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हड्डी रोग और जोड़ प्रत्यारोपण · जयपुर हॉस्पिटल

जयपुर में घुटना बदलना (नी रिप्लेसमेंट)

घुटने का दर्द रोज़मर्रा की ज़िंदगी में रुकावट डाल रहा है? जयपुर हॉस्पिटल में साफ़ असेसमेंट और इलाज की योजना पाएं।

  • 1991 से जयपुर की सेवा में (35 साल)
  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त
  • 24×7 इमरजेंसी और आईसीयू
  • कैशलेस: RGHS, मा योजना, CGHS + 22 बीमा कंपनियाँ
सीढ़ियों पर दुखते घुटने को थामे एक बुज़ुर्ग महिला, साथ में घुटने के जोड़ का नज़दीकी चित्र
ऑपरेशन का समय
1.5 से 2.5 घंटे
एनेस्थीसिया
स्पाइनल या एपिड्यूरल एनेस्थीसिया
रिकवरी
सहारे से 1 से 2 दिन में चलनाडेस्क का काम 4 से 6 हफ्ते में
कीमत
₹1,80,000 से ₹3,50,000भारत में आम रेंज; हमसे अनुमानित खर्च पूछें

घुटने का दर्द रोकता है

गंभीर घुटने का दर्द चलने, सीढ़ियां चढ़ने और सोने को मुश्किल बनाता है

आर्थराइटिस या चोट जोड़ को घिस देती है। दवा, थेरेपी या इंजेक्शन के बावजूद दर्द बना रहता है। आसान काम कठिन हो जाते हैं। आप उन गतिविधियों से बचने लगते हैं जिन्हें आप पहले पसंद करते थे।

  • आराम में भी दर्द

    बैठे या लेटे हुए भी घुटने में दर्द रहता है जिससे नींद और आराम खराब होता है।

  • अकड़न से मूवमेंट सीमित

    घुटना पूरी तरह मोड़ या सीधा नहीं कर पाते; कुर्सी से उठना मुश्किल होता है।

  • दवाएं अब असर नहीं करतीं

    पेनकिलर और इंजेक्शन से बस थोड़ी देर राहत मिलती है या साइड इफेक्ट होते हैं।

  • रोज़ के काम प्रभावित

    बाज़ार चलकर जाना, सीढ़ियां चढ़ना या टॉयलेट इस्तेमाल करना संघर्ष बन जाता है।

घुटने का ऑस्टियोआर्थराइटिस दुनिया भर में लंबे समय तक रहने वाले दर्द और विकलांगता का एक प्रमुख कारण है।

जयपुर हॉस्पिटल क्यों

आपको चिंता है कि सर्जरी का मतलब महीनों काम से दूर रहना, ज़्यादा खर्च, और यह कि क्या आप फिर से सामान्य चल पाएंगे।

  • 1991 से एनएबीएच मान्यता प्राप्त मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल
  • मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और 24×7 क्रिटिकल केयर
  • RGHS, मा योजना, CGHS और पैनल में शामिल इंश्योरेंस के तहत कैशलेस इलाज

आपके इलाज का प्लान

हमारे साथ आपके पहले कदम

  1. 1 ऑर्थोपेडिक सर्जन के साथ ओपीडी कंसल्टेशन बुक करें
  2. 2 अस्पताल में ही स्कैन और टेस्ट करवाएं
  3. 3 सर्जरी के विकल्प देखें और अनुमानित खर्च लें
  4. 4 सर्जरी करवाएं और गाइडेड रिकवरी प्लान फॉलो करें

ऑपरेशन कैसे किया जाता है

सर्जन खराब हड्डी और कार्टिलेज निकालकर मेटल और प्लास्टिक का इम्प्लांट लगाते हैं। स्पाइनल या एपिड्यूरल एनेस्थीसिया दिया जाता है। प्रक्रिया आमतौर पर 1.5 से 2.5 घंटे लेती है।

  • टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR)

    घुटने के तीनों कम्पार्टमेंट बदलता है; व्यापक आर्थराइटिस में आम।

  • पार्शियल नी रिप्लेसमेंट (UKR)

    सिर्फ खराब कम्पार्टमेंट को रीसरफेस करता है; स्वस्थ हड्डी और लिगामेंट बचाता है।

  • कंप्यूटर-नेविगेटेड TKR

    सर्जरी के दौरान इम्प्लांट अलाइनमेंट की सटीकता सुधारने के लिए नेविगेशन इस्तेमाल करता है।

  • रोबोटिक-असिस्टेड TKR

    प्री-ऑपरेटिव प्लान के आधार पर सटीक बोन कट के लिए रोबोटिक आर्म मदद करता है।

मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं

  • 1991 35 साल से जयपुर की सेवा में
  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल
  • 5 हड्डी रोग और जोड़ प्रत्यारोपण कंसल्टेंट
  • 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू और एम्बुलेंस
  • 25 कैशलेस योजनाएँ और बीमा कंपनियाँ

शोध घुटना बदलने के बारे में क्या दिखाता है

  • 10 से 15 साल

    घुटना बदलवाने वाले लगभग हर व्यक्ति का घुटना कम से कम 10 से 15 साल तक बेहतर काम करता है।

  • लगभग 25 साल

    अधिकांश घुटना बदलने की सर्जरी लगभग 25 साल चलती है, उसके बाद रिवीजन की ज़रूरत पड़ सकती है।

  • अधिकांश लोग

    घुटना बदलवाने वाले अधिकांश लोगों को दर्द कम होता है, चलना-फिरना बढ़ता है, और जीवन की गुणवत्ता सुधरती है।

अगर इलाज न कराया जाए

इलाज न करवाने पर गंभीर आर्थराइटिस से दर्द बढ़ता है, जोड़ विकृत होता है, मांसपेशियां कमज़ोर होती हैं, और आत्मनिर्भरता घटती है। गिरने का खतरा बढ़ता है। जीवन की गुणवत्ता लगातार गिरती है।

इलाज के बाद की ज़िंदगी

अधिकांश लोग कई महीनों में कम दर्द और बेहतर मूवमेंट के साथ रोज़ के कामों पर लौट आते हैं।

  • बिना सहारे चलना

    अधिकांश लोग कुछ हफ्तों में खुद चलने लगते हैं और 4 से 6 हफ्ते में डेस्क का काम शुरू कर देते हैं।

  • बेहतर नींद

    जैसे-जैसे जोड़ ठीक होता है, रात का दर्द आमतौर पर कम हो जाता है, जिससे चैन की नींद आती है।

  • हल्की गतिविधियां फिर शुरू

    कई मरीज़ चलना, घर के काम, और सामाजिक कार्यक्रमों में जाना फिर शुरू कर देते हैं जिन्हें वे टाल रहे थे।

  • लंबे समय तक राहत

    नया जोड़ अधिकांश मरीज़ों में आमतौर पर 15 से 25 साल तक अच्छा काम करता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

घुटना बदलना (नी रिप्लेसमेंट) के बारे में मरीज़ों के सवाल

घुटना बदलने की प्रक्रिया में किन समस्याओं की जाँच की जाती है?

