इमरजेंसी 24×7इमरजेंसी · 0141 255 1500 S16A-17, Mahaveer Nagar, Tonk Road

नाक, कान, गला (ईएनटी) · जयपुर हॉस्पिटल

जयपुर में एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन (नाक की एलर्जी का इलाज)

लगातार छींक और बंद नाक? साफ़ डायग्नोसिस और चरणबद्ध इलाज योजना पाएँ।

  • 1991 से जयपुर की सेवा में (35 साल)
  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त
  • 24×7 इमरजेंसी और आईसीयू
  • कैशलेस: RGHS, मा योजना, CGHS + 22 बीमा कंपनियाँ
टिशू में छींकता एक युवक, साथ में नाक में परागकणों का नज़दीकी चित्र
इलाज की अवधि
लगातार (इम्यूनोथेरेपी के लिए 3 से 5 साल)
एनेस्थीसिया (बेहोशी)
ज़रूरत नहीं
रिकवरी (ठीक होना)
2 से 4 हफ्ते में लक्षणों पर काबू
कीमत
₹2,000 से ₹15,000 प्रति साल (इम्यूनोथेरेपी पूरा कोर्स ₹50,000 से ₹1,00,000)भारत में आम रेंज; हमसे अनुमानित खर्च पूछें

नाक की एलर्जी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में खलल डालती है

छींक, जकड़न और खुजली वाली आँखें जो ठीक नहीं होतीं

भारत में 20% से 30% लोगों को एलर्जिक राइनाइटिस होता है और यह अक्सर अस्थमा से जुड़ा होता है। लक्षण नींद, काम और पढ़ाई में बाधा डालते हैं, और कई मरीज़ थकान और ध्यान न लगा पाने की शिकायत करते हैं।

  • नींद और ध्यान पर असर

    रात में नाक बंद होने से नींद ख़राब होती है, दिन में थकान रहती है और काम या स्कूल में ध्यान लगाने में दिक्कत होती है।

  • दवाएँ सिर्फ़ लक्षण दबाती हैं

    स्प्रे और गोलियाँ कुछ समय मदद करती हैं लेकिन एलर्जी की जड़ नहीं बदलतीं; दवा बंद करते ही लक्षण लौट आते हैं।

  • ट्रिगर से बचना मुश्किल

    जयपुर में धूल के कण, पराग और प्रदूषण की वजह से ज्यादातर परिवारों के लिए पूरी तरह बचाव लगभग नामुमकिन है।

  • बाद में अस्थमा का खतरा

    भारत में एलर्जिक राइनाइटिस के लगभग 15% मरीज़ों को आगे चलकर अस्थमा हो जाता है अगर एलर्जी काबू न की जाए।

एलर्जिक राइनाइटिस IgE की वजह से होने वाली नाक की श्लेष्मा झिल्ली की सूजन है जो साँस से जाने वाले एलर्जन से शुरू होती है।

जयपुर हॉस्पिटल क्यों

आपको फ़िक्र है कि लगातार छींक और बंद नाक आपको कभी ठीक से सोने या काम पर ध्यान देने नहीं देगी, और आप हमेशा स्प्रे पर निर्भर नहीं रहना चाहते।

  • 1991 से एनएबीएच मान्यता प्राप्त मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल
  • 24x7 इमरजेंसी, इन-हाउस लैब, इमेजिंग और फार्मेसी
  • RGHS, मा योजना, CGHS और प्राइवेट TPA के तहत कैशलेस इलाज

आपके इलाज का प्लान

हमारे साथ आपके पहले कदम

  1. 1 कॉल करें या ओपीडी में आकर ईएनटी कंसल्टेशन लें
  2. 2 इन-हाउस एलर्जी टेस्ट और नाक की जाँच करवाएँ
  3. 3 व्यक्तिगत मेडिकल प्लान या इम्यूनोथेरेपी शेड्यूल शुरू करें
  4. 4 इलाज एडजस्ट करने और प्रोग्रेस देखने के लिए नियमित फॉलो-अप पर आएँ

इलाज की योजना कैसे बनती है

आपका ईएनटी सर्जन विस्तार से हिस्ट्री लेता है, नाक की जाँच करता है और ट्रिगर पहचानने के लिए स्किन प्रिक या खून की जाँच करवा सकता है। फिर आपके लक्षणों के पैटर्न और गंभीरता के हिसाब से इलाज तय किया जाता है।

  • इंट्रानेसल कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स

    नाक की सूजन घटाने के लिए रोज़ाना स्प्रे; लगातार या मध्यम-से-गंभीर लक्षणों के लिए पहली पसंद।

  • एंटीहिस्टामाइन्स

    छींक और बहती नाक के लिए खाने वाली या नाक की स्प्रे दवा; सेकेंड-जेनरेशन टाइप से नींद कम आती है।

  • सबलिंगुअल इम्यूनोथेरेपी (SLIT)

    जीभ के नीचे एलर्जन की बूँदें घर पर लेकर लंबे समय तक डिसेंसिटाइज़ेशन; चुनिंदा मरीज़ों के लिए उपयुक्त।

  • सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी (SCIT)

    क्लिनिक में दी जाने वाली एलर्जी के इंजेक्शन 3 से 5 साल तक गंभीर या मल्टी-एलर्जन केस के लिए; हर डोज़ के बाद निगरानी ज़रूरी।

मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं

  • 1991 35 साल से जयपुर की सेवा में
  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल
  • 2 नाक, कान, गला (ईएनटी) कंसल्टेंट
  • 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू और एम्बुलेंस
  • 25 कैशलेस योजनाएँ और बीमा कंपनियाँ

शोध इस इलाज के बारे में क्या बताता है

  • 3 से 5 साल

    इम्यूनोथेरेपी कोर्स आमतौर पर तीन से पांच साल चलते हैं ताकि दवा बंद करने के बाद भी फ़ायदा बना रहे।

  • लक्षणों और/या दवा के स्कोर में उल्लेखनीय कमी

    लोकल नेसल इम्यूनोथेरेपी के ज्यादातर कंट्रोल्ड ट्रायल में लक्षणों में सार्थक राहत और दवा का इस्तेमाल कम होना दर्ज हुआ।

  • भारत में 20%–30% प्रसार

    जनसंख्या अध्ययनों का अनुमान है कि भारत में दो से तीन लोग प्रति दस को एलर्जिक राइनाइटिस होता है।

अगर इलाज न कराया जाए

बिना इलाज वाली एलर्जिक राइनाइटिस नींद ख़राब कर सकती है, काम और पढ़ाई की उत्पादकता घटा सकती है, और समय के साथ अस्थमा, साइनसाइटिस और कान के संक्रमण से जुड़ी होती है।

इलाज के बाद की ज़िंदगी

ज्यादातर लोगों को लगता है कि उनके नाक के लक्षण काबू में आ जाते हैं, नींद सुधरती है और रोज़ की दवाओं की ज़रूरत कम हो जाती है।

  • कम ख़राब दिन

    छींक और जकड़न रोज़ाना के बजाय कभी-कभार होती हैं, इसलिए आप बेफ़िक्र होकर गतिविधियाँ प्लान कर सकते हैं।

  • बेहतर नींद और ऊर्जा

    रात में नाक से साँस लेना सुधरता है, जिससे अगले दिन थकान कम होती है और ध्यान बेहतर लगता है।

  • कम दवा की ज़रूरत

    इम्यूनोथेरेपी से कई मरीज़ बिल्ड-अप फेज़ के बाद रोज़ के स्प्रे और गोलियाँ कम या बंद कर पाते हैं।

  • कम अस्थमा का खतरा

    नाक की एलर्जी को जल्दी काबू करने से बाद में एलर्जिक अस्थमा होने की संभावना कम हो सकती है।

हमारी टीम से मिलें

आपके नाक, कान, गला (ईएनटी) डॉक्टर

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन (नाक की एलर्जी का इलाज) के बारे में मरीज़ों के सवाल

एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन (नाक की एलर्जी का इलाज) क्या है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन (नाक की एलर्जी का इलाज) का मतलब है दवाओं, एलर्जन से बचाव और इम्यूनोथेरेपी से नाक की एलर्जी के लक्षणों को काबू करना। यह एक आउटपेशेंट प्लान है जिसका मकसद छींक, बहती नाक, बंद नाक और खुजली को कम करना है। इलाज लगातार चलता है, और इम्यूनोथेरेपी तीन से पांच साल तक चलती है।

विस्तार से

एलर्जिक राइनाइटिस नाक की म्यूकोसा की एक IgE-मध्यस्थ इन्फ्लेमेटरी बीमारी है। ARIA गाइडलाइंस इसे इंटरमिटेंट या पर्सिस्टेंट और माइल्ड या मॉडरेट-टू-सीवियर में बांटती हैं। पर्सिस्टेंट बीमारी के लिए फर्स्ट-लाइन फार्माकोथेरेपी इंट्रानेसल कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स है। सेकंड-जेनरेशन एंटीहिस्टामाइन्स छींक और खुजली में मदद करते हैं।

जब मोनोथेरेपी काफी न हो तो कॉम्बिनेशन स्प्रे इस्तेमाल हो सकते हैं।

एलर्जन इम्यूनोथेरेपी (सबलिंगुअल या सबक्यूटेनियस) एकमात्र डिजीज-मोडिफाइंग विकल्प है और यह तब दी जाती है जब दवाओं और परहेज के बावजूद लक्षण काबू में न हों, या मरीज लंबे समय की दवा कम करना चाहे।

एनवायरनमेंटल कंट्रोल पहचाने गए एलर्जन जैसे डस्ट माइट्स, पोलेन, मोल्ड या पेट डैंडर को टारगेट करते हैं। सेलाइन इरिगेशन सभी मरीजों के लिए सुझाई जाती है।

सर्जरी एलर्जी का इलाज नहीं है, लेकिन टरबाइनेट हाइपरट्रॉफी या पॉलिप्स जैसी स्ट्रक्चरल दिक्कतों के लिए सोची जा सकती है।

एक आम धारणा

बहुत लोग सोचते हैं कि एक स्प्रे या टैबलेट काफी है।

असल में क्या होता है

पर्सिस्टेंट या मॉडरेट-टू-सीवियर बीमारी में मोनोथेरेपी अक्सर नाकाम होती है और लंबे समय तक काबू के लिए कॉम्बिनेशन थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी की जरूरत होती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आपका सर्जन लक्षणों के पैटर्न, गंभीरता और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर को देखेगा। ट्रिगर्स पहचानने के लिए स्किन प्रिक टेस्टिंग या स्पेसिफिक IgE के लिए खून की जाँच हो सकती है।

स्प्रे, टैबलेट, परहेज के उपाय और, अगर सही हो तो इम्यूनोथेरेपी को मिलाकर एक पर्सनलाइज्ड प्लान बताया जाएगा। इम्यूनोथेरेपी में तीन से पांच साल की प्रतिबद्धता और नियमित फॉलो-अप चाहिए। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करके अपनी जांच शुरू करें।

इस समस्या के लिए मुझे किस स्पेशलिस्ट को दिखाना चाहिए?

