इमरजेंसी 24×7इमरजेंसी · 0141 255 1500 S16A-17, Mahaveer Nagar, Tonk Road

जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी · जयपुर हॉस्पिटल

जयपुर में बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी

खून आना, दर्द या मस्सा बाहर आना? हमारे सर्जनों की टीम से सही जाँच और आसान सलाह पाएँ।

  • 1991 से जयपुर की सेवा में (35 साल)
  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त
  • 24×7 इमरजेंसी और आईसीयू
  • कैशलेस: RGHS, मा योजना, CGHS + 22 बीमा कंपनियाँ
कुर्सी पर असहज बैठे एक पुरुष, साथ में छल्लेदार गद्दी
ऑपरेशन का समय
20 से 45 मिनट
एनेस्थीसिया
स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न) या थोड़ी देर का जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी)
रिकवरी
ज्यादातर मरीज 3 से 7 दिनों में डेस्क के काम पर लौट आते हैं
खर्च
₹35,000 से ₹90,000 (भारत में आम खर्चहमसे अनुमानित खर्च पता करें)

बवासीर से रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ता है

खून आना, खुजली या ऐसा मस्सा जो अंदर न जाए

शौच के बाद आपको पेपर पर साफ लाल खून दिख सकता है, शौच के बाद मस्सा महसूस हो सकता है, या ऐसी खुजली हो सकती है जिससे बैठना मुश्किल हो जाए। फाइबर और ज्यादा पानी जैसे आसान उपायों से शुरू में आराम मिलता है, लेकिन लक्षण बने रह सकते हैं या दोबारा हो सकते हैं।

  • शौच के बाद साफ लाल खून आना

    सबसे आम लक्षण मल के रास्ते बिना दर्द के खून आना है, जो शौच के दौरान या ठीक बाद होता है।

  • मस्सा जो बाहर आता है और बाहर ही रहता है

    बाहर निकले हुए बवासीर के मस्सों से मलद्वार में भारीपन लगता है और सफाई करना मुश्किल हो जाता है।

  • खुजली और त्वचा में जलन

    बाहर निकले मस्सों से निकलने वाले चिपचिपे पानी से गुदा के आसपास की त्वचा में जलन होती है।

  • समय के साथ खून की कमी का खतरा

    बार-बार खून आने से शरीर में आयरन कम हो सकता है और थकान हो सकती है।

बवासीर गुदा नली में सूजी हुई नसें होती हैं और यह दुनिया भर में गुदा की सबसे आम बीमारी है।

जयपुर हॉस्पिटल क्यों

आपको शौच के समय दर्द की चिंता रहती है, इसे किसी को बताने में झिझक होती है, और काम या घर की जिम्मेदारियों से छुट्टी होने की फिक्र रहती है।

  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल
  • फरवरी 1991 से जयपुर की सेवा में
  • मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और 24×7 इमरजेंसी सेवा
  • RGHS, मा योजना, CGHS और पैनल में शामिल बीमा (इंश्योरेंस) कंपनियों के तहत कैशलेस इलाज

आपके इलाज का प्लान

हमारे साथ आपके पहले कदम

  1. 1 सर्जन से सलाह के लिए ओपीडी में फोन करें या आएँ
  2. 2 जाँच कराएँ और जरूरी टेस्ट अस्पताल में ही करवाएँ
  3. 3 बवासीर के ग्रेड के हिसाब से अपने लिए सही तरीके पर बात करें
  4. 4 सर्जरी करवाएँ और फॉलो-अप के साथ ठीक हों

ऑपरेशन कैसे किया जाता है

सर्जरी आमतौर पर स्पाइनल या थोड़ी देर के जनरल एनेस्थीसिया में की जाती है और इसमें 20 से 45 मिनट लगते हैं। आप उसी दिन घर जा सकते हैं या एक रात रुक सकते हैं। आपके सर्जन आपको बताएँगे कि आपकी स्थिति के लिए कौन सा तरीका ठीक रहेगा।

  • लेज़र सर्जरी

    मस्सों के अंदर लेज़र ऊर्जा दी जाती है, जिससे वे सूखकर सिकुड़ जाते हैं।

  • स्टेपलर सर्जरी (MIPH)

    एक गोल स्टेपलर की मदद से बाहर निकले मस्सों को वापस अंदर खींचा जाता है और उनके ऊपर का थोड़ा सा हिस्सा हटा दिया जाता है।

  • ओपन सर्जरी

    मस्सों को काटकर अलग किया जाता है; यह बड़े बाहरी मस्सों के लिए की जाती है।

  • रबर बैंड लिगेशन

    ओपीडी में मस्से की जड़ पर एक छोटा बैंड लगा दिया जाता है, जिससे उसका खून का दौरा रुक जाता है।

मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं

  • 1991 35 साल से जयपुर की सेवा में
  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल
  • 3 जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कंसल्टेंट
  • 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू और एम्बुलेंस
  • 25 कैशलेस योजनाएँ और बीमा कंपनियाँ

इन इलाजों के बारे में शोध क्या बताते हैं

  • लगभग 10 में से 9

    अध्ययन (स्टडी) में देखा गया कि शुरुआती ग्रेड के बवासीर में रबर बैंड लिगेशन के बाद 90% तक मरीजों का खून आना बंद हो गया।

  • 1 से 2 हफ्ते

    स्टेपलर सर्जरी के बाद घाव भरने में आम तौर पर दो हफ्ते लगते हैं, और ज्यादातर लोग हल्के कामों पर इससे पहले ही लौट आते हैं।

  • 7% से 9%

    एक बड़े अध्ययन में गंभीर जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) स्टेपलर वाले 7% मरीजों में और पारंपरिक सर्जरी वाले 9% मरीजों में देखी गईं।

अगर इलाज न कराया जाए

अगर इलाज न कराया जाए, तो बार-बार खून गिरने से शरीर में आयरन की कमी और एनीमिया हो सकता है। बहुत बड़े मस्सों से शौच करने में परेशानी हो सकती है या कभी-कभी बहुत ज्यादा खून बह सकता है, जिसके लिए तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है।

इलाज के बाद की जिंदगी

ज्यादातर लोग एक हफ्ते के भीतर डेस्क के काम पर लौट आते हैं और खून आने व मस्से बाहर निकलने की समस्या ठीक हो जाती है।

  • रोजमर्रा के काम पर वापसी

    सर्जरी के बाद ज्यादातर मरीज 3 से 7 दिनों में डेस्क के काम पर लौट आते हैं।

  • खून आना कम होना

    इलाज के बाद खून आना आमतौर पर बंद हो जाता है या बहुत कम हो जाता है।

  • बाहर निकलता मस्सा नहीं

    जो मस्सा पहले बाहर निकलता था, वह इलाज के बाद आमतौर पर अंदर ही रहता है।

  • साफ-सफाई में आसानी

    बाहरी मस्से न होने से शौच के बाद सफाई करना आसान हो जाता है।

हमारी टीम से मिलें

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी के बारे में मरीज़ों के सवाल

बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी में क्या होता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी आमतौर पर 20 से 45 मिनट में होती है और स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न) या शॉर्ट जनरल एनेस्थीसिया (थोड़ी देर की पूरी बेहोशी) दी जाती है। सर्जिकल टीम या तो लेज़र सर्जरी से अंदर से बवासीर को सिकोड़ती है या स्टेपलर सर्जरी से बाहर निकले बवासीर को वापस जगह पर लाती है। बड़े बाहरी बवासीर के लिए ओपन सर्जरी (चीरे वाली) की जाती है। ज्यादातर मरीज़ उसी दिन घर चले जाते हैं या एक रात रुकते हैं।

विस्तार से

लेज़र सर्जरी बवासीर के मास में सीधे एनर्जी देती है, जिससे फाइब्रोसिस होता है और टिशू सिकुड़कर गुदा की दीवार से चिपक जाता है।

स्टेपलर सर्जरी एक गोल स्टेपलर से डेंटेट लाइन के ऊपर की म्यूकोसा की रिंग निकालती है, कुशन को ऊपर उठाती है और खून का बहाव कम करती है।

अध्ययन में लेज़र सर्जरी का औसत समय 24 मिनट रहा, खून का नुकसान लगभग 5 मिली और अस्पताल में रुकना लगभग 1 दिन, जबकि स्टेपलर सर्जरी में औसत 30 मिनट, खून का नुकसान लगभग 10 मिली और रुकना लगभग 3 दिन रहा।

24 घंटे, एक हफ्ते, एक महीने और तीन महीने पर दर्द के स्कोर लेज़र में लगातार कम रहे। दोनों तकनीकों में खून बहने, दोबारा होने और जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) की दरें लगभग समान हैं।

एक आम धारणा

बहुत लोग समझते हैं कि हर बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी एक जैसी ओपन कटिंग होती है।

असल में क्या होता है

असल में लेज़र और स्टेपलर तकनीक कम इनवेसिव हैं। अध्ययन बताते हैं कि लेज़र सर्जरी में समय कम लगता है, खून कम बहता है और मरीज़ स्टेपलर सर्जरी के मुकाबले जल्दी ठीक होते हैं, हालांकि दोनों सुरक्षित हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आपका सर्जन जांच के बाद आपके बवासीर के ग्रेड के हिसाब से बताएगा कि कौन सी तकनीक ठीक है। आप आमतौर पर 3 से 7 दिन में डेस्क वर्क पर लौट सकते हैं। आम कीमत ₹35,000 से ₹90,000 के बीच है। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करके अपने विकल्पों पर बात करें।

बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी से पहले मुझे कौन-से टेस्ट और स्कैन कराने होंगे?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी से पहले आमतौर पर रूटीन ब्लड टेस्ट कराए जाते हैं जैसे कम्प्लीट ब्लड काउंट, कोएगुलेशन प्रोफाइल, ब्लड ग्रुप और बेसिक बायोकेमिस्ट्री। अगर आपको रेक्टल ब्लीडिंग है और उम्र 50 से ज्यादा है या कोलोरेक्टल बीमारी की फैमिली हिस्ट्री है, तो कोलोनोस्कोपी की सलाह दी जाती है ताकि दूसरे कारणों को रूल आउट किया जा सके। प्रोक्टोस्कोपी ओपीडी में की जाती है ताकि बवासीर (पाइल्स) का ग्रेड पता चले।

विस्तार से

गाइडलाइन कोलोनोस्कोपी की सिफारिश करती है जब रेक्टल ब्लीडिंग के साथ पर्सनल या फैमिली हिस्ट्री कोलोरेक्टल नियोप्लाज्म की हो, इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज हो, बॉवेल हैबिट बदले हों, हाल में वजन गिरा हो, आयरन-डेफिशिएंसी एनीमिया हो, या फीकल इम्यूनोकेमिकल टेस्ट पॉजिटिव हो।

अगर कोलोनोस्कोपी मुमकिन न हो तो फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी विद एनोस्कोपी विकल्प हो सकती है। एनोस्कोपी या प्रोक्टोस्कोपी ओपीडी में गोलाइअर सिस्टम से ग्रेड कन्फर्म करती है। रूटीन प्री-एनेस्थीसिया चेक में ईसीजी और चेस्ट एक्स-रे शामिल हैं अगर उम्र या कॉमॉर्बिडिटी के हिसाब से ज़रूरी हो।

अनकॉम्प्लिकेटेड हेमोरॉयडल डिजीज के लिए एमआरआई या सीटी स्कैन जैसी स्पेशलाइज्ड इमेजिंग रूटीन में नहीं मांगी जाती। सर्जन आपकी उम्र, लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के मुताबिक ही ज़रूरी टेस्ट लिखेंगे।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर लंबी स्कैन लिस्ट की उम्मीद करते हैं।

असल में क्या होता है

सीधे-सादे बवासीर (पाइल्स) के लिए बस बेसिक ब्लड वर्क और स्कोप एग्जाम काफी हैं। कोलोनोस्कोपी सबके लिए रूटीन नहीं — सिर्फ तब जब गाइडलाइन दूसरी बीमारियों को रूल आउट करने के लिए कहे।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अधिकतर टेस्ट हॉस्पिटल की इन-हाउस लैब और रेडियोलॉजी में एक-दो दिन में पूरे हो जाते हैं। नतीजे रिव्यू होने और फिटनेस कन्फर्म होने पर सर्जरी की तारीख दी जाती है। आमतौर पर हॉस्पिटल स्टे सेम डे या एक रात का होता है। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करके प्री-ऑपरेटिव वर्कअप शुरू करें।

बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी और शुरुआती रिकवरी में कितना दर्द होता है?