संक्षेप में

जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल में, जब घुटने का गठिया बहुत बढ़ जाता है या जोड़ खराब होने से रोज़मर्रा के काम रुक जाते हैं, तब घुटना बदलना (नी रिप्लेसमेंट) का विचार किया जाता है। यहाँ की सर्जिकल टीम गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस, पुरानी चोट या फ्रैक्चर के बाद होने वाले गठिया, और जोड़ की सतह को नुकसान पहुँचाने वाली अन्य दिक्कतों की जाँच करती है। इस जाँच में दर्द कितना है, घुटना कितना मुड़ पा रहा है, और इस समस्या का आपके जीवन पर क्या असर पड़ रहा है, इन बातों पर ध्यान दिया जाता है।

विस्तार से

घुटने का गठिया सबसे आम कारण है जिसके लिए घुटना बदलने की ज़रूरत पड़ती है। घुटने की हड्डी टूटने के बाद होने वाला गठिया भी इसकी वजह हो सकता है।

ऑर्थोपेडिक टीम आपकी पिछली मेडिकल जानकारी देखती है, घुटने की सूजन, उसका टेढ़ापन और घुमाव जाँचती है, और जोड़ में खाली जगह तथा हड्डियों के बदलाव देखने के लिए खड़े होकर कराए जाने वाले एक्स-रे करवाती है।

अध्ययन (स्टडी) बताते हैं कि गंभीर लक्षणों और जोड़ में संरचनात्मक खराबी वाले मरीज़ों को पूरा जोड़ बदलने की ज़रूरत होती है।

यह फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि बिना ऑपरेशन के किए गए इलाज से आराम मिला या नहीं, और क्या जोड़ इतना खराब हो चुका है कि सर्जरी (ऑपरेशन) ज़रूरी है।

एक आम धारणा

कई लोगों को लगता है कि घुटने के हर दर्द में ऑपरेशन होता है।

असल में क्या होता है

असल में सर्जन एक्स-रे में हड्डियों की खराबी देखते हैं और यह देखते हैं कि दवा, कसरत या वजन घटाने से फायदा हुआ या नहीं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

विस्तृत जाँच और जांचों के लिए आप ऑर्थोपेडिक्स ओपीडी में जाएँ। अपने पुराने एक्स-रे, सीटी स्कैन / एमआरआई रिपोर्ट और दवाइयों की पर्ची साथ लाएँ। सर्जन आपको समझाएँगे कि आपके गठिया के हिसाब से पूरा घुटना बदलना ठीक रहेगा या आधा।

डॉक्टर यह कैसे तय करते हैं कि मुझे घुटना बदलने से पहले किन जांचों की ज़रूरत है?

संक्षेप में

जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल में, सर्जन आपकी उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और घुटने की खराबी के आधार पर जांचें तय करते हैं। सामान्य जांचों में दोनों घुटनों का खड़े होकर एक्स-रे, ब्लड काउंट, किडनी और लिवर की कार्यप्रणाली, ब्लड शुगर, खून का थक्का जमने की जाँच और ईसीजी शामिल हैं। अतिरिक्त इमेजिंग जैसे सीटी स्कैन या एमआरआई तभी कराई जाती है जब एक्स-रे साफ न हो या घुटने का टेढ़ापन जटिल हो।

विस्तार से

सर्जन गठिया की स्थिति समझने और सही नाप का इम्प्लांट चुनने के लिए शारीरिक जाँच और एक्स-रे का उपयोग करते हैं।

यदि आपको अन्य बीमारियाँ हैं जैसे डायबिटीज, दिल की बीमारी, या आप खून पतला करने की दवा ले रहे हैं, तो फिजिशियन या कार्डियोलॉजिस्ट से अतिरिक्त अनुमति की ज़रूरत पड़ सकती है।

एनेस्थीसिया टीम स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न) या एपिड्यूरल के लिए फिटनेस जाँचती है।

इसका उद्देश्य यह तय करना है कि आप सर्जरी के लिए सुरक्षित हैं और हड्डी की मजबूती तथा अलाइनमेंट के आधार पर सही तकनीक — पूरा, आधा, कंप्यूटर-नेविगेटेड या रोबोटिक — चुनी जा सके।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ों को लगता है कि एमआरआई या सीटी स्कैन हमेशा ज़रूरी होता है।

असल में क्या होता है

इनकी ज़रूरत केवल तभी पड़ती है जब एक्स-रे से सर्जरी की पूरी योजना बनाने लायक जानकारी न मिले।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सभी जांचें अस्पताल की अपनी डायग्नोस्टिक लैब और रेडियोलॉजी विभाग में ही हो जाती हैं। इनकी रिपोर्ट आमतौर पर एक दिन में मिल जाती है। सर्जन रिपोर्ट देखकर ऑपरेशन की योजना पक्की करते हैं। यदि कोई रिपोर्ट असामान्य आती है, तो आगे बढ़ने से पहले फिजिशियन की राय ली जाती है।

घुटना बदलने के इलाज के बाद सुधार की उम्मीद कितनी जल्दी करनी चाहिए?

