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जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी · जयपुर हॉस्पिटल

जयपुर में छोटे सर्जिकल प्रोसीजर

कोई गांठ, फोड़ा या कट जो ठीक नहीं हो रहा: हम जांच, स्पष्ट योजना और अनुमानित खर्च की जानकारी देते हैं।

  • 1991 से जयपुर की सेवा में (35 साल)
  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त
  • 24×7 इमरजेंसी और आईसीयू
  • कैशलेस: RGHS, मा योजना, CGHS + 22 बीमा कंपनियाँ
बाँह पर छोटी पट्टी थामे एक पुरुष, साथ में त्वचा पर साफ़ पट्टी
प्रोसीजर का समय
15 से 45 मिनट
एनेस्थीसिया
लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना)
रिकवरी
ज्यादातर मरीजों के लिए 1 से 3 दिनों में सामान्य दिनचर्या में वापसी (रिकवरी)
खर्च
₹3,000 से ₹25,000भारत में सामान्य सीमा; अनुमानित खर्च के लिए हमसे पूछें

एक गांठ जिसे आप बार-बार छूते हैं

गांठ, फोड़ा या कट जो ठीक नहीं हो रहा

आप त्वचा के नीचे एक सख्त गांठ महसूस कर सकते हैं, या छूने पर दर्द देने वाली ऐसी सूजन जिससे बैठने या चलने में परेशानी होती है। कोई कट कपड़ों में बार-बार उलझ सकता है। आप सोचते हैं कि क्या यह गंभीर है, क्या यह ठीक हो जाएगा, और काम से कितने दिनों की छुट्टी लेनी पड़ेगी।

  • गांठ जो आपको परेशान कर रही है

    सिस्ट या लिपोमा अक्सर नुकसानदेह नहीं होते, लेकिन वे बढ़ सकते हैं या उनमें दर्द हो सकता है। आप इसे दिखाना और हटवाना चाह सकते हैं।

  • दर्द देने वाला फोड़ा

    छूने पर दर्द और गर्माहट देने वाली सूजन से काम करना और सोना मुश्किल हो सकता है। छोटे से चीरे से मवाद निकालना एक आम विकल्प है जिस पर आपके सर्जन बात करेंगे।

  • कट जिसमें टांके चाहिए

    घाव की स्थिति के अनुसार, चोट लगने के कई घंटों बाद भी कट को बंद किया जा सकता है। सफाई और टांके लगाने से यह जल्दी भरता है।

  • पैर के अंगूठे में धंसा नाखून

    अंगूठे के किनारे पर दर्द, जो अक्सर जूतों या नाखून काटने की आदतों की वजह से होता है। हल्के मामलों में अन्य देखभाल से आराम मिल सकता है, और सर्जरी (ऑपरेशन) भी एक विकल्प है।

सिस्ट आमतौर पर त्वचा के नीचे हानिरहित उभार होते हैं, और जब तक वे आपको परेशान न करें, कई मामलों में इलाज की ज़रूरत नहीं होती।

जयपुर हॉस्पिटल क्यों

आप शायद इसे इसलिए टाल रहे हैं क्योंकि आपको पक्का नहीं पता कि इसमें कितना समय, काम से छुट्टी या खर्च लगेगा।

  • जयपुर में निजी रूप से संचालित, एनएबीएच मान्यता प्राप्त मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल।
  • फरवरी 1991 से जयपुर में मरीजों की देखभाल।
  • RGHS, मा योजना, CGHS और सूचीबद्ध बीमा कंपनियों के तहत कैशलेस सुविधा।

आपके इलाज का प्लान

हमारे साथ आपके पहले कदम

  1. 1 हमें कॉल करें या सीधे ओपीडी में आएं।
  2. 2 जांच के लिए जनरल और लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) सर्जन से मिलें।
  3. 3 फैसला लेने से पहले इलाज की योजना और अनुमानित खर्च समझें।
  4. 4 प्रोसीजर करवाएं और सलाह के अनुसार फॉलो-अप करें।

ऑपरेशन कैसे किया जाता है

आपके सर्जन आपके मामले के विकल्पों के बारे में बताएंगे। इनमें से ज्यादातर प्रोसीजर लोकल एनेस्थीसिया में किए जाते हैं और आमतौर पर 15 से 45 मिनट लेते हैं। इनमें से कई डे केयर होते हैं, और आप आमतौर पर उसी दिन घर जा सकते हैं।

  • चीरा लगाकर मवाद निकालना

    एक छोटे से चीरे के ज़रिए फोड़े से मवाद निकालना। आपके सर्जन बताएंगे कि क्या यह आपकी सूजन के लिए सही है।

  • एक्सिशन (निकालना)

    सिस्ट, लिपोमा या त्वचा की गांठ को निकालना। आमतौर पर निकाले गए हिस्से को जांच के लिए भेजा जाता है।

  • घाव में टांके लगाना और ड्रेसिंग

    कट की सफाई करके टांके लगाना, फिर घाव पर पट्टी बांधना और भरने के दौरान उसकी जांच करना।

  • अंगूठे के धंसे नाखून की सर्जरी

    नाखून का एक हिस्सा निकालना और नेल बेड का इलाज करना। आपके सर्जन विकल्पों पर चर्चा करेंगे।

मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं

  • 1991 35 साल से जयपुर की सेवा में
  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल
  • 3 जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कंसल्टेंट
  • 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू और एम्बुलेंस
  • 25 कैशलेस योजनाएँ और बीमा कंपनियाँ

शोध इन इलाजों के बारे में क्या बताते हैं

  • 2 से 4 हफ्ते

    अध्ययन (स्टडी) किए गए दिशानिर्देशों में बिना केमिकल लगाए नाखून का हिस्सा निकालने पर ठीक होने का अनुमानित समय।

  • 2 से 3 घंटे

    नाखून की सर्जरी के बाद लोकल एनेस्थीसिया का असर खत्म होने में आमतौर पर लगने वाला समय।

  • 3.6% और 2.8%

    एक क्लिनिक अध्ययन में छोटे प्रोसीजर के 30 दिनों के भीतर जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) विकसित होने वाले मरीजों का प्रतिशत।

अगर इलाज न कराया जाए

यदि फोड़ा या संक्रमित सिस्ट ऐसे ही छोड़ दिया जाए, तो संक्रमण (इन्फेक्शन) फैल सकता है और इलाज कठिन हो सकता है। दर्द देने वाली या बढ़ती हुई गांठ की जांच करवाना ज़रूरी है। घर पर कभी भी सिस्ट को दबाने या काटने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे संक्रमण या निशान बन सकते हैं। प्रोसीजर के बाद यदि लालिमा फैले, दर्द बढ़े या बदबू आए, तो तुरंत बताना चाहिए।

इलाज के बाद की जिंदगी

ज्यादातर लोग 1 से 3 दिनों में अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आते हैं। आपको पट्टी बदलने और फॉलो-अप विज़िट के स्पष्ट निर्देश मिलेंगे, और आप किसी भी समय सवाल पूछ सकते हैं।

  • अपनी दिनचर्या में वापसी

    प्रोसीजर और आपके काम के आधार पर, ज्यादातर लोग 1 से 3 दिनों में सामान्य काम शुरू कर देते हैं।

  • देखभाल जिसे समझना आसान है

    आपको आमतौर पर सिखाया जाएगा कि पट्टी कैसे बदलें और उस जगह को साफ और सूखा कैसे रखें।

  • फॉलो-अप विज़िट

    घाव ठीक होने की जांच के लिए और ज़रूरत पड़ने पर टांके कटवाने के लिए ज्यादातर लोगों का फॉलो-अप होता है।

हमारी टीम से मिलें

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर के बारे में मरीज़ों के सवाल

जयपुर हॉस्पिटल में छोटे प्रोसीजर और सर्जिकल ओपीडी के तहत किन समस्याओं की जांच की जाती है?