संक्षेप में

बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी के बाद दर्द तकनीक और व्यक्ति के हिसाब से अलग होता है। जयपुर हॉस्पिटल में हमारी सर्जिकल टीम स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न) या छोटी जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) देती है, इसलिए 20 से 45 मिनट की प्रक्रिया के दौरान आपको कुछ महसूस नहीं होता। ज्यादातर मरीज पहले कुछ दिनों में मध्यम असुविधा बताते हैं, खासकर मल त्याग के समय, और यह आमतौर पर एक हफ्ते में सुधर जाता है।

विस्तार से

अध्ययन (स्टडी) दिखाते हैं कि लेज़र सर्जरी से स्टेपलर सर्जरी या ओपन सर्जरी (चीरे वाली) के मुकाबले ऑपरेशन के बाद दर्द कम होता है।

एक ट्रायल में 24 घंटे, एक हफ्ते, एक महीने और तीन महीने पर दर्द के स्कोर लेज़र ग्रुप में लगातार कम थे। स्टेपलर वाले मरीजों को अस्पताल में ज्यादा रहना पड़ा और सामान्य गतिविधि में लौटने में ज्यादा समय लगा।

ओपन सर्जरी (चीरे वाली) में आमतौर पर ज्यादा दर्द होता है क्योंकि टिश्यू काटे और टांके जाते हैं।

हमारी टीम दर्द की दवा देती है और सिट्ज़ बाथ (गुनगुने पानी में बैठना), स्टूल सॉफ्टनर और हाई-फाइबर डाइट की सलाह देती है ताकि पहले मल त्याग आसान हों।

एक आम धारणा

कई लोग मानते हैं कि सभी बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी में दर्द एक जैसा होता है।

असल में क्या होता है

सबूत दिखाते हैं कि लेज़र इलाज से अक्सर दर्द कम होता है और गतिविधि में जल्दी वापसी होती है स्टेपलर या ओपन सर्जरी (चीरे वाली) के मुकाबले, लेकिन आपका सर्जन आपके बवासीर (पाइल्स) के ग्रेड और सेहत के हिसाब से तरीका चुनेगा।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आप पहले दो से तीन दिन सबसे ज्यादा असुविधा महसूस कर सकते हैं। डेस्क का काम आमतौर पर तीन से सात दिन में संभव है। दो हफ्ते भारी वजन न उठाएं। दर्द की दवा समय पर लें, सिर्फ तेज दर्द होने पर नहीं।

फाइबर और तरल पदार्थ से मल नरम रखें। अगर दर्द अचानक बढ़े या बुखार आए, तो अस्पताल संपर्क करें। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि चर्चा हो सके कि आपके लिए कौन सी तकनीक सही है।

बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी के बाद रिकवरी (ठीक होना) में आमतौर पर कितना समय लगता है?

संक्षेप में

रिकवरी (ठीक होना) का समय तकनीक और आपके काम पर निर्भर करता है। जयपुर हॉस्पिटल में हमारी सर्जिकल टीम अधिकांश मरीज़ों को बताती है कि वे तीन से सात दिन में डेस्क वर्क पर लौट सकते हैं। अस्पताल में रहना उसी दिन या एक रात का होता है। पूरी तरह ठीक होने में कुछ हफ्ते लगते हैं, भारी वजन उठाने से दो से चार सप्ताह बचना चाहिए।

विस्तार से

अध्ययनों के अनुसार, लेज़र सर्जरी वाले मरीज़ों का औसत अस्पताल प्रवास 1.28 दिन था और वे 2.24 दिन में सामान्य गतिविधि पर लौटे, जबकि स्टेपलर वाले 3.28 दिन रहे और 4.24 दिन लगे।

ओपन सर्जरी (चीरे वाली) में आमतौर पर अधिक दर्द के कारण काम से अधिक समय छुट्टी लेनी पड़ती है।

पहले तीन हफ्तों में स्टेपलर के बाद दर्द और दर्द की दवा का उपयोग ओपन सर्जरी (चीरे वाली) की तुलना में कम होता है, लेकिन 24 महीने पर जीवन की गुणवत्ता के स्कोर ओपन सर्जरी (चीरे वाली) के पक्ष में होते हैं।

रबर बैंड लिगेशन ओपीडी प्रक्रिया है जिसमें लगभग कोई डाउनटाइम नहीं होता। आपका सर्जन चुनी गई प्रक्रिया और आपकी शारीरिक मांग के आधार पर व्यक्तिगत समयरेखा देगा।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर अपनी रिकवरी (ठीक होना) की तुलना किसी ऐसे दोस्त से करते हैं जिसकी अलग तकनीक हुई थी।

असल में क्या होता है

लेज़र वाले आमतौर पर जल्दी घर जाते हैं और स्टेपलर वालों की तुलना में तेजी से गतिविधि पर लौटते हैं, जबकि ओपन सर्जरी (चीरे वाली) को सबसे अधिक समय लगता है। आपका सर्जन आपके ऑपरेशन और काम के अनुसार समयरेखा देगा।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

लेज़र या स्टेपलर सर्जरी के बाद कम से कम तीन दिन और ओपन सर्जरी (चीरे वाली) के बाद दो सप्ताह तक काम से छुट्टी की योजना बनाएं। फाइबर, तरल पदार्थ और निर्धारित स्टूल सॉफ्टनर से मल नरम रखें।

हर मल त्याग के बाद सिट्ज़ बाथ (गुनगुने पानी में बैठना) लें। दो सप्ताह तक जिम, साइकिल चलाना और भारी वजन उठाने से बचें। दो से तीन सप्ताह पर अपना फॉलो-अप अटेंड करें।

जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श बुक करें ताकि आपकी प्रक्रिया और जीवनशैली से मेल खाता रिकवरी (ठीक होना) प्लान मिल सके।

पाइल्स के विभिन्न ग्रेड का निदान कैसे किया जाता है?

संक्षेप में

पाइल्स के ग्रेड का निदान जयपुर हॉस्पिटल में क्लिनिकल जांच और एनोस्कोपी द्वारा किया जाता है। सर्जन आपके लक्षणों के बारे में पूछते हैं, डिजिटल रेक्टल जांच करते हैं, और गुदा नली देखने के लिए एनोस्कोप का उपयोग करते हैं। व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली गोलिघर वर्गीकरण पाइल्स को आकार, प्रोलैप्स, और क्या वे स्वतः कम होते हैं, के आधार पर I से IV तक ग्रेड करता है।

विस्तार से

सबूत ग्रेड I को बिना प्रोलैप्स के रक्तस्राव के रूप में वर्णित करते हैं। ग्रेड II जोर लगाने पर प्रोलैप्स करता है लेकिन स्वतः कम हो जाता है। ग्रेड III प्रोलैप्स करता है और मैन्युअल रूप से कम करना पड़ता है।

ग्रेड IV प्रोलैप्स रहता है और कम नहीं किया जा सकता। सर्जन बाहरी पाइल्स, स्किन टैग, और थ्रोम्बोसिस की भी जांच करते हैं।

अगर मलाशय से रक्तस्राव है, विशेष रूप से वृद्ध रोगियों या जोखिम कारकों वाले लोगों में, तो अन्य कोलोरेक्टल बीमारियों को खारिज करने के लिए कोलोनोस्कोपी या फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी की सलाह दी जा सकती है।

ग्रेड तय करता है कि आप फाइबर और दवाओं से शुरू करते हैं, आउटपेशेंट रबर बैंड लिगेशन से, या लेज़र, स्टेपलर, या ओपन सर्जरी की ओर बढ़ते हैं।

एक आम धारणा

मरीज अक्सर अकेले लक्षणों से अपना ग्रेड अनुमान लगाते हैं।

असल में क्या होता है

केवल एनोस्कोप से सीधा देखने पर सही ग्रेड मिलता है, और ग्रेड तय करता है कि आपको दवा, बैंड, या सर्जरी की जरूरत है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

