीं आता, या भारी थक्के दिखाई देते हैं, तो तुरंत जयपुर हॉस्पिटल के इमरजेंसी विभाग जाएं। स्टेंट आमतौर पर एक से दो सप्ताह बाद ओपीडी में हटाया जाता है।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद किसी घाव या ड्रेसिंग की देखभाल कैसे करनी चाहिए?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) प्राकृतिक मूत्र मार्ग से की जाती है, इसलिए कोई बाहरी सर्जिकल घाव या ड्रेसिंग नहीं होती जिसकी देखभाल करनी पड़े। प्रक्रिया में यूरेटेरोस्कोप यूरेथ्रा से डाला जाता है, और एक अस्थायी डीजे स्टेंट पूरी तरह से शरीर के अंदर लगाया जाता है। आपकी त्वचा पर कोई टांके या घाव स्थल नहीं होगा।

विस्तार से

चूंकि सर्जरी यूरेटेरोस्कोपी के माध्यम से की जाती है, कोई चीरा नहीं लगाया जाता। यूरेटेरोस्कोप यूरेथ्रा से प्रवेश करता है, यूरेटर या किडनी में पथरी तक पहुंचता है, और होल्मियम लेज़र पथरी को तोड़ता है।

एक डीजे स्टेंट एक सिरा किडनी में और दूसरा ब्लैडर में रखकर पूरी तरह से मूत्र पथ के भीतर लगाया जाता है। साक्ष्य पुष्टि करते हैं कि यह एक न्यूनतम इनवेसिव दृष्टिकोण है जिसमें कोई कट या निशान नहीं होता।

प्रक्रिया के बाद, आपके हाथ या बांह पर इंट्रावेनस कैनुला साइट पर एक छोटी ड्रेसिंग हो सकती है, जिसे अगले दिन हटाया जा सकता है। पेट, फ्लैंक, या पेरिनेम पर कोई घाव नहीं होता जिसके लिए ड्रेसिंग बदलने या टांके हटाने की आवश्यकता हो।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर पुरानी ओपन सर्जरी (चीरे वाली) की तरह फ्लैंक चीरे की उम्मीद करते हैं, लेकिन आधुनिक यूरेटेरोस्कोपी प्राकृतिक मूत्र मार्ग का उपयोग करती है।

असल में क्या होता है

केवल एक चीज़ जो आपके पास हो सकती है वह है आईवी ड्रिप से हाथ पर एक छोटा प्लास्टर, जो अगले दिन निकल जाता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आईवी कैनुला साइट को 24 घंटे तक साफ और सूखा रखें, फिर प्लास्टर हटा दें। किसी अन्य घाव की देखभाल की आवश्यकता नहीं है। रोज़ दो से तीन लीटर पानी पिएं ताकि पथरी के टुकड़े निकल जाएं और स्टेंट की जलन कम हो। निर्धारित दर्द निवारक और एंटीबायोटिक्स निर्देशानुसार लें। स्टेंट एक से दो सप्ताह बाद ओपीडी में हटाया जाता है।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद मैं कब नहा या शॉवर ले सकता हूँ?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में आप यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के अगले दिन शॉवर ले सकते हैं। कोई बाहरी घाव नहीं है, इसलिए पानी का संपर्क कोई समस्या नहीं है। बाथटब या स्विमिंग पूल में कम से कम एक सप्ताह तक या डीजे स्टेंट हटने तक न बैठें, ताकि यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का जोखिम कम हो।

विस्तार से

प्रक्रिया पूरी तरह से यूरेथ्रा के माध्यम से यूरेटेरोस्कोप का उपयोग करके की जाती है, बिना किसी त्वचा के चीरे के। एक डीजे स्टेंट आंतरिक रूप से किडनी से ब्लैडर तक लगाया जाता है।

चूंकि शरीर की सतह पर कोई सर्जिकल घाव नहीं है, सामान्य शॉवरिंग सुरक्षित है एक बार जब आप अपने पैरों पर स्थिर महसूस करते हैं, आमतौर पर डिस्चार्ज के अगली सुबह।

