जनरल मेडिसिन · जयपुर हॉस्पिटल
जयपुर में निवारक स्वास्थ्य और जांच (प्रिवेंटिव हेल्थ एंड स्क्रीनिंग)
आप स्वस्थ रहना चाहते हैं; हम आपको एक स्पष्ट जांच योजना देते हैं और नतीजे समझाते हैं।
- 1991 से जयपुर की सेवा में (35 साल)
- एनएबीएच मान्यता प्राप्त
- 24×7 इमरजेंसी और आईसीयू
- कैशलेस: RGHS, मा योजना, CGHS + 22 बीमा कंपनियाँ
- प्रोसीजर का समय
- फुल पैकेज के लिए 2 से 4 घंटे
- एनेस्थीसिया
- ज़रूरत नहीं
- रिकवरी
- तुरंतरिपोर्ट 24 से 48 घंटे में
- कीमत
- ₹3,000 से ₹10,000 बेसिक₹15,000 से ₹50,000 एक्जीक्यूटिव/कार्डियक पैकेजभारत में सामान्य रेंज; हमसे अनुमानित खर्च पूछें
चुपचाप बढ़ते जोखिम
आप ठीक महसूस करते हैं, लेकिन गंभीर समस्याएं बिना लक्षणों के शुरू हो सकती हैं
हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर और हाई कोलेस्ट्रॉल के अक्सर शुरुआती लक्षण नहीं होते। कैंसर स्क्रीनिंग के दिशानिर्देश उम्र और जोखिम के साथ बदलते हैं। फ्लू, निमोनिया और शिंगल्स के टीके अक्सर छूट जाते हैं।
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शुरुआती चेतावनी नहीं
ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल सालों तक चुपचाप बढ़ सकते हैं।
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स्क्रीनिंग की उम्र उलझाती है
मैमोग्राम, कोलन जांच और लंग स्कैन के दिशानिर्देश उम्र और हिस्ट्री के हिसाब से अलग होते हैं।
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वयस्क टीके भूल जाते हैं
फ्लू, न्यूमोकोकल, एचपीवी और शिंगल्स के टीकों के खास शेड्यूल होते हैं।
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व्यस्त जीवन जांच टालता है
काम और परिवार के चलते टेस्ट के लिए पूरा दिन निकालना मुश्किल होता है।
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असामान्य नतीजों का डर
यह चिंता कि टेस्ट में क्या निकल सकता है, कई लोगों को जाने से रोकती है।
नियमित विज़िट लक्षण दिखने से पहले मेडिकल समस्याओं की स्क्रीनिंग में मदद करती हैं।
जयपुर हॉस्पिटल क्यों
आपको चिंता है कि काम और परिवार में व्यस्त रहते हुए कोई छिपी समस्या गंभीर न हो जाए।
आपके इलाज का प्लान
हमारे साथ आपके पहले कदम
- 1 कॉल करें या वॉक-इन करके पैकेज चुनें।
- 2 खून, पेशाब और इमेजिंग के सैंपल दें।
- 3 24 से 48 घंटे में रिपोर्ट लें।
- 4 फिजिशियन के साथ नतीजे और अगले कदम पर चर्चा करें।
चेक-अप कैसे होता है
आप 2 से 4 घंटे आउटपेशेंट के तौर पर बिताते हैं। एनेस्थीसिया की ज़रूरत नहीं। रिपोर्ट 24 से 48 घंटे में तैयार होती है।
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एक्जीक्यूटिव हेल्थ चेक-अप
CBC, लिपिड, शुगर, लिवर, किडनी, थायरॉइड, ECG, चेस्ट X-ray, USG एब्डोमेन।
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कैंसर स्क्रीनिंग पैनल
PSA, CA-125, मैमोग्राफी, पैप स्मीयर, दिशानिर्देशों के अनुसार LDCT चेस्ट।
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कार्डियक रिस्क असेसमेंट
TMT, 2D इको, लिपिड प्रोफाइल, Hs-CRP, कोरोनरी कैल्शियम स्कोरिंग।
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वयस्क टीकाकरण
इन्फ्लुएंजा, न्यूमोकोकल, हेपेटाइटिस B, HPV, हर्पीज़ जोस्टर वैक्सीन उपलब्ध।
मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं
- 1991 35 साल से जयपुर की सेवा में
- एनएबीएच मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल
- 1 जनरल मेडिसिन कंसल्टेंट
- 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू और एम्बुलेंस
- 25 कैशलेस योजनाएँ और बीमा कंपनियाँ
शोध प्रिवेंटिव स्क्रीनिंग के बारे में क्या दिखाता है
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20% रिलेटिव रिस्क रिडक्शन
रैंडमाइज़्ड ट्रायल के मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि स्क्रीनिंग से ब्रेस्ट कैंसर मृत्यु दर में लगभग 20% की कमी आई।
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3 से 5 मिलियन गंभीर फ्लू केस
मौसमी इन्फ्लुएंजा हर साल विश्व स्तर पर लाखों गंभीर बीमारियों का कारण बनता है।
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HPV 16/18 में 83% गिरावट
HPV वैक्सीनेशन से 5-8 साल बाद 13-19 साल की लड़कियों में हाई-रिस्क वायरस की व्यापकता 83% कम हुई।
अगर इलाज न कराया जाए
बिना इलाज वाला हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी रोग का खतरा बढ़ाते हैं। छूटी हुई कैंसर स्क्रीनिंग डायग्नोसिस में तब तक देरी कर सकती है जब तक लक्षण न दिखें। टीके छोड़ने से आप रोकी जा सकने वाली बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
आपके चेक-अप के बाद का जीवन
अधिकांश लोग अपनी सेहत की स्पष्ट तस्वीर और आने वाले साल के लिए एक सरल योजना लेकर जाते हैं।
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अपने नंबर जानें
आपको ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और अंगों के कामकाज के नतीजे हाथ में मिलते हैं।
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स्क्रीनिंग शेड्यूल तय
आप जानते हैं कि आपको कौन से कैंसर टेस्ट चाहिए और उन्हें कब दोहराना है।
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टीके अप टू डेट
आपको बकाया टीके लगते हैं और अगली खुराक की तारीखों वाला कार्ड मिलता है।
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स्पष्ट अगले कदम
अगर किसी चीज़ में फॉलो-अप चाहिए, तो आपका फिजिशियन योजना को सीधी भाषा में समझाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
निवारक स्वास्थ्य और जांच (प्रिवेंटिव हेल्थ एंड स्क्रीनिंग) के बारे में मरीज़ों के सवाल
निवारक स्वास्थ्य और जांच (प्रिवेंटिव हेल्थ एंड स्क्रीनिंग) में किन समस्याओं की जांच की जाती है?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में निवारक स्वास्थ्य और जांच (प्रिवेंटिव हेल्थ एंड स्क्रीनिंग) के तहत आम पुरानी बीमारियों और कैंसर का जोखिम देखा जाता है। पैकेज में दिल की बीमारी, डायबिटीज़, लिवर और किडनी का काम, थायरॉइड की गड़बड़ी और लिपिड की गड़बड़ी शामिल हैं। कैंसर स्क्रीनिंग में उम्र और जोखिम के आधार पर स्तन, गर्भाशय ग्रीवा, अंडाशय, प्रोस्टेट और फेफड़ों की जांच होती है। इन्फ्लुएंजा, न्यूमोकोकल, हेपेटाइटिस बी, एचपीवी और हर्पीज़ ज़ोस्टर के लिए वयस्क टीकाकरण की स्थिति भी देखी जाती है।