संक्षेप में

आपको जयपुर हॉस्पिटल में ENT (ओटोलैरिंजोलॉजी) स्पेशलिस्ट या एलर्जिस्ट को दिखाना चाहिए। हमारा ओटोलैरिंजोलॉजी डिपार्टमेंट नाक के लक्षणों की जांच करता है, एंडोस्कोपिक एग्जामिनेशन करता है और एलर्जी टेस्टिंग कोऑर्डिनेट करता है। इम्यूनोथेरेपी के लिए, एलर्जन इम्यूनोथेरेपी में ट्रेंड क्लिनिशियन इलाज की निगरानी करेगा।

विस्तार से

गाइडलाइंस सीवियर या रिफ्रैक्टरी बीमारी, क्लिनिकली रेलेवेंट एलर्जन को लेकर अनिश्चितता, एलर्जन इम्यूनोथेरेपी पर विचार, या क्वालिटी ऑफ लाइफ में बड़ी गिरावट के लिए एलर्जिस्ट या इम्यूनोलॉजिस्ट को रेफर करने की सलाह देती हैं।

स्ट्रक्चरल असामान्यताओं, क्रोनिक राइनोसाइनसाइटिस, नेजल पॉलिप्स, बार-बार एपिस्टैक्सिस या एंडोस्कोपिक जांच या सर्जिकल मैनेजमेंट वाली दूसरी स्थितियों के शक पर ओटोलैरिंजोलॉजिस्ट को रेफर करना सही है।

जयपुर हॉस्पिटल में ENT टीम एलर्जी-ट्रेंड क्लिनिशियंस के साथ मिलकर स्किन प्रिक टेस्टिंग, इंट्रानेसल कॉर्टिकोस्टेरॉइड और एंटीहिस्टामाइन प्रिस्क्रिप्शन, और सबलिंगुअल व सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी समेत पूरी देखभाल देती है।

स्पेशलिस्ट का चुनाव इस पर निर्भर करता है कि प्राइमरी जरूरत मेडिकल मैनेजमेंट, एलर्जी टेस्टिंग और इम्यूनोथेरेपी की है, या टरबाइनेट हाइपरट्रॉफी या सेप्टल डेविएशन जैसे सर्जिकल मुद्दों की जांच की।

एक आम धारणा

कुछ मरीज सिर्फ जनरल फिजिशियन के पास जाते हैं या सालों सेल्फ-मेडिकेशन करते हैं।

असल में क्या होता है

ENT नाक की स्ट्रक्चर जांच सकता है, पॉलिप्स या साइनसाइटिस को रूल आउट कर सकता है, और एक ही विजिट में सही एलर्जी टेस्टिंग करा सकता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

हमारे OPD में ENT कंसल्टेशन से शुरू करें। डॉक्टर विस्तृत हिस्ट्री लेंगे, जरूरत पड़ने पर एंडोस्कोप से नाक देखेंगे, और तय करेंगे कि एलर्जी टेस्टिंग या साथ में अस्थमा के लिए पल्मोनोलॉजी ओपिनियन चाहिए या नहीं।

ज्यादातर मरीज पूरी तरह ENT और एलर्जी सर्विस में ही मैनेज होते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करके सही स्पेशलिस्ट को दिखाएं।

मेरी स्थिति के लिए कौन से इलाज के विकल्प मौजूद हैं?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में इलाज के विकल्पों में इंट्रानैज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड (लगातार लक्षणों के लिए फर्स्ट-लाइन), ओरल या इंट्रानैज़ल एंटीहिस्टामिन (छींक और बहती नाक के लिए), कॉम्बिनेशन नेज़ल स्प्रे, सेलाइन इरिगेशन, ल्यूकोट्रिएन रिसेप्टर एंटागोनिस्ट (मुख्य रूप से अगर अस्थमा साथ हो), और एलर्जन इम्यूनोथेरेपी (सबलिंगुअल ड्रॉप या सबक्यूटेनियस इंजेक्शन) लॉन्ग-टर्म डिसेंसिटाइज़ेशन के लिए शामिल हैं। पहचाने गए एलर्जन से बचाव हमेशा बताया जाता है।

विस्तार से

ARIA और इंटरनेशनल गाइडलाइन स्टेपवाइज़ अप्रोच की सलाह देती हैं। इंट्रानैज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड लगातार या मॉडरेट-टू-सीवियर बीमारी के लिए सबसे असरदार मोनोथेरेपी हैं। सेकेंड-जेनरेशन एंटीहिस्टामिन हल्के या रुक-रुक कर आने वाले लक्षणों के लिए पसंद किए जाते हैं।

फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन स्प्रे (कॉर्टिकोस्टेरॉइड + एंटीहिस्टामिन) मॉडरेट-टू-सीवियर केस में बेहतर कंट्रोल देते हैं। सेलाइन इरिगेशन सब मरीज़ों के लिए सुझाई जाती है। शॉर्ट-टर्म डिकॉन्जेस्टेंट सीवियर कंजेशन के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं लेकिन कुछ दिन से ज़्यादा नहीं, वरना रिबाउंड हो सकता है।

एलर्जन इम्यूनोथेरेपी (SLIT या SCIT) अकेली डिजीज़-मॉडिफाइंग ट्रीटमेंट है और तब इन्डिकेटेड है जब फार्माकोथेरेपी और अवॉइडेंस के बावजूद लक्षण काबू में न हों, या मरीज़ लॉन्ग-टर्म दवा घटाना चाहे।

SLIT पहली सुपरवाइज़्ड डोज़ के बाद घर पर रोज़ जीभ के नीचे ड्रॉप के रूप में दी जाती है। SCIT में हफ्ते फिर महीने के इंजेक्शन क्लिनिकल सेटिंग में तीन से पांच साल तक लगते हैं।

दोनों रास्ते पोलेन, डस्ट माइट और कुछ एनिमल एलर्जन के लिए असरदार हैं। सर्जरी जैसे इन्फीरियर टर्बाइनेट रिडक्शन सिर्फ रिफ्रैक्टरी नेज़ल ऑब्स्ट्रक्शन के लिए है जो स्ट्रक्चरल एनलार्जमेंट की वजह से हो और मेडिकल थेरेपी फेल हो चुकी हो।

एक आम धारणा

लोग अक्सर सिर्फ एंटीहिस्टामिन पर भरोसा करते हैं।

असल में क्या होता है

लगातार लक्षणों के लिए नेज़ल स्टेरॉइड ज़्यादा असरदार हैं। इम्यूनोथेरेपी अकेला इलाज है जो बीमारी का कोर्स बदल सकता है, लेकिन इसमें तीन से पांच साल का कमिटमेंट लगता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आपका डॉक्टर आपके लक्षणों का पैटर्न (छींक-बहने वाला या बंद नाक वाला), सीवियरिटी और ट्रिगर देख कर एक टेलर्ड कॉम्बिनेशन बताएंगे। इम्यूनोथेरेपी में तीन से पांच साल का कमिटमेंट और रेगुलर फॉलो-अप चाहिए।

दवाओं का खर्च ₹2,000 से ₹15,000 प्रति साल तक हो सकता है; पूरा इम्यूनोथेरेपी कोर्स आमतौर पर ₹50,000 से ₹1,00,000 का पड़ता है। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि आपका पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट प्लान मिल सके।

एलर्जिक राइनाइटिस (नाक की एलर्जी) के लक्षण घर पर सुरक्षित तरीके से कैसे काबू कर सकता हूँ?