साक्ष्य दिखाते हैं कि लंबा स्टेंट ड्वेल और यूरिनरी स्टेसिस संक्रमण (इन्फेक्शन) का जोखिम बढ़ाते हैं; स्नान के पानी में डूबने से बैक्टीरिया यूरेथ्रा में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए, जब तक स्टेंट लगा है, शॉवर को बाथ पर प्राथमिकता दी जाती है।

स्टेंट आमतौर पर एक से दो सप्ताह बाद एक संक्षिप्त ओपीडी विज़िट के दौरान हटाया जाता है, जिसके बाद आप सभी सामान्य स्नान गतिविधियाँ फिर से शुरू कर सकते हैं।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ सोचते हैं कि उन्हें दिनों तक सूखा रहना चाहिए, लेकिन क्योंकि सर्जरी प्राकृतिक मूत्र मार्ग का उपयोग करती है, शॉवरिंग तुरंत सुरक्षित है।

असल में क्या होता है

प्रतिबंध भिगोने पर है, जो स्टेंट लगे रहने पर संक्रमण (इन्फेक्शन) का जोखिम बढ़ा सकता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सर्जरी के अगले दिन से सामान्य शॉवर लें। यदि प्लास्टर अभी भी लगा है तो आईवी कैनुला साइट को थपथपाकर सुखाएं।

बाथटब में न बैठें, हॉट टब का उपयोग न करें, या तब तक न तैरें जब तक स्टेंट न निकल जाए और आपका सर्जन पुष्टि न करे कि यह सुरक्षित है। खूब तरल पदार्थ पिएं और निर्धारित दवाएं लें।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद रिकवरी के दौरान मैं क्या खा-पी सकता हूँ?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद आप सामान्य, संतुलित आहार ले सकते हैं। खाने-पीने की कोई खास पाबंदी नहीं है। रिकवरी का सबसे ज़रूरी हिस्सा है रोज़ दो से तीन लीटर पानी पीना ताकि पथरी के टुकड़े निकल जाएँ, पेशाब पतला रहे और स्टेंट की जलन कम हो। दर्द की दवा चलने तक पहले 48 घंटे शराब न पिएँ।

विस्तार से

सर्जरी में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट शामिल नहीं होता, इसलिए पाचन पर असर नहीं पड़ता। सबूत बताते हैं कि ज्यादा तरल लेने से यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (संक्रमण) का खतरा कम होता है और बची हुई पथरी की धूल साफ होती है।

फल, सब्ज़ी और फाइबर वाला खाना कब्ज़ रोकता है, जो स्टेंट की तकलीफ बढ़ा सकता है। फौरन किसी खास स्टोन-प्रिवेंशन डाइट की ज़रूरत नहीं; आपका सर्जन पथरी की बनावट की जाँच के आधार पर लंबे समय के खान-पान की सलाह देगा।

लंबे समय में नमक और एनिमल प्रोटीन कम रखें अगर आपको पथरी जल्दी बनती है, लेकिन सर्जरी के बाद फौरन खाने में कोई बदलाव ज़रूरी नहीं।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर तुरंत खास स्टोन डाइट पूछते हैं, लेकिन फौरन प्राथमिकता पानी पीना है, खाने पर रोक नहीं।

असल में क्या होता है

लंबे समय की डाइट पथरी के प्रकार पर निर्भर करती है, जो लैब में टुकड़ों की जाँच से पता चलता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अगर एनेस्थीसिया (बेहोशी) से जी मिचलाए तो हल्का खाना शुरू करें, फिर अपना रोज़ का खाना खाएँ। दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पिएँ — लक्ष्य दो से तीन लीटर का है। चाय, कॉफी, कोला कम रखें क्योंकि ये ब्लैडर को चिढ़ा सकते हैं।

48 घंटे शराब न पिएँ। दर्द और एंटीबायोटिक की दवा खाने के साथ लें। स्टेंट एक से दो हफ्ते बाद ओपीडी में निकाला जाता है।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी से जुड़े अन्य सवाल

इस भाग में मरीज़ों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले आम सवालों के जवाब दिए गए हैं।

क्या मेरी यूरेटेरिक पथरी अपने आप निकल सकती है, और इसकी संभावना कैसे आँकी जाती है?