विस्तार से
एग्जीक्यूटिव हेल्थ चेक-अप में खून की जांच (सीबीसी, लिपिड, शुगर, लिवर, किडनी, थायरॉइड), ईसीजी, चेस्ट एक्स-रे और यूएसजी एब्डोमेन से हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज़ और अंगों की खराबी जैसी खामोश बीमारियों का पता लगाया जाता है।
कैंसर स्क्रीनिंग पैनल में गाइडलाइन के मुताबिक पीएसए, सीए-125, मैमोग्राफी, पैप स्मीयर और लो-डोज़ सीटी चेस्ट जोड़े जाते हैं। कार्डियक जोखिम आकलन में टीएमटी, 2डी इको, एचएस-सीआरपी और कोरोनरी कैल्शियम स्कोरिंग शामिल हैं।
अध्ययनों से पता चलता है कि मैमोग्राफी से स्तन कैंसर का जल्दी पता लगना मृत्यु दर में कमी से जुड़ा है। कोलोरेक्टल कैंसर चौथा सबसे आम कैंसर है और कैंसर से मौत का दूसरा प्रमुख कारण, इसलिए गाइडलाइन आधारित स्क्रीनिंग दी जाती है।
टीकाकरण गंभीर इन्फ्लुएंजा बीमारी को रोकता है, जिससे हर साल दुनिया भर में 3 से 5 मिलियन गंभीर मामले होते हैं।
एक आम धारणा
कई लोग सोचते हैं कि चेक-अप केवल तब होता है जब वे बीमार महसूस करें।
असल में क्या होता है
लेकिन हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और शुरुआती कैंसर के अक्सर कोई लक्षण नहीं होते। स्क्रीनिंग इन खामोश समस्याओं को जल्दी पकड़ लेती है, जब इलाज बेहतर काम करता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आप निवारक स्वास्थ्य पैकेज को आउटपेशेंट विजिट के तौर पर बुक कर सकते हैं जिसमें 2 से 4 घंटे लगते हैं। रिपोर्ट आमतौर पर 24 से 48 घंटे में तैयार हो जाती है।
बेसिक पैकेज का खर्च आमतौर पर ₹3,000 से ₹10,000 और एग्जीक्यूटिव या कार्डियक पैकेज का ₹15,000 से ₹50,000 होता है। आपका सर्जन बताएगा कि आपकी उम्र और जोखिम प्रोफाइल के हिसाब से कौन सा पैनल सही है।
डॉक्टर कैसे तय करेंगे कि मुझे कौन से टेस्ट चाहिए?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में डॉक्टर आपकी उम्र, लिंग, व्यक्तिगत मेडिकल इतिहास, पारिवारिक इतिहास, जीवनशैली के कारकों और मौजूदा गाइडलाइन के आधार पर टेस्ट चुनते हैं। उदाहरण के लिए, औसत जोखिम वाले वयस्कों के लिए कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग 45 साल से शुरू होती है। मैमोग्राफी 40 से 45 साल पर विचार की जाती है। 30 से 65 साल की महिलाओं के लिए पैप या एचपीवी टेस्ट से सर्वाइकल स्क्रीनिंग होती है। 20 पैक-ईयर धूम्रपान इतिहास वाले 50 से 80 साल के लोगों के लिए लो-डोज़ सीटी लंग स्क्रीनिंग है। टीकाकरण की जरूरत उम्र और जोखिम आधारित शेड्यूल का पालन करती है।
विस्तार से
प्रमुख संस्थाओं की गाइडलाइन रूपरेखा देती हैं। यूएसपीएसटीएफ सबूत बदलने पर अपडेट की गई स्क्रीनिंग सिफारिशें प्रकाशित करता है। एसीएस 45 से 75 साल तक कोलोरेक्टल स्क्रीनिंग की सिफारिश करता है और 76 से 85 साल के लिए व्यक्तिगत फैसले की बात करता है।
स्तन कैंसर स्क्रीनिंग 45 से शुरू होती है और 40 से शुरू करने का विकल्प होता है। सर्वाइकल स्क्रीनिंग में पैप हर 3 साल, एचपीवी हर 5 साल, या 30 से 65 साल की महिलाओं के लिए को-टेस्टिंग हर 5 साल होती है।
डायबिटीज़ स्क्रीनिंग 35 साल से शुरू होती है अगर वजन ज्यादा हो। कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग 20 साल से शुरू होकर हर 4 से 6 साल में दोहराई जाती है, जोखिम कारक होने पर ज्यादा बार। डॉक्टर आपकी कॉमॉर्बिडिटी, दवाएं, पिछले टेस्ट परिणाम और पसंद को भी ध्यान में रखकर पैकेज तैयार करते हैं।
एक आम धारणा
आम गलती है हर उपलब्ध टेस्ट मांगना।
असल में क्या होता है
ज्यादा टेस्ट बेहतर नहीं होते। गैरजरूरी टेस्ट फाल्स पॉजिटिव, ओवरडायग्नोसिस और चिंता पैदा कर सकते हैं। गाइडलाइन उन टेस्ट को टारगेट करती हैं जहां आपके खास जोखिम समूह के लिए फायदा नुकसान से ज्यादा हो।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आपके परामर्श के दौरान डॉक्टर आपका इतिहास और जोखिम प्रोफाइल देखेंगे, फिर खास प्रिवेंटिव पैकेज या अलग-अलग टेस्ट सुझाएंगे। विजिट में आउटपेशेंट के तौर पर 2 से 4 घंटे लगते हैं। रिपोर्ट 24 से 48 घंटे में आती है।
बेसिक के लिए ₹3,000 से ₹10,000 और एग्जीक्यूटिव या कार्डियक पैकेज के लिए ₹15,000 से ₹50,000 तक खर्च होता है। जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श बुक करके अपने लिए सही टेस्ट प्लान पाएं।
प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप के बाद मुझे कब सुधार की उम्मीद करनी चाहिए?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप इलाज नहीं है, इसलिए कोई रिकवरी या सुधार का पीरियड नहीं होता। विजिट दो से चार घंटे की होती है और आप तुरंत नॉर्मल एक्टिविटी शुरू कर सकते हैं। रिपोर्ट आमतौर पर 24 से 48 घंटे में मिल जाती है।
विस्तार से
चेक-अप में रूटीन खून की जांच, इमेजिंग जैसे ईसीजी (ECG), चेस्ट एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी), और फिजिकल एग्जामिनेशन होता है। ये स्टैंडर्ड, नॉन-इनवेसिव स्टेप हैं जो मेडिकल सुपरविजन में होते हैं। क्योंकि कोई एनेस्थीसिया (बेहोशी) या इंटरवेंशन नहीं होता, कोई डाउनटाइम नहीं होता।
मकसद है रिस्क फैक्टर जैसे हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर या असामान्य कोलेस्ट्रॉल की जल्दी पहचान, जिनके अर्ली स्टेज में अक्सर लक्षण नहीं होते। इन्हें जल्दी पहचानने से समय पर लाइफस्टाइल बदलाव या मेडिकल मैनेजमेंट शुरू हो सकता है।
एक आम धारणा
कभी-कभी लोग उम्मीद करते हैं कि चेक-अप प्रॉब्लम ठीक कर देगा।
असल में क्या होता है
यह बीमारी ठीक नहीं करता; यह हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसे छिपे रिस्क फैक्टर ढूंढता है इससे पहले कि वे लक्षण पैदा करें।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आपको रिपोर्ट एक से दो दिन में मिल जाएगी। डॉक्टर आपके साथ रिव्यू करेंगे और जरूरत पड़ने पर फॉलो-अप टेस्ट या स्पेशलिस्ट रेफरल बताएंगे। आप जयपुर हॉस्पिटल में प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप अस्पताल कॉल करके या ओपीडी (OPD) जाकर बुक कर सकते हैं।
मेरी उम्र, लक्षणों और पारिवारिक इतिहास के लिए कौन सी जांच उपयुक्त हैं?