संक्षेप में

आप सेलाइन नेज़ल रिंस (नमक के पानी से नाक धोना) इस्तेमाल कर सकते हैं, पराग (पोलेन) ज़्यादा होने पर खिड़कियाँ बंद रखें, और एलर्जन-प्रूफ़ बेडिंग कवर लगाएँ। जयपुर हॉस्पिटल इन उपायों को लिखित इलाज के साथ अपनाने की सलाह देता है। बेडिंग को गर्म पानी से नियमित धोना और घर के अंदर नमी कम रखना डस्ट माइट (धूल के कण) का संपर्क घटाता है।

विस्तार से

एनवायरमेंटल कंट्रोल के उपाय उन एलर्जन को निशाना बनाएँ जो आपकी हिस्ट्री और एलर्जी टेस्ट से पहचाने गए हैं।

मौसमी एलर्जन के लिए, हाई पोलेन काउंट के दौरान बाहर कम निकलना, खिड़कियाँ बंद रखना, एसी चलाना, और बाहर से आने पर नहाना मदद कर सकता है।

इनडोर एलर्जन के लिए, एक साथ कई कदम बेहतर काम करते हैं: गद्दे और तकिये के एलर्जन-प्रूफ़ कवर, बेडिंग को गर्म पानी से धोना, डस्ट माइट के लिए घर की नमी कम रखना; फफूँद (मोल्ड) के लिए नमी कंट्रोल; और पालतू जानवरों की रूसी (डैंडर) के लिए उनसे दूर रहना या HEPA फ़िल्टर।

तंबाकू का धुआँ, तेज़ गंध, और तापमान में तेज़ बदलाव से बचना भी मदद करता है। आइसोटोनिक इंट्रानेज़ल सेलाइन हर एलर्जिक राइनाइटिस के मरीज़ के लिए सुझाया जाता है।

एलर्जन के संपर्क में आने से पहले और दौरान लिखित दवा (फार्माकोथेरेपी) नियमित लेने से लक्षण बढ़ने से रुक सकते हैं।

एक आम धारणा

कई लोग एक ही उपाय आजमाते हैं, जैसे सिर्फ़ एयर प्यूरीफ़ायर, और पाते हैं कि वह काम नहीं करता।

असल में क्या होता है

सबूत बताते हैं कि डस्ट माइट के लिए मिला-जुला तरीका बेहतर काम करता है, और जानवर की एलर्जी में उसे घर से हटाना सबसे असरदार कदम है। बिना ट्रिगर जाने इधर-उधर के परहेज़ से मेहनत बेकार जाती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अपने पहचाने गए ट्रिगर से मेल खाने वाले उपायों से शुरू करें। अगर सेलाइन रिंस मदद करे तो रोज़ करें। लक्षणों की डायरी रखें ताकि पता चले क्या नाक बिगाड़ता है। फॉलो-अप पर डॉक्टर से इन कदमों की समीक्षा करें। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करके अपने लिए पर्सनलाइज़्ड होम-मैनेजमेंट प्लान लें।

"हे फीवर" शब्द का एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन से क्या संबंध है?

संक्षेप में

हे फीवर, सीज़नल एलर्जिक राइनाइटिस का आम नाम है जो पराग से होता है। जयपुर हॉस्पिटल में हमारी ENT टीम हे फीवर का इलाज उसी एविडेंस-बेस्ड तरीके से करती है जिससे सारे एलर्जिक राइनाइटिस का। मैनेजमेंट का फोकस आपके खास ट्रिगर पहचानना, दवा से लक्षण कंट्रोल करना, और ज़रूरत पड़ने पर इम्यूनोथेरेपी देना है।

विस्तार से

हे फीवर शब्द उस एलर्जिक राइनाइटिस के लिए है जो पराग के मौसम में होता है। सबूत दिखाते हैं कि इंट्रानेसल कॉर्टिकोस्टेरॉइड लगातार या मीडियम-टू-सीवियर लक्षणों के लिए सबसे असरदार फर्स्ट-लाइन इलाज हैं। सेकंड-जनरेशन एंटीहिस्टामाइन छींक और खुजली में मदद करते हैं।

जिन मरीज़ों के लक्षण फार्माकोथेरेपी और एलर्जन अवॉइडेंस के बावजूद कंट्रोल में नहीं आते, उनके लिए एलर्जन इम्यूनोथेरेपी (सबलिंगुअल या सबक्यूटेनियस) बीमारी का लॉन्ग-टर्म कोर्स बदल सकती है। एनवायर्नमेंटल कंट्रोल जैसे हाई पोलन काउंट में खिड़कियां बंद रखना और बाहर से आने पर नहाना एक्सपोज़र घटाता है।

एक आम धारणा

कई लोग समझते हैं कि हे फीवर में बस एंटीहिस्टामाइन चाहिए।

असल में क्या होता है

लेकिन गाइडलाइन कहती हैं कि लगातार लक्षणों के लिए इंट्रानेसल कॉर्टिकोस्टेरॉइड ज़्यादा असरदार हैं, और इम्यूनोथेरेपी अकेला इलाज है जो बीमारी को लॉन्ग-टर्म बदल सकता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अगर आपको सीज़नल नेज़ल लक्षण हैं, तो जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें। हमारे ENT स्पेशलिस्ट डिटेल्ड हिस्ट्री लेंगे, जांच करेंगे, और आपके ट्रिगर कन्फर्म करने के लिए एलर्जी टेस्ट सुझा सकते हैं।

पर्सनलाइज़्ड प्लान आमतौर पर इंट्रानेसल कॉर्टिकोस्टेरॉइड और एंटीहिस्टामाइन से शुरू होता है, और लॉन्ग-टर्म कंट्रोल के लिए इम्यूनोथेरेपी पर विचार किया जाता है। इलाज का रिस्पॉन्स समय-समय पर रिव्यू होता है।

क्या रुकावट एलर्जी, साइनस बीमारी, पॉलिप्स, या टेढ़े सेप्टम से है?

संक्षेप में

नेज़ल ब्लॉकेज एलर्जिक राइनाइटिस, क्रोनिक साइनसाइटिस, नेज़ल पॉलिप्स, या डेविएटेड सेप्टम से हो सकती है, और अक्सर एक से ज़्यादा फैक्टर साथ होते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में हमारी ENT टीम क्लिनिकल जांच और ज़रूरत पड़ने पर नेज़ल एंडोस्कोपी से सही कारण पता करके टार्गेटेड इलाज बताती है।

विस्तार से

एलर्जिक राइनाइटिस में म्यूकोसल स्वेलिंग और इन्फ्लेमेशन से ब्लॉकेज होता है। क्रोनिक राइनोसाइनसाइटिस में गाढ़े स्राव और म्यूकोसल ओएडिमा जुड़ते हैं। नेज़ल पॉलिप्स, जो अक्सर एलर्जी से जुड़े होते हैं, फिज़िकल ऑब्स्ट्रक्शन बनाते हैं। डेविएटेड सेप्टम एयरवे को स्ट्रक्चरली संकरा करता है।

गाइडलाइन अनकॉम्प्लिकेटेड एलर्जिक राइनाइटिस के लिए रूटीन साइनोनेज़ल इमेजिंग के खिलाफ हैं। इमेजिंग पर तब विचार होता है जब लक्षण ऑप्टिमाइज़्ड मेडिकल थेरेपी के बावजूद बने रहें या स्ट्रक्चरल असामान्यता का शक हो।

इन्फीरियर टर्बिनेट रिडक्शन उन बड़े टर्बिनेट के लिए दिया जा सकता है जो मेडिकल मैनेजमेंट से ठीक न हों। क्लिनिकल हिस्ट्री, लक्षणों का पैटर्न, और एंडोस्कोपिक नतीजे इन कारणों को अलग करने में मदद करते हैं।

एक आम धारणा

कई मरीज़ मानते हैं कि तुरंत स्कैन चाहिए।

असल में क्या होता है

गाइडलाइन सिंपल एलर्जिक राइनाइटिस के लिए रूटीन इमेजिंग के खिलाफ हैं। क्लिनिक में सावधानीपूर्वक एंडोस्कोपिक जांच आमतौर पर कारण पहचान लेती है और गैर-ज़रूरी रेडिएशन बचाती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अगर आपको लगातार नेज़ल ब्लॉकेज है, तो जयपुर हॉस्पिटल में ENT कंसल्टेशन बुक करें। हमारे स्पेशलिस्ट पूरी नेज़ल जांच करेंगे, जिसमें क्लिनिक में डायग्नोस्टिक नेज़ल एंडोस्कोपी शामिल हो सकती है। नतीजों के आधार पर इलाज इंट्रानेसल कॉर्टिकोस्टेरॉइड और सेलाइन इरिगेशन से शुरू होगा। अगर स्ट्रक्चरल दिक्कत या पॉलिप्स मिलें, तो आगे इमेजिंग या सर्जिकल ऑप्शन पर चर्चा होगी।

क्या यह समस्या सुनने, संतुलन, साँस लेने, बोलने या निगलने पर असर डाल सकती है?

संक्षेप में

एलर्जिक राइनाइटिस सुनने और साँस लेने पर असर डाल सकती है, और बोलने की क्वालिटी को प्रभावित कर सकती है, लेकिन यह सीधे संतुलन या निगलने की दिक्कत पैदा नहीं करती। जयपुर हॉस्पिटल में हमारे ENT स्पेशलिस्ट नेज़ल एलर्जी का ऊपरी श्वास नली और संबंधित स्ट्रक्चर पर पूरा असर आंकते हैं।

विस्तार से

एलर्जिक राइनाइटिस से नेज़ल ऑब्सट्रक्शन होने पर मुँह से साँस लेना पड़ता है, जिससे स्पीच रेज़ोनेंस बदल सकता है और गला सूख सकता है।

नेज़ल इन्फ्लेमेशन की वजह से यूस्टेशियन ट्यूब डिसफंक्शन हो सकता है, जिससे मिडिल ईयर इफ्यूज़न होता है और सुनने में कमी या भरेपन का एहसास होता है। यह बच्चों में ज़्यादा आम है।

संतुलन आमतौर पर प्रभावित नहीं होता जब तक इनर ईयर इन्वॉल्वमेंट न हो, जो अलग-अलग एलर्जिक राइनाइटिस में दुर्लभ है। निगलना सीधे प्रभावित नहीं होता, हालाँकि पोस्टनेज़ल ड्रिप से गला साफ़ करने या खाँसी की ज़रूरत पड़ सकती है।

क्रोनिक राइनोसाइनसाइटिस या नेज़ल पॉलिप्स, जो एलर्जी के साथ हो सकते हैं, इन असरों को बढ़ा सकते हैं। गाइडलाइन्स सभी एलर्जिक राइनाइटिस मरीज़ों में ओटाइटिस मीडिया और स्लीप-डिसऑर्डर्ड ब्रीदिंग जैसी जुड़ी कंडीशन जाँचने की सलाह देती हैं।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर चक्कर या घुटन की चिंता करते हैं।

असल में क्या होता है

ये एलर्जिक राइनाइटिस की आम पहचान नहीं हैं। मिडिल ईयर फ्लूइड से सुनने में बदलाव आम है और नेज़ल इन्फ्लेमेशन कंट्रोल होने पर अक्सर ठीक हो जाता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अगर आपको सुनने में बदलाव, लगातार मुँह से साँस लेना, या बोलने की चिंता नेज़ल लक्षणों के साथ दिखे, तो जयपुर हॉस्पिटल में ENT इवैल्यूएशन बुक करें। हमारी टीम कान, नाक, गले की जाँच करेगी, मिडिल ईयर इफ्यूज़न देखेगी, और नेज़ल एयरफ्लो आंकेगी।