संक्षेप में

यूरेटेरिक पथरी अपने आप निकलेगी या नहीं, यह मुख्य रूप से उसके आकार और जगह पर निर्भर करता है। जयपुर हॉस्पिटल में आपका सर्जन इमेजिंग और लक्षण देखकर अपने आप निकलने की संभावना बताता है। निचले यूरेटर में छोटी पथरी ज़्यादा निकलती है, बड़ी या ऊपरी यूरेटर की पथरी कम।

विस्तार से

निचले यूरेटर में 5 मिलीमीटर से छोटी पथरी के बिना इलाज निकलने की संभावना ज़्यादा होती है। बड़ी पथरी, या पेल्वियूरेटेरिक जंक्शन के पास अटकी पथरी, अपने आप कम निकलती है।

आपका सर्जन सीटी या अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) पर पथरी का आकार देखता है, हाइड्रोनेफ्रोसिस जैसे रुकावट के लक्षण ढूँढता है, और दर्द की गंभीरता व इन्फेक्शन के मार्कर पूछता है।

अगर दर्द कंट्रोल और पानी पीने के बाद भी पथरी एक अवधि तक न हिले, या बुखार, क्रिएटिनिन बढ़ना, या बर्दाश्त न होने वाला दर्द हो, तो आमतौर पर एक्टिव इलाज की सलाह दी जाती है। फैसला पथरी के नैचुरल कोर्स और किडनी खराब होने या सेप्सिस के खतरे को तौलकर लिया जाता है।

एक आम धारणा

कई लोग बहुत इंतज़ार करते हैं कि पथरी निकल जाए, जिससे इन्फेक्शन या किडनी खराब होने का खतरा रहता है।

असल में क्या होता है

आपका सर्जन पथरी का आकार, जगह और आपके लक्षण देखकर ऑब्जर्वेशन की सेफ विंडो तय करता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

कंसल्टेशन से पहले हाल की सीटी केयूबी या अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) और यूरिन कल्चर चाहिए। सर्जन ऑब्जर्वेशन प्लान समझाएगा या ज़रूरत पर यूरेटरोस्कोपी विद लेज़र फ्रैगमेंटेशन और स्टेंटिंग की सलाह देगा। सर्जरी के बाद ज्यादातर मरीज़ तीन से पांच दिन में डेस्क वर्क पर लौटते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक कर अपनी पथरी और इलाज के सही समय पर चर्चा करें।

पथरी का आकार, जगह और इन्फेक्शन यूरेटेरिक पथरी के इलाज के चुनाव को कैसे बदलते हैं?

संक्षेप में

पथरी का आकार, जगह और इन्फेक्शन तय करते हैं कि ऑब्जर्वेशन, यूरेटरोस्कोपी या दूसरा तरीका चाहिए। जयपुर हॉस्पिटल में आपका सर्जन इमेजिंग और खून की जाँच से इलाज को आपकी पथरी से मिलाता है। बड़ी पथरी, ऊपरी यूरेटर की पथरी, या एक्टिव इन्फेक्शन में आमतौर पर अर्जेंट इंटरवेंशन चाहिए।

विस्तार से

निचले यूरेटर में 5 मिलीमीटर से छोटी पथरी को देखा जा सकता है। 10 मिलीमीटर से बड़ी या किडनी के पास ऊपरी यूरेटर की पथरी में अक्सर यूरेटरोस्कोपी विद लेज़र फ्रैगमेंटेशन चाहिए। फ्लेक्सिबल यूरेटरोस्कोपी पेल्वियूरेटेरिक जंक्शन के पास की पथरी तक पहुँचती है।

अगर बुखार, हाई व्हाइट सेल काउंट, या पॉज़िटिव यूरिन कल्चर है, तो सेप्सिस कंट्रोल के लिए पहले डीजे स्टेंट डालकर ड्रेनेज किया जाता है, फिर पथरी निकाली जाती है।

सबूत बताते हैं कि प्रीऑपरेटिव इन्फेक्शन, लंबी प्रोसीजर अवधि, और स्टेंट ज्यादा समय रहने से यूरोसेप्सिस का खतरा बढ़ता है, इसलिए टीम ऑपरेटिव टाइम कम रखती है और स्टेंट जल्दी निकालती है।