संक्षेप में

जयपुर के जयपुर हॉस्पिटल में घुटना बदलने के बाद, आप आमतौर पर 1 से 2 दिन के भीतर किसी सहारे से चलना शुरू कर देते हैं। ज्यादातर लोग 4 से 6 हफ्तों में बैठकर करने वाला काम फिर से शुरू कर सकते हैं। घुटना बदलने के बाद पूरी रिकवरी में आमतौर पर लगभग 1 साल का समय लगता है, और इस दौरान दर्द, चलने-फिरने और रोजमर्रा के कामों में लगातार सुधार होता रहता है।

विस्तार से

अध्ययनों में पाया गया है कि घुटना बदलवाने वाले ज्यादातर लोगों का दर्द कम होता है, घुटने को हिलाने-डुलाने की क्षमता बढ़ती है और जीवन बेहतर होता है। घुटना बदलने के बाद ज्यादातर लोगों का रोजमर्रा का जीवन सुधर जाता है।

स्पाइनल या एपिड्यूरल एनेस्थीसिया के तहत इस ऑपरेशन में 1.5 से 2.5 घंटे का समय लगता है। अस्पताल में आमतौर पर 3 से 5 रात रुकना होता है।

मांसपेशियों की ताकत और घुटने का मुड़ना वापस पाने के लिए फिजियोथेरेपी जल्दी शुरू की जाती है और घर पर भी जारी रहती है।

एक आम धारणा

आम तौर पर लोग सोचते हैं कि कुछ ही हफ्तों में सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा, लेकिन अंदर के टिशू और मांसपेशियों को पूरी तरह ठीक होने में महीनों लगते हैं।

असल में क्या होता है

बहुत जल्दी ज्यादा जोर लगाने से सूजन आ सकती है और परेशानी बढ़ सकती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

शुरुआती 1 से 2 हफ्तों के लिए घर पर देखभाल के लिए किसी परिजन या सहायक की व्यवस्था रखें। फिजियोथेरेपी के तय नियमों का पालन करें और सलाह के अनुसार ओपीडी में फॉलो-अप के लिए आएं। 6 से 12 हफ्तों में धीरे-धीरे हल्के काम शुरू किए जा सकते हैं।

मुझे कैसे पता चलेगा कि मैं जोड़ बदलवाने के लिए तैयार हूँ?

संक्षेप में

जब घुटने का तेज दर्द, जकड़न और सूजन अन्य उपचारों से भी ठीक न हो और घुटने को हिलाना या इस्तेमाल करना कठिन हो जाए, तब आप घुटना बदलने के लिए तैयार हो सकते हैं। जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल में सर्जन आपके लक्षणों, शारीरिक जाँच, इमेजिंग और यह देखकर कि घुटने से आपके दैनिक जीवन पर कितना असर पड़ रहा है, सही समय का फैसला करते हैं।

विस्तार से

यदि आपके लक्षण बहुत गंभीर हैं जिससे घुटने को चलाना या इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ घुटना बदलने की सलाह दे सकते हैं।

गंभीर लक्षणों और जोड़ में संरचनात्मक खराबी वाले व्यक्ति पूरे जोड़ को बदलने के लिए सही उम्मीदवार होते हैं। घुटने का गठिया (अर्थराइटिस) इस सर्जरी का सबसे आम कारण है, और फ्रैक्चर के बाद होने वाला अर्थराइटिस भी एक वजह हो सकता है।

सर्जरी से पहले मरीज की उम्मीदें और सर्जरी के बाद घुटने के काम में सुधार व दर्द से राहत का स्तर संतुष्टि को तय करने वाले प्रमुख कारक हैं।

सर्जन इस बात पर चर्चा करेंगे कि क्या बिना सर्जरी वाले विकल्प पूरे हो चुके हैं और क्या आपके लक्ष्य इस ऑपरेशन से हासिल होने वाले परिणामों से मेल खाते हैं।

एक आम धारणा

कई लोग केवल एक्स-रे रिपोर्ट पर ध्यान देते हैं, लेकिन फैसला इस बात पर अधिक निर्भर करता है कि घुटने का आपके जीवन पर कितना असर पड़ रहा है।

असल में क्या होता है

ठीक होने की गति या नतीजों को लेकर अवास्तविक उम्मीदें असंतोष का कारण बन सकती हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

यदि दवा, फिजियोथेरेपी और चलने के सहारों के बावजूद घुटने का दर्द चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने, सोने या खुद की बुनियादी देखभाल में रुकावट बन रहा है, तो जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें।

सर्जन आपके मामले की समीक्षा करेंगे, ₹1,80,000 से ₹3,50,000 की सामान्य खर्च सीमा समझाएंगे, और यह तय करने में मदद करेंगे कि क्या आप जोड़ बदलवाने के लिए तैयार हैं।

मुझे टोटल नी रिप्लेसमेंट की सलाह कब लेनी चाहिए?

संक्षेप में

जब अन्य उपचारों के बावजूद घुटने का दर्द, अकड़न और सूजन आपके रोजमर्रा के कामों में रुकावट बनने लगे, तब टोटल नी रिप्लेसमेंट की सलाह लेने पर विचार करें। जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल हर मरीज की व्यक्तिगत रूप से जांच करता है। आपके सर्जन पुष्टि करेंगे कि क्या सर्जरी आपके लिए जरूरी है।

विस्तार से

टोटल नी रिप्लेसमेंट में घुटने के तीनों हिस्से बदले जाते हैं। आमतौर पर यह कई हिस्सों में फैले गंभीर गठिया के लिए अनुशंसित है।

साक्ष्य बताते हैं कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसकी सलाह तब देते हैं जब गंभीर लक्षणों के कारण घुटने को हिलाना या इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है।

आम लक्षणों में आराम के समय दर्द, रात में दर्द, थोड़ी दूर चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने या कुर्सी से उठने में परेशानी शामिल हैं। बिना सर्जरी वाले विकल्प जैसे वजन घटाना, कसरत, दवाएं और इंजेक्शन पहले आजमाए जाते हैं।

मोटापा और घुटने की पुरानी चोट से गठिया का खतरा बढ़ता है। यह फैसला लक्षणों की गंभीरता, एक्स-रे में जोड़ के नुकसान और जीवन पर पड़ने वाले असर को तौलकर लिया जाता है।

घुटना बदलवाने वाले ज्यादातर लोगों का दर्द कम होता है, चलने-फिरने की क्षमता बढ़ती है और जीवन बेहतर होता है। लगभग बीस प्रतिशत मरीज असंतोष व्यक्त करते हैं, जो अक्सर अपेक्षाओं और सुधार की मात्रा से जुड़ा होता है।

एक आम धारणा

कई लोग दर्द के असहनीय होने तक इंतजार करते हैं, लेकिन समय पर जांच से बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है।

असल में क्या होता है

कुछ लोग उम्मीद करते हैं कि सर्जरी से सब कुछ पूरी तरह ठीक हो जाएगा; शोध बताते हैं कि लगभग बीस प्रतिशत मरीज असंतुष्ट रहते हैं, अक्सर इसलिए क्योंकि अपेक्षाओं पर पहले चर्चा नहीं हुई थी। फैसला आपके लक्षणों, एक्स-रे और जीवन पर पड़ने वाले असर पर निर्भर करता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

यदि अन्य उपचारों के बाद भी घुटने का दर्द आपकी स्वतंत्रता को सीमित कर रहा है, तो जांच के लिए समय तय करें। हाल के एक्स-रे और आजमाए गए उपचारों की सूची साथ लाएं। सर्जन आपके घुटने की जांच करेंगे, रिपोर्ट देखेंगे और चर्चा करेंगे कि क्या टोटल नी रिप्लेसमेंट उचित है।

घुटना बदलने के इलाज से मेरे चलने-फिरने, हलचल और आत्मनिर्भरता पर क्या असर पड़ेगा?