उचित ग्रेडिंग के लिए जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श बुक करें। सर्जन आपका ग्रेड बताएंगे, निष्कर्ष दिखाएंगे, और अगले चरण की सिफारिश करेंगे। अगर सर्जरी की आवश्यकता है तो आपको ₹35,000 से ₹90,000 की सामान्य सीमा के भीतर लागत अनुमान भी मिलेगा।

सर्जन कैसे तय करेगा कि बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी (ऑपरेशन) ज़रूरी है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में सर्जन आपके लक्षणों, बवासीर (पाइल्स) के ग्रेड, और पहले के इलाज पर आपकी प्रतिक्रिया के क्लिनिकल आकलन के बाद बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी (ऑपरेशन) पर फैसला करता है। यह फैसला स्थापित दिशानिर्देशों का पालन करता है जो निचले ग्रेड के लिए पहले गैर-सर्जिकल उपायों और उच्च ग्रेड या रूढ़िवादी देखभाल विफल होने पर सर्जरी (ऑपरेशन) की सिफारिश करते हैं।

विस्तार से

सबूत दिखाते हैं कि प्रारंभिक प्रबंधन समुदाय आधारित है और आहार परिवर्तन, बल्क-फॉर्मिंग लैक्सेटिव, और जीवनशैली सलाह से शुरू होता है। आउटपेशेंट प्रक्रियाएं जैसे रबर बैंड लिगेशन ग्रेड I से III हेमोरॉयड्स के लिए उपयोग की जाती हैं जो रूढ़िवादी इलाज से नहीं सुधरते।

लेज़र हेमोरॉयडोप्लास्टी, स्टेपलर हेमोरॉयडोपेक्सी (MIPH), और ओपन हेमोरॉयडेक्टॉमी जैसे सर्जिकल विकल्प उच्च ग्रेड के लिए या जब बैंडिंग असफल रही हो, पर विचार किए जाते हैं।

सर्जन सर्जरी (ऑपरेशन) की योजना बनाने से पहले कोलोरेक्टल बीमारी या पोर्टल हाइपरटेंशन जैसी अन्य स्थितियों की भी जांच करेगा।

एक आम धारणा

कई लोग सोचते हैं कि सर्जरी (ऑपरेशन) पहला विकल्प है।

असल में क्या होता है

असल में, दिशानिर्देश शुरुआती ग्रेड के लिए रूढ़िवादी देखभाल और रबर बैंड लिगेशन जैसी सरल OPD प्रक्रियाओं की सिफारिश करते हैं। सर्जरी (ऑपरेशन) बाद में आती है, और लेज़र, स्टेपलर, या ओपन तकनीक का चुनाव आपके विशिष्ट ग्रेड और एनाटॉमी पर निर्भर करता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आपका OPD परामर्श होगा जहां सर्जन आपकी जांच करेगा, पिछली रिपोर्ट की समीक्षा करेगा, और संकेत मिलने पर कोलोनोस्कोपी या सिग्मोइडोस्कोपी की सलाह दे सकता है। निष्कर्षों के आधार पर, सर्जन बताएगा कि कौन सी तकनीक आपके ग्रेड और स्वास्थ्य स्थिति के अनुकूल है।

मेरा डॉक्टर बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी की सलाह क्यों दे सकता है?

संक्षेप में

आपका डॉक्टर बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी की सलाह दे सकता है जब खून बहना, बाहर निकलना, दर्द या खुजली जैसे लक्षण फाइबर, तरल पदार्थ और ओपीडी इलाज के बावजूद बने रहें। सर्जरी आमतौर पर ग्रेड III या IV बवासीर के लिए सोची जाती है, या जब रबर बैंड लिगेशन से फायदा न हुआ हो। मकसद लक्षणों से राहत और जीवन की गुणवत्ता सुधारना है।

विस्तार से

दिशानिर्देश कहते हैं कि निचले ग्रेड के बवासीर के लिए पहले खान-पान में बदलाव, बल्क-फॉर्मिंग लैक्सेटिव और ओपीडी प्रक्रियाएं जैसे रबर बैंड लिगेशन या स्क्लेरोथेरेपी आजमाएं।

अगर ये नाकाम रहें, या बड़े बाहर निकले बवासीर (ग्रेड III–IV) हों, तो लेज़र सर्जरी, स्टेपलर सर्जरी या ओपन सर्जरी जैसे सर्जिकल विकल्प दिए जाते हैं। अध्ययन दिखाते हैं कि सर्जिकल दखल ऊंचे ग्रेड की बीमारी में लक्षणों पर असरदार कंट्रोल देता है।

स्टेपलर सर्जरी पारंपरिक काटकर निकालने का एक मान्य विकल्प है। लेज़र इलाज टिशू ट्रॉमा, खून बहना और अस्पताल में रुकना कम कर सकता है। चुनाव बवासीर के ग्रेड, आपकी सेहत और आपके सर्जन के आकलन पर निर्भर करता है।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ मानते हैं कि सर्जरी पहला कदम है।

असल में क्या होता है

असल में दिशानिर्देश पहले कंजर्वेटिव और ओपीडी उपाय आजमाने को कहते हैं। सर्जरी तब आती है जब वे विकल्प खत्म हो चुके हों या बवासीर उनके लिए बहुत एडवांस हो।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आपके ओपीडी विज़िट पर सर्जन आपकी जांच करेंगे, ग्रेड कन्फर्म करेंगे और बताएंगे कि नॉन-सर्जिकल विकल्प आजमाए गए हैं या नहीं। अगर सर्जरी की सलाह दी जाए, तो आपको आम ₹35,000 से ₹90,000 की रेंज में अनुमानित खर्च और प्रोसीजर की तारीख मिलेगी। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करके अपने लक्षणों और अगले कदमों पर बात करें।

बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी से पहले के दिनों में मुझे कैसे तैयारी करनी चाहिए?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी से पहले आपके सर्जन खास निर्देश देंगे। आमतौर पर हल्का, हाई-फाइबर खाना खाएं और खूब पानी पिएं ताकि स्टूल नरम रहें। आपको शाम को या प्रोसीजर की सुबह लैक्सेटिव या एनिमा लेने को कहा जा सकता है। शराब और धूम्रपान से बचें, क्योंकि ये हीलिंग धीमी कर सकते हैं। बॉवेल-प्रेप की सलाह को ठीक वैसे ही मानें जैसी दी गई हो।

विस्तार से

अच्छी बॉवेल प्रेपरेशन इन्फेक्शन का चांस घटाती है और ऑपरेशन आसान बनाती है। सबूत दिखाते हैं कि पर्याप्त फाइबर और ओरल फ्लुइड वाला संतुलित आहार स्टूल कंसिस्टेंसी सुधारता है, जो कंजर्वेटिव मैनेजमेंट का मुख्य लक्ष्य है।