सेमीरिजिड और फ्लेक्सिबल स्कोप, लेज़र डस्टिंग या बास्केटिंग का चुनाव पथरी की जगह और टुकड़े के आकार पर निर्भर करता है।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर सोचते हैं सब पथरी का इलाज एक जैसा होता है।

असल में क्या होता है

असल में इन्फेक्शन सब बदल देता है — सेप्सिस रोकने के लिए ड्रेनेज पहले, पथरी निकालना बाद में।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

कंसल्टेशन में आपका सर्जन आपकी सीटी स्कैन, यूरिन कल्चर, और ब्लड वर्क देखेगा। अगर इन्फेक्शन है, तो स्टेंट अर्जेंटली लग सकता है और पथरी का इलाज एंटीबायोटिक के बाद तय होगा। बिना इन्फेक्शन वाली साफ पथरी के लिए यूरेटरोस्कोपी इलेक्टिवली प्लान हो सकती है। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक कर अपनी पथरी के हिसाब से ट्रीटमेंट प्लान लें।

यूरेटेरिक पथरी के लिए ESWL, यूरेटरोस्कोपी, RIRS, और PCNL की तुलना कैसे करें?

संक्षेप में

हर तरीका अलग पथरी प्रोफाइल के लिए सही है। जयपुर हॉस्पिटल में आपका सर्जन एक्स्ट्राकॉर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी, सेमीरिजिड या फ्लेक्सिबल यूरेटरोस्कोपी, रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी, या पर्क्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी में से पथरी के आकार, जगह और कठोरता के आधार पर चुनता है। कोई एक तरीका हर केस में फिट नहीं होता।

विस्तार से

ESWL नॉन-इनवेसिव है और रेनल पेल्विस या ऊपरी यूरेटर में 10 से 15 मिलीमीटर तक की पथरी के लिए काम करता है, लेकिन हार्ड स्टोन या निचले यूरेटर की पथरी में सफलता कम होती है।

सेमीरिजिड यूरेटरोस्कोपी विद होल्मियम लेज़र मिड और डिस्टल यूरेटेरिक स्टोन के लिए स्टैंडर्ड है। फ्लेक्सिबल यूरेटरोस्कोपी (RIRS) ऊपरी यूरेटर और रेनल स्टोन तक 2 सेंटीमीटर तक पहुँचती है और हाई स्टोन-फ्री रेट देती है।

PCNL बड़ी रेनल स्टोन 2 सेंटीमीटर से ऊपर या कॉम्प्लेक्स स्टैगहॉर्न कैलकुली के लिए पसंद की जाती है। यूरेटरोस्कोपी और RIRS आमतौर पर डेकेयर या एक रात की भर्ती होती हैं; PCNL में लंबी भर्ती चाहिए।

सर्जन एनेस्थीसिया फिटनेस, एंटीकोगुलेशन स्टेटस, और पिछले इलाज का इतिहास भी देखता है। खर्च अलग होता है, ESWL आमतौर पर कम और PCNL ज्यादा।

एक आम धारणा

लोग अक्सर मान लेते हैं कि कम इनवेसिव विकल्प हमेशा सही है।

असल में क्या होता है

हार्ड निचली यूरेटर पथरी ESWL में फेल हो सकती है और यूरेटरोस्कोपी चाहिए। बड़ी रेनल पथरी को एक बार में पूरा निकालने के लिए PCNL चाहिए।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आपका सर्जन आपकी सीटी केयूबी, स्टोन डेंसिटी, और मेडिकल हिस्ट्री देखकर सबसे सही विकल्प सुझाएगा। यूरेटरोस्कोपी के लिए आम भर्ती डेकेयर या एक रात की होती है, और डेस्क वर्क पर तीन से पांच दिन में लौट सकते हैं। कंसल्टेशन में डिटेल्ड एस्टीमेट माँगें। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक कर चर्चा करें कि आपकी पथरी के लिए कौन सी तकनीक सही है।

क्या एक यूरेटरोस्कोपी ट्रीटमेंट मेरी सारी यूरेटेरिक पथरी साफ कर देगा?