संक्षेप में

जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल की सर्जिकल ओपीडी में त्वचा और सॉफ्ट टिश्यू की उन समस्याओं को देखा जाता है जिनका इलाज लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) में छोटे प्रोसीजर से हो सकता है। इनमें फोड़ा (एब्सेस) जिनमें ड्रेनेज की जरूरत हो, सेबेशियस सिस्ट, लिपोमा, दूसरी बिनाइन गांठें, टांके लगाने लायक कट, और अंदर की तरफ बढ़े नाखून शामिल हैं। सर्जन जगह को देखते हैं, संक्रमण (इन्फेक्शन) के लक्षण जांचते हैं, और तय करते हैं कि डे-केयर प्रोसीजर ठीक रहेगा या नहीं।

विस्तार से

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर में एक तय समूह की स्थितियां आती हैं। अध्ययन (स्टडी) के मुताबिक सॉफ्ट टिश्यू मास एक्सिजन, फोड़े का चीरा और ड्रेनेज, स्किन लेशन एक्सिजन, स्किन टैग हटाना, और लिम्फ नोड एक्सिजन आम छोटी सर्जरी हैं।

अंदर बढ़े नाखून की सर्जरी मध्यम से गंभीर केस में की जाती है जब बिना सर्जरी के उपाय — जैसे जूते बदलना, भिगोना, कॉटन विक, गटर स्प्लिंट, या नेल ब्रेस — काम न आएं।

सिस्ट जो दर्द दें, संक्रमित हों, मूवमेंट रोकें, या चिंता दें, उन्हें निकालने के लिए चुना जाता है। लिपोमा बिनाइन फैटी गांठें हैं जिन्हें छोटे चीरों से निकाला जाता है।

ये सब आमतौर पर लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) में होते हैं और 15 से 45 मिनट लगते हैं।

एक आम धारणा

कई लोगों को लगता है कि हर गांठ के लिए बड़ी सर्जरी या लंबा अस्पताल रहना पड़ता है।

असल में क्या होता है

असल में इनमें से ज्यादातर स्थितियां 15 से 45 मिनट में निपट जाती हैं और आप उसी दिन घर जाते हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अगर आपके पास कोई गांठ, सूजन, न भरने वाला घाव, या दर्द वाला नाखून है, तो जयपुर हॉस्पिटल में सर्जिकल ओपीडी कंसल्टेशन बुक करें। सर्जन आपकी जांच करेंगे, विकल्प समझाएंगे, और जरूरत हो तो प्रोसीजर तय करेंगे। ज्यादातर मरीज उसी दिन घर जाते हैं और एक से तीन दिन में सामान्य काम पर लौट आते हैं।

डॉक्टर कैसे तय करेंगे कि छोटे सर्जिकल प्रोसीजर से पहले मुझे कौन से टेस्ट चाहिए?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में जयपुर के सर्जन टेस्ट का फैसला गांठ या घाव के प्रकार, आपकी मेडिकल हिस्ट्री और प्लान की गई एनेस्थीसिया के आधार पर करते हैं। लोकल एनेस्थीसिया वाले ज्यादातर छोटे प्रोसीजर के लिए रूटीन खून की जाँच ज़रूरी नहीं होती। टेस्ट तभी लिखे जाते हैं जब जाँच या हिस्ट्री से ज़रूरत लगे, जैसे फोड़े (एब्सेस) के लिए इन्फेक्शन मार्कर, गहरी गांठ के लिए इमेजिंग, या खून पतला करने की दवा ले रहे हों तो कोएगुलेशन स्टडी।

विस्तार से

सबूत दिखाते हैं कि प्रोवाइडर साइट और हिस्ट्री देखकर डायग्नोसिस कन्फर्म करता है। सतही सिस्ट या लिपोमा के लिए क्लिनिकल एग्जामिनेशन अक्सर काफी होता है। अगर गांठ गहरी, बड़ी है या डायग्नोसिस पक्का नहीं है तो अल्ट्रासाउंड मांगा जा सकता है।

फोड़े के लिए व्हाइट सेल काउंट और CRP जैसे खून के टेस्ट इन्फेक्शन की गंभीरता बताते हैं। अगर आप एंटीकोगुलेंट ले रहे हैं या ब्लीडिंग डिसऑर्डर है तो कोएगुलेशन प्रोफाइल चेक होती है। घाव के लिए टिटेनस स्टेटस देखा जाता है। सर्जन गैर-ज़रूरी टेस्ट से बचते हैं ताकि डे-केयर सर्जरी आसान और किफायती रहे।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर किसी भी सर्जरी से पहले फुल पैनल ब्लड टेस्ट की उम्मीद करते हैं।

असल में क्या होता है

लोकल एनेस्थीसिया वाले डे-केयर प्रोसीजर में गैर-ज़रूरी टेस्ट खर्च और देरी बढ़ाते हैं, सेफ्टी नहीं सुधारते।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आपके कंसल्टेशन में सर्जन बताएंगे कि कोई टेस्ट चाहिए या नहीं और इन-हाउस लैब में करवा देंगे। ज्यादातर रिजल्ट कुछ घंटों में आ जाते हैं। क्लियर होने पर प्रोसीजर शेड्यूल हो जाता है, अक्सर उसी दिन। अपने हाल के टेस्ट रिपोर्ट साथ लाएं। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि आपके लिए सही प्लान बन सके।

फोड़ा (एब्सेस) ड्रेनेज, सिस्ट निकालना, या अंदर के नाखून की सर्जरी जैसे छोटे प्रोसीजर के बाद मुझे कब तक सुधार की उम्मीद करनी चाहिए?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में छोटे प्रोसीजर के बाद ज्यादातर मरीज़ 1 से 3 दिन में सामान्य गतिविधि पर लौट आते हैं। दर्द और सूजन आमतौर पर हल्की होती है। फोड़ा ड्रेनेज से जल्दी राहत मिलती है। सिस्ट या गांठ निकालने का घाव आकार के हिसाब से दिनों से हफ्तों में भरता है। अंदर के नाखून की सर्जरी में तकनीक के अनुसार पूरी तरह भरने में 2 से 12 हफ्ते लगते हैं।

विस्तार से

प्रोटोकॉल के तथ्य कहते हैं कि ज्यादातर मरीज़ों की सामान्य गतिविधि में रिकवरी 1 से 3 दिन में होती है।

प्रमाण दिखाते हैं कि बिना टांकों वाले छोटे सिस्ट कुछ दिनों से एक-दो हफ्ते में भरते हैं, जबकि बड़े एक्सिज़न में कई हफ्ते लग सकते हैं।

अंदर के नाखून के लिए, बिना केमिकल मैट्रिक्सेक्टॉमी के आंशिक नाखून निकालने पर 2 से 4 हफ्ते में भरता है; फिनोल के साथ पूरा निकालने पर 8 से 12 हफ्ते। 7 से 10 दिन पर हरा या पीला डिस्चार्ज सामान्य भरना है, मवाद नहीं। सर्जिकल टीम हर चरण में आपका मार्गदर्शन करती है।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर एक हफ्ते पर पीला डिस्चार्ज देख चिंता करते हैं।

असल में क्या होता है

वह सामान्य भरना है, संक्रमण नहीं। असली संक्रमण में फैलती लाली, बढ़ता दर्द, बदबू, या बुखार होता है। फ़र्क जानने से बेवजह घबराहट बचती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

घाव को साफ़ और सूखा रखें, ड्रेसिंग के निर्देश मानें, और भारी व्यायाम तब तक न करें जब तक छूट न मिले। बिना पर्ची की दर्द की दवा मदद कर सकती है।

फॉलो-अप विज़िट आमतौर पर 7 से 10 दिन पर टांके निकालने और घाव जांच के लिए तय होती है। जयपुर हॉस्पिटल से संपर्क करें अगर आपको फैलती लाली, बढ़ता दर्द, बदबू, या बुखार दिखे।

मैं कैसे तय करूं कि छोटे सर्जिकल प्रोसीजर के लिए सलाह लेनी चाहिए?