संक्षेप में

घुटना बदलने के बाद ज्यादातर लोग 1 से 2 दिनों में किसी सहारे के साथ चलने लगते हैं और 4 से 6 हफ्तों में डेस्क के काम पर लौट आते हैं। जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल में, मेडिकल टीम एक तय रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम के जरिए आपकी मदद करती है। लंबे समय में, ज्यादातर लोगों को दर्द में राहत और चलने-फिरने में सुधार मिलता है।

विस्तार से

तथ्य बताते हैं कि घुटना बदलने के बाद ज्यादातर लोगों का दैनिक जीवन बेहतर हो जाता है, दर्द कम होता है और घुटने को हिलाने-डुलाने की क्षमता बढ़ती है।

रिकवरी (ठीक होना) धीरे-धीरे होती है: आप वॉकर या बैसाखी से शुरुआत करते हैं, फिर छड़ी पर आते हैं, और ताकत लौटने पर बिना सहारे चलने लगते हैं। घुटने की हलचल और मांसपेशियों के नियंत्रण के लिए फिजियोथेरेपी बहुत जरूरी है।

कुछ मरीजों को लगातार अकड़न या घुटना पूरा मोड़ने में परेशानी रह सकती है, और बहुत कम लोगों को खड़े होने या चलने में कमजोरी महसूस होती है।

इंप्लांट आमतौर पर कम से कम 10 से 15 साल तक चलते हैं, इसलिए कम उम्र के मरीजों को आगे चलकर दोबारा ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है। कसरत के नियमों का पालन करने से आपको पूरा फायदा मिलता है।

एक आम धारणा

कुछ लोग तुरंत सामान्य चलने की उम्मीद करते हैं।

असल में क्या होता है

असल में, ताकत और संतुलन वापस पाने के लिए महीनों लगातार कसरत करनी पड़ती है। फिजियोथेरेपी छोड़ने से अक्सर अकड़न और लंगड़ाहट रह जाती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

फिजियोथेरेपी के निर्देशों का पालन करें, तय फॉलो-अप पर आएं और नया दर्द या सूजन दिखने पर तुरंत बताएं।

किन लक्षणों के दिखने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलना चाहिए?

संक्षेप में

जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल में, जब दूसरे उपचारों के बाद भी घुटने का दर्द, अकड़न और सूजन ठीक न हो, तब आपको विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। ये लक्षण बताते हैं कि जोड़ इतना घिस चुका है कि घुटना बदलने पर विचार किया जा सकता है। चलने में तकलीफ, सीढ़ियाँ चढ़ने में परेशानी या कुर्सी से उठने में दिक्कत होने पर लोग आमतौर पर ऑर्थोपेडिक डॉक्टर की राय लेते हैं।

विस्तार से

अन्य इलाजों के बाद भी घुटने का दर्द, अकड़न और सूजन न मिटना संकेत हो सकता है कि घुटना बदलना आपके लिए सही कदम है।

यदि आपको गंभीर लक्षण हैं जिससे घुटना हिलाना या काम में लेना कठिन हो गया है, तो डॉक्टर घुटना बदलने की सलाह दे सकते हैं।

शोध में पाया गया है कि अधिक वजन, मोटापा, महिला होना और घुटने की पुरानी चोट घुटने के दर्द की शुरुआत से जुड़े मुख्य कारण हैं। विशेष रूप से घुटने के दर्द से बचाव के लिए मोटापे को नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी है।

सर्जन आपसे पूछेंगे कि लक्षण कब से हैं, आपने क्या-क्या इलाज करवाए, और रोज़ के कामों पर इसका कितना असर पड़ रहा है।

एक आम धारणा

लोग अक्सर तब तक इंतज़ार करते हैं जब तक चलना पूरी तरह बंद न हो जाए।

असल में क्या होता है

समय पर जाँच से मांसपेशियों की ताकत बची रहती है और यदि सर्जरी की ज़रूरत पड़े, तो रिकवरी (ठीक होना) आसान हो जाती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अगर दर्द की वजह से चलने की दूरी कम हो गई हो, नींद टूटती हो, या आप दर्द की दवाओं पर निर्भर हो गए हों, तो ओपीडी अपॉइंटमेंट लें। पुराने एक्स-रे और दवाइयों की सूची साथ लाएँ।

सर्जन घुटने की जाँच करेंगे, खड़े होकर नए एक्स-रे करवाएँगे, और बताएँगे कि क्या बिना ऑपरेशन वाले इलाज से अब भी मदद मिल सकती है या सर्जरी की योजना बनाने का समय आ गया है।

जाँच के नतीजों से मेरे इलाज की योजना कैसे बदलेगी?

संक्षेप में

जयपुर के जयपुर हॉस्पिटल में जाँच के नतीजे सीधे आपकी सर्जरी (ऑपरेशन) की योजना और सुरक्षा के तरीकों को तय करते हैं। यदि खून की जाँच में कुछ गड़बड़ी आती है, तो स्थिति सामान्य होने तक ऑपरेशन टाला जा सकता है। दिल या फेफड़ों की रिपोर्ट के आधार पर एनेस्थीसिया (बेहोशी) का तरीका बदला जा सकता है या हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह ली जा सकती है। इमेजिंग रिपोर्ट से यह तय होता है कि पूरा घुटना बदलना (नी रिप्लेसमेंट) है या आधा घुटना, और क्या घुटने के सही अलाइनमेंट के लिए कंप्यूटर नेविगेशन या रोबोटिक तकनीक की जरूरत पड़ेगी।

विस्तार से

अगर खून की जाँच में खून की कमी या शुगर ज्यादा आती है, तो संक्रमण (इन्फेक्शन) और घाव भरने के जोखिम को कम करने के लिए सर्जन पहले इन्हें ठीक कर सकते हैं।

ईसीजी में बदलाव दिखने पर स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न) या एपिड्यूरल एनेस्थीसिया देने से पहले हृदय रोग विशेषज्ञ की मंजूरी की जरूरत हो सकती है।

अगर एक्स-रे में घुटने के केवल एक हिस्से में गठिया दिखता है, तो आधा घुटना बदला जा सकता है, जिससे ज्यादा प्राकृतिक हड्डी बच जाती है।