संक्षेप में

एक यूरेटरोस्कोपी सेशन का लक्ष्य सभी दिखने वाली पथरी निकालना है, लेकिन पूरा क्लीयरेंस पथरी के बोझ, एनाटॉमी, और बाद में टुकड़ों के निकलने पर निर्भर करता है। जयपुर हॉस्पिटल में आपका सर्जन ऑपरेशन के दौरान लेज़र डस्टिंग या बास्केटिंग से जितना मुमकिन हो उतना निकालता है। अध्ययन (स्टडी) बताते हैं कि आम यूरेटेरिक स्टोन के लिए स्टोन-फ्री रेट लगभग 94 प्रतिशत होता है, हालांकि बड़ी या कई पथरी में दूसरी प्रोसीजर चाहिए हो सकती है।

विस्तार से

यूरेटरोस्कोपी के दौरान सर्जन स्कोप से पूरे यूरेटर और किडनी को देखता है। लेज़र डस्टिंग टुकड़ों को महीन धूल में बदल देती है जो अपने आप निकल जाती है। बास्केटिंग बड़े टुकड़े निकालती है।

डीजे स्टेंट आमतौर पर लगाया जाता है ताकि यूरेटर खुला रहे जब टुकड़े निकलें।

सबूत बताते हैं कि 2 से 3 सेमी पथरी के लिए फ्लेक्सिबल यूरेटरोस्कोपी 95 प्रतिशत से ऊपर स्टोन-फ्री रेट देती है, लेकिन 3 सेमी से बड़ी पथरी में रेट लगभग 85 प्रतिशत रह जाता है। बचे हुए टुकड़े बाद में बढ़ सकते हैं या लक्षण दे सकते हैं, इसलिए फॉलो-अप स्कैन रूटीन है।

एक आम धारणा

लोग मान लेते हैं एक सर्जरी का मतलब काम खत्म।

असल में क्या होता है

असल में फॉलो-अप इमेजिंग ज़रूरी है क्योंकि छोटे बचे टुकड़े नई पथरी बन सकते हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

प्रोसीजर के बाद स्टेंट कुछ दिन से कुछ हफ्ते रह सकता है। चार से छह हफ्ते पर रिपीट अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) या सीटी क्लीयरेंस कन्फर्म करता है। अगर टुकड़े बचें तो आपका सर्जन ऑब्जर्वेशन या मामूली रिपीट प्रोसीजर की सलाह देगा। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक कर अपने खास पथरी लोड के लिए अपेक्षित क्लीयरेंस समझें।

यूरेटेरोस्कोपी के बाद यूरेटेरिक स्टेंट की ज़रूरत क्यों पड़ सकती है, और इसे कब निकालना ज़रूरी है?

संक्षेप में

यूरेटेरोस्कोपी के बाद यूरेटेरिक स्टेंट इसलिए लगाया जाता है ताकि सूजन कम होने और पथरी के टुकड़े निकलने तक यूरेटर खुला रहे। जयपुर हॉस्पिटल में आपका सर्जन पथरी के आकार, यूरेटर की हालत और संक्रमण था या नहीं, इसके आधार पर स्टेंट लगाने का फैसला लेता है। स्टेंट रुकावट रोकता है और यूरेटर की ऐंठन से होने वाले दर्द को कम करता है। इसे आमतौर पर एक से दो हफ्ते में निकाल दिया जाता है, हालांकि कभी-कभी यह ज़्यादा समय तक रह सकता है अगर ठीक होने में देर हो।

विस्तार से

स्टेंट किडनी से ब्लैडर तक पूरी तरह आपके शरीर के अंदर रहता है। यह पेशाब निकलने देता है भले ही यूरेटर में सूजन हो। अध्ययन दिखाते हैं कि स्टेंट लगाने से सूजन या टुकड़े निकलने से होने वाली रुकावट का जोखिम कम होता है।

कुछ स्टेंट में खींचकर निकालने वाला धागा होता है जिसे आप या अटेंडेंट घर पर निकाल सकते हैं; बाकी के लिए ओपीडी में छोटी सिस्टोस्कोपी करनी पड़ती है।