संक्षेप में

जब कोई गांठ, उभार या घाव दर्द दे, बढ़े, मूवमेंट रोके या संक्रमण के लक्षण दिखाए जैसे लाली, गर्मी या डिस्चार्ज, तब जयपुर हॉस्पिटल में सलाह लें। छोटे स्किन बदलाव जो आपको कॉस्मेटिकली परेशान करते हैं, वे भी हमारे सर्जिकल टीम से असेसमेंट कराने की वाजिब वजह हैं।

विस्तार से

सबूत दिखाते हैं कि कई सिस्ट हार्मलेस होते हैं और इलाज की ज़रूरत नहीं होती जब तक वे दर्दनाक, संक्रमित न हों या रोज़मर्रा के काम न रोकें। लिपोमा बिनाइन फैटी गांठ हैं जिन्हें सेफली निकाला जा सकता है अगर वे तकलीफ या चिंता दें।

फोड़ा (एब्सेस) में आमतौर पर ड्रेनेज चाहिए क्योंकि एंटीबायोटिक अकेले अक्सर पस कलेक्शन खत्म नहीं कर पाते। मीडियम से सीवियर इनग्रोन टोनेल को आमतौर पर सर्जिकल अप्रोच चाहिए दोबारा होने से रोकने के लिए।

गहरे, खुले या कई घंटे पुराने घाव भी साइट और कंटैमिनेशन के हिसाब से सेफली बंद किए जा सकते हैं। सर्जन साइज़, लोकेशन, लक्षण और आपकी सेहत देखकर सही माइनर प्रोसीजर बताते हैं।

एक आम धारणा

कई लोग इंतज़ार करते हैं कि सिस्ट या इनग्रोन नेल अपने आप ठीक हो जाए।

असल में क्या होता है

सबूत बताते हैं सिस्ट संक्रमित हो सकते हैं और इनग्रोन नेल प्रॉपर सर्जिकल ट्रीटमेंट के बिना अक्सर दोबारा होते हैं। घर पर ड्रेनेज करने से इन्फेक्शन और निशान का खतरा रहता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

जयपुर हॉस्पिटल में OPD कंसल्टेशन बुक करें क्लिनिकल एग्जामिनेशन के लिए। सर्जन आपकी मेडिकल हिस्ट्री देखेंगे, एरिया चेक करेंगे और बताएंगे कि लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) में डे-केयर प्रोसीजर सही है या नहीं।

ज्यादातर माइनर प्रोसीजर 15 से 45 मिनट लेते हैं और आप उसी दिन घर जाते हैं। नॉर्मल एक्टिविटी में रिकवरी आमतौर पर 1 से 3 दिन। विज़िट के दौरान अनुमानित खर्च पूछ लें।

सर्जन कैसे तय करेंगे कि ऑपरेशन ज़रूरी है या नहीं?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में सर्जन क्लिनिकल जांच, आपके लक्षण, घाव का आकार और जगह, और यह देखकर तय करते हैं कि क्या उससे दर्द, संक्रमण (इन्फेक्शन), कामकाज में रुकावट या दिखने की चिंता हो रही है। वे आपकी मेडिकल हिस्ट्री और खून पतला करने या भरने पर असर डालने वाली दवाएं भी देखते हैं।

विस्तार से

सिस्ट (गांठ) के लिए, गाइडलाइन कहती हैं कि उन्हें निकालें अगर वे दर्द दें, हिलने-डुलने में रोकें, संक्रमित हों या परेशानी दें। कुछ छोटे बिना लक्षण वाले सिस्ट को बस देखा जा सकता है।

लिपोमा तब निकाले जाते हैं जब उनसे तकलीफ हो या जांच के लिए ज़रूरी हों। फोड़ा (एब्सेस) में अक्सर ड्रेनेज (मवाद निकालना) करना पड़ता है क्योंकि केवल एंटीबायोटिक काफी नहीं होते।

अंदर घुसा नाखून (इनग्रोन टोनेल) में सर्जरी तब होती है जब दूसरे इलाज फेल हों या दोबारा होने का डर हो। घाव की गहराई, गंदगी, चोट लगे कितना समय हुआ और कौन से अंग शामिल हैं, यह सब देखा जाता है।

सर्जन नतीजे समझाते हैं, बिना ऑपरेशन वाले विकल्प बताते हैं जहां मुमकिन हो, और तभी प्रोसीजर सुझाते हैं जब फायदा, लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) और छोटी सर्जरी (ऑपरेशन) के छोटे जोखिम से ज़्यादा हो।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ हर गांठ का ऑपरेशन चाहते हैं या बिल्कुल नहीं चाहते।

असल में क्या होता है

सर्जन सबूत पर चलते हैं: कई सिस्ट बस देखे जा सकते हैं, लेकिन फोड़ा (एब्सेस) में ड्रेनेज ज़रूरी है, और बार-बार होने वाले अंदर घुसे नाखून में नेल सर्जरी चाहिए। फैसला मिलकर होता है, अपने आप नहीं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

जयपुर हॉस्पिटल में ओपीडी कंसल्टेशन लें। सर्जन आपकी जांच करेंगे, वजह समझाएंगे और प्रोसीजर के स्टेप, एनेस्थीसिया (बेहोशी), रिकवरी (ठीक होने) का समय और खर्च बताएंगे। आप सवाल पूछ सकते हैं और फैसला लेने के लिए समय ले सकते हैं।

ज़्यादातर छोटे प्रोसीजर डे-केयर में लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) से होते हैं, 15 से 45 मिनट लगते हैं, और 1 से 3 दिन में सामान्य काम शुरू हो जाता है।

कौन से लक्षण होने पर मुझे छोटी सर्जिकल समस्या के लिए स्पेशलिस्ट को दिखाना चाहिए?

संक्षेप में

आपको जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल के स्पेशलिस्ट को दिखाना चाहिए अगर आपको कोई गांठ बढ़ती, दर्द करती, या रूप बदलती दिखे; सूजन लाल, गर्म, या मवाद (पस) छोड़ रही हो; कट गहरा, खुला, या खून न रुके; या नाखून का किनारा त्वचा में धंसा हो और दर्द, लाली, या डिस्चार्ज हो। ये संकेत बताते हैं कि समस्या को छोटे प्रोसीजर की जरूरत हो सकती है।

विस्तार से

सबूत बताते हैं कि सिस्ट की जांच तब करनी चाहिए जब वे दर्द दें, मूवमेंट असर डालें, संक्रमित (इन्फेक्टेड) हों, या चिंता दें। लिपोमा आमतौर पर हानिरहित होते हैं लेकिन निकालने पड़ सकते हैं अगर वे बढ़ें या आस-पास की संरचना पर दबाव डालें।

फोड़े (एब्सेस) आमतौर पर धड़कते दर्द, सूजन, गर्मी, और कभी-कभी बुखार के साथ आते हैं। अंदर बढ़े नाखून अक्सर बड़े पैर के अंगूठे को असर करते हैं और नेल फोल्ड के साथ दर्द, लाली, और डिस्चार्ज देते हैं।

घाव जो गहरे हों, जिनमें विदेशी चीज हो, या 18 घंटे से पुराने हों, उन्हें भी बंद किया जा सकता है लेकिन संक्रमण (इन्फेक्शन) के खतरे और टेटनस स्टेटस के लिए जांच जरूरी है। कोई भी लेशन जो तेजी से बदले या खून बहाए, उसे जल्दी दिखाना चाहिए।

एक आम धारणा

लोग अक्सर तब तक इंतजार करते हैं जब तक गांठ बहुत बड़ी न हो जाए या फोड़ा (एब्सेस) न फूट जाए।

असल में क्या होता है

पहले दिखाने से इलाज सरल होता है, संक्रमण (इन्फेक्शन) फैलने का खतरा कम होता है, और भरना जल्दी होता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अगर इनमें से कोई लक्षण हैं, तो जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन तय करें। सर्जन जगह देखेंगे, तय करेंगे कि प्रोसीजर चाहिए या नहीं, और स्टेप्स समझाएंगे। ज्यादातर छोटे प्रोसीजर उसी दिन या जल्द ही तय होते हैं। पुरानी रिपोर्ट या दवाओं की लिस्ट साथ लाएं।