इमेजिंग में घुटने का ज्यादा टेढ़ापन या हड्डी का नुकसान दिखने पर, सर्जन इंप्लांट को सही जगह बैठाने के लिए कंप्यूटर-नेविगेटेड या रोबोटिक तकनीक से पूरा घुटना बदलने का विकल्प चुन सकते हैं।

अध्ययन (स्टडी) बताते हैं कि अलाइनमेंट की सटीकता से इंप्लांट लंबे समय तक चलता है। सभी विशेषज्ञ मिलकर पूरी रिपोर्ट देखने के बाद ही इलाज का तरीका तय करते हैं।

एक आम धारणा

मरीज अक्सर सोचते हैं कि इंप्लांट का चुनाव पहले से तय होता है।

असल में क्या होता है

असल में, इमेजिंग में यदि घुटने का केवल एक हिस्सा घिसा दिखता है, तो छोटा आधा घुटना बदला जा सकता है। या ज्यादा टेढ़ेपन में इंप्लांट को लंबे समय तक टिकाने के लिए नेविगेशन की जरूरत पड़ सकती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

भर्ती होने से पहले वाली विज़िट में आपसे तय योजना पर बात की जाएगी। सर्जन चुनी हुई तकनीक, अस्पताल में 3 से 5 रात रुकने की संभावना और रिकवरी (ठीक होना) के समय के बारे में समझाएंगे।

अनुमानित खर्च के साथ RGHS / CGHS / मा योजना या निजी टीपीए के तहत बीमा (इंश्योरेंस) के कैशलेस इलाज की मंजूरी की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

यदि घुटना बदलना (नी रिप्लेसमेंट) के बाद लक्षण बने रहें या बढ़ जाएँ तो मुझे क्या करना चाहिए?

संक्षेप में

यदि आपको पैर में धड़कता हुआ या ऐंठन वाला दर्द, तेज बुखार, घाव से पानी या मवाद आना, या लालिमा, छूने पर दर्द और सूजन दिखे जो ठीक नहीं हो रही है, तो तुरंत अपने कंसल्टेंट / सर्जन से संपर्क करें। आपके ऑपरेशन के बाद किसी भी आपात स्थिति के लिए जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल 24 घंटे इमरजेंसी सुविधा प्रदान करता है।

विस्तार से

घुटना बदलवाने वाले अधिकांश लोगों को कोई जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) नहीं होती है। यदि कोई समस्या होती भी है, तो वह आमतौर पर मामूली होती है और उसका इलाज किया जा सकता है।

सर्जरी (ऑपरेशन) के बाद खून के थक्के या DVT बनने की आशंका हो सकती है; यदि किसी थक्के से दर्द या सूजन होती है, तो खून पतला करने वाली दवाएं मदद कर सकती हैं।

फेफड़ों तक पहुँचने वाला थक्का गंभीर होता है और इसके लिए तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है। घाव का संक्रमण (इन्फेक्शन) आमतौर पर एंटीबायोटिक्स से ठीक हो जाता है, लेकिन गहरा संक्रमण होने पर आगे और सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।

सर्जरी के दौरान नस या रक्तवाहिका को नुकसान पहुँचना आम नहीं है और यह अक्सर ठीक हो जाता है या इसकी मरम्मत कर दी जाती है। लगातार दर्द, जकड़न या अस्थिरता की जाँच के लिए अपने सर्जन को सूचित किया जाना चाहिए।

एक आम धारणा

कुछ मरीज पिंडली की गर्मी और सूजन को सामान्य सूजन मानकर अनदेखा कर देते हैं।

असल में क्या होता है

यह खून का थक्का हो सकता है। अन्य लोग बुखार होने पर घर पर एंटीबायोटिक से ठीक होने की उम्मीद में कई दिन इंतज़ार करते हैं। समय पर जानकारी देने से बड़ी समस्या भी मामूली रह जाती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

इमरजेंसी नंबर संभाल कर रखें। यदि अचानक सांस फूलने लगे, सीने में दर्द हो, या पिंडली में तेज गर्मी और सूजन आ जाए, तो बिल्कुल भी इंतज़ार न करें। अपने सभी निर्धारित फॉलो-अप में जाएँ ताकि टीम समस्याओं को शुरुआत में ही पहचान सके। यदि कुछ भी ठीक न लगे, तो अस्पताल में फोन करें या इमरजेंसी विभाग में जाएँ।

घुटना बदलने से पहले मेरे लिए कौन से बिना सर्जरी वाले उपचार अभी भी सही हैं?

संक्षेप में

जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल में घुटना बदलने से पहले, बिना सर्जरी वाले उचित उपचारों में वजन नियंत्रण, फिजियोथेरेपी और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम, चलने के सहारे, पैरासिटामोल या NSAIDs जैसी दर्द की दवाएं, और जीवनशैली में बदलाव शामिल हैं। सर्जन यह देखेंगे कि आपने किन विकल्पों को आजमाया है और क्या कोई उपाय अभी भी आपकी स्थिति के अनुकूल है।

विस्तार से

अध्ययन में पाया गया कि खान-पान और व्यायाम दोनों ने मिलकर दर्द को कम किया और कार्यक्षमता में अकेले किसी एक की तुलना में अधिक सुधार किया।

खान-पान और व्यायाम वाले समूह में लगभग 10 किलोग्राम वजन कम होने से घुटने पर पड़ने वाला दबाव और सूजन पैदा करने वाले तत्व कम हुए।

अधिक वजन और मोटापा घुटने का दर्द शुरू होने के बड़े कारण हैं, जहाँ घुटने के दर्द के 24.6% नए मामले अधिक वजन या मोटापे से जुड़े होते हैं। घुटने की पुरानी चोट भी एक बड़ा जोखिम कारक है।

दवाओं की योजना आमतौर पर मजबूत विकल्पों पर विचार करने से पहले पैरासिटामोल या NSAIDs से शुरू होती है। ये उपाय कुछ मरीजों में सर्जरी की आवश्यकता को टाल सकते हैं या कम कर सकते हैं।

  • अधिक वजन और मोटापा घुटने का दर्द शुरू होने के बड़े कारण हैं, जहाँ घुटने के दर्द के 24.6% नए मामले अधिक वजन या मोटापे से जुड़े होते हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अपने कंसल्टेशन के दौरान सर्जन के साथ अपने वर्तमान इलाज पर चर्चा करें। यदि आपने तय फिजियोथेरेपी कार्यक्रम या वजन नियंत्रण योजना पूरी नहीं की है, तो सर्जरी से पहले इनकी सलाह दी जा सकती है।