स्टिमुलेंट लैक्सेटिव या ऑस्मोटिक एजेंट ब्लीडिंग और लक्षण बने रहने का जोखिम कम करते देखे गए हैं। आपकी सर्जिकल टीम बताएगी कि फॉर्मल बॉवेल वॉशआउट चाहिए या सिर्फ माइल्ड लैक्सेटिव। सर्जरी से पहले धूम्रपान बंद करना और शराब न पीना भी एनेस्थेटिक जोखिम घटाने के लिए सुझाया जाता है।

एक आम धारणा

कई लोगों को लगता है स्ट्रॉन्ग पर्ज चाहिए, लेकिन माइल्ड लैक्सेटिव या एनिमा आमतौर पर काफी होता है।

असल में क्या होता है

ज्यादा सफाई एनल एरिया को इरिटेट कर सकती है और रिकवरी मुश्किल बना सकती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

प्री-ऑपरेटिव विज़िट पर आपको लिखित प्रेपरेशन शीट मिलेगी। डॉक्टर के लिखे लैक्सेटिव या एनिमा केमिस्ट से एक दिन पहले ले लें। एक अटेंडेंट का इंतज़ाम करें जो आपको हॉस्पिटल लाए और ले जाए।

अगर तारीख से पहले बुखार, लूज़ मोशन या कोई नई बीमारी हो तो हॉस्पिटल कॉल करें। जयपुर हॉस्पिटल में प्री-ऑपरेटिव कंसल्टेशन बुक करके अपनी पर्सनलाइज़्ड प्रेपरेशन प्लान लें।

बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी के आम साइड इफेक्ट और कम पाए जाने वाले गंभीर कॉम्प्लिकेशन (जटिलताएं) क्या हैं?

संक्षेप में

बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी के बाद आम साइड इफेक्ट में हल्का रक्तस्राव, मल त्याग में दर्द, सूजन, स्किन टैग और अस्थायी रूप से पेशाब करने में दिक्कत शामिल हैं। जयपुर हॉस्पिटल में हमारी सर्जिकल टीम आपकी करीब से निगरानी करती है। गंभीर कॉम्प्लिकेशन (जटिलताएं) जैसे भारी रक्तस्राव, संक्रमण (इन्फेक्शन), रेक्टल परफोरेशन या गंभीर सेप्सिस दुर्लभ हैं लेकिन संभव हैं।

विस्तार से

अध्ययनों में, कुछ तकनीकों के बाद 15 से 44 प्रतिशत मरीजों में ऑपरेशन के बाद रक्तस्राव देखा गया, और दर्द 8 से 80 प्रतिशत में रिपोर्ट हुआ, जो तरीके पर निर्भर करता है।

रबर बैंड लिगेशन से दर्द, रक्तस्राव, थ्रोम्बोसिस और स्किन टैग हो सकते हैं; बहुत कम मामलों में भारी रक्तस्राव या सेप्सिस हो सकता है। स्टेपलर सर्जरी में रेक्टल परफोरेशन के साथ पेरिटोनाइटिस का छोटा जोखिम होता है।

लेज़र सर्जरी में तुलनात्मक डेटा में कम खून की कमी और कम कॉम्प्लिकेशन (जटिलताएं) दिखी हैं। कुल मिलाकर, एक बड़े ट्रायल में लगभग 7 प्रतिशत स्टेपलर मरीजों और 9 प्रतिशत ओपन सर्जरी (चीरे वाली) मरीजों में गंभीर प्रतिकूल घटनाएं देखी गईं। हमारी टीम इन जोखिमों को कम करने के लिए सख्त प्रोटोकॉल अपनाती है।

एक आम धारणा

लोग अक्सर दुर्लभ आपदाओं की चिंता करते हैं लेकिन दर्द और स्पॉटिंग जैसी आम परेशानी को नजरअंदाज कर देते हैं।

असल में क्या होता है

डेटा दिखाता है कि लेज़र और स्टेपलर तरीकों की समग्र सुरक्षा समान है, लेकिन लेज़र से रक्तस्राव और दर्द कम होता है। आपका सर्जन उन जोखिमों को समझाएगा जो आपके विशेष मामले के लिए मायने रखते हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

कुछ दिन टॉयलेट पेपर पर स्पॉटिंग हो सकती है। दी गई एंटीबायोटिक और दर्द की दवा निर्देशानुसार लें। गर्म पानी से जगह साफ रखें। जोर न लगाएं।

अगर आपको चमकीला लाल भारी रक्तस्राव, 38°C से ऊपर बुखार, दवा से न घटने वाला तेज दर्द, या पेशाब न आने की शिकायत हो, तो इमरजेंसी विभाग जाएं। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि आपकी व्यक्तिगत जोखिम प्रोफाइल की समीक्षा हो सके।

बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी के बाद कौन से लक्षण सामान्य हैं और किनके लिए तत्काल चिकित्सा ध्यान ज़रूरी है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी के बाद आप कुछ दर्द, हल्का रक्तस्राव और गुदा में दबाव या खराश कुछ दिनों तक महसूस कर सकते हैं। ये सामान्य हैं और आमतौर पर आपके सर्जन द्वारा दी गई दवाओं से सुधरते हैं। आप यह भी देख सकते हैं कि पहली बार मल त्याग के साथ एक छोटी ड्रेसिंग या गॉज़ निकलती है।

विस्तार से

सबूत दिखाते हैं कि ऑपरेशन के बाद दर्द 15 से 100 प्रतिशत मरीज़ों में होता है और कुछ प्रक्रियाओं के बाद रक्तस्राव 15 से 44 प्रतिशत तक होता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, हेमोरॉइडोपेक्सी के बाद दबाव या खराश महसूस करना सामान्य है।

हालांकि, आपको तत्काल देखभाल लेनी चाहिए अगर भारी चमकदार लाल रक्तस्राव हो जो न रुके, तेज़ बुखार, गंभीर पेट दर्द, पेशाब करने में कठिनाई, या संक्रमण के लक्षण जैसे फैलती लालिमा या दुर्गंधयुक्त स्राव हो।

रबर बैंड लिगेशन जैसी प्रक्रियाओं के बाद बड़े पैमाने पर रक्तस्राव या सेप्सिस जैसी दुर्लभ लेकिन गंभीर जटिलताएं (कॉम्प्लिकेशन) बताई गई हैं, इसलिए चेतावनी संकेतों पर तुरंत ध्यान देना आवश्यक है।

एक आम धारणा

कई मरीज़ सोचते हैं कि कोई भी रक्तस्राव इमरजेंसी है।

असल में क्या होता है

अध्ययनों में, सर्जरी के बाद मामूली रक्तस्राव आम है। लेकिन भारी न रुकने वाला रक्तस्राव, तेज़ बुखार, गंभीर पेट दर्द, या पेशाब न कर पाना खतरे के संकेत हैं। दुर्लभ रूप से, गंभीर सेप्सिस या बड़ा रक्तस्राव हो सकता है, इसलिए इन संकेतों को नज़रअंदाज न करें।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