मेरे टेस्ट रिजल्ट छोटे सर्जिकल प्रोसीजर के लिए मेरा केयर प्लान कैसे बदलेंगे?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में जयपुर के टेस्ट रिजल्ट सर्जन को डायग्नोसिस कन्फर्म करने, इन्फेक्शन की गंभीरता आंकने, ब्लीडिंग रिस्क चेक करने और लोकल एनेस्थीसिया के लिए फिटनेस पक्की करने में मदद करते हैं। अगर रिजल्ट में एक्टिव इन्फेक्शन दिखे तो ड्रेनेज से पहले एंटीबायोटिक शुरू हो सकती है। असामान्य कोएगुलेशन में दवा एडजस्टमेंट या हीमेटोलॉजी ओपिनियन चाहिए। इमेजिंग में असामान्य गांठ दिखे तो प्रोसीजर सिंपल एक्सिजन से बदलकर वाइडर एक्सिजन या रेफरल हो सकता है।

विस्तार से

सबूत बताते हैं कि प्रोवाइडर साइट और हिस्ट्री देखकर डायग्नोसिस कन्फर्म करता है। अल्ट्रासाउंड सिस्ट, लिपोमा या वैस्कुलर लेशन में फर्क बता सकता है, जिससे सर्जिकल अप्रोच बदलती है।

खून के टेस्ट में बढ़े इन्फ्लेमेटरी मार्कर फोड़े के ड्रेनेज की ज़रूरत बताते हैं और एंटीबायोटिक चुनने में मदद करते हैं। कोएगुलेशन की गड़बड़ी में प्रोसीजर से पहले ब्लड थिनर रोकने या ब्रिजिंग की ज़रूरत हो सकती है।

अगर इमेजिंग में गांठ संदिग्ध लगे तो सर्जन फॉर्मल एक्सिजन विथ मार्जिन प्लान कर सकता है या स्पेशलिस्ट क्लिनिक रेफर कर सकता है। नॉर्मल रिजल्ट में प्लान्ड डे-केयर प्रोसीजर तय समय पर होता है।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ समझते हैं टेस्ट बस फॉर्मेलिटी हैं।

असल में क्या होता है

असल में, हाई INR या संदिग्ध अल्ट्रासाउंड जैसा अनएक्सपेक्टेड रिजल्ट सीधे आपकी सेफ्टी के लिए प्रोसीजर का टाइम या टाइप बदल देता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सर्जन आपके साथ रिजल्ट डिस्कस करेंगे और ज़रूरत पड़ने पर प्लान एडजस्ट करेंगे। ज्यादातर एडजस्टमेंट मामूली होते हैं, जैसे दवा के टाइमिंग में बदलाव या छोटा एंटीबायोटिक कोर्स। प्रोसीजर की तारीख से पहले आपको किसी भी बदलाव की जानकारी दे दी जाएगी। अपने रिपोर्ट जयपुर हॉस्पिटल के कंसल्टेशन में लाएं ताकि टीम आपका केयर प्लान जल्दी फाइनल कर सके।

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर के बाद लक्षण बने रहें या बिगड़ें तो मुझे क्या करना चाहिए?

संक्षेप में

अगर आपके छोटे सर्जिकल प्रोसीजर के बाद लक्षण बने रहें या बिगड़ें, तो जयपुर हॉस्पिटल से तुरंत संपर्क करें। चेतावनी के संकेतों में लाली या सूजन में खास बढ़ोतरी, लाली का अंग की ओर बढ़ना, दर्द बढ़ना, घाव से बदबू, या फ्लू जैसे लक्षण जैसे बुखार शामिल हैं। ये संक्रमण का इशारा हो सकते हैं जिसे चिकित्सा ध्यान की ज़रूरत है।

विस्तार से

प्रमाण दिखाते हैं कि प्रोसीजर के बाद जटिलताएं (कॉम्प्लिकेशन) कम प्रतिशत मरीज़ों में होती हैं। सामान्य भरने में हल्का दर्द, सूजन, और सात से दस दिन के आसपास हरा-पीला डिस्चार्ज शामिल है, जो मवाद नहीं है।

लेकिन अगर लाली घाव के किनारों से आगे फैले, दर्द घटने के बजाय बढ़े, या बुखार आए, तो ये सामान्य नहीं हैं। अंदर के नाखून की सर्जरी के लिए, आपको लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) के बाद 24 घंटे गाड़ी नहीं चलानी चाहिए।

आपको निर्देश के मुताबिक ड्रेसिंग बदलते रहना चाहिए, आमतौर पर हर दो दिन, और बीच में जगह सूखी रखनी चाहिए। डिस्चार्ज को छुएं या पोंछें नहीं, क्योंकि इससे भरना लंबा खिंच सकता है। पैर भिगोना, देर तक डुबोना, और जगह को रगड़ने से बचें।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर सामान्य भरने वाले डिस्चार्ज को संक्रमण समझ लेते हैं, या यह सोचकर इंतज़ार करते हैं कि अपने आप ठीक हो जाएगा।

असल में क्या होता है

असली संक्रमण में देरी से गहरे ऊतक तक बात पहुंच सकती है। सामान्य पीले डिस्चार्ज और संक्रमण के संकेतों का फ़र्क जानने से आप सही समय पर कदम उठा पाते हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अगर कोई चेतावनी संकेत दिखे तो हॉस्पिटल कॉल करें या इमरजेंसी विभाग जाएं। जयपुर हॉस्पिटल का 24×7 इमरजेंसी विभाग तत्काल चिंताओं के लिए उपलब्ध है। लक्षण बिगड़ रहे हों तो तय फॉलो-अप का इंतज़ार न करें। संक्रमण का जल्दी इलाज गंभीर समस्याएं रोकता है।

अपना फॉलो-अप अपॉइंटमेंट रखें, आमतौर पर सात से दस दिन में, टांके निकालने और भरने के आकलन के लिए। जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श बुक करें ताकि प्रोसीजर से पहले पूरा आफ्टरकेयर प्लान जान सकें।

मैं कैसे तय करूं कि फोड़ा (एब्सेस) के चीरा और ड्रेनेज के लिए सलाह लेनी चाहिए?

संक्षेप में

जब आपको दर्दनाक, सूजी, गर्म गांठ दिखे जिससे पस या फ्लूइड निकल रहा हो, खासकर अगर बुखार भी हो या तबीयत खराब लगे, तब जयपुर हॉस्पिटल में सलाह लें। फोड़े (एब्सेस) में आमतौर पर लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) में छोटा चीरा लगाकर पस निकालना पड़ता है और प्रेशर कम करना पड़ता है।

विस्तार से

फोड़ा (एब्सेस) इन्फेक्शन से बना पस का कलेक्शन है। सबूत बताते हैं कि चीरा और ड्रेनेज स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट है क्लिनिकल रिजॉल्यूशन के लिए। एक बार कैविटी बन जाने पर एंटीबायोटिक अकेले अक्सर काफी नहीं होती। प्रोसीजर 15 से 45 मिनट लेता है।

ज्यादातर साइट पर एपिनेफ्रिन वाला लोकल एनेस्थेटिक सेफ है। इंजेक्शन में हल्की चुभन महसूस हो सकती है लेकिन ड्रेनेज के दौरान दर्द नहीं होना चाहिए। प्रोसीजर के बाद घाव पर ड्रेसिंग होती है और आप उसी दिन घर जाते हैं।

नॉर्मल एक्टिविटी में रिकवरी आमतौर पर 1 से 3 दिन। फैलते संक्रमण के लक्षण जैसे बढ़ती लाली, ट्रैकिंग लाइन, तेज दर्द, बदबू या फ्लू जैसे लक्षण हों तो फ़ौरन रिव्यू कराएं।

एक आम धारणा

कुछ लोग सिर्फ एंटीबायोटिक पर भरोसा करते हैं या इंतज़ार करते हैं कि फोड़ा (एब्सेस) अपने आप फूट जाए।

असल में क्या होता है

सबूत बताते हैं बनी हुई एब्सेस कैविटी को आमतौर पर चीरा और ड्रेनेज चाहिए प्रॉपर हीलिंग के लिए। देर करने से इन्फेक्शन गहरा या खून में फैल सकता है। घर पर दबाने से बैक्टीरिया टिश्यू में और अंदर जा सकते हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

जयपुर हॉस्पिटल में सर्जिकल OPD जाएं असेसमेंट के लिए। मौजूदा दवाओं की लिस्ट साथ लाएं। सर्जन फोड़े (एब्सेस) की जांच करेंगे, ड्रेनेज प्रोसीजर समझाएंगे और ₹3,000 से ₹25,000 की आम रेंज में अनुमानित खर्च बताएंगे। आपको ड्रेसिंग निर्देश और फॉलो-अप प्लान मिलेगा। ज्यादातर मरीज़ 1 से 3 दिन में रूटीन शुरू कर देते हैं।

क्या मैं बिना ऑपरेशन वाले विकल्प या कम इनवेसिव तरीके पर बात कर सकता हूँ?