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  • ओपीडी में ऑर्थोपेडिक सर्जन के साथ कंसल्टेशन
  • आपके स्कैन और रिपोर्ट देखे जाएंगे, ज़रूरत हो तो अस्पताल में ही टेस्ट (लैब, एक्स-रे और इमेजिंग)
  • आपके विकल्प सादे शब्दों में समझाए जाएंगे, जिसमें यह भी कि क्या आपको सर्जरी की ज़रूरत है भी या नहीं
  • फैसला लेने से पहले अनुमानित खर्च
  • RGHS, मा योजना, CGHS और पैनल में शामिल इंश्योरेंस और TPAs के तहत कैशलेस इलाज में मदद
  • आपके इलाज के बाद फॉलो-अप विज़िट
अपॉइंटमेंट का अनुरोध करें WhatsApp पर पूछें

पूरी जानकारी

घुटना बदलना (नी रिप्लेसमेंट): ज़रूरी जानकारी

घुटने का आर्थराइटिस क्या है और यह कैसे विकसित होता है

घुटने का आर्थराइटिस सबसे आम स्थिति है जिसके कारण लोगों को घुटना बदलना (नी रिप्लेसमेंट) सर्जरी (ऑपरेशन) की ज़रूरत पड़ती है। घुटने के जोड़ में चिकना कार्टिलेज होता है जो हड्डियों को एक-दूसरे पर फिसलने देता है। जब यह कार्टिलेज घिस जाता है, तो हड्डियाँ आपस में रगड़ खाती हैं। इससे दर्द, अकड़न और सूजन होती है।

इस स्थिति को ऑस्टियोआर्थराइटिस कहते हैं। इसकी शुरुआत बायोमैकेनिकल और इन्फ्लेमेटरी कारणों से होती है और अधिक वज़न इसे और बढ़ा देता है। समय के साथ जोड़ की जगह संकरी हो जाती है और हड्डी का आकार बदल सकता है। इससे चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना या कुर्सी से उठना जैसे रोज़मर्रा के काम मुश्किल हो जाते हैं।

घुटना बदलना (नी आर्थ्रोप्लास्टी) सर्जरी (ऑपरेशन) है जिसमें आपके घुटने के जोड़ के पूरे या कुछ हिस्से को बदला जाता है। यह एक आम और सुरक्षित प्रक्रिया है।

लक्षण और चेतावनी संकेत जिनमें उसी दिन देखभाल की ज़रूरत हो

उसी दिन देखभाल वाले चेतावनी संकेत
  • पैर पर वज़न न डाल पाना
  • घुटना बहुत गर्म और लाल होना
  • तेज़ बुख़ार
इमरजेंसी? 0141 255 1500 पर कॉल करें, 24×7

आम लक्षणों में घुटने का दर्द, अकड़न और सूजन शामिल हैं जो दूसरे इलाज आज़माने के बाद भी ठीक नहीं होते। आपको चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने या यहाँ तक कि बिस्तर से उठने में दिक्कत हो सकती है। दर्द आराम करते समय भी हो सकता है और नींद खराब कर सकता है। घुटना अस्थिर लग सकता है या लड़खड़ा सकता है।

अगर आप अचानक पैर पर वज़न नहीं डाल पाते, घुटना बहुत गर्म और लाल हो जाता है, या तेज़ बुख़ार आ जाता है, तो उसी दिन अपने डॉक्टर से संपर्क करें या इमरजेंसी विभाग जाएँ। ये जोड़ के संक्रमण (इन्फेक्शन) या खून के थक्के के संकेत हो सकते हैं जिनमें तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है।

कारण और किन्हें अधिक जोखिम है

घुटने के आर्थराइटिस के जोखिम कारक
  • लगभग दोगुनी संभावना अधिक वज़न की संभावना
  • लगभग तीन गुना संभावना पिछली चोट की संभावना
  • लगभग 25 प्रतिशत नया दर्द वज़न से जुड़ा
  • लगभग 5 प्रतिशत नया दर्द चोट से जुड़ा

मुख्य कारण घिसाव वाला ऑस्टियोआर्थराइटिस है। कुछ लोगों में फ्रैक्चर या घुटने में गंभीर लिगामेंट चोट के बाद पोस्ट-ट्रॉमैटिक आर्थराइटिस विकसित होता है। अधिक वज़न या मोटापा एक बड़ा जोखिम कारक है। अध्ययनों में, अधिक वज़न वाले लोगों में नए घुटने के दर्द की संभावना लगभग दोगुनी पाई गई, और मोटापे से यह संभावना और बढ़ गई।

पिछली घुटने की चोट से संभावना लगभग तीन गुना हो जाती है। महिलाओं में दर पुरुषों से अधिक होती है। उम्र भी एक कारक है; 50 के बाद प्रसार बढ़ता है। एक बड़े विश्लेषण में, नए घुटने के दर्द के लगभग 25 प्रतिशत मामले अधिक वज़न या मोटापे से जुड़े थे, और लगभग 5 प्रतिशत पिछली घुटने की चोट से। उसी डेटा में हाथ का ऑस्टियोआर्थराइटिस और धूम्रपान महत्वपूर्ण जोखिम कारक नहीं थे।

घुटने के आर्थराइटिस की पहचान: जाँच और टेस्ट

आपका ऑर्थोपेडिक सर्जन (कंसल्टेंट / सर्जन) आपके दर्द के बारे में पूछेंगे, आप कितना चल पाते हैं, और आपने अब तक क्या इलाज आज़माए हैं। वे घुटने की सूजन, कोमलता, हिलने की रेंज और स्थिरता की जाँच करेंगे। वज़न डालकर एक्स-रे मानक टेस्ट है।

यह जोड़ की जगह संकरी होना, हड्डी के उभार (बोन स्पर्स) और हड्डी के आकार में बदलाव दिखाता है। कुछ मामलों में कार्टिलेज और लिगामेंट को करीब से देखने के लिए एमआरआई करवाई जा सकती है। खून की जाँच कभी-कभी की जाती है ताकि रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसे इन्फ्लेमेटरी आर्थराइटिस को खारिज किया जा सके। पहचान आपके लक्षणों, जाँच और इमेजिंग नतीजों को मिलाकर की जाती है।