इंट्रानेज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड और सेलाइन इरिगेशन से अंदरूनी एलर्जिक इन्फ्लेमेशन का इलाज अक्सर इन सेकेंडरी असरों को सुधार देता है। किसी भी साथ वाली कंडीशन का आगे मैनेजमेंट डिस्कस किया जाएगा।

कौन से लक्षण या बदलाव मुझे डॉक्टरी सलाह लेने के लिए कहें?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में डॉक्टरी सलाह लें अगर आपको बार-बार छींक, बहती या बंद नाक, नाक में खुजली, पोस्टनेजल ड्रिप या खुजली वाली, पानी भरी आंखें हैं जो नींद, काम या स्कूल पर असर डालती हैं। यह भी दिखाएं अगर ओवर-द-काउंटर दवाएं काम न करें, लक्षण कुछ हफ्तों से ज्यादा रहें, या आपको घरघराहट, साइनस दर्द या बार-बार संक्रमण (इन्फेक्शन) हो।

विस्तार से

एलर्जिक राइनाइटिस आमतौर पर छींक, एंटीरियर राइनोरिया, नेजल कंजेशन, नेजल इचिंग और खुजली वाली, पानी भरी आंखों के साथ सामने आती है। ये लक्षण क्वालिटी ऑफ लाइफ खराब कर सकते हैं, जिससे नींद में खलल, थकान, चिड़चिड़ापन और खराब एकाग्रता होती है।

ARIA गाइडलाइंस अस्थमा, कंजंक्टिवाइटिस, साइनसाइटिस, ओटाइटिस मीडिया और स्लीप-डिसऑर्डर्ड ब्रीदिंग जैसी जुड़ी स्थितियों की जांच की सलाह देती हैं। अगर एम्पिरिक ट्रीटमेंट के बावजूद लक्षण बने रहें, या डायग्नोसिस अनिश्चित हो, तो स्पेसिफिक IgE टेस्टिंग जरूरी है।

रेड फ्लैग्स में एकतरफा लक्षण, खून मिला डिस्चार्ज, चेहरे का दर्द, या स्टैंडर्ड थेरेपी से न सुधरने वाले लक्षण शामिल हैं, जो स्ट्रक्चरल या दूसरी पैथोलॉजी की ओर इशारा करते हैं जिनके लिए ENT जांच चाहिए।

एक आम धारणा

लोग अक्सर सालों इंतजार करते हैं, यह सोचकर कि यह सिर्फ जुकाम या मौसमी परेशानी है।

असल में क्या होता है

अनुपचारित एलर्जिक राइनाइटिस अस्थमा बढ़ा सकती है, साइनस इन्फेक्शन दे सकती है और प्रोडक्टिविटी घटा सकती है। जल्दी जांच जटिलताओं (कॉम्प्लिकेशन) को रोकती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अपने लक्षणों के पैटर्न और ट्रिगर्स को एक हफ्ते तक नोट करें। मौसमी बदलाव, पेट्स, धूल या मोल्ड के संपर्क, और आजमाई गई दवाओं के असर को लिखें। मौजूदा दवाओं की लिस्ट लाएं।

डॉक्टर फोकस्ड हिस्ट्री लेंगे, नाक की जांच करेंगे और स्किन प्रिक टेस्टिंग या खून की जाँच करा सकते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करके सही जांच करवाएं।

पहली विजिट पर डॉक्टर क्या पूछेंगे और क्या चेक करेंगे?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में डॉक्टर आपके लक्षणों के पैटर्न, ट्रिगर्स, सीजनैलिटी, एलर्जी या अस्थमा की फैमिली हिस्ट्री, मौजूदा दवाओं और नींद व काम पर असर के बारे में पूछेंगे। नाक को स्पेकुलम या एंडोस्कोप से देखकर पीली म्यूकोसा, साफ डिस्चार्ज, टरबाइनेट की सूजन या पॉलिप्स देखेंगे।

विस्तार से

गाइडलाइंस कहती हैं कि एलर्जिक राइनाइटिस की क्लिनिकल डायग्नोसिस हिस्ट्री और फिजिकल फाइंडिंग्स पर आधारित होती है जो एलर्जिक कारण की ओर इशारा करते हैं: नेजल कंजेशन, बहती नाक, नाक में खुजली या छींक।

जांच में साफ राइनोरिया, नेजल कंजेशन, नेजल म्यूकोसा का पीला रंग और लाल, पानी भरी आंखें मिलती हैं। डॉक्टर अस्थमा, एटॉपिक डर्मेटाइटिस, कंजंक्टिवाइटिस, साइनसाइटिस, ओटाइटिस मीडिया और स्लीप-डिसऑर्डर्ड ब्रीदिंग जैसी जुड़ी स्थितियों को देखेंगे।

अगर डायग्नोसिस अनिश्चित हो, या लक्षण एम्पिरिक ट्रीटमेंट से न सुधरें, या टारगेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी के लिए खास एलर्जन पहचानने हों, तो स्पेसिफिक IgE टेस्टिंग (स्किन प्रिक या खून की जाँच) सुझाई जाएगी। सीधे-सादे एलर्जिक राइनाइटिस के लिए रूटीन साइनोनेजल इमेजिंग सुझाई नहीं जाती।

एक आम धारणा

मरीज अक्सर तुरंत स्कैन या खून की जाँच की उम्मीद करते हैं।

असल में क्या होता है

गाइडलाइंस रूटीन इमेजिंग के खिलाफ सलाह देती हैं। डायग्नोसिस क्लिनिकल है; टेस्टिंग तभी जुड़ती है जब इम्यूनोथेरेपी प्लानिंग या अस्पष्ट केस के लिए जरूरी हो।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

मुमकिन हो तो सिम्पटम डायरी लाएं, जिसमें दिन का समय, मौसम, एक्सपोजर और दवा का इस्तेमाल नोट हो। नेजल स्प्रे समेत सभी मौजूदा दवाओं की लिस्ट लाएं। विजिट 20 से 30 मिनट की होती है।

स्किन प्रिक टेस्टिंग हो तो नतीजे 15 से 20 मिनट में आते हैं। ट्रीटमेंट प्लान आमतौर पर उसी दिन बताया जाता है। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करके अपनी पहली जांच करवाएं।

क्या यह समस्या बिना किसी प्रोसीजर या ऑपरेशन के ठीक हो सकती है?

संक्षेप में

हाँ, जयपुर हॉस्पिटल में एलर्जिक राइनाइटिस का इलाज मुख्य रूप से बिना सर्जरी के होता है। ज्यादातर मरीज़ दवाओं, एलर्जन अवॉइडेंस और इम्यूनोथेरेपी से अच्छी तरह कंट्रोल पा लेते हैं। सर्जरी सिर्फ स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम जैसे डेविएटेड सेप्टम, बड़े टर्बाइनेट या पॉलिप के लिए सोची जाती है जो ऑप्टिमल मेडिकल ट्रीटमेंट के बावजूद बने रहें।

विस्तार से

फार्माकोथेरेपी इलाज का मुख्य आधार है। इंट्रानैज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड एलर्जिक रिस्पॉन्स के अर्ली और लेट फेज़ में इन्फ्लेमेशन असरदार तरीके से कंट्रोल करते हैं। एंटीहिस्टामिन छींक, खुजली और बहती नाक में राहत देते हैं। कॉम्बिनेशन स्प्रे मॉडरेट-टू-सीवियर बीमारी में एक्स्ट्रा फायदा देते हैं।

सेलाइन इरिगेशन एलर्जन और म्यूकस साफ करने में मदद करती है। एलर्जन इम्यूनोथेरेपी (SLIT या SCIT) लक्षण घटा सकती है, दवा की ज़रूरत कम कर सकती है और बीमारी का लॉन्ग-टर्म कोर्स मोडिफाई कर सकती है।

स्टडीज़ में सही इलाज से लक्षणों में काफी राहत और क्वालिटी ऑफ़ लाइफ बेहतर देखी गई। सर्जरी अंदरूनी एलर्जिक इन्फ्लेमेशन का इलाज नहीं करती; यह सिर्फ एनाटॉमिकल ऑब्स्ट्रक्शन दूर करती है।

गाइडलाइन इन्फीरियर टर्बाइनेट रिडक्शन तभी सुझाती है जब नेज़ल एयरवे ऑब्स्ट्रक्शन और बड़े टर्बाइनेट मेडिकल मैनेजमेंट फेल होने के बाद भी रहें। सर्जरी के बाद भी आमतौर पर मेडिकल थेरेपी और अवॉइडेंस जारी रखनी पड़ती है।

एक आम धारणा

आम धारणा है कि सर्जरी एलर्जी ठीक करती है।

असल में क्या होता है

ऐसा नहीं है। सर्जरी सिर्फ नेज़ल पैसेज खोलती है; एलर्जिक इन्फ्लेमेशन बनी रहती है और उसे अब भी मेडिकल ट्रीटमेंट चाहिए।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अपनी सीवियरिटी और ट्रिगर के हिसाब से मेडिकल प्लान से शुरुआत करें। इंट्रानैज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड को पूरा असर दिखाने के लिए कम से कम दो से चार हफ्ते दें।

अगर ऑप्टिमाइज़्ड मेडिकल थेरेपी और अवॉइडेंस के बाद भी लक्षण काबू में न हों, तो डॉक्टर एडहेरेंस, अल्टरनेटिव डायग्नोसिस या इम्यूनोथेरेपी की संभावना दोबारा देखेंगे। सर्जरी बाद का कदम है, पहला ऑप्शन नहीं। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि नॉन-सर्जिकल मैनेजमेंट शुरू हो सके।

सवाल-जवाब

एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन (नाक की एलर्जी का इलाज): सवाल और जवाब