संक्षेप में

हाँ, जयपुर हॉस्पिटल में आप सर्जिकल ओपीडी कंसल्टेशन के दौरान सर्जन से हमेशा बिना ऑपरेशन वाले या कम इनवेसिव विकल्पों पर बात कर सकते हैं। सर्जन बताएंगे कि कब इंतज़ार करके देखना, दवाएं, ड्रेसिंग या छोटे ऑफिस प्रोसीजर, औपचारिक सर्जरी (ऑपरेशन) के बजाय सही विकल्प हैं।

विस्तार से

सबूत कई हालत में बिना ऑपरेशन वाले इलाज का समर्थन करते हैं। छोटे बिना लक्षण वाले सिस्ट को सुरक्षित देखा जा सकता है।

हल्के से मध्यम अंदर घुसे नाखून (इनग्रोन टोनेल) अक्सर जूते बदलने, भिगोने, स्टेरॉयड क्रीम, कॉटन विक या गटर स्प्लिंट से ठीक हो जाते हैं।

कम तनाव वाली जगह के सतही घाव टिश्यू ग्लू या चिपकने वाली स्ट्रिप्स से बंद हो सकते हैं, टांके की ज़रूरत नहीं।

छोटे फोड़े (एब्सेस) जो पक चुके हों, कभी-कभी सुई से निकालकर और एंटीबायोटिक से ठीक किए जा सकते हैं, हालांकि बड़े में चीरा और ड्रेनेज ही मानक है। सर्जन आपका खास केस देखेंगे, हर तरीके के फायदे-नुकसान बताएंगे, और आपकी पसंद का सम्मान करेंगे। आपकी सहमति के बिना कोई प्रोसीजर नहीं किया जाता।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ मानते हैं कि गांठ का मतलब हमेशा सर्जरी (ऑपरेशन) है।

असल में क्या होता है

सबूत दिखाते हैं कई सिस्ट को इलाज नहीं चाहिए। अंदर घुसे नाखून अक्सर साधारण देखभाल से ठीक होते हैं। छोटे घाव को सिर्फ ग्लू या स्ट्रिप्स चाहिए। सर्जन बताएंगे कि कम इनवेसिव विकल्प क्यों बेहतर हो सकता है या सर्जरी क्यों फिर भी ज़रूरी है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

जयपुर हॉस्पिटल में सर्जिकल ओपीडी अपॉइंटमेंट बुक करें। पुरानी रिपोर्ट और दवाओं की लिस्ट लाएं। सर्जन सभी सही विकल्प बताएंगे, बिना ऑपरेशन वाले भी, और अगर प्रोसीजर चुना जाए तो ₹3,000 से ₹25,000 की आम रेंज में खर्च का अनुमान देंगे। आप मिलकर प्लान तय करें।

सवाल-जवाब

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर: सवाल और जवाब

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  • ओपीडी में जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जन से परामर्श
  • आपके स्कैन और रिपोर्ट की समीक्षा, और ज़रूरत पड़ने पर अस्पताल में ही जांच (लैब, एक्स-रे और इमेजिंग)
  • आसान शब्दों में समझाए गए आपके विकल्प, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या आपको वाकई सर्जरी की ज़रूरत है
  • फैसला लेने से पहले अनुमानित खर्च की जानकारी
  • RGHS, मा योजना, CGHS और सूचीबद्ध बीमा (इंश्योरेंस) कंपनियों और टीपीए के तहत कैशलेस इलाज में मदद
  • आपके इलाज के बाद फॉलो-अप विज़िट
अपॉइंटमेंट का अनुरोध करें WhatsApp पर पूछें

पूरी जानकारी

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर: ज़रूरी जानकारी

जयपुर में छोटे सर्जिकल प्रोसीजर: ये क्या होते हैं

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर क्या होते हैं
फोड़े से मवाद निकालना
द्रव बाहर निकालने के लिए छोटा चीरा
सिस्ट या लाइपोमा निकालना
त्वचा के नीचे की गांठ को काटकर निकालना
अंदर धंसे नाखून की सर्जरी
नाखून का कुछ हिस्सा या पूरा नाखून निकालना

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर (माइनर सर्जिकल प्रोसीजर) त्वचा पर या त्वचा के ठीक नीचे की छोटी समस्याओं के लिए किए जाने वाले छोटे प्रोसीजर हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • फोड़ा (एब्सेस) से मवाद निकालना
  • सिस्ट या लाइपोमा निकालना
  • कटे हुए घाव पर टांके लगाना
  • अंदर की तरफ बढ़े नाखून (इनग्रोन टोनेल) का इलाज करना

जयपुर हॉस्पिटल में, इन प्रोसीजर में आमतौर पर 15 से 45 मिनट लगते हैं और ये लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) देकर किए जाते हैं। ज्यादातर लोग उसी दिन घर चले जाते हैं।

सिस्ट त्वचा के नीचे द्रव (पानी जैसा तरल) से भरी एक गांठ होती है। सिस्ट आपके शरीर में कहीं भी हो सकती है। ज्यादातर सिस्ट हानिरहित होती हैं और कैंसर नहीं होती हैं। कुछ सिस्ट अपने आप ठीक हो जाती हैं, जबकि अन्य वैसी ही बनी रहती हैं या धीरे-धीरे बड़ी होती जाती हैं। एक छोटे प्रोसीजर के रूप में लाइपोमा को निकाला जा सकता है।

एक छोटे चीरे के ज़रिए फोड़े से मवाद निकाला जा सकता है। यदि सिस्ट में द्रव भर जाता है, तो उसे भी एक छोटे चीरे के ज़रिए निकाला जा सकता है। अंदर की तरफ बढ़ा नाखून एक ऐसी समस्या है जहाँ नाखून का किनारा त्वचा की परत में धंस जाता है और जलन या परेशानी पैदा करता है।

पैर का अंगूठा इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। नाखून की सर्जरी (ऑपरेशन) से समस्या वाले नाखून का कुछ हिस्सा या पूरा नाखून निकाल दिया जाता है।

उस जगह को सुन्न करने के लिए लोकल एनेस्थीसिया का उपयोग किया जाता है। जब इंजेक्शन दिया जाता है, तो आपको हल्की सी चुभन या टीस महसूस हो सकती है। उसके बाद, प्रोसीजर के दौरान आपको दर्द महसूस नहीं होना चाहिए। नाखून की सर्जरी के लिए, सुन्नपन आमतौर पर लगभग 2 से 3 घंटे में खत्म हो जाता है।

त्वचा की गांठ या अंदर धंसे नाखून के लक्षण और चेतावनी के संकेत

छोटे प्रोसीजर के बाद संक्रमण के संकेत
  • उस जगह से बदबू आना
  • फ्लू जैसे लक्षण
इमरजेंसी? 0141 255 1500 पर कॉल करें, 24×7