स्टेंट को बहुत देर तक छोड़ने से उस पर पपड़ी जमना, संक्रमण या तकलीफ हो सकती है, इसलिए समय पर निकालना ज़रूरी है। आपका सर्जन डिस्चार्ज से पहले निकालने की तारीख बता देगा।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ समझते हैं कि स्टेंट वैकल्पिक है या हमेशा रह सकता है।

असल में क्या होता है

भूला हुआ स्टेंट अपनी सतह पर पथरी बना सकता है या संक्रमण दे सकता है, इसलिए समय पर निकालना ज़रूरी है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

जब तक स्टेंट लगा है, आपको बार-बार पेशाब आना, कमर में तकलीफ या पेशाब में खून आना महसूस हो सकता है। खूब तरल पदार्थ लें और दी गई दर्द की दवा लें। निकालने का अपॉइंटमेंट न भूलें।

अगर बुखार आए, तेज दर्द हो या पेशाब न आए, तो तुरंत हॉस्पिटल से संपर्क करें। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि आपके केस के लिए स्टेंट मैनेजमेंट और निकालने का समय तय हो सके।

खर्च, बीमा और आपकी देखभाल

इस भाग में आपके इलाज के खर्च और बीमा (इंश्योरेंस) की जानकारी दी गई है।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी के बाद किन पेशाब के लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए?

संक्षेप में

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी के बाद कुछ लक्षणों पर तुरंत मेडिकल ध्यान देना चाहिए। जयपुर हॉस्पिटल में आपको सलाह दी जाती है कि तुरंत इलाज लें अगर आपको 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बुखार, कंपकंपी, पेशाब न आना, दी गई दवा से न ठीक होने वाला तेज कमर या पेट दर्द, या थक्कों के साथ भारी खून आए। ये संक्रमण, रुकावट या चोट का इशारा हो सकते हैं जिनका जल्दी इलाज ज़रूरी है।

विस्तार से

अध्ययन दिखाते हैं कि यूरेटेरोस्कोपी के बाद इन्फेक्शन की जटिलताएं, जिनमें यूरोसेप्सिस शामिल है, कुछ मरीज़ों में होती हैं। जोखिम बढ़ाने वाले कारण हैं पहले से संक्रमण, डायबिटीज, लंबा ऑपरेशन टाइम, और स्टेंट का देर तक रहना।

बुखार और कंपकंपी बताते हैं कि बैक्टीरिया खून में पहुंच गए हैं। पेशाब न आना मतलब क्लॉट या टुकड़ा स्टेंट या यूरेटर को रोक रहा है। तेज दर्द यूरेटर की ऐंठन, स्टेंट खिसकना, या छूटी हुई पथरी का संकेत हो सकता है।

भारी खून आना कम होता है लेकिन इसमें इरिगेशन या स्टेंट एडजस्टमेंट की ज़रूरत पड़ सकती है। जल्दी जांच से गंभीर जटिलता की आशंका कम होती है।

एक आम धारणा

कई मरीज़ समझते हैं कि सर्जरी के बाद थोड़ा बुखार या दर्द नॉर्मल है।

असल में क्या होता है

लेकिन यूरेटेरोस्कोपी के बाद बुखार सेप्सिस का संकेत हो सकता है, जो तेजी से बढ़ता है। घर पर इंतज़ार न करें।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

इमरजेंसी नंबर पास रखें और लक्षण ठीक होने का इंतज़ार न करें। अगर आपके स्टेंट में खींचने वाला धागा है, तो उसे खुद न निकालें जब तक कहा न जाए। किसी भी वक्त जयपुर हॉस्पिटल से संपर्क करें। जयपुर हॉस्पिटल में फॉलो-अप अपॉइंटमेंट बुक करें अपनी रिकवरी और स्टेंट निकालने के शेड्यूल की समीक्षा के लिए।