निर्धारित दर्द निवारक और स्टूल सॉफ्टनर नियमित लें। आराम के लिए गुनगुने पानी से सिट्ज़ बाथ (गुनगुने पानी में बैठना) लें। भारी रक्तस्राव, 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बुखार, या पेशाब न कर पाने पर नज़र रखें।

अगर इनमें से कुछ भी होता है, तो जयपुर हॉस्पिटल के इमरजेंसी विभाग में तुरंत जाएं। आपका सर्जन पहले फॉलो-अप पर आपकी रिकवरी (ठीक होना) की समीक्षा करेगा। जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श बुक करें ताकि आपकी विशिष्ट रिकवरी (ठीक होना) योजना पर चर्चा हो सके।

जब आप हमसे संपर्क करते हैं

आपका अगला कदम: एक साफ योजना

सर्जन से मिलने, जरूरत पड़ने पर अस्पताल में ही जाँच कराने, अनुमानित खर्च जानने और कैशलेस योजनाओं की मदद के लिए जयपुर हॉस्पिटल से संपर्क करें।

  • ओपीडी में जनरल और लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) सर्जन से परामर्श
  • आपकी स्कैन रिपोर्ट की जाँच, और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में ही टेस्ट (लैब, एक्स-रे और इमेजिंग)
  • आसान शब्दों में इलाज के सभी विकल्पों की जानकारी, जिसमें यह भी शामिल है कि सर्जरी की जरूरत है या नहीं
  • फैसला लेने से पहले इलाज का अनुमानित खर्च
  • RGHS, मा योजना, CGHS और पैनल में शामिल बीमा कंपनियों व टीपीए के तहत कैशलेस इलाज में मदद
  • इलाज के बाद फॉलो-अप
अपॉइंटमेंट का अनुरोध करें WhatsApp पर पूछें

पूरी जानकारी

बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी: ज़रूरी जानकारी

बवासीर क्या है और यह कैसे होती है

बवासीर (पाइल्स) गुदा नली के अंदर या गुदा के आसपास की नसों में होने वाली सूजन है। यह दुनिया भर में गुदा और मलाशय से जुड़ी सबसे आम समस्या है। जब इस हिस्से में दबाव बढ़ता है, तो यहाँ की नसें फूल सकती हैं। इससे अंदरूनी टिशू कमजोर हो जाते हैं और वहाँ के कुशन नीचे खिसकने लगते हैं।

बहुत से लोगों को बिना पता चले भी बवासीर होती है, लेकिन समस्या तब बनती है जब इनमें से खून आने लगे, ये बाहर निकलने लगें या दर्द-परेशानी होने लगे।

बवासीर के लक्षण और चेतावनी के संकेत जिनके लिए उसी दिन दिखाना ज़रूरी है

उसी दिन दिखाने वाले चेतावनी के संकेत
  • बहुत ज्यादा खून बहना जो बंद न हो
  • चक्कर आना या बेहोशी लगना
  • बैठने न देने वाला तेज दर्द
  • गुदा में दर्द के साथ तेज बुखार
इमरजेंसी? 0141 255 1500 पर कॉल करें, 24×7

शौच के दौरान या तुरंत बाद चमकदार लाल खून आना इसका सबसे आम लक्षण है।

आपको यह भी महसूस हो सकता है:

  • मलद्वार से बाहर निकलता हुआ मस्सा
  • खुजली
  • जलन या दर्द
  • पेट पूरी तरह साफ न होने का अहसास

अंदरूनी बवासीर में आमतौर पर दर्द नहीं होता, लेकिन अगर गुदा के किनारे पर अचानक तेज दर्द के साथ छूने पर दर्द करने वाला मस्सा बन जाए, तो इसका मतलब आमतौर पर बाहरी बवासीर में खून का थक्का जमना होता है।

अगर बहुत ज्यादा खून बहना बंद न हो, चक्कर आए या बेहोशी लगे, इतना तेज दर्द हो कि बैठना मुश्किल हो जाए, या गुदा में दर्द के साथ तेज बुखार आ जाए, तो उसी दिन जयपुर हॉस्पिटल से संपर्क करें।

यह शरीर से ज्यादा खून बहने, बवासीर में खून का दौरा रुकने, या किसी संक्रमण (इन्फेक्शन) का संकेत हो सकता है जिसके लिए तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है।

कारण और किन लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है

बवासीर के जोखिम कारक
पुरानी कब्ज़
जोर लगाने से मलाशय पर दबाव बढ़ता है
कम फाइबर वाला भोजन
मल सख्त होता है और जोर लगाना पड़ता है
गर्भावस्था
गर्भाशय पेल्विक नसों पर दबाव डालता है
बढ़ती उम्र
50 के बाद टिशू कमजोर हो जाते हैं

मलाशय के निचले हिस्से में बार-बार दबाव बढ़ने पर बवासीर बनती है।

इसके आम कारणों में शामिल हैं:

  • पुरानी कब्ज़ और शौच के समय जोर लगाना
  • टॉयलेट सीट पर देर तक बैठना
  • खाने में कम फाइबर होना
  • पर्याप्त मात्रा में पानी या तरल न पीना

गर्भावस्था में इसका खतरा बढ़ जाता है क्योंकि बढ़ता हुआ गर्भाशय पेल्विक नसों पर दबाव डालता है और हॉर्मोन नसों की दीवारों को ढीला कर देते हैं। उम्र बढ़ने के साथ टिशू कमजोर होने लगते हैं, इसलिए 50 की उम्र के बाद बवासीर अधिक आम हो जाती है; इस उम्र के लगभग आधे लोगों में इसके लक्षण दिखाई देते हैं।

परिवार में बवासीर का इतिहास, मोटापा और भारी वजन उठाना भी इसकी संभावना को बढ़ाते हैं:

  • परिवार में बवासीर का इतिहास
  • मोटापा
  • भारी वजन उठाना

बवासीर की पहचान कैसे होती है: जांच और टेस्ट

आपके कंसल्टेंट / सर्जन पहले आपके लक्षणों, शौच की आदतों और परिवार में आंतों की किसी बीमारी के इतिहास के बारे में पूछते हैं। गुदा क्षेत्र की आसान जांच और प्रोक्टोस्कोपी (एक छोटी, रोशनी वाली नली) से सर्जन बवासीर को देख पाते हैं और उसे ग्रेड I से IV में तय करते हैं।

अगर आपकी उम्र 40 से अधिक है, परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास रहा है, बिना कोशिश किए वजन घटा है, या शरीर में आयरन की कमी से खून की कमी (एनीमिया) है, तो खून आने के अन्य कारणों को खारिज करने के लिए आमतौर पर कोलोनोस्कोपी या फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी की सलाह दी जाती है। ये टेस्ट अस्पताल के एंडोस्कोपी सुइट में हल्की बेहोशी या आराम की दवा देकर किए जाते हैं।