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  • आपके विकल्प सादे शब्दों में समझाए जाएँगे, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या आपको सर्जरी (ऑपरेशन) की ज़रूरत है भी या नहीं
  • फ़ैसला लेने से पहले खर्च का अनुमानित खर्च
  • RGHS, मा योजना, CGHS और पैनल वाले इंश्योरर और TPA के तहत कैशलेस इलाज में मदद
  • आपके इलाज के बाद फॉलो-अप विज़िट
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पूरी जानकारी

एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन (नाक की एलर्जी का इलाज): ज़रूरी जानकारी

एलर्जिक राइनाइटिस क्या है और यह कैसे होती है

भारत में एलर्जिक राइनाइटिस
  • 20% से 30% प्रभावित आबादी
  • 15% अस्थमा विकसित होना

एलर्जिक राइनाइटिस एक पुरानी, IgE-मध्यस्थ टाइप 2 सूजन की बीमारी है जो बड़ों और बच्चों दोनों को प्रभावित करती है। यह नाक और आंखों का एक एलर्जी विकार है जो सामान्य आबादी के लगभग पांचवें हिस्से को प्रभावित करता है।

भारत में, एलर्जिक राइनाइटिस 20% से 30% लोगों को प्रभावित करती है, और उनमें से 15% लोगों को आगे चलकर अस्थमा हो जाता है। यह स्थिति सांस के साथ अंदर जाने वाले एलर्जन के प्रति इम्युनोग्लोबुलिन E (IgE) की मध्यस्थता वाली प्रतिक्रियाओं के कारण होती है।

सांस के एलर्जन के प्रति संवेदनशीलता जीवन के पहले वर्ष में शुरू होती है; इनडोर एलर्जन की संवेदनशीलता पराग की संवेदनशीलता से पहले आती है। एलर्जिक राइनाइटिस की नैदानिक अभिव्यक्ति नाक में एलर्जी प्रतिक्रिया के प्रारंभिक और देर के चरणों दोनों से प्रभावित होती है।

प्रारंभिक चरण एलर्जन के संपर्क में आने के कुछ मिनटों के भीतर होता है, जब हिस्टामाइन, प्रोटीएज और साइटोकाइन मुक्त होते हैं, जिससे छींक, बहती नाक और खुजली होती है। देर की चरण की प्रतिक्रिया, जो घंटों बाद होती है, नाक की रुकावट और हाइपररिएक्टिविटी की विशेषता है जो ईोसिनोफिल और Th2 सेल-प्रधान सूजन के कारण होती है।

बार-बार होने वाले लक्षण, आमतौर पर नाक की रुकावट, अक्सर बने रहते हैं क्योंकि प्रारंभिक चरणों में उत्पादित साइटोकाइन और मध्यस्थ एक दूसरी सेलुलर सूजन प्रतिक्रिया का कारण बनते हैं जो 4 से 8 घंटे तक रहती है।

प्राइमिंग बार-बार संपर्क के साथ एलर्जन के प्रति नाक की बढ़ी हुई प्रतिक्रियाशीलता का वर्णन करता है, और यह वायु प्रदूषण के कारण भी हो सकता है। "एक वायुमार्ग, एक बीमारी" दृष्टिकोण दर्शाता है कि एलर्जिक राइनाइटिस अक्सर कंजंक्टिवाइटिस और/या अस्थमा से जुड़ी होती है।

पारंपरिक रूप से एलर्जिक राइनाइटिस को चक्रीय पराग या साल भर रहने वाले एलर्जन जैसे धूल के कण, जानवरों की रूसी, तिलचट्टे और फफूंद के प्रति संवेदनशीलता के आधार पर मौसमी या बारहमासी के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित ARIA दिशानिर्देशों का पालन करते हुए, एलर्जिक नाक की बीमारी को अब हल्के या मध्यम-से-गंभीर, रुक-रुक कर होने वाली या लगातार बनी रहने वाली के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

एलर्जिक राइनाइटिस के लक्षण और वे चेतावनी संकेत जिनमें उसी दिन देखभाल की जरूरत हो

चेतावनी संकेत जिनमें उसी दिन देखभाल की जरूरत हो
  • अचानक गंभीर सांस लेने में कठिनाई
  • चेहरे या गले की सूजन
  • सामान्य इनहेलर से घरघराहट न सुधरना
  • एनाफिलेक्सिस के संकेत
इमरजेंसी? 0141 255 1500 पर कॉल करें, 24×7

क्लासिक लक्षणों में शामिल हैं:

  • छींक
  • राइनोरिया (बहती नाक)
  • नाक की रुकावट
  • नाक और आंखों में खुजली
  • पोस्टनेज़ल ड्रिप

साफ नाक स्राव अक्सर देखे जाते हैं, साथ में बढ़े हुए टर्बाइनेट और आमतौर पर पीली और ढीली नाक की श्लेष्मा झिल्ली। एलर्जिक राइनाइटिस अक्सर अस्थमा और कंजंक्टिवाइटिस के साथ होती है।

यह नींद में खलल, थकान, चिड़चिड़ापन, अवसाद, काम या स्कूल में ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता, और काम से अनुपस्थिति से जुड़ी हो सकती है, जिससे जीवन की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह जीवन की गुणवत्ता और स्कूल व काम के प्रदर्शन को कम करती है। यह सामान्य अभ्यास में ओपीडी विज़िट का एक लगातार कारण है।

चेतावनी संकेत जिनमें उसी दिन तत्काल देखभाल की जरूरत होती है उनमें अचानक गंभीर सांस लेने में कठिनाई, चेहरे या गले की सूजन, घरघराहट जो आपके सामान्य इनहेलर से नहीं सुधरती, या गंभीर एलर्जी प्रतिक्रिया (एनाफिलेक्सिस) के संकेत जैसे पूरे शरीर पर पित्ती, चक्कर आना, या गिर जाना शामिल हैं। ये एलर्जिक राइनाइटिस के सामान्य लक्षण नहीं हैं और इनमें तत्काल चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

कारण और किन्हें अधिक जोखिम है

कारण और जोखिम कारक
IgE-मध्यस्थ रिएक्शन
साँस के साथ जाने वाले एलर्जन इम्यून रिस्पॉन्स शुरू करते हैं
जल्दी सेंसिटाइज़ेशन
पहले साल में पराग से पहले इनडोर एलर्जन
आनुवंशिक कारक
एटोपी का पारिवारिक इतिहास जोखिम बढ़ाता है
पर्यावरणीय तनाव
वायु प्रदूषण और सूक्ष्मजीव इम्युनिटी को प्रभावित करते हैं

एलर्जिक राइनाइटिस सांस के साथ अंदर जाने वाले एलर्जन के प्रति इम्युनोग्लोबुलिन E (IgE) की मध्यस्थता वाली प्रतिक्रियाओं के कारण होती है। गैर-इंजेक्शन मार्गों के विकास के लिए मुख्य प्रेरणा इंजेक्टेड SIT की सुरक्षा की समस्या थी।

सांस के एलर्जन के प्रति संवेदनशीलता जीवन के पहले वर्ष में शुरू होती है; इनडोर एलर्जन की संवेदनशीलता पराग की संवेदनशीलता से पहले आती है। जीवन के दूसरे से चौथे दशक में एलर्जिक राइनाइटिस सबसे आम है, जिसके बाद यह धीरे-धीरे कम होती जाती है।

राइनाइटिस के लक्षण आमतौर पर बचपन में शुरू होने के बाद जीवन के दूसरे, तीसरे और चौथे दशक में चरम पर होते हैं। हालांकि कुल IgE स्तर और विशिष्ट एलर्जन संवेदनशीलता के आनुवंशिक निर्धारक हैं, न तो एटोपिक बीमारी का प्रकार और न ही विशिष्ट संवेदनशीलता सरल आनुवंशिक लक्षणों के रूप में वंशानुगत प्रतीत होती है।

10 साल की उम्र तक फॉलो-अप किए गए बच्चों के एक समूह में एलर्जिक राइनाइटिस विकसित होने की संभावना ट्रांसक्रिप्शन कारकों GATA बाइंडिंग प्रोटीन 3, ट्रांस-एक्टिंग T-सेल-विशिष्ट ट्रांसक्रिप्शन कारक, और इंटरल्यूकिन (IL)-13 के पॉलीमॉर्फिज्म के साथ संबंधित पाई गई। जोखिम कारकों में सांस के और व्यावसायिक एलर्जन, साथ ही आनुवंशिक कारक शामिल हैं।

अंतर्निहित आनुवंशिक और प्रतिरक्षाविज्ञान अंतरों के कारण, कुछ आबादी अधिक संवेदनशील होती है। जीन TSLP, GATA3, IL-4, IL-13, और IL-33, जो Th2 सेल विभेदन और IgE संश्लेषण को नियंत्रित करते हैं, में पॉलीमॉर्फिज्म जीनोम-वाइड एसोसिएशन अध्ययनों द्वारा पाए गए हैं। IL1RL1 और HLA-DQ में वेरिएंट को भी एटोपी और एलर्जिक वायुमार्ग सूजन की बढ़ी हुई घटना से जोड़ा गया है।

जिन लोगों के परिवार में एटोपिक बीमारियों का इतिहास होता है जिसमें अस्थमा, एक्जिमा, या एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस शामिल हैं, उनमें आनुवंशिक रूप से प्राइम्ड प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया होती है जो बढ़े हुए Th2 ध्रुवीकरण और ईोसिनोफिलिया द्वारा चिह्नित होती है।

वायु प्रदूषण और सूक्ष्मजीवविज्ञान जोखिम पर्यावरणीय तनाव हैं जो एपिजेनेटिक परिवर्तन पैदा कर सकते हैं, जैसे बदला हुआ DNA मेथिलेशन, जो प्रतिरक्षात्मक सहनशीलता और बीमारी की अभिव्यक्ति को प्रभावित करते हैं। कई सहवर्ती विकार एलर्जिक राइनाइटिस से जुड़े हुए हैं जिनमें अस्थमा, साइनसाइटिस, ओटिटिस मीडिया, नेज़ल पॉलीपोसिस, निचले श्वसन पथ का संक्रमण, और दंत मैलोक्लूजन शामिल हैं।