जयपुर हॉस्पिटल में संवेदनशील चिंताओं और अंतरंग जांच को गोपनीय तरीके से कैसे संभाला जाता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल सभी यूरोलॉजी परामर्श और प्रक्रियाओं के लिए सख्त गोपनीयता नियमों का पालन करता है। आपके मेडिकल रिकॉर्ड केवल इलाज करने वाली टीम देख सकती है। जांच निजी कमरे में होती है और चैपरोन (साथ रहने वाला) मांगने पर उपलब्ध होता है। जानकारी केवल आपकी सहमति से या कानून के मुताबिक साझा की जाती है। आप किसी भी चिंता पर अपने सर्जन या नर्सिंग स्टाफ से बिना किसी डर के बात कर सकते हैं।

विस्तार से

हॉस्पिटल NABH मान्यता प्राप्त मानकों के तहत काम करता है, जिनमें मरीज़ की गोपनीयता, सूचित सहमति, और अंतरंग जांच के दौरान गरिमा अनिवार्य है।

पुरुष और महिला मरीज़ों को उपयुक्त स्टाफ देखता है, और आप एक ही जेंडर के जांचकर्ता या अटेंडेंट को साथ रखने की मांग कर सकते हैं। डिजिटल रिकॉर्ड एक्सेस कंट्रोल से सुरक्षित हैं।

बीमा और योजना के कागज़ात (RGHS, मा योजना, CGHS, प्राइवेट TPA) एक अलग प्रशासनिक टीम संभालती है, जिससे क्लिनिकल जानकारी बिलिंग से अलग रहती है। आपका सर्जन किसी भी जांच या प्रक्रिया से पहले हर कदम समझाएगा।

एक आम धारणा

मरीज़ कभी-कभी शर्म या जानकारी लीक होने के डर से इलाज टालते हैं।

असल में क्या होता है

NABH मानक और हमारी आंतरिक नीतियां आपकी गरिमा और डेटा को हर कदम पर सुरक्षित रखती हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अगर आपकी खास गोपनीयता प्राथमिकताएं हैं, तो पहली विज़िट पर OPD रिसेप्शन या अपने सर्जन को बताएं। किसी भी दखल से पहले लिखित सहमति फॉर्म साइन किया जाता है। आप किसी भी समय अपने रिकॉर्ड की कॉपी मांग सकते हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें सम्मानजनक, गोपनीय देखभाल का अनुभव लेने के लिए जो आपके आराम के हिसाब से बनी है।

जयपुर में यूरेटेरोस्कोपी और DJ स्टेंटिंग का अनुमानित खर्च कितना है?

संक्षेप में

लेज़र से पथरी तोड़ने और स्टेंटिंग के साथ यूरेटेरोस्कोपी का खर्च आमतौर पर जयपुर हॉस्पिटल में ₹60,000 से ₹1,50,000 के बीच होता है। अंतिम रकम पथरी की जटिलता, एनेस्थीसिया के प्रकार, स्टेंट के प्रकार, और हॉस्पिटल स्टे पर निर्भर करती है। अकेले DJ स्टेंट लगाने का खर्च ₹10,000 से ₹30,000 तक होता है अगर यह अलग से किया जाए।

विस्तार से

सामान्य रेंज में प्रक्रिया, एनेस्थीसिया, स्टैंडर्ड स्टेंट, और डेकेयर या एक रात का स्टे शामिल है। जटिल केस जिनमें फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोपी, ज़्यादा ऑपरेटिव टाइम, या अतिरिक्त इमेजिंग चाहिए, वे ऊपरी सीमा पर हो सकते हैं।

पक्की सर्जरी से पहले ड्रेनेज के लिए अलग DJ स्टेंट डालने का खर्च सामान्य भारतीय दरों के अनुसार ₹10,000 से ₹30,000 होता है। डायग्नोस्टिक टेस्ट जैसे CT, यूरिन कल्चर, और खून की जाँच अलग से बिल होती हैं।

हॉस्पिटल RGHS, मा योजना, CGHS, और प्राइवेट इंश्योरेंस TPA स्वीकार करता है; आपका आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च आपकी योजना के कवरेज पर निर्भर करता है। बिलिंग टीम आपके इमेजिंग की समीक्षा और प्रक्रिया की योजना बनाने के बाद सर्जन द्वारा अनुमान देती है।