संक्षेप में
उपयुक्त जांच आपकी उम्र, जोखिम कारकों और पारिवारिक इतिहास पर निर्भर करती है। जयपुर हॉस्पिटल में सर्जिकल टीम मानक दिशानिर्देशों का पालन करके पैकेज की सिफारिश करती है जैसे एग्जीक्यूटिव हेल्थ चेक-अप, कैंसर स्क्रीनिंग पैनल, कार्डियक रिस्क असेसमेंट, या एडल्ट वैक्सीनेशन। आपका सर्जन परामर्श में योजना को आपके अनुसार तैयार करेगा।
विस्तार से
सबूत दिखाते हैं कि स्क्रीनिंग सिफारिशें उम्र और जोखिम के अनुसार अलग-अलग होती हैं। ब्लड प्रेशर की जांच सालाना होनी चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग बीस साल की उम्र से शुरू होती है और हर चार से छह साल में दोहराई जाती है, जोखिम कारक होने पर अधिक बार। डायबिटीज स्क्रीनिंग पैंतीस साल से शुरू होती है अगर वजन ज्यादा हो।
कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग पैंतालीस से पचहत्तर साल के लिए सुझाई जाती है। औसत जोखिम वाली महिलाओं के लिए मैमोग्राफी चालीस से पैंतालीस साल से शुरू होती है। तीस साल के बाद पैप या एचपीवी टेस्टिंग खास अंतराल पर होती है।
लो-डोज़ सीटी लंग स्क्रीनिंग पचास से अस्सी साल के उन लोगों के लिए लागू होती है जिनका धूम्रपान का इतिहास हो। स्तन, कोलन या अन्य कैंसर का पारिवारिक इतिहास शुरुआती उम्र को पहले कर सकता है। इन्फ्लुएंजा, न्यूमोकोकल, एचपीवी, हर्पीस जोस्टर, और हेपेटाइटिस बी जैसे टीके वयस्क शेड्यूल के अनुसार दिए जाते हैं।
एक आम धारणा
बहुत से लोग यह जांचे बिना पैकेज चुन लेते हैं कि यह उनके जोखिम से मेल खाता है या नहीं।
असल में क्या होता है
बीस साल के व्यक्ति को कोलोनोस्कोपी की जरूरत नहीं होती। एक धूम्रपान करने वाले को लंग सीटी की जरूरत हो सकती है। आपका सर्जन जांच को आपसे मिलाता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अपनी उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, पारिवारिक इतिहास, और वर्तमान दवाओं का विवरण ओपीडी में लाएं। आपका सर्जन दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगा और सही पैकेज की सिफारिश करेगा। विज़िट में दो से चार घंटे लगते हैं। रिपोर्ट चौबीस से अड़तालीस घंटे में आती है। जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श बुक करें ताकि आपको एक व्यक्तिगत निवारक स्वास्थ्य योजना मिल सके।
मैं कैसे तय करूं कि वार्षिक मास्टर हेल्थ चेक-अप के लिए सलाह लेनी चाहिए या नहीं?
संक्षेप में
मास्टर हेल्थ चेक-अप पर विचार करें अगर आप सामान्य स्वास्थ्य जोखिमों की एक संरचित समीक्षा चाहते हैं तब भी जब आप ठीक महसूस करते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में सर्जिकल टीम उम्र, पारिवारिक इतिहास, जीवनशैली, और मौजूदा स्थितियों के आधार पर आपकी मदद करती है। सबूत नियमित विज़िट का समर्थन करते हैं हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी खामोश स्थितियों की जांच के लिए।
विस्तार से
दिशानिर्देश विशिष्ट स्थितियों के लिए आवधिक स्क्रीनिंग की सिफारिश करते हैं परिभाषित उम्र पर। ब्लड प्रेशर और बीएमआई सालाना। कोलेस्ट्रॉल बीस साल की उम्र से, हर चार से छह साल में। डायबिटीज पैंतीस साल से अगर वजन ज्यादा हो।
कोलोरेक्टल कैंसर पैंतालीस से पचहत्तर साल के लिए। महिलाओं के लिए स्तन कैंसर स्क्रीनिंग चालीस से पैंतालीस साल से। सर्वाइकल स्क्रीनिंग तीस साल से। धूम्रपान करने वालों के लिए लंग कैंसर स्क्रीनिंग पचास से अस्सी साल के लिए।
इन्फ्लुएंजा सालाना, न्यूमोकोकल, एचपीवी, हर्पीस जोस्टर पचास साल के बाद, और हेपेटाइटिस बी जोखिम के अनुसार जैसे टीके। अगर आपके पास जल्दी हृदय रोग, कैंसर, या डायबिटीज का पारिवारिक इतिहास है, तो पहले या अधिक बार स्क्रीनिंग की सलाह दी जा सकती है।
एक मास्टर चेक-अप इन्हें कुशलता से बंडल करता है। आपका सर्जन समीक्षा करेगा कि आपके लिए क्या लागू होता है और अनावश्यक जांच से बचेगा।
एक आम धारणा
कुछ लोग हर साल हर जांच करवा लेते हैं।
असल में क्या होता है
दिशानिर्देश इसका समर्थन नहीं करते। बहुत अधिक जांच गलत अलार्म बढ़ाती हैं। आपका सर्जन केवल वही चुनता है जो दिशानिर्देश आपकी प्रोफाइल के लिए सुझाते हैं।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अपनी उम्र, पारिवारिक इतिहास, जीवनशैली की आदतें, और कोई भी लक्षण सूचीबद्ध करें। जयपुर हॉस्पिटल में ओपीडी परामर्श बुक करें। सर्जन एक पैकेज या व्यक्तिगत जांच की सिफारिश करेगा। विज़िट में दो से चार घंटे लगते हैं। रिपोर्ट चौबीस से अड़तालीस घंटे में।
अपने सर्जन के साथ तय करें कि वार्षिक मास्टर चेक-अप आपकी जरूरतों के अनुकूल है या नहीं। आज ही जयपुर हॉस्पिटल में अपना परामर्श शेड्यूल करें।
क्या कई बीमारियाँ या दवाएँ मिलकर मेरे लक्षण पैदा कर सकती हैं?
संक्षेप में
हाँ, एक से ज़्यादा बीमारियाँ और दवाएँ आपस में मिलकर ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं जिन्हें कोई एक समस्या नहीं समझा सकती। जयपुर हॉस्पिटल में आपकी सभी बीमारियों, लिखी हुई दवाओं और बिना पर्चे की दवाओं की पूरी समीक्षा करके ऐसी जटिल स्थितियों को समझा जाता है।
विस्तार से
बुज़ुर्गों में एक साथ कई दवाएँ लेना (पॉलीफार्मेसी) और कई बीमारियाँ होना (मल्टीमॉर्बिडिटी) आम है।
ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दिल की बीमारी और दर्द की दवाओं के साइड इफेक्ट से चक्कर, थकान, भ्रम या पेट खराब हो सकता है जो मौजूदा बीमारी जैसा लगता है या उसे बढ़ा देता है।
दवा-दवा और दवा-बीमारी के असर से ब्लड शुगर, किडनी का काम या इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बदल सकता है। हॉस्पिटल की जनरल मेडिसिन टीम दवाओं का मिलान करती है, डुप्लीकेट थेरेपी, गलत डोज़ और इंटरैक्शन जाँचती है।
वे यह भी देखते हैं कि लक्षण ज्ञात दुष्प्रभाव से मेल खाते हैं या नई बीमारी की ओर इशारा करते हैं जिसकी जाँच ज़रूरी है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आप जो भी दवाएँ, सप्लीमेंट या हर्बल प्रोडक्ट लेते हैं उनकी पूरी लिस्ट लाएँ, साथ में डोज़ और समय भी लिखें। लक्षण कब शुरू हुए और इलाज में हाल में क्या बदलाव हुआ यह भी नोट करें।
डॉक्टर डोज़ बदल सकते हैं, गैर-ज़रूरी दवाएँ बंद कर सकते हैं या टार्गेटेड टेस्ट लिख सकते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि दवाओं और लक्षणों की व्यवस्थित समीक्षा हो सके।
किन लक्षणों पर मुझे विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए?