एलर्जिक राइनाइटिस का निदान कैसे किया जाता है: जांच और टेस्ट

एलर्जिक राइनाइटिस का निदान कैसे किया जाता है
  1. नैदानिक इतिहास और जांच लक्षण और नाक के निष्कर्ष
  2. सहवर्ती स्थितियों का आकलन करें अस्थमा, कंजंक्टिवाइटिस, आदि

एलर्जिक राइनाइटिस का निदान नैदानिक इतिहास पर आधारित होता है और यदि आवश्यक हो तो त्वचा परीक्षण या एलर्जन के प्रति सीरम-विशिष्ट IgE एंटीबॉडी की उपस्थिति पर।

चिकित्सकों को नैदानिक निदान करना चाहिए जब रोगी एक ऐसे इतिहास और शारीरिक जांच के साथ प्रस्तुत होते हैं जो एलर्जी कारण के अनुरूप हो और निम्नलिखित में से एक या अधिक लक्षण हों: नाक की रुकावट, बहती नाक, नाक में खुजली, या छींक।

एलर्जी कारण के अनुरूप निष्कर्षों में साफ राइनोरिया, नाक की रुकावट, नाक की श्लेष्मा झिल्ली का पीला मलिनकिरण, और लाल और पानी भरी आंखें शामिल हैं। नाक की श्लेष्मा झिल्ली का पीला मलिनकिरण विशेषज्ञों द्वारा निदान में सहायता के लिए किया गया एक नैदानिक अवलोकन है।

एक निश्चित निदान तीन लक्षणों (छींक और नाक की खुजली, राइनोरिया, और नाक की रुकावट), एलर्जन जोखिम के रोगी इतिहास, और महत्वपूर्ण नैदानिक जांच निष्कर्षों (साफ राइनोरिया, नाक की श्लेष्मा झिल्ली का पीला मलिनकिरण, और पानी भरी और लाल आंखें) के आधार पर किया जाता है।

चिकित्सा इतिहास, शारीरिक जांच, और यदि आवश्यक हो तो नेज़ल एंडोस्कोपी का उपयोग एलर्जिक राइनाइटिस के निदान के लिए किया जाता है। कुछ मामलों में, एलर्जन-विशिष्ट IgE (त्वचा चुभन या सीरम-विशिष्ट IgE) का परीक्षण भी किया जाता है।

मौसमी और बारहमासी एरोएलर्जन के लिए त्वचा परीक्षण गैर-एलर्जिक राइनाइटिस को एलर्जिक राइनाइटिस से अलग करने के लिए और यह दिखाने के लिए उपयोगी है कि IgE एंटीबॉडी मौजूद हैं या अनुपस्थित। लगभग एक सदी से, क्लिनिकल स्किन प्रिक टेस्टिंग (SPT) का उपयोग एटोपिक, IgE-मध्यस्थ विकारों के निदान में मदद के लिए किया जाता रहा है।

SPT एलर्जी की पहचान करने का एक विश्वसनीय और प्रभावी तरीका साबित हुआ है। SPT एक ही सत्र में कई एलर्जन के आकलन को सक्षम बनाता है, जिसमें परिणाम 15 से 20 मिनट में उपलब्ध होते हैं।

नेज़ल एलर्जन प्रोवोकेशन टेस्ट एक संवेदनशील, विशिष्ट और पुनरुत्पादन योग्य विधि है, लेकिन इसमें लंबा समय लगता है और विशेषज्ञ कर्मियों की आवश्यकता होती है।

चिकित्सकों को उन रोगियों के लिए विशिष्ट IgE (त्वचा या रक्त) एलर्जी परीक्षण करना और व्याख्या करना चाहिए, या किसी ऐसे चिकित्सक के पास भेजना चाहिए जो ऐसा कर सके, जिनका नैदानिक निदान हो लेकिन जो अनुभवजन्य उपचार का जवाब न दें, या जब निदान अनिश्चित हो, या जब विशिष्ट कारण एलर्जन का ज्ञान चिकित्सा को लक्षित करने के लिए आवश्यक हो।

चिकित्सकों को रोगियों का मूल्यांकन करना चाहिए और चिकित्सा रिकॉर्ड में सहवर्ती स्थितियों की उपस्थिति का दस्तावेजीकरण करना चाहिए जैसे अस्थमा, एटोपिक डर्मेटाइटिस, नींद-विकार श्वास, कंजंक्टिवाइटिस, राइनोसाइनसाइटिस, और ओटिटिस मीडिया। एलर्जिक राइनाइटिस के अनुरूप लक्षणों के साथ प्रस्तुत होने वाले रोगियों में नियमित साइनोनेज़ल इमेजिंग नहीं की जानी चाहिए।

यह उन रोगियों में माना जा सकता है जो चिकित्सा का जवाब नहीं देते हैं। एलर्जिस्ट/इम्यूनोलॉजिस्ट के पास रेफरल उन रोगियों के लिए माना जाना चाहिए जिनमें गंभीर या रिफ्रैक्टरी बीमारी हो, चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक एलर्जन के बारे में अनिश्चितता हो, एलर्जन इम्यूनोथेरेपी पर विचार हो, या जीवन की गुणवत्ता में पर्याप्त कमी हो।

ओटोलरींगोलॉजिस्ट के पास रेफरल तब उपयुक्त हो सकता है जब संरचनात्मक असामान्यताएं, पुरानी राइनोसाइनसाइटिस, नेज़ल पॉलीप्स, बार-बार नकसीर, या अन्य स्थितियां जिनमें एंडोस्कोपिक मूल्यांकन या सर्जिकल प्रबंधन की आवश्यकता हो, का संदेह हो।

एलर्जिक राइनाइटिस के गैर-सर्जिकल उपचार विकल्प और कब सर्जरी की सलाह दी जाती है

एलर्जिक राइनाइटिस का प्रबंधन लक्षणों की गंभीरता, लक्षणों की आवृत्ति, एलर्जन जोखिम, रोगी की प्राथमिकताओं, और अस्थमा जैसी सहवर्ती स्थितियों की उपस्थिति पर आधारित होता है। उपचार में आमतौर पर जब संभव हो तब एलर्जन से बचाव, फार्माकोथेरेपी, और चयनित रोगियों के लिए एलर्जन इम्यूनोथेरेपी शामिल होती है।

फार्माकोलॉजिकल थेरेपी अधिकांश रोगियों के इलाज का मुख्य आधार है, जिसमें इंट्रानेज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड लगातार या मध्यम-से-गंभीर बीमारी के लिए पहली पंक्ति की चिकित्सा के रूप में कार्य करते हैं। रुक-रुक कर लक्षणों वाले रोगियों को अक्सर दूसरी पीढ़ी की मौखिक या इंट्रानेज़ल एंटीहिस्टामाइन से पर्याप्त रूप से प्रबंधित किया जाता है।

इंट्रानेज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड लगातार या मध्यम-से-गंभीर एलर्जिक राइनाइटिस के लिए सबसे प्रभावी मोनोथेरेपी हैं और अधिकांश रोगियों के लिए पहली पंक्ति के उपचार के रूप में अनुशंसित हैं।

दूसरी पीढ़ी की एंटीहिस्टामाइन का उपयोग हल्की एलर्जिक राइनाइटिस के इलाज के लिए किया जाता है और आमतौर पर पहली पीढ़ी के एजेंटों पर पसंद की जाती हैं क्योंकि वे कम शामक और एंटीकॉलिनर्जिक प्रतिकूल प्रभावों के साथ समान प्रभावकारिता प्रदान करती हैं।

पहली पीढ़ी की एंटीहिस्टामाइन से आमतौर पर बचा जाना चाहिए, विशेष रूप से छोटे बच्चों और बड़े वयस्कों में, उनके प्रतिकूल प्रभाव प्रोफाइल के कारण।

मध्यम-से-गंभीर एलर्जिक राइनाइटिस या मोनोथेरेपी से अपर्याप्त रूप से नियंत्रित लक्षणों के लिए, इंट्रानेज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड और इंट्रानेज़ल एंटीहिस्टामाइन के साथ संयोजन उपचार अकेले किसी भी एजेंट की तुलना में अधिक लक्षण नियंत्रण प्रदान कर सकता है। फिक्स्ड-डोज़ संयोजन इंट्रानेज़ल स्प्रे, जैसे एज़ेलास्टाइन/फ्लुटिकासोन और ओलोपैटाडाइन/मोमेटासोन, उपलब्ध हैं।

उपचार प्रतिक्रिया का समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए, जिसमें लक्षण नियंत्रण, पालन, दवा तकनीक, प्रतिकूल प्रभाव, और रोगी की प्राथमिकताओं द्वारा निर्देशित चिकित्सा में वृद्धि, कमी, या परिवर्तन शामिल हैं। अनुकूलित फार्माकोथेरेपी के बावजूद लगातार लक्षणों वाले रोगियों का पालन, वैकल्पिक निदान, और एलर्जन इम्यूनोथेरेपी के लिए उम्मीदवारी के लिए मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

एलर्जन इम्यूनोथेरेपी (AIT) एकमात्र वर्तमान में उपलब्ध उपचार है जो अंतर्निहित पैथोफिजियोलॉजी को लक्षित करता है, और इसका रोग-संशोधक प्रभाव हो सकता है। या तो सबक्यूटेनियस (SCIT) या सबलिंगुअल (SLIT) मार्गों का उपयोग किया जा सकता है। SCIT और SLIT को मौसमी और बारहमासी एलर्जिक राइनाइटिस दोनों के लिए अल्पकालिक लाभ के लिए अनुशंसित किया जाता है।