बवासीर का बिना सर्जरी इलाज और सर्जरी की सलाह कब दी जाती है

बिना सर्जरी इलाज के चरण
  1. फाइबर ज्यादा खाएं और पानी पिएं सब्जियाँ, फल, साबुत अनाज और भरपूर पानी
  2. ज़रूरत पड़ने पर पेट साफ करने वाली दवा लें मल को नरम करने में मदद करती है
  3. खून और खुजली के लिए फ्लेबोटोनिक्स दवाएं आजमाएं दवाएं लक्षणों को कम कर सकती हैं

शुरुआती इलाज का मुख्य लक्ष्य मल को नरम और आसानी से निकलने लायक बनाना होता है।

इसका मतलब है भोजन में फाइबर बढ़ाना:

  • सब्जियाँ
  • फल
  • साबुत अनाज
  • भरपूर पानी पीना
  • ज़रूरत पड़ने पर पेट साफ करने वाली दवा (लेक्सेटिव) लेना

हर बार शौच के बाद कुछ मिनट के लिए गुनगुने सिट्ज़ बाथ (गुनगुने पानी में बैठना) से जलन और दर्द में आराम मिल सकता है। फ्लेबोटोनिक्स नाम की दवाएं खून आने, खुजली और परेशानी को कम कर सकती हैं।

अगर इन तरीकों से फायदा न हो, तो अगला कदम ओपीडी में की जाने वाली प्रक्रियाएं हैं। रबर बैंड लिगेशन ग्रेड I से III की बवासीर के लिए सबसे आम ओपीडी इलाज है; इसमें एक छोटा बैंड खून का दौरा रोक देता है और मस्सा कुछ ही दिनों में सूखकर गिर जाता है। शुरुआती ग्रेड के लिए इंजेक्शन स्क्लेरोथेरेपी भी ओपीडी का एक विकल्प है।

सर्जरी (ऑपरेशन) की सलाह आमतौर पर तब दी जाती है जब बवासीर बड़ी हो (ग्रेड III या IV), रबर बैंड के बाद दोबारा हो जाए, या लगातार खून बहने और मस्से बाहर आने से रोजमर्रा की ज़िंदगी पर असर पड़ रहा हो। आपके सर्जन चर्चा करेंगे कि आपकी बवासीर के ग्रेड और सेहत के हिसाब से कौन सा ऑपरेशन सही रहेगा।

जयपुर हॉस्पिटल में बवासीर की सर्जरी की तैयारी

सर्जरी से पहले की चेकलिस्ट

करें

  • चल रही दवाओं की लिस्ट साथ लाएं
  • बीमा या योजना का कार्ड साथ लाएं
  • आरामदायक ढीले कपड़े साथ लाएं

आपके ऑपरेशन से पहले, हमारी सर्जिकल टीम आपकी पुरानी बीमारियों और चलने वाली दवाओं की समीक्षा करेगी। आपकी उम्र और सेहत के आधार पर आपको खून की जाँच, ईसीजी, या छाती के एक्स-रे की ज़रूरत हो सकती है। ये जांचें हमारे अस्पताल की अपनी लैब और इमेजिंग सेंटर में की जाती हैं।

खून पतला करने की दवाओं, शुगर की गोलियों या किसी भी सप्लीमेंट के बारे में अपने सर्जन को ज़रूर बताएं। एनेस्थीसिया (बेहोशी) के डॉक्टर सर्जरी के दिन आपसे स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न) या कुछ समय के जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) के बारे में चर्चा करेंगे।

सर्जरी से कम से कम 6 घंटे पहले आपको कुछ भी खाना या पीना नहीं है। अपनी मौजूदा दवाओं की पर्ची, बीमा (इंश्योरेंस) या सरकारी योजना का कार्ड (RGHS, मा योजना, CGHS, या प्राइवेट टीपीए), और आरामदायक ढीले कपड़े साथ लाएं। अगर आपको रात भर भर्ती रहना पड़े, तो एक तीमारदार को साथ रुकने की योजना बनाकर आनी चाहिए।

जयपुर हॉस्पिटल में बवासीर (पाइल्स) की सर्जरी (ऑपरेशन) कैसे की जाती है

उपलब्ध सर्जिकल तकनीकें

laser

  • लेज़र सर्जरी

stapler

  • स्टेपलर सर्जरी (MIPH)

open

  • ओपन सर्जरी

banding

  • रबर बैंड लिगेशन

आपके कंसल्टेंट / सर्जन आपकी बवासीर के ग्रेड और आपकी सेहत के अनुसार सही तकनीक की सलाह देंगे। मुख्य विकल्प लेज़र सर्जरी, स्टेपलर सर्जरी (MIPH), ओपन सर्जरी (चीरे वाली), और रबर बैंड लिगेशन हैं। लेज़र सर्जरी में अंदर से बवासीर को सिकोड़ने के लिए लेज़र ऊर्जा का उपयोग होता है, जिससे खून का बहाव रुक जाता है।

स्टेपलर सर्जरी में एक गोल स्टेपलर से बाहर निकली बवासीर को वापस अपनी जगह पर खींचकर डेंटेट लाइन के ऊपर के अतिरिक्त ऊतक को हटा दिया जाता है। ओपन सर्जरी में बवासीर को काटकर अलग किया जाता है और यह बड़ी बाहरी बवासीर के लिए उपयोग की जाती है।

रबर बैंड लिगेशन एक ओपीडी प्रक्रिया है, जिसमें अंदरूनी बवासीर के आधार पर एक छोटा बैंड बांधकर खून का बहाव रोक दिया जाता है। ऑपरेशन के दिन आपको मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर में ले जाया जाता है।

यह प्रक्रिया आमतौर पर स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न) या कुछ समय के जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) में 20 से 45 मिनट लेती है। ऑपरेशन के बाद आपको रिकवरी (ठीक होना) रूम में ले जाया जाता है, जहाँ एनेस्थीसिया (बेहोशी) का असर उतरने तक नर्सें आपकी देखभाल करती हैं। ज्यादातर मरीज़ उसी दिन घर चले जाते हैं या एक रात रुकते हैं।

बवासीर की सर्जरी के जोखिम और संभावित जटिलताएँ (कॉम्प्लिकेशन)

गंभीर समस्याओं की दर
  • लगभग 7% स्टेपलर सर्जरी
  • लगभग 9% पारंपरिक चीरे वाली सर्जरी

हर ऑपरेशन में कुछ जोखिम होते हैं। अध्ययन (स्टडी) के अनुसार, सर्जरी के बाद सबसे आम जटिलताएँ खून बहना और दर्द हैं, जो कई मरीज़ों में देखी जाती हैं। स्टेपलर सर्जरी के बाद लगभग 7% मरीज़ों में गंभीर समस्याएँ देखी गईं; जबकि पारंपरिक चीरे वाली सर्जरी के बाद लगभग 9% में गंभीर समस्याएँ पाई गईं।