संक्षेप में
अगर आपको लगातार या बिना कारण वाले बदलाव दिखें जैसे नई गांठ, असामान्य खून बहना, तीन हफ्ते से ज्यादा खांसी, बिना वजह वजन घटना, पेट या पेशाब की आदतों में बदलाव, निगलने में दिक्कत, लगातार अपच, या तिल के आकार, रूप या रंग में बदलाव, तो आपको विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। ये लक्षण उन स्थितियों की ओर इशारा कर सकते हैं जिनकी नियमित स्क्रीनिंग से आगे जाकर जांच जरूरी होती है। जयपुर हॉस्पिटल संबंधित विभागों में विशेषज्ञ परामर्श देता है।
विस्तार से
स्क्रीनिंग गाइडलाइन बिना लक्षण वाले लोगों पर केंद्रित होती हैं। जब लक्षण आते हैं, तो तरीका जनसंख्या स्क्रीनिंग से बदलकर डायग्नोस्टिक जांच हो जाता है।
उदाहरण के लिए, स्तन में गांठ होने पर डायग्नोस्टिक इमेजिंग और संभावित बायोप्सी की जरूरत होती है, केवल रूटीन मैमोग्राफी से काम नहीं चलता। मल में खून या पेट की आदतें बदलने पर स्क्रीनिंग उम्र की परवाह किए बिना कोलोनोस्कोपिक जांच जरूरी है।
धूम्रपान करने वाले में लगातार खांसी या खून की उल्टी होने पर स्टैंडर्ड लंग कैंसर स्क्रीनिंग मानदंड से आगे जाकर अर्जेंट लो-डोज़ सीटी या ब्रोंकोस्कोपी की जा सकती है।
बिना वजह वजन घटना, रात को पसीना या लगातार बुखार कैंसर, संक्रमण या एंडोक्राइन विकार का संकेत दे सकते हैं जिनमें विशेषज्ञ वर्कअप चाहिए।
यूएसपीएसटीएफ और अन्य संस्थाएं जोर देती हैं कि स्क्रीनिंग टेस्ट उन लोगों के लिए हैं जिनमें टारगेट कंडीशन के कोई लक्षण या संकेत नहीं हैं।
एक आम धारणा
लोग अक्सर इन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या अपने वार्षिक पैकेज का इंतजार करते हैं।
असल में क्या होता है
लेकिन स्क्रीनिंग स्वस्थ, बिना लक्षण वाले लोगों के लिए है। एक बार लक्षण आने पर आपको टारगेटेड डायग्नोस्टिक वर्कअप चाहिए, जो प्रिवेंटिव पैकेज से अलग है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अगर आपको इनमें से कोई लक्षण हो, तो अगले रूटीन चेक-अप का इंतजार न करें। विशेषज्ञ अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए जयपुर हॉस्पिटल से संपर्क करें। डॉक्टर केंद्रित इतिहास लेंगे, आपकी जांच करेंगे और उचित डायग्नोस्टिक टेस्ट लिखेंगे। जल्दी विशेषज्ञ समीक्षा से समय पर निदान और इलाज होता है।
नतीजे मेरी केयर प्लान को कैसे बदलेंगे?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में प्रिवेंटिव स्क्रीनिंग के नतीजे अगले कदम तय करते हैं। सामान्य नतीजे आमतौर पर मतलब है कि सिफारिश किए गए अंतराल पर रूटीन स्क्रीनिंग जारी रखें। असामान्य नतीजे दोबारा टेस्ट, अतिरिक्त डायग्नोस्टिक टेस्ट, विशेषज्ञ रेफरल, जीवनशैली सलाह, दवा शुरू करना या इलाज योजना की ओर ले जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, पॉजिटिव स्टूल टेस्ट के लिए समय पर कोलोनोस्कोपी जरूरी है। असामान्य मैमोग्राम के लिए डायग्नोस्टिक इमेजिंग या बायोप्सी हो सकती है। हाई ब्लड प्रेशर, शुगर या कोलेस्ट्रॉल आमतौर पर जीवनशैली काउंसलिंग और संभवतः दवा शुरू करते हैं।
विस्तार से
सबूत दिखाते हैं कि स्क्रीनिंग से जल्दी पता लगने पर कई कैंसर में मृत्यु दर घटती है। हालांकि, स्क्रीनिंग में ओवरडायग्नोसिस और फाल्स पॉजिटिव का जोखिम भी होता है। पॉजिटिव स्क्रीनिंग टेस्ट निदान नहीं है; यह एक डायग्नोस्टिक प्रक्रिया शुरू करता है।
कोलोरेक्टल स्क्रीनिंग में, किसी भी पॉजिटिव नॉन-कॉलोनोस्कोपी टेस्ट के लिए फॉलो-अप कोलोनोस्कोपी चाहिए। ब्रेस्ट स्क्रीनिंग में, असामान्य इमेजिंग डायग्नोस्टिक मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड या बायोप्सी की ओर ले जाती है। सर्वाइकल स्क्रीनिंग में, असामान्य पैप या एचपीवी परिणाम कोलपोस्कोपी या दोबारा टेस्ट अंतराल तय करते हैं।
बढ़े हुए कार्डियोवैस्कुलर जोखिम कारक गाइडलाइन के मुताबिक जोखिम गणना और प्रबंधन शुरू करते हैं। डॉक्टर सभी नतीजे, आपका समग्र स्वास्थ्य और पसंद मिलाकर व्यक्तिगत योजना बनाते हैं।
एक आम धारणा
बहुत से लोग असामान्य स्क्रीनिंग नतीजे पर घबरा जाते हैं।
असल में क्या होता है
लेकिन स्क्रीनिंग टेस्ट संवेदनशील बनाए जाते हैं, इसलिए फाल्स पॉजिटिव होते हैं। अहम है समय पर फॉलो-अप, चिंता नहीं। ओवरडायग्नोसिस एक ज्ञात जोखिम है, इसीलिए गाइडलाइन फायदे और नुकसान का संतुलन रखती हैं।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आपको रिपोर्ट 24 से 48 घंटे में मिलेगी। डॉक्टर हर नतीजा समझाएंगे और कदम सुझाएंगे: दोबारा अंतराल, आगे के टेस्ट, विशेषज्ञ रेफरल, जीवनशैली बदलाव या इलाज। कुछ नतीजों में अर्जेंट फॉलो-अप चाहिए; दूसरों में निगरानी।
अगर प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप के बाद लक्षण बने रहें या बढ़ें तो मुझे क्या करना चाहिए?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप एक स्क्रीनिंग विजिट है, इलाज नहीं। अगर आपके पहले से लक्षण हैं जो चेक-अप के बाद भी बने रहें या बढ़ें, तो अपने सर्जन या ओपीडी (OPD) से तुरंत संपर्क करें क्लिनिकल रिव्यू के लिए। अगली शेड्यूल्ड स्क्रीनिंग का इंतजार न करें।
विस्तार से
स्क्रीनिंग टेस्ट बिना लक्षण वाले लोगों में रिस्क फैक्टर या अर्ली बीमारी पकड़ने के लिए बने हैं। अगर आपको पहले से लक्षण हैं, तो उन्हें डायग्नोस्टिक इवैल्यूएशन चाहिए, सिर्फ स्क्रीनिंग नहीं।
सबूत दिखाते हैं हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर और हाई कोलेस्ट्रॉल अर्ली स्टेज में लक्षण नहीं पैदा करते, लेकिन लक्षण आने पर उन्हें समय पर मेडिकल असेसमेंट चाहिए। चेक-अप रिपोर्ट चौबीस से अड़तालीस घंटे में मिलती है।
कोई भी असामान्य नतीजा आगे की जांच के लिए फ्लैग होगा। आपका सर्जन नतीजों और आपकी क्लिनिकल तस्वीर के आधार पर बताएगा कि आपको अतिरिक्त टेस्ट, स्पेशलिस्ट रेफरल या तुरंत इलाज चाहिए या नहीं।
एक आम धारणा
कुछ लोग सोचते हैं नॉर्मल स्क्रीनिंग रिपोर्ट का मतलब लक्षण नजरअंदाज किए जा सकते हैं।
असल में क्या होता है
स्क्रीनिंग एक्टिव बीमारी मिस कर सकती है, और लक्षणों को हमेशा क्लिनिकल इवैल्यूएशन चाहिए।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अड़तालीस घंटे के अंदर रिपोर्ट ले लें। अगर रिपोर्ट मिलने से पहले या बाद में लक्षण बढ़ें, तो ओपीडी (OPD) जाएं या अस्पताल कॉल करें। अपने लक्षणों और दवाओं का रिकॉर्ड रखें। आपका सर्जन रिजल्ट रिव्यू करके प्लान बताएगा। जयपुर हॉस्पिटल संपर्क करें फॉलो-अप कंसल्टेशन के लिए।
मेरे लिए कौन सी जांच उपयोगी हैं, और कौन सी शायद जरूरी नहीं?