बिना सर्जरी के इलाज विकल्प और कब घुटना बदलना सुझाया जाता है

पहले आज़माने वाले बिना सर्जरी के उपाय

करें

  • अधिक वज़न हो तो वज़न कम करना
  • कम असर वाली एक्सरसाइज़ और फिजियोथेरेपी
  • दर्द की दवाएँ (पैरासिटामोल या NSAIDs)
  • घुटने के इंजेक्शन (कॉर्टिकोस्टेरॉइड या हायल्यूरोनिक एसिड)
  • चलने की छड़ी जैसे सहारे

सर्जरी (ऑपरेशन) से पहले डॉक्टर आमतौर पर बिना सर्जरी के उपाय सुझाते हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • अगर आप अधिक वज़न वाले हैं तो वज़न कम करना
  • कम असर वाली एक्सरसाइज़ और फिजियोथेरेपी से घुटने के आसपास की मांसपेशियों को मज़बूत करना
  • दर्द की दवाएँ जैसे पैरासिटामोल या NSAIDs
  • घुटने के इंजेक्शन (कॉर्टिकोस्टेरॉइड या हायल्यूरोनिक एसिड)

चलने की छड़ी जैसे सहारे जोड़ पर भार कम कर सकते हैं। एक ट्रायल में, संयुक्त डाइट और एक्सरसाइज़ प्रोग्राम ने अकेले किसी भी उपाय से बेहतर दर्द राहत और कार्यक्षमता दी। जब ये उपाय दर्द को काबू नहीं कर पाते या दैनिक गतिविधियाँ करने नहीं देते, तो सर्जरी (ऑपरेशन) पर विचार किया जाता है।

एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता घुटना बदलने की सलाह दे सकता है अगर आपके गंभीर लक्षण हैं जो घुटने को हिलाना या इस्तेमाल करना मुश्किल बनाते हैं। उन्नत लक्षणों और संरचनात्मक क्षति वाले व्यक्ति पूर्ण जोड़ प्रतिस्थापन के उम्मीदवार हैं। पूर्ण जोड़ प्रतिस्थापन ऐसे मामलों में प्रभावी रूप से दर्द दूर करता है। ज्यादातर लोग पाते हैं कि घुटना बदलने के बाद उनका दैनिक जीवन बेहतर हो जाता है।

घुटना बदलने की सर्जरी (ऑपरेशन) की तैयारी

अस्पताल में रहने के लिए क्या साथ लाएँ

करें

  • आरामदायक ढीले कपड़े
  • सपाट नॉन-स्लिप जूते
  • पहले से इस्तेमाल किया जाने वाला चलने का सहारा
  • मूल पैकेट में नियमित दवाएँ
  • बीमा या योजना के कार्ड

आपके ऑपरेशन से पहले, आप जयपुर हॉस्पिटल में प्री-एडमिशन जाँच के लिए आएँगे। टीम खून की जाँच, चेस्ट एक्स-रे और ईसीजी करेगी ताकि एनेस्थीसिया (बेहोशी) के लिए आपकी फिटनेस पक्की हो सके।

आपका सर्जन (कंसल्टेंट / सर्जन) आपके द्वारा ली जा रही हर दवा और सप्लीमेंट के बारे में पूछेंगे, जिसमें बिना पर्ची की दर्द की दवाएँ और हर्बल उत्पाद शामिल हैं। कुछ दवाएँ, खासकर खून पतला करने वाली, सर्जरी (ऑपरेशन) से कई दिन पहले बंद करनी पड़ सकती हैं। आपको बताया जाएगा कि कब खाना-पीना बंद करना है, आमतौर पर प्रक्रिया से 12 घंटे पहले।

साथ लाएँ:

  • आरामदायक ढीले कपड़े
  • सपाट नॉन-स्लिप जूते
  • कोई चलने का सहारा जो आप पहले से इस्तेमाल करते हैं
  • अपनी नियमित दवाएँ उनके मूल पैकेट में
  • अपने बीमा या योजना के कार्ड

एक अटेंडेंट को अस्पताल में रहने के दौरान आपके साथ रहने की योजना बनानी चाहिए।

घुटना बदलने की सर्जरी कैसे की जाती है

सर्जरी वाले दिन आपको मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर ले जाया जाएगा। स्पाइनल या एपिड्यूरल एनेस्थीसिया (बेहोशी) दी जाती है, जिससे कमर से नीचे का हिस्सा सुन्न हो जाता है और आप जागते रहते हैं या हल्की बेहोशी में रहते हैं। ऑपरेशन में आमतौर पर 1.5 से 2.5 घंटे लगते हैं।

आपका सर्जन खराब कार्टिलेज और हड्डी को निकालकर धातु और प्लास्टिक से बना कृत्रिम जोड़ लगाएगा। कई तकनीक के विकल्प हैं। टोटल नी रिप्लेसमेंट (पूर्ण घुटना बदलना) में घुटने के तीनों हिस्से बदले जाते हैं। पार्शियल नी रिप्लेसमेंट (आंशिक घुटना बदलना) तभी उपयुक्त है जब गठिया केवल एक हिस्से में हो, जिससे स्वस्थ हड्डी और लिगामेंट बचे रहते हैं।

कंप्यूटर-नेविगेटेड टोटल नी रिप्लेसमेंट में ट्रैकिंग सेंसर से इम्प्लांट की एलाइनमेंट (संरेखण) सटीक की जाती है। रोबोटिक-असिस्टेड टोटल नी रिप्लेसमेंट में रोबोटिक आर्म से हड्डी की सटीक कटिंग गाइड की जाती है। आपका सर्जन आपके घुटने की बनावट और नुकसान की हद देखकर बताएगा कि कौन सा विकल्प सही है।

इम्प्लांट लगाने के बाद घाव बंद करके ड्रेसिंग की जाती है। फिर आपको रिकवरी रूम में ले जाया जाता है, जहां टीम कुछ घंटे निगरानी करती है जब तक बेहोशी का असर खत्म न हो जाए।

घुटना बदलने के जोखिम और संभावित जटिलताएं

घुटना बदलवाने वाले ज्यादातर लोगों को कोई जटिलता नहीं होती। अगर जटिलता होती भी है, तो वह आमतौर पर मामूली होती है और इलाज से ठीक हो जाती है।

सर्जरी के बाद दर्द होना सामान्य है, खासकर पहले कुछ हफ्तों में, और इसे दर्द की दवाओं, एनएसएआईडी (अगर आपके लिए सुरक्षित हों) और पैरासिटामोल के मेल से काबू किया जाता है। खून के थक्के या डीप वेन थ्रोम्बोसिस (गहरी नस में थक्का) बन सकते हैं, क्योंकि सर्जरी के बाद खून का बहाव और थक्का जमना बदल जाता है।