रबर बैंड लिगेशन के बाद दर्द, खून बहना, खून का थक्का जमना और त्वचा के मस्से जैसी मामूली जटिलताएँ हो सकती हैं।

रबर बैंड लिगेशन के बाद होने वाली दुर्लभ लेकिन गंभीर जटिलताओं में शामिल हैं:

  • पाचन तंत्र से भारी मात्रा में खून बहना
  • लिवर में फोड़ा (एब्सेस)
  • एंडोकार्डाइटिस (दिल का संक्रमण)
  • पेरिनियल सेप्सिस (गुदा के आसपास गंभीर संक्रमण)
  • मृत्यु

मलाशय में छेद होना और पेरिटोनिटिस होना स्टेपलर सर्जरी का एक विशेष जोखिम है। गंभीर सेप्सिस भी स्टेपलर सर्जरी की जटिलता बन सकता है। एनेस्थीसिया के बाद आपको चक्कर, उलझन या उल्टी जैसा महसूस हो सकता है। हमारी टीम आपकी पूरी निगरानी करती है और किसी भी जटिलता को तुरंत संभालती है।

बवासीर की सर्जरी के बाद रिकवरी और देखभाल

रिकवरी के मुख्य पड़ाव
  1. डेस्क वर्क 3 से 7 दिनों में वापसी
  2. घाव भरना कुछ हफ़्ते लगते हैं
  3. भारी वज़न उठाना दो से चार हफ़्ते तक बचें

ज्यादातर लोग 3 से 7 दिनों में डेस्क के काम पर लौट आते हैं। पूरी तरह ठीक होने में कुछ हफ़्ते लगते हैं। आपको गुदा क्षेत्र में हल्का दबाव या दर्द महसूस हो सकता है। ज़रूरत के अनुसार दर्द और उल्टी की दवाएँ दी जाती हैं।

सर्जरी के दौरान रखी गई पट्टी आमतौर पर पहले शौच के साथ बाहर निकल जाती है। दिन में कुछ मिनट के लिए गुनगुने पानी का सिट्ज़ बाथ (गुनगुने पानी में बैठना) लेने से आराम मिलता है। फाइबर युक्त खाना खाएँ, खूब पानी पिएँ और ज़ोर लगाने से बचने के लिए सलाह मिलने पर पेट साफ़ करने की दवा लें।

दो से चार हफ़्तों तक भारी वज़न उठाने और कसरत से बचें। शुरुआत से ही हल्का-फुल्का चलने-फिरने की सलाह दी जाती है। अपने सर्जन के साथ तय फॉलो-अप अपॉइंटमेंट पर ज़रूर जाएँ।

अस्पताल को तुरंत फोन करें या 24×7 इमरजेंसी में आएँ यदि आपको:

  • भारी खून बहना जो रुक न रहा हो
  • बुखार हो
  • गंभीर दर्द हो जो दवाओं से कम न हो रहा हो
  • पेशाब करने में असमर्थता हो
  • संक्रमण (इन्फेक्शन) के लक्षण जैसे बढ़ती लाली या मवाद बहना

बवासीर की सर्जरी के परिणाम: असर और दोबारा होना

अध्ययनों में लेज़र और स्टेपलर दोनों तकनीकें खून बहने, दोबारा होना और ऑपरेशन के बाद की जटिलताओं के मामले में सुरक्षित और असरदार पाई गई हैं। पारंपरिक चीरे वाली सर्जरी की तुलना में स्टेपलर सर्जरी में कम दर्द होता है और मरीज़ सामान्य गतिविधियों में जल्दी लौट पाते हैं।

शोध से पता चला है कि स्टेपलर विधि की तुलना में लेज़र सर्जरी में ऑपरेशन का समय कम लगता है, खून कम बहता है, दर्द कम होता है, अस्पताल में कम रुकना पड़ता है और काम पर जल्दी वापसी होती है।

एक परीक्षण में स्टेपलर समूह के लगभग 7% मरीज़ों में और लेज़र समूह के लगभग 3% मरीज़ों में बीमारी दोबारा हुई; यह अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं था। एक बड़े परीक्षण में 12 महीनों पर पारंपरिक सर्जरी में स्टेपलर सर्जरी की तुलना में बीमारी दोबारा होने के कम मामले देखे गए।

रबर बैंड लिगेशन 90% तक मामलों में खून बहना रोकता है और 78% से 84% ग्रेड III बवासीर के मरीज़ों में सुधार करता है, लेकिन तीन महीने में दोबारा होने की संभावना लगभग 13% रहती है। आपके सर्जन आपको बताएँगे कि आपकी बवासीर के ग्रेड और चुनी गई तकनीक के आधार पर क्या उम्मीद की जा सकती है।

जयपुर में बवासीर की सर्जरी का खर्च और बीमा (इंश्योरेंस)

जयपुर हॉस्पिटल में बवासीर की सर्जरी का सामान्य खर्च ₹35,000 से ₹90,000 के बीच होता है।

अंतिम खर्च इन बातों पर निर्भर करता है:

  • तकनीक (लेज़र, स्टेपलर, ओपन, या बैंडिंग)
  • बवासीर का ग्रेड
  • एनेस्थीसिया का प्रकार
  • आप उसी दिन घर जाते हैं या रात भर रुकते हैं
  • अतिरिक्त जाँचें या दवाएँ

हम स्वीकार करते हैं:

  • RGHS
  • मा योजना
  • CGHS
  • निजी बीमा कंपनियाँ और टीपीए

हमारी बिलिंग टीम भर्ती से पहले आपके कवर की जाँच कर सकती है और आपको अनुमानित खर्च दे सकती है। आपके ठहरने के दौरान ज़रूरी दवाओं या जाँचों के लिए अस्पताल परिसर में ही फार्मेसी और डायग्नोस्टिक लैब उपलब्ध हैं।

पता नहीं किस डॉक्टर को दिखाएँ?

हमारी टीम सही डॉक्टर तक पहुँचने में आपकी मदद करेगी, हिन्दी या अंग्रेज़ी में।

अपॉइंटमेंट का अनुरोध करें

बस एक मिनट लगेगा। कोई अकाउंट या मेडिकल हिस्ट्री नहीं चाहिए।

10 अंकों का भारतीय मोबाइल नंबर

यह WhatsApp खोलेगा और आपका अनुरोध पहले से लिखा होगा। हमारी टीम डॉक्टर, तारीख और समय पक्का करके जवाब देगी — तब तक यह पक्की बुकिंग नहीं है। बात करना चाहते हैं? कॉल करें +91 74140 01001.

आपका नाम, नंबर और पसंद हमारी अपॉइंटमेंट टीम के लिए भी सहेजे जाते हैं, सिर्फ़ आपकी विज़िट तय करने के लिए।