संक्षेप में
उपयोगी जांच वे हैं जो आपकी उम्र, लिंग और जोखिम कारकों के लिए दिशानिर्देशों द्वारा सुझाई गई हैं। जयपुर हॉस्पिटल में सर्जिकल टीम आपकी प्रोफाइल के आधार पर एग्जीक्यूटिव हेल्थ चेक-अप, कैंसर स्क्रीनिंग पैनल, और कार्डियक रिस्क असेसमेंट जैसे पैकेज से जांच चुनती है। आपकी स्थिति के लिए सबूत द्वारा समर्थित नहीं होने वाली जांच नियमित रूप से सलाह नहीं दी जाती।
विस्तार से
सबूत उपयुक्त स्क्रीनिंग अंतराल और लक्ष्य समूहों को परिभाषित करते हैं। सालाना ब्लड प्रेशर और बीएमआई जांच व्यापक रूप से उपयोगी हैं। कोलेस्ट्रॉल हर चार से छह साल में बीस साल की उम्र से, डायबिटीज या हृदय रोग होने पर अधिक बार।
डायबिटीज स्क्रीनिंग हर तीन साल में पैंतीस साल से अगर वजन ज्यादा हो। मैमोग्राफी हर एक से दो साल में चालीस से चौहत्तर साल तक। पैप या एचपीवी को-टेस्टिंग हर पांच साल में तीस से पैंसठ साल तक।
कोलोरेक्टल स्क्रीनिंग विकल्पों में सालाना एफआईटी, हर दस साल में कोलोनोस्कोपी, या हर पांच साल में सीटी कोलोनोग्राफी शामिल हैं पैंतालीस से पचहत्तर साल के लिए। लो-डोज़ सीटी लंग स्क्रीनिंग केवल पचास से अस्सी साल के लिए जिनका बीस पैक-ईयर धूम्रपान इतिहास हो।
औसत जोखिम वाली महिलाओं के लिए नियमित क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन की सिफारिश नहीं की जाती। पीएसए और सीए-125 बिना जोखिम चर्चा के सार्वभौमिक रूप से सुझाए नहीं जाते। आपका सर्जन उन जांच से बचेगा जहां नुकसान जैसे गलत पॉजिटिव या ओवरडायग्नोसिस लाभ से ज्यादा हों।
एक आम धारणा
कई पैकेज में हर जांच शामिल होती है।
असल में क्या होता है
अधिक जांच का मतलब अधिक गलत अलार्म और ओवरडायग्नोसिस हो सकता है। आपका सर्जन केवल वही चुनता है जो दिशानिर्देश आपके लिए समर्थन करते हैं।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अपना व्यक्तिगत और पारिवारिक इतिहास ओपीडी में अपने सर्जन से चर्चा करें। टीम केवल दिशानिर्देश-आधारित जांच की सिफारिश करेगी। विज़िट में दो से चार घंटे लगते हैं। रिपोर्ट चौबीस से अड़तालीस घंटे में आती है। अनावश्यक जांच से बचें और उस पर ध्यान दें जो आपके लिए मायने रखती है।
सवाल-जवाब
निवारक स्वास्थ्य और जांच (प्रिवेंटिव हेल्थ एंड स्क्रीनिंग): सवाल और जवाब
जब आप हमसे संपर्क करते हैं
अपना प्रिवेंटिव हेल्थ पैकेज बुक करें
जयपुर हॉस्पिटल से संपर्क करके चेक-अप पैकेज चुनें, इन-हाउस टेस्ट करवाएं और फिजिशियन के साथ नतीजों की समीक्षा करें।
- OPD में एक फिजिशियन (इंटरनल मेडिसिन) के साथ कंसल्टेशन
- आपके स्कैन और रिपोर्ट की समीक्षा, ज़रूरत पड़ने पर इन-हाउस टेस्ट (लैबोरेटरी, X-ray और इमेजिंग)
- आपके विकल्प सीधी भाषा में समझाए गए, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या आपको सर्जरी (ऑपरेशन) की ज़रूरत है भी या नहीं
- फैसला लेने से पहले लागत का अनुमानित खर्च
- RGHS, मा योजना, CGHS और एम्पैनल्ड इंश्योरर्स और TPAs के तहत कैशलेस इलाज में मदद
- आपके इलाज के बाद फॉलो-अप विज़िट
पूरी जानकारी
निवारक स्वास्थ्य और जांच (प्रिवेंटिव हेल्थ एंड स्क्रीनिंग): ज़रूरी जानकारी
निवारक स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग क्या हैं
निवारक स्वास्थ्य जांच आपके डॉक्टर के पास तब जाने की योजना है जब आप ठीक महसूस कर रहे हों। इन मुलाकातों का मकसद लक्षण आने से पहले बीमारियों का पता लगाना है। अगर आप ठीक भी महसूस करें, तब भी नियमित जांच के लिए जाएं क्योंकि इससे आगे की परेशानियों से बचा जा सकता है।
जयपुर हॉस्पिटल में एक पूरा पैकेज आमतौर पर 2 से 4 घंटे में होता है और यह ओपीडी में किया जाता है। एनेस्थीसिया (बेहोशी) की जरूरत नहीं होती और आप तुरंत अपने रोज़मर्रा के काम पर लौट सकते हैं। रिपोर्ट आमतौर पर 24 से 48 घंटे में तैयार हो जाती हैं।
हॉस्पिटल कई तरह के पैकेज देता है।
एक्जीक्यूटिव हेल्थ चेक-अप में ये शामिल हैं:
- कम्प्लीट ब्लड काउंट
- लिपिड प्रोफाइल
- ब्लड शुगर
- लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट
- थायरॉइड प्रोफाइल
- ईसीजी
- चेस्ट एक्स-रे
- पेट का अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी)
कैंसर स्क्रीनिंग पैनल में दिशानिर्देशों के मुताबिक PSA, CA-125, मैमोग्राफी, पैप स्मीयर और लो-डोज़ CT चेस्ट हो सकते हैं। कार्डियक रिस्क असेसमेंट में ट्रेडमिल टेस्ट, 2D इकोकार्डियोग्राफी, लिपिड प्रोफाइल, हाई-सेंसिटिविटी CRP और कोरोनरी कैल्शियम स्कोरिंग शामिल हैं। वयस्क टीकाकरण में इन्फ्लुएंजा, न्यूमोकोकल, हेपेटाइटिस B, HPV और हर्पीज़ ज़ोस्टर के टीके आते हैं।
चेतावनी के लक्षण जिनमें उसी दिन डॉक्टर को दिखाएं
- सीने में दर्द, अचानक सांस फूलना या बेहोशी
- किसी भी जगह से भारी खून बहना
- अचानक तेज सिरदर्द जैसा पहले कभी न हुआ हो
निवारक जांच अर्जेंट लक्षणों के लिए नहीं है। अगर आपको नीचे दी गई कोई भी परेशानी हो, तो जयपुर हॉस्पिटल के इमरजेंसी विभाग जाएं या 0141-2551500 पर तुरंत कॉल करें:
- सीने में दर्द, अचानक सांस फूलना या बेहोशी
- शरीर के एक तरफ अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में लड़खड़ाहट या भ्रम
- तेज पेट दर्द जो ठीक न हो
- किसी भी जगह से भारी खून बहना
- तेज बुखार के साथ गर्दन अकड़ना, चकत्ते या सांस लेने में तकलीफ