सिस्ट अक्सर त्वचा के नीचे छोटी गांठ जैसी महसूस होती है और इससे कोई परेशानी नहीं होती है। यदि सिस्ट में दर्द हो, इससे आपकी गतिविधि पर असर पड़े, या आप असहज महसूस करें, तो अपने कंसल्टेंट / सर्जन से मिलें।

यदि सिस्ट तेजी से बढ़ती है, दर्द पैदा करती है, या आपको परेशान करने लगती है, तब भी सलाह लें। यदि सिस्ट में संक्रमण (इन्फेक्शन) हो जाए, तो उसके इलाज की जरूरत होती है।

अंदर धंसा हुआ नाखून दर्दनाक हो सकता है। पैर का अंगूठा सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। नाखून का किनारा त्वचा में धंस सकता है और जलन पैदा कर सकता है। नाखून के आसपास लालिमा, सूजन या दर्द में बड़ा इजाफा होने पर ध्यान देने की जरूरत होती है।

किसी भी छोटे प्रोसीजर के बाद, यदि आपको संक्रमण के संकेत दिखाई दें, तो उसी दिन अपने सर्जन से संपर्क करें। इन संकेतों में अंगूठे, पैर या टांग में ऊपर की ओर लालिमा का फैलना, उस जगह से बदबू आना, या फ्लू जैसे लक्षण शामिल हैं।

नाखून की सर्जरी के बाद, लगभग 7 से 10 दिनों में हरा या पीला स्राव दिखाई दे सकता है। कुछ लोग इसे गलती से मवाद या संक्रमण समझ लेते हैं, लेकिन घाव भरने के दौरान ऐसा हो सकता है। यदि आपको पक्का यकीन न हो, तो अपने सर्जन से पूछें।

छोटी सर्जिकल समस्याओं के कारण और जोखिम कारक

कारण और जोखिम कारक
अंदर धंसे नाखून
नाखून की देखभाल की आदतों और जूतों से जुड़े
सिस्ट दोबारा हो सकती हैं
यदि द्रव निकालने के बाद थैली रह जाती है
दवाएं और सप्लीमेंट्स
कुछ से अतिरिक्त रक्तस्राव हो सकता है

अंदर धंसे हुए नाखून अक्सर नाखून की देखभाल की आदतों और जूतों से जुड़े होते हैं। ये युवा पुरुषों में अधिक आम हैं। प्राइमरी केयर में पैर की हर 100 समस्याओं में से लगभग 20 समस्याएं अंदर धंसे हुए नाखून की होती हैं। पैर का अंगूठा सबसे अधिक प्रभावित होता है। आपके द्वारा पहने जाने वाले जूते इस समस्या को बढ़ा सकते हैं।

कुछ सिस्ट दोबारा हो जाती हैं, खासकर द्रव निकालने के बाद। यदि थैली अंदर ही रह जाती है, तो समय के साथ सिस्ट में फिर से द्रव भर सकता है। सिस्ट शरीर में कहीं भी हो सकती है। कुछ छोटी बनी रहती हैं, जबकि अन्य धीरे-धीरे बड़ी होती जाती हैं।

कुछ दवाएं और सप्लीमेंट्स अतिरिक्त रक्तस्राव का कारण बन सकते हैं। आप जो कुछ भी लेते हैं, उसके बारे में अपने सर्जन को बताएं।

जयपुर हॉस्पिटल में गांठ या छोटी सर्जिकल समस्या की जांच कैसे होती है

आपके सर्जन प्रोसीजर से पहले आपकी मेडिकल हिस्ट्री जानने और उस जगह को देखने के लिए आपसे मिलेंगे। सिस्ट के मामले में, यह पक्का करने के लिए होता है कि गांठ सिस्ट ही है। अपने सर्जन को उन सभी दवाओं और सप्लीमेंट्स के बारे में बताएं जो आप लेते हैं, क्योंकि कुछ से अधिक रक्तस्राव हो सकता है। आपके सर्जन प्रोसीजर से पहले आपसे कुछ दवाएं बंद करने या बदलने के लिए कह सकते हैं।

आपको संभवतः पिछली रात से खाना बंद करने की जरूरत नहीं होगी। सिस्ट निकालना आमतौर पर डे केयर के रूप में किया जाता है, इसलिए आप उसी दिन घर जा सकते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में, छोटे प्रोसीजर आमतौर पर डे केयर में होते हैं।

सिस्ट के लिए, इसके चरण इस बात पर निर्भर करते हैं कि इसे किस तरह निकाला जाना है, इसका आकार क्या है और सिस्ट कहाँ पर है। आपके सर्जन योजना समझाएंगे और आपके सवालों के जवाब देंगे। सवाल पूछना और अपना समय लेना बिल्कुल ठीक है।

अंदर धंसे नाखून के लिए, मध्यम और गंभीर मामलों में सर्जिकल उपचार का उपयोग किया जाता है। गांठ के लिए, आपके सर्जन ऊतक को निकाल सकते हैं और जांच के लिए भेज सकते हैं। आपके सर्जन सलाह देंगे कि आपकी समस्या के लिए कौन सा प्रोसीजर सही रहेगा।

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर के लिए उपचार के विकल्प और सर्जरी की सलाह कब दी जाती है

अंदर धंसे नाखून के लिए बिना सर्जरी वाले विकल्प
  1. जूते-चप्पल बदलें ऐसे जूते पहनें जो अंगूठे पर दबाव न डालें
  2. पसीने या फंगल संक्रमण का इलाज करें अंतर्निहित कारणों के लिए चिकित्सकीय उपचार
  3. अंगूठे को भिगोएं नाखून को नरम करने के लिए गुनगुने पानी में भिगोना
  4. स्टेरॉयड क्रीम लगाएं नेल फोल्ड पर सूजन को कम करती है

अंदर धंसे हुए नाखून के हल्के से मध्यम मामलों का इलाज आमतौर पर सर्जरी के बिना किया जाता है।

विकल्पों में शामिल हैं:

  • जूते-चप्पल बदलना
  • अत्यधिक पसीने या नाखून के फंगल इन्फेक्शन का इलाज करना
  • पैर के अंगूठे को भिगोना
  • स्टेरॉयड क्रीम लगाना
  • नाखून के किनारे के नीचे रुई या डेंटल फ्लॉस रखना

गटर स्प्लिंट नाखून को त्वचा से अलग कर सकता है और दर्द से तुरंत राहत दे सकता है। नाखून पर कॉटन कास्ट लगाना या नेल फोल्ड पर टेप लगाना भी मददगार हो सकता है। आपके सर्जन सलाह देंगे कि आपके लिए कौन सा विकल्प सही है।

जब समस्या मध्यम या गंभीर हो, तो सर्जरी की सलाह दी जा सकती है। सर्जरी का उद्देश्य नाखून और त्वचा की परत के बीच के संपर्क को हटाना है। सबसे आम ऑपरेशन नाखून के किनारे के हिस्से को निकालना है।

अध्ययन (स्टडी) में, नाखून को दोबारा बढ़ने से रोकने में बिना सर्जरी वाले इलाज की तुलना में सर्जरी अधिक असरदार थी। अध्ययनों में, नेल मैट्रिक्स (वह जगह जहाँ से नाखून बढ़ता है) को निकालने से नाखून के दोबारा होने की संभावना और कम हो गई।

बिना केमिकल के नाखून का हिस्सा निकालने के बाद, ठीक होने में 2 से 4 सप्ताह लग सकते हैं। केमिकल के साथ पूरा नाखून निकालने में 8 से 12 सप्ताह लग सकते हैं। नाखून को दोबारा बढ़ने से रोकने के लिए नेल बेड और मैट्रिक्स पर फिनोल केमिकल लगाया जाता है।

यदि सिस्ट छोटी है और आपको परेशान नहीं कर रही है, तो आपके सर्जन इस पर नज़र रखने का सुझाव दे सकते हैं। कुछ सिस्ट अपने आप ठीक हो जाती हैं। यदि सिस्ट में दर्द हो, गतिविधि प्रभावित हो, या आप असहज महसूस करें, तो इसे निकाला जा सकता है।