एक आम धारणा

ऑनलाइन कीमतें बहुत अलग-अलग होती हैं।

असल में क्या होता है

वास्तविक खर्च आपकी पथरी, एनेस्थीसिया, और स्टे पर निर्भर करता है। इंश्योरेंस योजनाएं आउट-ऑफ-पॉकेट रकम को काफी बदल देती हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

परामर्श के समय अपना इंश्योरेंस कार्ड और योजना के कागज़ात लाएं। टीम कवरेज वेरिफाई करेगी और विस्तृत अनुमान देगी। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें अपने यूरेटेरोस्कोपी और स्टेंटिंग के लिए व्यक्तिगत खर्च विवरण पाने के लिए।

यूरेटेरिक पथरी सर्जरी के अनुमान में क्या शामिल होता है, और क्या अलग से चार्ज हो सकता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल यूरेटेरिक पथरी सर्जरी के लिए जो अनुमान देता है उसमें आमतौर पर ऑपरेशन, एनेस्थीसिया, स्टैंडर्ड हॉस्पिटल स्टे और रूटीन नर्सिंग केयर शामिल होती है। सामान्य कीमत रेंज ₹60,000 से ₹1,50,000 है। प्री-ऑपरेटिव जांच, स्टेंट निकालना, दवाएं और कोई बढ़ा हुआ स्टे आमतौर पर अलग से बिल होते हैं।

विस्तार से

अनुमान में मुख्य प्रक्रिया शामिल है: लेज़र फ्रैगमेंटेशन और DJ स्टेंटिंग के साथ यूरेटेरोस्कोपी, जो स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया में की जाती है। ऑपरेशन का समय आमतौर पर 45 से 90 मिनट होता है। हॉस्पिटल स्टे डेकेयर या एक रात का होता है।

अध्ययन दिखाते हैं कि सूजन कम होने तक ड्रेनेज पक्का करने के लिए स्टेंट लगाना मानक है।

अलग चार्ज में आमतौर पर प्री-ऑपरेटिव खून की जाँच, यूरिन कल्चर, X-ray या अल्ट्रासाउंड जैसी इमेजिंग, कुछ हफ्ते बाद स्टेंट निकालने की प्रक्रिया, डिस्चार्ज की दवाएं, और कोई अतिरिक्त रातें अगर रिकवरी के लिए चाहिए, शामिल हैं। संक्रमण या दूसरी प्रक्रिया की ज़रूरत जैसी जटिलताओं में अतिरिक्त खर्च आएगा।

एक आम धारणा

कई मरीज़ मान लेते हैं कि सब शामिल है।

असल में क्या होता है

प्री-ऑपरेटिव टेस्ट, स्टेंट निकालना, डिस्चार्ज की दवाएं, और कोई अतिरिक्त हॉस्पिटल दिन आमतौर पर अलग से बिल होते हैं। जटिलताएं या दूसरी प्रक्रिया भी अंतिम बिल बढ़ा देंगी।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

एडमिशन से पहले एडमिशन डेस्क से लिखित ब्रेक-अप मांग लें ताकि आपको ठीक पता चले कि क्या कवर है। हाल की टेस्ट रिपोर्ट साथ लाएं ताकि डुप्लीकेट चार्ज न लगें। स्टेंट निकालने के लिए फॉलो-अप विज़िट की योजना बनाएं, आमतौर पर दो से तीन हफ्ते में।

पता नहीं किस डॉक्टर को दिखाएँ?

हमारी टीम सही डॉक्टर तक पहुँचने में आपकी मदद करेगी, हिन्दी या अंग्रेज़ी में।

अपॉइंटमेंट का अनुरोध करें

बस एक मिनट लगेगा। कोई अकाउंट या मेडिकल हिस्ट्री नहीं चाहिए।

10 अंकों का भारतीय मोबाइल नंबर

यह WhatsApp खोलेगा और आपका अनुरोध पहले से लिखा होगा। हमारी टीम डॉक्टर, तारीख और समय पक्का करके जवाब देगी — तब तक यह पक्की बुकिंग नहीं है। बात करना चाहते हैं? कॉल करें +91 74140 01001.

आपका नाम, नंबर और पसंद हमारी अपॉइंटमेंट टीम के लिए भी सहेजे जाते हैं, सिर्फ़ आपकी विज़िट तय करने के लिए।