- अचानक तेज सिरदर्द जैसा पहले कभी न हुआ हो
ये स्क्रीनिंग के नतीजे नहीं हैं; इनमें तुरंत मेडिकल ध्यान की जरूरत है। हॉस्पिटल में 24×7 इमरजेंसी विभाग और एम्बुलेंस सेवा चलती है।
स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है और किन्हें ज्यादा खतरा है
- उम्र 45 से 75 कोलोरेक्टल कैंसर
- उम्र 45 (विकल्प 40 से 44) ब्रेस्ट कैंसर (मैमोग्राफी)
- उम्र 35 डायबिटीज (अगर वजन ज्यादा हो)
- उम्र 50 से 80, 20 पैक-ईयर इतिहास फेफड़ों का कैंसर (लो-डोज़ CT)
हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी कई बीमारियों के शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं होते। एक सिंपल खून की जांच से इनका पता लगाया जा सकता है। स्क्रीनिंग का मकसद बीमारी को जल्दी पकड़ना है जब इलाज बेहतर काम करता है।
उम्र और निजी इतिहास तय करते हैं कि किसे कब स्क्रीन कराना चाहिए। कोलोरेक्टल कैंसर के लिए, औसत जोखिम वाले वयस्कों को 45 साल की उम्र से स्क्रीनिंग शुरू करनी चाहिए और 75 साल तक जारी रखनी चाहिए।
ब्रेस्ट कैंसर के लिए, औसत जोखिम वाली महिलाओं को 45 साल की उम्र से नियमित मैमोग्राफी शुरू करनी चाहिए, 40 से 44 साल के बीच शुरू करने का विकल्प भी है। महिलाओं को तब तक जारी रखना चाहिए जब तक उनका समग्र स्वास्थ्य अच्छा है और जीवन प्रत्याशा 10 साल या उससे ज्यादा है।
डायबिटीज के लिए, अगर आपका वजन ज्यादा है या मोटापा है तो स्क्रीनिंग 35 साल की उम्र से शुरू होनी चाहिए। अगर आपके परिवार में कोलन कैंसर या पॉलिप का मजबूत इतिहास है, या इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज का इतिहास है, तो स्क्रीनिंग जल्दी और ज्यादा बार करानी पड़ सकती है।
यही बात डायबिटीज पर भी लागू होती है अगर आपके फर्स्ट-डिग्री रिश्तेदार को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, प्रीडायबिटीज, दिल की बीमारी या प्रेगनेंसी के दौरान डायबिटीज का इतिहास रहा हो।
ऑस्टियोपोरोसिस के लिए जोखिम कारकों में शामिल हैं:
- लंबे समय तक स्टेरॉयड का इस्तेमाल
- कम वजन
- धूम्रपान
- ज्यादा शराब पीना
- 50 साल की उम्र के बाद फ्रैक्चर
- परिवार में हिप फ्रैक्चर का इतिहास
फेफड़ों के कैंसर के लिए, सालाना लो-डोज़ CT की सलाह दी जाती है अगर आपकी उम्र 50 से 80 साल है, 20 पैक-ईयर का धूम्रपान का इतिहास है और आप अभी धूम्रपान करते हैं या 15 साल के अंदर छोड़ा है।
वैक्सीन हेज़िटेंसी एक मान्यता प्राप्त शब्द है जो सारे टीके मानने से लेकर कोई टीका न मानने तक की एक निरंतरता बताता है। इसके निर्धारक जटिल और संदर्भ-विशिष्ट हैं, जो समय, स्थान और टीकों के अनुसार बदलते हैं।
आम बाधाओं में बीमारी का कम जोखिम महसूस करना, बीमारी की कम चिंता, असुविधा और गलत जानकारी के कारण आत्मविश्वास की कमी शामिल हैं। कुछ लोग अपने खुद के आकलन के आधार पर जोखिम और फायदे तौलते हैं। इन्फ्लुएंजा वैक्सीन का असर हर साल बदलता है और अक्सर कम होता है, और हर साल टीकाकरण जरूरी है। इन्फ्लुएंजा से ज्यादातर मौतें बहुत छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पुरानी बीमारी वाले मरीजों में होती हैं।
जयपुर हॉस्पिटल में स्क्रीनिंग और चेक-अप कैसे किए जाते हैं
- माप ब्लड प्रेशर, ऊंचाई, वजन, बीएमआई
- इतिहास और जांच मेडिकल हिस्ट्री, डाइट, एक्सरसाइज, मानसिक स्वास्थ्य, स्किन चेक
- खून की जांच सीबीसी, शुगर, लिपिड्स, लिवर, किडनी, थायरॉइड, अन्य मार्कर
- नतीजे और अगले कदम डॉक्टर नतीजे समझाते हैं, लाइफस्टाइल बदलाव, दोबारा जांच, रेफरल या इलाज सुझाते हैं
जब आप एक निवारक स्वास्थ्य पैकेज बुक करते हैं, तो हमारी टीम आपको हर कदम पर गाइड करेगी। इस मुलाकात में आमतौर पर ब्लड प्रेशर, ऊंचाई, वजन और बॉडी मास इंडेक्स नापना शामिल होता है। एक डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, खान-पान, व्यायाम, और डिप्रेशन या एंग्जायटी के किसी भी लक्षण के बारे में पूछेंगे।
शारीरिक जांच में स्किन कैंसर के लक्षणों के लिए स्किन चेक शामिल हो सकता है, खासकर अगर आप हाई रिस्क पर हैं।
खून की जांच के लिए सैंपल लिए जाते हैं:
- कम्प्लीट ब्लड काउंट
- शुगर
- लिपिड्स
- लिवर और किडनी फंक्शन
- थायरॉइड
- पैकेज के हिसाब से दूसरे मार्कर
इमेजिंग में जरूरत के मुताबिक चेस्ट एक्स-रे, पेट का अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी), ईसीजी, ट्रेडमिल टेस्ट, 2D इकोकार्डियोग्राफी या लो-डोज़ CT चेस्ट शामिल हो सकते हैं। महिलाओं के लिए, उम्र के दिशानिर्देशों के मुताबिक मैमोग्राफी और पैप स्मीयर की पेशकश की जाती है। पुरुषों के लिए PSA टेस्ट उपलब्ध है। नॉन-कॉलोनोस्कोपी स्टूल टेस्ट में पॉजिटिव नतीजे आने पर समय पर कॉलोनोस्कोपी करानी चाहिए।
टीकाकरण की स्थिति देखी जाती है। इन्फ्लुएंजा वैक्सीन हर साल लगवाने की सलाह है। COVID-19 वैक्सीन 6 महीने और उससे ऊपर के सभी लोगों के लिए सुझाई जाती है। शिंगल्स वैक्सीन 50 साल या उसके बाद 2 खुराक में दी जाती है। न्यूमोकोकल, हेपेटाइटिस B और HPV वैक्सीन उम्र और जोखिम कारकों के आधार पर दी जाती हैं। आपका डॉक्टर बताएगा कि आपके लिए कौन से टीके सही हैं।
रिपोर्ट आमतौर पर 24 से 48 घंटे में मिल जाती हैं। एक डॉक्टर नतीजे समझाएंगे और अगले कदम सुझाएंगे, जिनमें लाइफस्टाइल की सलाह, दोबारा जांच, स्पेशलिस्ट रेफरल या इलाज शामिल हो सकते हैं।