संक्रमण होने पर या अन्य समस्याओं की जांच के लिए भी इसे निकालने की सलाह दी जा सकती है। सिस्ट निकालने से संक्रमण की गंभीर समस्याओं से बचाव में मदद मिल सकती है। सिस्ट निकालने का निर्णय एक व्यक्तिगत पसंद है। घर पर कभी भी सिस्ट को फोड़ने या काटने की कोशिश न करें। इससे संक्रमण या निशान पड़ सकता है।

एक छोटे चीरे के ज़रिए फोड़े से मवाद निकाला जा सकता है। एक बड़े परीक्षण में, जब इलाज में एंटीबायोटिक जोड़ा गया, तो प्लेसीबो लेने वालों की तुलना में अधिक लोगों के फोड़े ठीक हुए। आपके सर्जन तय करेंगे कि आपको एंटीबायोटिक की जरूरत है या नहीं।

कटे हुए घाव को अक्सर टांकों से बंद किया जा सकता है। इसका उद्देश्य रक्तस्राव को रोकना और संक्रमण के जोखिम को बढ़ाए बिना निशान के रूप में अच्छा परिणाम पाना है। घाव के आधार पर, चोट लगने के 18 या उससे अधिक घंटे बाद भी घाव को बंद करना संभव हो सकता है।

नम घाव तेजी से भरता है, इसलिए ऐसी ड्रेसिंग का उपयोग किया जा सकता है जो घाव को नम रखे। यदि आवश्यक हो तो टिटनेस का इंजेक्शन दिया जाता है। घाव कहाँ है, इसके आधार पर टांके निकाले जाते हैं।

जिन जगहों पर त्वचा में ज्यादा खिंचाव नहीं होता, वहां स्किन ग्लू या चिपकने वाली पट्टियों का उपयोग किया जा सकता है।

सिस्ट निकालने के बाद, आपको हल्का दर्द या सूजन हो सकती है। आपके सर्जन दर्द की दवा का सुझाव दे सकते हैं जिसे आप मेडिकल स्टोर से खरीद सकते हैं। ज्यादातर लोग 1 से 3 दिनों में सामान्य गतिविधियों पर लौट आते हैं। लोकल एनेस्थीसिया के बाद आप 24 घंटे तक गाड़ी नहीं चला सकते हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में छोटे प्रोसीजर की तैयारी

जयपुर हॉस्पिटल में ज्यादातर छोटे प्रोसीजर आमतौर पर डे केयर के रूप में प्लान किए जाते हैं। आप आते हैं, प्रोसीजर करवाते हैं और उसी दिन घर चले जाते हैं। सिस्ट या गांठ निकालने के लिए, आपकी सर्जिकल टीम प्रोसीजर से पहले आपकी मेडिकल हिस्ट्री देखेगी और उस जगह की जांच करेगी। इस विज़िट का उपयोग प्रोसीजर, रिकवरी (ठीक होना) और खर्च के बारे में पूछने के लिए करें।

आप जो भी दवा और सप्लीमेंट लेते हैं, उसके बारे में अपने सर्जन को बताएं। कुछ से अतिरिक्त रक्तस्राव हो सकता है। आपके सर्जन प्रोसीजर से पहले आपसे कुछ दवाएं बंद करने या बदलने के लिए कह सकते हैं। अपने आप कोई भी दवा बदलने से पहले अपने सर्जन से पूछें।

सिस्ट निकालने के लिए, आपको संभवतः पिछली रात से खाना बंद करने की जरूरत नहीं होगी। यदि आपके सर्जन चाहते हैं कि आप खाली पेट रहें, तो टीम आपको साफ तौर पर बताएगी।

अपनी पुरानी रिपोर्ट और अपनी दवाओं की सूची साथ लाएं। लोकल एनेस्थीसिया के बाद आप 24 घंटे तक गाड़ी नहीं चला सकते हैं, इसलिए आपको घर ले जाने के लिए किसी परिजन या अटेंडेंट की व्यवस्था करें।

जयपुर हॉस्पिटल में इन-हाउस डायग्नोस्टिक लैब और इमेजिंग सेवा उपलब्ध है। आपके सर्जन तय करेंगे कि आपको किन जांचों की जरूरत है, और ये जांचें आमतौर पर अस्पताल में ही की जा सकती हैं।

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर कैसे किए जाते हैं

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर के आम विकल्पों में ड्रेनेज, एक्सीजन (गांठ निकालना), घाव की सिलाई और नाखून की सर्जरी (ऑपरेशन) शामिल हैं। आपके सर्जन आपकी समस्या के अनुसार सही तरीका चुनेंगे और उसके फायदे और सीमाएं समझाएंगे।

चीरा और ड्रेनेज। आपके सर्जन एक छोटा चीरा लगाकर फोड़े (एब्सेस) से मवाद या पानी बाहर निकाल देते हैं। फोड़े में चीरा लगाना और ड्रेनेज करना एक छोटा प्रोसीजर है।

एक्सीजन। आपके सर्जन सिस्ट, लिपोमा या त्वचा की गांठ को काटकर बाहर निकाल देते हैं। इस टिशू को जाँच के लिए भेजा जा सकता है। लिपोमा हटाना एक छोटा प्रोसीजर है, और यह 3 से 4 mm के छोटे चीरों से किया जाता है।

घाव की सिलाई और ड्रेसिंग। कटे हुए घाव के लिए, मकसद खून बहना रोकना और संक्रमण (इन्फेक्शन) का खतरा बढ़ाए बिना अच्छा कॉस्मेटिक परिणाम पाना होता है। घाव को देखकर, आपके सर्जन चोट लगने के 18 या उससे अधिक घंटे बाद भी टांके लगा सकते हैं।

नम या बंद ड्रेसिंग का उपयोग किया जा सकता है क्योंकि नम माहौल में घाव तेजी से भरते हैं। जरूरत पड़ने पर टिटनेस से बचाव का टीका दिया जाता है। टांके कब हटाए जाएंगे, यह घाव की जगह और विशेषज्ञ की राय व अनुभव पर निर्भर करता है।

अंदर धंसे नाखून (इंग्रोन टोनेल) की सर्जरी। नाखून की सर्जरी में समस्या वाले नाखून का एक हिस्सा या पूरा नाखून निकाला जाता है। एक आम तरीका नाखून के किनारे के हिस्से को निकालना है। आपके सर्जन नाखून के आधार (नेल बेड और मैट्रिक्स) पर फिनोल लगा सकते हैं, जिससे नाखून का वह हिस्सा दोबारा नहीं उगता। इसके लिए पहले लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) का इंजेक्शन देकर अंगूठे को सुन्न किया जाता है।

प्रोसीजर के दिन, उस जगह को साफ करके सुन्न किया जाता है। इंजेक्शन से आपको हल्की सी चुभन महसूस हो सकती है। इसके बाद, प्रोसीजर के दौरान आपको दर्द महसूस नहीं होना चाहिए। एनेस्थीसिया का असर लगभग 2 से 3 घंटे में खत्म हो जाता है। इस प्रोसीजर में आमतौर पर 15 से 45 मिनट लगते हैं। आप आमतौर पर उसी दिन घर जा सकते हैं।

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर के जोखिम और जटिलताएं

छोटे प्रोसीजर में जटिलताओं की दर
  • 3.6% रेजिडेंट क्लिनिक
  • 2.8% अटेंडिंग क्लिनिक

अध्ययन (स्टडी) बताते हैं कि सिस्ट निकालना सुरक्षित है और संभावित जोखिम बहुत कम होते हैं। अध्ययन लिपोमा सर्जरी को भी आमतौर पर सुरक्षित और बहुत कम जोखिम वाला बताते हैं।

प्रोसीजर के बाद आपको हल्का दर्द या सूजन हो सकती है। इन्फेक्शन होना संभव है। यदि आपको इन्फेक्शन के लक्षण दिखें तो अपने सर्जन से संपर्क करें।