यह अक्सर गंभीर नहीं होता, लेकिन अगर थक्के से दर्द या सूजन हो, तो खून पतला करने की दवाएं दी जाती हैं। थक्का अगर फेफड़ों तक पहुंच जाए (पल्मोनरी एम्बोलिज्म), तो गंभीर जटिलता हो सकती है।

घाव में संक्रमण की थोड़ी आशंका रहती है; यह आमतौर पर एंटीबायोटिक्स से ठीक हो जाता है, लेकिन अगर संक्रमण जोड़ के अंदर गहरा फैल जाए, तो और सर्जरी करनी पड़ सकती है।

सर्जरी के दौरान घुटने के आसपास की खून की नस, नस या लिगामेंट को नुकसान पहुंच सकता है, हालांकि यह आम नहीं है और इसकी मरम्मत हो सकती है या यह बाद में ठीक हो जाता है। कुछ लोगों को लगातार अकड़न, घुटना मोड़ने में दिक्कत या लगातार दर्द रह सकता है।

समय के साथ इम्प्लांट घिस या ढीला पड़ सकता है, और रिवीजन रिप्लेसमेंट (दोबारा बदलना) जरूरी हो सकता है, लेकिन यह आम नहीं है। जटिलताओं का जोखिम आपकी उम्र और सेहत पर निर्भर करता है। खून के थक्कों का जोखिम कम करने के लिए डॉक्टर कंप्रेशन स्टॉकिंग्स या खून पतला करने की दवाएं सुझा सकते हैं।

घुटना बदलने के बाद रिकवरी और देखभाल

घुटना बदलने के बाद रिकवरी के पड़ाव
  1. अस्पताल में रहना 3 से 5 रात
  2. चलना शुरू करना 1 से 2 दिन में फ्रेम या बैसाखी के सहारे
  3. डेस्क का काम 4 से 6 हफ्ते
  4. भारी काम 3 महीने या ज्यादा
  5. पूरी रिकवरी एक साल तक

आपको आमतौर पर 3 से 5 रात अस्पताल में रहना पड़ता है। ज्यादातर लोग 1 से 2 दिन में फ्रेम या बैसाखी के सहारे चलना शुरू कर देते हैं। फिजियोथेरेपी सर्जरी के अगले दिन शुरू होती है और घर पर जारी रहती है। आपको मूवमेंट और ताकत वापस लाने के लिए कस्टमाइज्ड एक्सरसाइज प्लान दिया जाएगा।

दर्द और सूजन को नियमित दवा, आइस पैक और पैर ऊंचा रखकर काबू किया जाता है। घाव को साफ और सूखा रखें; टांके या क्लिप लगभग 10 से 14 दिन बाद निकाले जाते हैं। डेस्क का काम अक्सर 4 से 6 हफ्ते में शुरू कर सकते हैं, जबकि भारी शारीरिक काम में 3 महीने या ज्यादा लग सकते हैं।

गाड़ी चलाना आमतौर पर तब अनुमति दी जाती है जब आप घुटना इतना मोड़ सकें कि कार सुरक्षित चला सकें और तेज दर्द की दवाएं न ले रहे हों। पूरी रिकवरी में एक साल तक लग सकता है, लेकिन आप धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियों पर लौटते हैं।

अगर घाव में लाली, गर्मी या डिस्चार्ज बढ़े, बुखार 38°C से ऊपर जाए, दवा से न घटने वाला तेज दर्द हो, पिंडली में सूजन या दर्द हो, सांस फूले या सीने में दर्द हो, तो तुरंत अस्पताल या अपने सर्जन से संपर्क करें।

घुटना बदलने की सर्जरी के नतीजे

घुटना बदलना एक सुरक्षित और असरदार प्रक्रिया है जो लंबे समय के दर्द से राहत देती है और आपको चलने-फिरने लायक बनाती है। अध्ययनों में पाया गया कि ज्यादातर लोगों को दर्द कम होता है, घुटना मोड़ने और इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ती है, और जीवन की गुणवत्ता सुधरती है।

अगर आप उन गतिविधियों से बच रहे थे जो आपको पसंद थीं, तो घुटना ठीक होने पर आप उन्हें फिर से कर पाएंगे। टोटल जॉइंट रिप्लेसमेंट दर्द को असरदार ढंग से दूर करता है।

इम्प्लांट टिकाऊ होते हैं: घुटना बदलवाने वाले लगभग हर व्यक्ति का घुटना कम से कम 10 से 15 साल तक बेहतर काम करता है, और ज्यादातर घुटना बदलने लगभग 25 साल चलते हैं। जीवन में बाद में कभी-कभी रिवीजन सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन यह आम नहीं है।

जयपुर में घुटना बदलने का खर्च और बीमा

भारत में घुटना बदलने के खर्च की रेंज
  • ₹1,80,000 से ₹3,50,000 एक घुटना बदलना
  • ₹4,00,000 से ₹7,00,000 दोनों घुटने बदलना

भारत में एक घुटना बदलने का आम खर्च ₹1,80,000 से ₹3,50,000 के बीच है।

अंतिम खर्च इस पर निर्भर करता है:

  • चुने गए इम्प्लांट का प्रकार
  • टोटल या पार्शियल रिप्लेसमेंट किया जा रहा है
  • कंप्यूटर नेविगेशन या रोबोटिक सहायता का उपयोग
  • अस्पताल में रहने की अवधि
  • कोई अन्य बीमारी जिसका प्रबंधन जरूरी हो

दोनों घुटने बदलने (बाइलेटरल नी रिप्लेसमेंट) का खर्च आमतौर पर ₹4,00,000 से ₹7,00,000 के बीच होता है।

जयपुर हॉस्पिटल इनके पैनल में है:

  • RGHS
  • मा योजना
  • CGHS
  • निजी बीमा कंपनियों और TPA का पैनल

अगर आप इनमें से किसी योजना के तहत कवर हैं, तो अस्पताल प्री-ऑथराइजेशन (पूर्व-अनुमति) की प्रक्रिया में आपकी मदद करेगा। अस्पताल में ही फार्मेसी और डायग्नोस्टिक लैब होने से दवाएं और जांचें मौके पर उपलब्ध हैं। व्यक्तिगत अनुमानित खर्च के लिए कृपया अस्पताल के एडमिशन डेस्क से संपर्क करें।

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यह WhatsApp खोलेगा और आपका अनुरोध पहले से लिखा होगा। हमारी टीम डॉक्टर, तारीख और समय पक्का करके जवाब देगी — तब तक यह पक्की बुकिंग नहीं है। बात करना चाहते हैं? कॉल करें +91 74140 01001.

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