नॉन-सर्जिकल विकल्प और सर्जरी कब सुझाई जा सकती है
- प्रीकैंसरस पॉलिप
- कोलोनोस्कोपी के दौरान निकाला जाता है
- शुरुआती स्टेज का कैंसर
- स्क्रीनिंग से मिले कैंसर की सर्जरी
- खास हार्ट ब्लॉकेज
- कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग
निवारक स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग अपने स्वभाव से नॉन-सर्जिकल हैं। मुख्य कदम हैं लाइफस्टाइल में बदलाव, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या ब्लड शुगर जैसे जोखिम कारकों को कंट्रोल करने की दवाएं, और टीकाकरण।
अगर स्क्रीनिंग टेस्ट में कोई असामान्यता मिलती है, तो अगला कदम आमतौर पर आगे की जांच या स्पेशलिस्ट की राय होती है, तुरंत सर्जरी नहीं। उदाहरण के लिए, कोलोरेक्टल कैंसर के लिए पॉजिटिव स्टूल टेस्ट से कॉलोनोस्कोपी होती है। मैमोग्राफी पर संदिग्ध ब्रेस्ट गांठ से आगे की इमेजिंग या बायोप्सी होती है। असामान्य पैप स्मीयर से कोल्पोस्कोपी होती है। कोरोनरी कैल्शियम स्कोरिंग या पॉजिटिव ट्रेडमिल टेस्ट से कार्डियोलॉजी रिव्यू और संभावित एंजियोग्राफी हो सकती है।
सर्जरी तभी सुझाई जाती है जब कन्फर्म डायग्नोसिस में उसकी जरूरत हो, जैसे कॉलोनोस्कोपी के दौरान प्रीकैंसरस पॉलिप निकालना, स्क्रीनिंग से मिले शुरुआती कैंसर की सर्जरी, या बड़ी ब्लॉकेज के लिए कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग। आपका सर्जन कारण, विकल्प और क्या उम्मीद करें, इस पर चर्चा करेंगे। जयपुर हॉस्पिटल में ऐसी प्रक्रियाओं के लिए मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और इंटेंसिव केयर यूनिट हैं।
बेसिक निवारक पैकेज की आम कीमत ₹3,000 से ₹10,000 है। एक्जीक्यूटिव या कार्डियक पैकेज आमतौर पर ₹15,000 से ₹50,000 तक होते हैं। अंतिम खर्च शामिल टेस्ट पर निर्भर करता है। हमसे अनुमानित खर्च पूछें। हॉस्पिटल RGHS, मा योजना, CGHS और प्राइवेट इंश्योरर व TPA के पैनल को स्वीकार करता है।
जयपुर हॉस्पिटल में निवारक स्वास्थ्य जांच की तैयारी
करें
- आरामदायक कपड़े और फ्लैट जूते पहनें
- उपवास के दौरान सादा पानी पिएं
- डॉक्टर से सुबह की डायबिटीज खुराक के बारे में पूछें
निवारक स्वास्थ्य जांच के लिए आपको एनेस्थीसिया (बेहोशी) या हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है। मुलाकात आमतौर पर 2 से 4 घंटे लेती है और आप उसी दिन घर जा सकते हैं। आरामदायक कपड़े और फ्लैट जूते पहनें। अपनी सभी दवाओं और सप्लीमेंट्स की लिस्ट लाएं, जिनमें ब्लड थिनर या डायबिटीज की गोलियां शामिल हैं।
अगर पुरानी रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन या वैक्सीनेशन कार्ड हैं, तो उन्हें साथ ले आएं। आपका डॉक्टर खून की जांच से थोड़े समय पहले कुछ दवाएं रोकने को कह सकते हैं; इस पर अपने OPD विजिट में चर्चा करें। ज्यादातर पैकेज के लिए आपको रात भर 8 से 10 घंटे उपवास रखना होगा। उपवास के दौरान आप सादा पानी पी सकते हैं।
अगर आप डायबिटिक हैं, तो अपने डॉक्टर से पूछें कि चेक-अप के दिन सुबह की खुराक कैसे मैनेज करें। एक अटेंडेंट कैंटीन एरिया में इंतजार कर सकता है जब तक आप टेस्ट पूरे करते हैं।
जयपुर हॉस्पिटल में प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप कैसे होता है
आपके सर्जन बताएंगे कि आपकी उम्र, रिस्क फैक्टर और मेडिकल हिस्ट्री के हिसाब से कौन सा पैकेज सही रहेगा।
एग्जीक्यूटिव हेल्थ चेक-अप में ये शामिल हैं:
- सीबीसी
- लिपिड
- शुगर
- लिवर
- किडनी
- थायरॉइड
- ईसीजी
- चेस्ट एक्स-रे
- यूएसजी एब्डोमेन
कैंसर स्क्रीनिंग पैनल में गाइडलाइंस के मुताबिक PSA, CA-125, मैमोग्राफी, पैप स्मीयर और LDCT चेस्ट जुड़ते हैं। कार्डियक रिस्क असेसमेंट में TMT, 2D इको, लिपिड प्रोफाइल, Hs-CRP और कोरोनरी कैल्शियम स्कोरिंग होती है। एडल्ट वैक्सीनेशन में इन्फ्लुएंजा, न्यूमोकोकल, हेपेटाइटिस B, HPV और हर्पीज़ जोस्टर के टीके लगते हैं। सारे टेस्ट इन-हाउस लैबोरेटरी और रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में होते हैं। रिपोर्ट आमतौर पर 24 से 48 घंटे में तैयार हो जाती है।
प्रिवेंटिव हेल्थ स्क्रीनिंग के रिस्क और संभावित जटिलताएं
- 11% से 19% ब्रेस्ट कैंसर ओवरडायग्नोसिस
- जब स्क्रीनिंग कम उम्र में शुरू हो फाल्स पॉजिटिव ज़्यादा आम
प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप में रूटीन ब्लड टेस्ट, इमेजिंग और फिजिकल एग्जामिनेशन होते हैं जो स्टैंडर्ड, नॉन-इनवेसिव हैं और एक्सपर्ट मेडिकल सुपरविजन में किए जाते हैं। ये प्रोसीजर सेफ हैं। खून निकालने से थोड़ी देर के लिए तकलीफ या छोटा सा नीला निशान हो सकता है।
कुछ लोगों को ब्लड टेस्ट के दौरान या बाद में चक्कर आते हैं; अगर ऐसा हो तो नर्स को बताएं। स्क्रीनिंग टेस्ट कभी-कभी फाल्स-पॉजिटिव रिजल्ट दे सकते हैं, यानी टेस्ट प्रॉब्लम बताता है जबकि असल में कुछ नहीं होता। इससे एक्स्ट्रा टेस्ट और चिंता हो सकती है।
ओवरडायग्नोसिस भी मुमकिन है: स्क्रीनिंग टेस्ट ऐसी कंडीशन पकड़ सकता है जो आपकी पूरी ज़िंदगी में कभी लक्षण या नुकसान नहीं देती। ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग की स्टडीज़ में ओवरडायग्नोसिस का अनुमान स्क्रीनिंग पीरियड में डायग्नोज़ हुए कैंसर का 11% से 19% तक है।