लक्षणों में शामिल हैं:

  • लालिमा और सूजन का साफ तौर पर बढ़ना
  • अंगूठे, पैर या टांग में ऊपर की ओर लालिमा फैलना
  • दर्द का साफ तौर पर बढ़ना
  • बदबू आना
  • फ्लू जैसे लक्षण

नाखून की सर्जरी के बाद, 7 से 10 दिनों में हरा या पीला स्राव (पानी) निकल सकता है। कुछ लोग इसे गलती से मवाद या इन्फेक्शन समझ लेते हैं।

कुछ सिस्ट दोबारा हो जाते हैं, खासकर केवल ड्रेनेज के बाद। यदि सिस्ट की थैली अंदर रह जाती है, तो वह समय के साथ फिर से भर सकती है। अंदर धंसे नाखून के मामले में, नाखून के दोबारा उगने की थोड़ी संभावना रहती है। यदि इससे परेशानी हो, तो इसे अक्सर हल्की नियमित फाइलिंग या आगे के इलाज से संभाला जा सकता है।

छोटे प्रोसीजर के एक अध्ययन में पाया गया कि रेजिडेंट क्लिनिक के 3.6% मरीजों और अटेंडिंग क्लिनिक के 2.8% मरीजों में 30 दिनों के भीतर जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) देखी गई। दोनों समूहों के बीच कोई बड़ा अंतर नहीं था।

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर के बाद रिकवरी और देखभाल

छोटे प्रोसीजर के बाद ठीक होने का समय
  1. सामान्य कामकाज पर लौटना ज्यादातर प्रोसीजर के लिए 1 से 3 दिन
  2. बिना केमिकल के नाखून का आंशिक हिस्सा हटाना 2 से 4 सप्ताह में ठीक होता है
  3. केमिकल के साथ पूरा नाखून हटाना 8 से 12 सप्ताह में ठीक होता है
  4. नाखून का दोबारा उगना (यदि अनुमति हो) 18 महीने तक
  5. बिना टांके के छोटा सिस्ट निकालना कुछ दिन से दो सप्ताह
  6. टांके के साथ बड़ा सिस्ट निकालना कई सप्ताह से महीने

ज्यादातर मरीज 1 से 3 दिनों में सामान्य कामकाज पर लौट सकते हैं। सही समय प्रोसीजर और आपके ठीक होने की गति पर निर्भर करता है। जब तक आपके सर्जन अनुमति न दें, तब तक भारी व्यायाम या खेलों से बचें।

उस जगह को साफ और सूखा रखें, और अपने सर्जन के निर्देशों का पालन करें। नाखून की सर्जरी के बाद, घाव भरने के दौरान आप आमतौर पर अपनी ड्रेसिंग खुद बदलेंगे। एक सामान्य तरीका यह है कि इसे हर 2 दिन में बदलें और बीच के दिन इसे सूखा रखें।

जिस दिन आप ड्रेसिंग बदलते हैं, उस दिन नहाते समय उस जगह को गीला होने दे सकते हैं। खुद को सुखाएं, पुरानी ड्रेसिंग हटाएं, उस जगह को हवा में सूखने दें, फिर नई सूखी ड्रेसिंग लगाएं। घाव को न छुएं। पैर को पानी में डुबोकर न रखें, देर तक न भिगोएं और रगड़ें नहीं।

निकलने वाले स्राव को पोंछकर न हटाएं; सामान्य रूप से ड्रेसिंग जारी रखें। यह सूखकर पपड़ी बन जाएगा, और इसे पोंछने से घाव भरने में देरी हो सकती है।

यदि आपके सर्जन सलाह दें, तो आप दर्द की दवा ले सकते हैं।

नाखून की सर्जरी के लिए, बिना केमिकल के आंशिक नाखून हटाना आमतौर पर 2 से 4 सप्ताह में ठीक हो जाता है। केमिकल के साथ पूरा नाखून हटाना आमतौर पर 8 से 12 सप्ताह में ठीक होता है। यदि नाखून को दोबारा उगने दिया जाए, तो इसमें 18 महीने तक का समय लग सकता है।

यदि दोबारा उगने से रोकना हो, तो वह जगह सामान्य त्वचा से ढक जाती है जो समय के साथ थोड़ी सख्त हो जाती है।

सिस्ट निकालने के बाद, बिना टांके वाले छोटे सिस्ट के घाव कुछ दिनों से लेकर दो सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। बड़े चीरे वाले बड़े सिस्ट को पूरी तरह ठीक होने में कई सप्ताह या महीने भी लग सकते हैं। टांके हटाने और घाव की जांच के लिए 7 से 10 दिन बाद आपका फॉलो-अप हो सकता है।

यदि लालिमा या सूजन बढ़े, दर्द ज्यादा हो, बदबू आए या फ्लू जैसे लक्षण दिखें तो अस्पताल को फोन करें। घर पर सिस्ट को फोड़ने या काटने की कोशिश न करें। इससे इन्फेक्शन हो सकता है या निशान पड़ सकता है।

छोटे सर्जिकल प्रोसीजर के परिणाम और समस्या दोबारा होने की संभावना

सिस्ट निकालने की ज्यादातर प्रक्रियाएं आसान और त्वरित होती हैं। सिस्ट निकालने से इन्फेक्शन के कारण होने वाली गंभीर समस्याओं से बचने में मदद मिल सकती है।

ड्रेनेज से पानी या मवाद बाहर निकल जाता है, लेकिन अगर थैली रह जाए तो सिस्ट दोबारा भर सकता है। एक्सीजन से सिस्ट पूरी तरह निकल जाता है। आपके सर्जन बताएंगे कि आपके लिए कौन सा तरीका सही है।

अंदर धंसे नाखून के मामले में, नाखून को दोबारा होने से रोकने के लिए बिना सर्जरी वाले तरीकों की तुलना में सर्जरी वाले तरीके ज्यादा बेहतर होते हैं। नेल मैट्रिक्स निकालने से नाखून के दोबारा आने से अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। सर्जरी के बाद भी, बहुत कम मामलों में नाखून दोबारा उग आता है। यदि ऐसा होता है, तो हल्की नियमित फाइलिंग या आगे के इलाज से अक्सर मदद मिल सकती है।

ये परिणाम मरीजों के समूहों पर हुए अध्ययनों से मिले हैं। ये ठीक-ठीक नहीं बता सकते कि आपके मामले में क्या होगा। आपके सर्जन समस्या के आकार, जगह और प्रकार को देखकर आपसे इस बारे में बात करेंगे कि क्या संभावना है।

जयपुर में छोटे सर्जिकल प्रोसीजर का खर्च और बीमा

जयपुर हॉस्पिटल में छोटे सर्जिकल प्रोसीजर का सामान्य खर्च ₹3,000 से ₹25,000 के बीच होता है। यह भारत में एक सामान्य खर्च का दायरा है, कोई तय बिल नहीं। हमसे अनुमानित खर्च की जानकारी लें।

हर प्रोसीजर का खर्च एक जैसा नहीं होता। यह प्रोसीजर के प्रकार, गांठ या सिस्ट के आकार और संख्या, जांचों, ड्रेसिंग और फॉलो-अप पर निर्भर करता है।

जयपुर हॉस्पिटल एक एनएबीएच मान्यता प्राप्त, निजी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल है।

यहाँ इन योजनाओं की सुविधा उपलब्ध है:

  • RGHS
  • मा योजना
  • CGHS
  • निजी बीमा (इंश्योरेंस) कंपनियों और टीपीए का पैनल

कवर आपकी योजना और पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करता है। प्रोसीजर की योजना बनाने से पहले अपनी बीमा कंपनी या टीपीए से पूछ लें कि वे कितना खर्च देंगे।

अस्पताल में अपनी जांच लैब और इमेजिंग की सुविधा है, जिसमें 24 घंटे लैब, एक्स-रे और ईसीजी शामिल हैं। अपने सभी बिल, रिपोर्ट और बीमा के कागजात संभालकर एक साथ रखें।

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