दीर्घकालिक प्रभावकारिता प्राप्त करने के लिए, न्यूनतम 3 साल की चिकित्सा का उपयोग करने की अनुशंसा की जाती है। चिकित्सकों को उन रोगियों के लिए इम्यूनोथेरेपी (सबलिंगुअल या सबक्यूटेनियस) की पेशकश करनी चाहिए, या किसी ऐसे चिकित्सक के पास भेजना चाहिए जो पेशकश कर सके, जिनका फार्माकोलॉजिकल थेरेपी के साथ पर्याप्त प्रतिक्रिया न हो, पर्यावरणीय नियंत्रण के साथ या बिना।

सबलिंगुअल इम्यूनोथेरेपी (SLIT) चयनित रोगियों के लिए एक प्रभावी विकल्प है और विशिष्ट एलर्जन के लिए उपलब्ध है, जिसमें कुछ घास पराग, रैगवीड पराग, और हाउस डस्ट माइट्स शामिल हैं। SLIT आमतौर पर वर्तमान में उपलब्ध उत्पादों द्वारा कवर किए गए एलर्जन के लिए चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक संवेदनशीलता वाले रोगियों के लिए सबसे उपयुक्त है।

यह उन रोगियों के लिए कम उपयुक्त हो सकता है जिन्हें कई असंबंधित एलर्जन के उपचार की आवश्यकता होती है। सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी (SCIT) को एलर्जिक राइनाइटिस के लक्षणों और दवा आवश्यकताओं को कम करने और उपचार पूरा होने के बाद निरंतर नैदानिक लाभ प्रदान करने के लिए दिखाया गया है।

चिकित्सा आमतौर पर 3 से 5 वर्षों में प्रशासित की जाती है और इसे उचित रूप से प्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा किया जाना चाहिए क्योंकि प्रणालीगत एलर्जी प्रतिक्रियाएं, जिनमें एनाफिलेक्सिस शामिल है, हो सकती हैं।

पर्यावरणीय नियंत्रण उपायों को रोगी के इतिहास के माध्यम से पहचाने गए चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक एलर्जन को लक्षित करना चाहिए और जब संकेत दिया हो, एलर्जी परीक्षण। व्यापक या अंधाधुंध एलर्जन परिहार आमतौर पर अनुशंसित नहीं है।

मौसमी एलर्जन के लिए, उच्च पराग संख्या की अवधि के दौरान बाहरी जोखिम को सीमित करना, खिड़कियां बंद रखना, जब उपयुक्त हो एयर कंडीशनिंग का उपयोग करना, और बाहरी गतिविधियों के बाद नहाना एलर्जन जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। इनडोर एलर्जन के लिए, रणनीतियों को पहचाने गए ट्रिगर के अनुसार व्यक्तिगत किया जाना चाहिए।

डस्ट माइट जोखिम को एक व्यापक, बहु-घटक दृष्टिकोण द्वारा कम किया जा सकता है, जैसे एलर्जन-अभेद्य गद्दे और तकिया कवर, बिस्तर को नियमित रूप से गर्म पानी में धोना, और कम इनडोर नमी बनाए रखना, क्योंकि एकल पृथक हस्तक्षेप से पर्याप्त नैदानिक लाभ मिलने की संभावना नहीं है।

मोल्ड जोखिम को इनडोर नमी को नियंत्रित करके कम किया जा सकता है, और पालतू जानवरों से परहेज जानवरों की एलर्जी के लिए सबसे प्रभावी रणनीति बनी हुई है, हालांकि पालतू जानवरों की पहुंच को बेडरूम तक सीमित करना और हाई-एफिशिएंसी पार्टिकुलेट एयर (HEPA) निस्पंदन का उपयोग करना कुछ लाभ प्रदान कर सकता है जब हटाना संभव न हो।

व्यावसायिक एलर्जी वाले रोगियों को जब भी संभव हो जोखिम को कम करना चाहिए या उचित कार्यस्थल सुरक्षा उपायों का उपयोग करना चाहिए। गैर-विशिष्ट उत्तेजक पदार्थों से परहेज, जिसमें तंबाकू का धुआं, वायु प्रदूषण, तेज गंध, और तेज तापमान परिवर्तन शामिल हैं, संवेदनशील व्यक्तियों में लक्षणों में सुधार कर सकते हैं।

धूम्रपान बंद करना और सेकेंडहैंड धुएं और अन्य हवाई उत्तेजक पदार्थों से परहेज की सिफारिश की जाती है क्योंकि ये जोखिम राइनाइटिस के लक्षणों को खराब कर सकते हैं। प्रत्याशित एलर्जन जोखिम से पहले और दौरान निर्धारित फार्माकोथेरेपी का पालन, विशेष रूप से मौसमी पराग अवधि के दौरान, लक्षणों को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है।

सर्जरी अंतर्निहित एलर्जी बीमारी का इलाज नहीं है लेकिन संबंधित संरचनात्मक असामान्यताओं या सहवर्ती स्थितियों के लिए संकेतित हो सकती है, जिसमें पुरानी राइनोसाइनसाइटिस, गंभीर सेप्टल डेविएशन, इन्फीरियर टर्बाइनेट हाइपरट्रॉफी, नेज़ल पॉलीप्स, या लगातार नाक की रुकावट के अन्य शारीरिक कारण शामिल हैं।

चिकित्सक एलर्जिक राइनाइटिस वाले रोगियों में इन्फीरियर टर्बाइनेट रिडक्शन की पेशकश कर सकते हैं, या किसी सर्जन के पास भेज सकते हैं जो पेशकश कर सके, जिनमें नाक की वायुमार्ग रुकावट और बढ़े हुए इन्फीरियर टर्बाइनेट हों और जिनका चिकित्सा प्रबंधन विफल हो गया हो।

एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन की तैयारी

अपनी पहली विज़िट से पहले

करें

  • लक्षण पैटर्न और ट्रिगर नोट करें
  • वर्तमान दवा सूची लाएं
  • पिछली एलर्जी टेस्ट रिपोर्ट साथ ले आएं
  • बताए जाने पर एंटीहिस्टामाइन रोकें

जयपुर हॉस्पिटल में एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन एक आउटडोर प्रक्रिया है। आपको उपवास करने या अस्पताल में रहने की आवश्यकता नहीं है। अपनी पहली विज़िट से पहले, नोट कर लें कि आपके लक्षण कब सबसे खराब होते हैं, क्या उन्हें ट्रिगर करता प्रतीत होता है, और आपने पहले कौन सी दवाएं आजमाई हैं।

वर्तमान दवाओं की एक सूची लाएं, जिसमें कोई आई ड्रॉप या स्किन क्रीम शामिल हों, ताकि आपका डॉक्टर इंटरैक्शन की जांच कर सके। यदि आपने पहले एलर्जी टेस्ट या ब्लड रिपोर्ट करवाई हैं, तो उन्हें भी साथ ले आएं।

स्किन प्रिक टेस्टिंग से कुछ दिन पहले आपका सर्जन आपसे एंटीहिस्टामाइन रोकने के लिए कह सकता है, क्योंकि वे प्रतिक्रिया को छिपा सकते हैं। आपको ठीक-ठीक बता दिया जाएगा कि कौन सी दवाएं रोकनी हैं और कितने समय के लिए। किसी विशेष आहार या आंत्र तैयारी की आवश्यकता नहीं है।

आरामदायक कपड़े पहनें और चाहें तो एक अटेंडेंट साथ लाएं, हालांकि अधिकांश रोगी विज़िट को अकेले ही प्रबंधित कर लेते हैं।

एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन कैसे किया जाता है

इलाज आपके लक्षणों के पैटर्न, गंभीरता और जाँच में पहचाने गए एलर्जन के हिसाब से तय होता है। मुख्य विकल्प हैं:

  • इंट्रानेज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड: एक रोज़ाना का स्प्रे जो नाक की परत की सूजन कम करता है। यह लगातार या मध्यम से गंभीर लक्षणों के लिए पहली पसंद का इलाज है।
  • एंटीहिस्टामाइन: खाने की गोलियाँ या नाक के स्प्रे जो हिस्टामाइन को रोकते हैं। दूसरी पीढ़ी के खाने वाले एंटीहिस्टामाइन पसंद किए जाते हैं क्योंकि उनसे नींद कम आती है। इंट्रानेज़ल एंटीहिस्टामाइन तेज़ असर करते हैं और उनके पूरे शरीर पर असर कम होते हैं।
  • सबलिंगुअल इम्यूनोथेरेपी (SLIT): जीभ के नीचे रखी जाने वाली बूँदें या गोलियाँ, रोज़ाना। SLIT का इस्तेमाल घास के पराग, रैगवीड और घर की धूल के कण जैसे खास एलर्जन के लिए किया जाता है। यह आमतौर पर तब सबसे सही होता है जब आप उन एलर्जन के प्रति संवेदनशील हों जिनके लिए उपलब्ध उत्पाद हैं।
  • सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी (SCIT): त्वचा के नीचे दिए जाने वाले एलर्जी के इंजेक्शन। बिल्ड-अप फेज़ में छह महीने तक हर हफ्ते या हफ्ते में दो बार इंजेक्शन लगते हैं, उसके बाद मेंटेनेंस फेज़ में तीन से पाँच साल तक हर महीने इंजेक्शन लगते हैं।

आपका सर्जन बताएगा कि आपके लिए कौन सा विकल्प सही है। SCIT के विज़िट वाले दिन आपको क्लिनिक में इंजेक्शन दिया जाता है और निगरानी के लिए लगभग 30 मिनट रुकना पड़ता है। SLIT की पहली खुराक डॉक्टरी निगरानी में दी जाती है, उसके बाद खुराक घर पर ली जाती है।

इंट्रानेज़ल स्प्रे और खाने की दवाएँ सही तरीके की हिदायत के साथ घर पर शुरू की जाती हैं। सेलाइन नेसल इरिगेशन (नाक धोना) एलर्जन और बलगम साफ़ करने के लिए जोड़ा जा सकता है।

एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन के जोखिम और संभावित जटिलताएँ