फाल्स-पॉजिटिव रिजल्ट तब ज़्यादा होते हैं जब स्क्रीनिंग कम उम्र में शुरू होती है, क्योंकि समय के साथ ज़्यादा टेस्ट होते हैं। आपका डॉक्टर स्क्रीनिंग पैनल चुनने से पहले फाल्स पॉजिटिव और ओवरडायग्नोसिस की संभावना पर बात करेगा।
विज़िट के दौरान लगने वाले टीकों से ये हो सकता है:
- इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द
- हल्का बुखार
- एक-दो दिन थकान
सीरियस एलर्जिक रिएक्शन बहुत रेयर हैं। अगर आपको किसी वैक्सीन कॉम्पोनेंट से एलर्जी है तो पहले ही डॉक्टर को बताएं।
प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप के बाद रिकवरी और देखभाल
कोई रिकवरी पीरियड नहीं होता। टेस्ट के बाद आप तुरंत अपनी नॉर्मल रूटीन पर लौट सकते हैं। अगर आप खाली पेट थे, तो जाने से पहले या जल्द ही हल्का खाना खा लें। खूब पानी पिएं। रिपोर्ट आमतौर पर 24 से 48 घंटे में मिल जाती है।
आप हॉस्पिटल से कलेक्ट कर सकते हैं या ऑनलाइन पोर्टल हो तो वहां देख सकते हैं। रिजल्ट समझने के लिए फॉलो-अप कंसल्टेशन तय होता है। अगर कोई वैल्यू नॉर्मल रेंज से बाहर है, तो डॉक्टर बताएंगे कि इसका क्या मतलब है और क्या आपको आगे टेस्ट, स्पेशलिस्ट रेफरल या लाइफस्टाइल बदलाव की ज़रूरत है।
वैक्सीनेशन के लिए इंजेक्शन वाली जगह साफ और सूखी रखें। डॉक्टर मानें तो बुखार या दर्द के लिए पैरासिटामोल ले सकते हैं।
हॉस्पिटल से संपर्क करें अगर आपको हो:
- तेज़ बुखार
- सूजन जो 24 घंटे बाद बढ़े
- रैश
- सांस लेने में तकलीफ
- कोई और लक्षण जो परेशान करे
इमरजेंसी डिपार्टमेंट और एम्बुलेंस सर्विस 24 घंटे उपलब्ध है।
प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप कितने कारगर हैं: स्टडीज़ से सबूत
- 20% ब्रेस्ट कैंसर मृत्यु दर में कमी स्क्रीनिंग के लिए बुलाई गई महिलाओं में रिलेटिव रिस्क रिडक्शन
- 43 मौतें रोकी गईं, 129 ओवरडायग्नोज्ड प्रति 10,000 महिलाओं पर ब्रेस्ट कैंसर के नतीजे 50 साल की उम्र से 20 साल तक
- उल्लेखनीय कमी एचपीवी वैक्सीनेशन का असर वैक्सीनेटेड ग्रुप में एचपीवी 16 और 18 प्रिवलेंस और एनोजेनिटल वार्ट्स
रेगुलर चेक-अप से हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर और हाई कोलेस्ट्रॉल का पता लक्षण आने से पहले चल जाता है। एक सिंपल ब्लड टेस्ट से इन कंडीशन का पता लग सकता है। स्टडीज़ में, 40 से 69 साल की महिलाओं में स्क्रीनिंग मैमोग्राफी ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों में कमी से जुड़ी है।
11 रैंडमाइज़्ड ट्रायल के मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि स्क्रीनिंग के लिए इनवाइट की गई महिलाओं में कंट्रोल ग्रुप के मुकाबले ब्रेस्ट कैंसर मॉर्टैलिटी में 20% रिलेटिव रिस्क रिडक्शन था। UK में 50 साल की 10,000 महिलाओं को 20 साल तक स्क्रीनिंग के लिए इनवाइट करने पर ब्रेस्ट कैंसर से 43 मौतें रोकी जा सकेंगी और 129 केस ओवरडायग्नोज़ होंगे।
कोलोरेक्टल कैंसर एडल्ट्स में चौथा सबसे कॉमन डायग्नोज़्ड कैंसर है और US में कैंसर से मौत का दूसरा बड़ा कारण। एवरेज-रिस्क एडल्ट्स में 45 साल से कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग शुरू करने से मॉर्टैलिटी कम होती है।
50 से 80 साल के उन लोगों में जिनकी 20 पैक-ईयर स्मोकिंग हिस्ट्री है और जो अभी स्मोक करते हैं या 15 साल के अंदर छोड़ा है, लो-डोज़ CT स्क्रीनिंग से लंग कैंसर की मौतें कम होती हैं। HPV वैक्सीनेशन से वैक्सीनेटेड एज ग्रुप में HPV 16 और 18 का प्रिवेलेंस और एनोजेनिटल वार्ट डायग्नोसिस में खासी कमी आई है।
इन्फ्लुएंजा वैक्सीनेशन हर साल लगवाने की सलाह दी जाती है क्योंकि वैक्सीन इफेक्टिवनेस हर साल बदलती है और प्रोटेक्शन कम होता जाता है। इन्फ्लुएंजा से जुड़ी ज़्यादातर मौतें बहुत छोटे बच्चों, बुजुर्गों और क्रोनिकली बीमार मरीज़ों में होती हैं। वैक्सीन अपटेक कई रिस्क ग्रुप में कम रहती है। आपका डॉक्टर आपकी उम्र, सेक्स और रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से स्क्रीनिंग टेस्ट और वैक्सीन चुनने में मदद करेगा।
जयपुर में प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप का खर्च और बीमा
बेसिक प्रिवेंटिव हेल्थ पैकेज का खर्च आमतौर पर ₹3,000 से ₹10,000 होता है। एग्जीक्यूटिव या कार्डियक पैकेज का खर्च आमतौर पर ₹15,000 से ₹50,000 होता है। फाइनल अमाउंट टेस्ट की संख्या और प्रकार, शामिल इमेजिंग स्टडीज़ और वैक्सीनेशन दिए जाने पर निर्भर करता है। जयपुर हॉस्पिटल एक NABH मान्यता प्राप्त मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल है जो फरवरी 1991 में स्थापित हुआ।
यह स्वीकार करता है:
- RGHS
- मा योजना
- CGHS
- प्राइवेट इंश्योरर्स और TPAs का एक पैनल
प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप का कवरेज स्कीम और पॉलिसी के हिसाब से अलग होता है; कुछ प्लान साल में एक बार एक तय पैकेज कवर करते हैं जबकि कुछ सिर्फ खास टेस्ट रीइंबर्स करते हैं। बुक करने से पहले हमारी टीम या अपने TPA से पूछ लें कि आपके प्लान में क्या शामिल है।
हॉस्पिटल में इन-हाउस फार्मेसी, डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी और रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट है, इसलिए सारे टेस्ट और वैक्सीनेशन एक ही जगह होते हैं। अपॉइंटमेंट लेते समय आप अपने चुने हुए पैकेज का अनुमानित खर्च मांग सकते हैं।