इलाज के अनुसार आम साइड इफेक्ट
इंट्रानेज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स
नाक में जलन, सूखापन, हल्का खून आना
ओरल एंटीहिस्टामाइन्स
हल्की नींद, मुँह सूखना, सिरदर्द
SCIT लोकल रिएक्शन
इंजेक्शन वाली जगह पर लाली, गर्माहट, खुजली, सूजन
SLIT लोकल रिएक्शन
मुँह में खुजली या गले में जलन

इंट्रानेज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड अच्छी तरह सहन होते हैं। नई दूसरी पीढ़ी के स्प्रे का पूरे शरीर में अवशोषण बहुत कम होता है, इसलिए पूरे शरीर पर असर वाले साइड इफेक्ट कम होते हैं। नाक में जलन, सूखापन या हल्का खून आ सकता है; सही स्प्रे तकनीक से यह कम होता है।

खाने वाले एंटीहिस्टामाइन से हल्की नींद, मुँह सूखना या सिरदर्द हो सकता है। पहली पीढ़ी के एंटीहिस्टामाइन नहीं दिए जाते क्योंकि उनसे तेज़ बेहोशी और एंटीकॉलिनर्जिक असर होते हैं। इंट्रानेज़ल डीकॉन्जेस्टेंट स्प्रे तीन से पाँच दिन से ज़्यादा नहीं इस्तेमाल करने चाहिए, क्योंकि उनसे रिबाउंड कंजेशन (राइनाइटिस मेडिकामेंटोसा) हो सकता है और नाक की परत को नुकसान पहुँच सकता है।

SCIT के लिए इंजेक्शन वाली जगह पर लाली, गर्मी, खुजली या सूजन आम है। पूरे शरीर पर असर वाले रिएक्शन जैसे पित्ती, दूसरी जगह खुजली या साँस लेने में तकलीफ कम होते हैं। एनाफिलैक्सिस दुर्लभ है लेकिन मुमकिन है, इसलिए इंजेक्शन इमरजेंसी केयर वाली जगह पर दिए जाते हैं।

24 घंटे के अंदर कोई देर से होने वाला रिएक्शन हो तो बताना ज़रूरी है। एक अध्ययन में तीन मरीज़ों में ब्रोंकोस्पाज्म हुआ जो गलत तकनीक से जुड़ा था। बीटा-ब्लॉकर और ACE इन्हिबिटर गंभीर रिएक्शन का खतरा बढ़ा सकते हैं या उन्हें इलाज करना मुश्किल बना सकते हैं।

SLIT से आमतौर पर मुँह में खुजली या गले में जलन होती है; गंभीर पूरे शरीर वाले रिएक्शन बहुत दुर्लभ हैं। मोंटेलुकास्ट पर न्यूरोसाइकियाट्रिक असर का बॉक्स्ड वार्निंग है और यह चुनिंदा मरीज़ों के लिए रखा जाता है। खाने वाले स्टेरॉइड के छोटे कोर्स सिर्फ़ गंभीर भड़काव के लिए इस्तेमाल होते हैं।

एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन के बाद रिकवरी और देखभाल

रिकवरी और फॉलो-अप के पड़ाव
  1. लक्षणों पर काबू शुरू दवाओं से दो से चार हफ्ते में
  2. SCIT इंजेक्शन के बाद निगरानी के लिए क्लिनिक में 30 मिनट रुकें
  3. लोकल रिएक्शन ठीक होना SCIT के कुछ घंटों के अंदर
  4. फॉलो-अप विज़िट रिस्पॉन्स जाँचें, डोज़ एडजस्ट करें, तकनीक देखें

इसमें कोई सर्जिकल रिकवरी नहीं होती। इंट्रानेज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड और एंटीहिस्टामाइन से लक्षणों पर काबू आमतौर पर दो से चार हफ्ते में शुरू होता है। आपको दिखाया जाएगा कि स्प्रे को नेज़ल सेप्टम (नाक की बीच की दीवार) से दूर कैसे निशाना बनाना है ताकि खून कम आए।

स्टेरॉइड स्प्रे से पहले सेलाइन रिंस (नमक के पानी से धोना) बलगम साफ़ करने के लिए किया जा सकता है। SCIT के लिए हर इंजेक्शन के बाद लगभग 30 मिनट क्लिनिक में रुकना होता है। इंजेक्शन वाली जगह के लोकल रिएक्शन कुछ घंटों में ठीक हो जाते हैं।

अगर जाने के बाद सूजन बढ़े, पित्ती हो, साँस लेने में तकलीफ हो या चक्कर आए तो इमरजेंसी डिपार्टमेंट जाएँ या अस्पताल को कॉल करें। SLIT के लिए पहली खुराक निगरानी में ली जाती है; उसके बाद रोज़ाना घर पर जारी रखें। लक्षणों की डायरी रखें और किसी भी साइड इफेक्ट को नोट करें।

फॉलो-अप विज़िट तय की जाती हैं ताकि असर जाँचा जा सके, खुराक एडजस्ट हो और इन्हेलर या स्प्रे की तकनीक देखी जा सके। अगर बेहतर दवा इलाज के बावजूद लक्षण बने रहें तो डॉक्टर डायग्नोसिस दोबारा देखेंगे, दवा लेने की नियमितता जाँचेंगे और इम्यूनोथेरेपी की संभावना पर बात करेंगे। धूम्रपान छोड़ना और सेकेंड-हैंड धुएँ से बचना नतीजे बेहतर करता है। आपके खास एलर्जन को ध्यान में रखकर पर्यावरण कंट्रोल एक्सपोज़र कम करने में मदद करते हैं।

एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन के नतीजे

अध्ययनों में इंट्रानेज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड लगातार या मध्यम से गंभीर एलर्जिक राइनाइटिस के लिए सबसे असरदार मोनोथेरेपी हैं और नाक व आँख के लक्षणों के साथ नींद की क्वालिटी भी सुधारते हैं। इंट्रानेज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड और इंट्रानेज़ल एंटीहिस्टामाइन का कॉम्बिनेशन थेरेपी मध्यम से गंभीर बीमारी में अकेले किसी भी इलाज से बेहतर लक्षण कंट्रोल देता है। फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन स्प्रे उपलब्ध हैं।

एलर्जन इम्यूनोथेरेपी अकेला रोग-परिवर्तक इलाज है। सही चुने गए मरीज़ों में जिनमें IgE-माध्यमित बीमारी कन्फर्म हो, इम्यूनोथेरेपी लक्षण कम करती है, दवा का इस्तेमाल घटाती है और एलर्जिक बीमारी के लंबे समय के कोर्स को बदल सकती है। SCIT से इलाज खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक क्लिनिकल फायदा दिखा है।

SLIT घास के पराग, रैगवीड और घर की धूल के कण जैसे खास एलर्जन के लिए असरदार है। लंबे समय के फायदे का सबसे मजबूत सबूत घास एलर्जन इम्यूनोथेरेपी के लिए है, खासकर गोलियों के लिए, जहाँ फायदा रोकने के बाद भी रहता है। लंबे समय की असरदार के लिए कम से कम तीन साल की थेरेपी सुझाई जाती है।

एक फॉलो-अप अध्ययन में लोकल नेसल इम्यूनोथेरेपी रोकने के बाद क्लिनिकल असर कायम नहीं रहा, जिससे लगता है कि हर साल प्री-सीज़नल कोर्स ज़रूरी हो सकता है। हालांकि, एक प्रोस्पेक्टिव ऑब्जर्वेशनल अध्ययन में कुछ मरीज़ों में रोकने के बाद तीन से पाँच साल तक असर कायम रहने का ज़िक्र है।

विशेषज्ञ ठीक से नहीं जानते कि एलर्जी शॉट रोकने के बाद कब तक काम करते हैं; कुछ लोग लक्षण-मुक्त रहते हैं जबकि कुछ में कुछ साल में एलर्जी लौट आती है। इम्यूनोथेरेपी एलर्जिक राइनाइटिस वाले बच्चों में अस्थमा विकसित होने से भी रोक सकती है। सही इलाज जीवन की गुणवत्ता, स्कूल और काम की उत्पादकता सुधारता है।

जयपुर में एलर्जिक राइनाइटिस प्रबंधन का खर्च और बीमा

दवा इलाज का आम सालाना खर्च ₹2,000 से ₹15,000 तक होता है। इम्यूनोथेरेपी का पूरा कोर्स (तीन से पाँच साल) आमतौर पर ₹50,000 से ₹1,00,000 का होता है। अंतिम रकम इम्यूनोथेरेपी के प्रकार (SLIT या SCIT), इलाज किए गए एलर्जन की संख्या, एक्सट्रैक्ट या स्प्रे के ब्रांड और इलाज की अवधि पर निर्भर करती है।

एलर्जिक राइनाइटिस के मेडिकल खर्च बड़े हैं, और काम की उत्पादकता खोने से होने वाले बचाए जा सकने वाले खर्च उससे भी बड़े हैं। LNIT इंजेक्शन का खर्च और समय की बचत करता है क्योंकि यह घर पर खुद दिया जाता है।

जयपुर हॉस्पिटल RGHS, मा योजना, CGHS और प्राइवेट इंश्योरर व TPA के पैनल को स्वीकार करता है। इम्यूनोथेरेपी का कवरेज योजना और पॉलिसी के हिसाब से अलग होता है; कुछ प्लान एक्सट्रैक्ट और एडमिनिस्ट्रेशन कवर करते हैं, कुछ सिर्फ़ कंसल्टेशन और दवाएँ। अपने इंश्योरर से पूछें कि एलर्जी इलाज में क्या शामिल है।

अस्पताल का इंश्योरेंस डेस्क बेनिफिट वेरिफाई करने और क्लेम प्रोसेस करने में मदद कर सकता है। OPD विज़िट के लिए कोई एडवांस डिपॉजिट नहीं देना पड़ता। आप इन-हाउस फार्मेसी पर दवाओं का और हर इम्यूनोथेरेपी विज़िट का तय शेड्यूल के हिसाब से भुगतान करते हैं।

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