इमरजेंसी 24×7इमरजेंसी · 0141 255 1500 S16A-17, Mahaveer Nagar, Tonk Road

फेफड़ा रोग (पल्मोनोलॉजी) · जयपुर हॉस्पिटल

जयपुर में क्षय रोग इलाज (टीबी ट्रीटमेंट)

लगातार खाँसी और वजन घटना? हम जाँच पक्की करते हैं और आपको पूरा DOTS इलाज प्लान समझाते हैं।

  • 1991 से जयपुर की सेवा में (35 साल)
  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त
  • 24×7 इमरजेंसी और आईसीयू
  • कैशलेस: RGHS, मा योजना, CGHS + 22 बीमा कंपनियाँ
कोहनी में खाँसते एक दुबले पुरुष, साथ में ऊपरी फेफड़ों के धब्बों का नज़दीकी चित्र
इलाज की अवधि
6 से 9 महीने (स्टैंडर्ड रेजिमेन)
एनेस्थीसिया
ज़रूरत नहीं
रिकवरी
2 से 4 हफ्ते में लक्षणों में सुधारकोर्स पूरा होने पर पूरी तरह ठीक होना
खर्च
₹1,000 से ₹3,000 प्रति कंसल्टेशन₹5,000 से ₹15,000 वर्कअप के लिए (CBNAAT, कल्चर) · दवाएँ अक्सर NTEP के ज़रिए मुफ्तभारत में आम रेंज; हमसे अनुमानित खर्च पूछें

टीबी के लक्षण रोज़मर्रा की ज़िंदगी में रुकावट डालते हैं

ऐसी खाँसी जो नहीं जाती, रात को बुखार, और वजन जो बिना वजह घट रहा है

सक्रिय टीबी खाँसने पर हवा के ज़रिए फैलती है। सही दवाएँ पूरे कोर्स तक न लेने पर कीटाणु ज़िंदा रहते हैं, आप दूसरों को संक्रमण दे सकते हैं, और बीमारी दवा-प्रतिरोधी बनकर इलाज को मुश्किल कर सकती है।

  • लंबा संक्रामक दौर

    इलाज असर करना शुरू करे उससे पहले तक आप हर रोज़ परिवार और साथ काम करने वालों को कीटाणु दे सकते हैं।

  • दवा प्रतिरोध का खतरा

    दवाएँ जल्दी बंद करना या खुराक छोड़ना बचे हुए कीटाणुओं को प्रतिरोधी बना देता है।

  • इलाज में महीने लगते हैं

    स्टैंडर्ड रेजिमेन छह से नौ महीने चलती है; खुराक छोड़ने पर घड़ी फिर से शुरू हो जाती है।

  • साइड इफेक्ट की चिंता

    मतली, चकत्ते, जोड़ों में दर्द, या नारंगी पेशाब आपको दवा रोकने पर मजबूर कर सकते हैं।

  • खर्च और भागदौड़

    बार-बार जाँच, रोज़ाना विज़िट, और दवा का खर्च कई महीनों में जुड़कर बड़ा हो जाता है।

सिर्फ सक्रिय फेफड़ों की टीबी संक्रामक होती है; लेटेंट इन्फेक्शन दूसरों को नहीं फैलता।

जयपुर हॉस्पिटल क्यों

आप फिक्र करते हैं कि आपके बच्चों या माता-पिता को संक्रमण न हो जाए, हफ्तों की मज़दूरी न चली जाए, और रोज़ की गोलियाँ पेट खराब न कर दें।

  • 1991 से NABH मान्यता प्राप्त मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल
  • 24x7 इमरजेंसी, ICU, इन-हाउस लैब, फार्मेसी, और इमेजिंग
  • RGHS, मा योजना, CGHS, और प्राइवेट TPA के तहत कैशलेस इलाज

आपके इलाज का प्लान

हमारे साथ आपके पहले कदम

  1. 1 पल्मोनोलॉजिस्ट के साथ OPD कंसल्टेशन बुक करें
  2. 2 इन-हाउस रैपिड मॉलिक्यूलर टेस्ट और कल्चर करवाएँ
  3. 3 रोज़ाना निगरानी और मॉनिटरिंग के साथ DOTS रेजिमेन शुरू करें
  4. 4 पूरा कोर्स खत्म करें और कम्पलीशन रिकॉर्ड लें

जयपुर हॉस्पिटल में टीबी इलाज कैसे काम करता है

हम रैपिड मॉलिक्यूलर टेस्टिंग और कल्चर से जाँच पक्की करते हैं, फिर डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन में स्टैंडर्ड DOTS रेजिमेन शुरू करते हैं। आपका सर्जन आपकी टीबी के टाइप के हिसाब से सही दवा कॉम्बिनेशन और अवधि बताएगा।

  • CBNAAT (GeneXpert MTB/RIF)

    रैपिड मॉलिक्यूलर टेस्ट जो कुछ घंटों में टीबी के कीटाणु और रिफैम्पिसिन प्रतिरोध पकड़ लेता है।

  • लिक्विड कल्चर (MGIT) और DST

    गोल्ड-स्टैंडर्ड कल्चर जो कीटाणु उगाता है और सभी एंटी-टीबी दवाओं के प्रति सेंसिटिविटी जाँचता है।

  • स्टैंडर्ड HRZE रेजिमेन (DOTS)

    दो महीने का चार-दवा वाला इंटेंसिव फेज, फिर NTEP गाइडलाइंस के मुताबिक डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन में चार महीने दो दवाएँ।

  • MDR-TB रेजिमेन (बेडाक्विलिन-आधारित)

    रिफैम्पिसिन-प्रतिरोधी टीबी के लिए पूरी तरह ओरल लंबी रेजिमेन, कड़ी निगरानी में दी जाती है।

मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं

  • 1991 35 साल से जयपुर की सेवा में
  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल
  • 1 फेफड़ा रोग (पल्मोनोलॉजी) कंसल्टेंट
  • 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू और एम्बुलेंस
  • 25 कैशलेस योजनाएँ और बीमा कंपनियाँ

अध्ययन टीबी इलाज के नतीजों के बारे में क्या बताते हैं

  • इलाज चार, छह, या नौ महीने चलता है

    अवधि चुनी गई रेजिमेन और मरीज़ की प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है; ज़्यादातर प्लान छह से नौ महीने के होते हैं।

  • ज़्यादातर लोग कुछ हफ्तों में बेहतर महसूस करने लगते हैं

    बुखार और खाँसी जैसे लक्षण अक्सर पहले महीने में सुधर जाते हैं, लेकिन पूरा कोर्स खत्म करना ज़रूरी है।

  • टीबी इलाज के साथ जल्दी एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी मृत्यु दर 56 प्रतिशत घटाती है

    HIV को-इन्फेक्टेड मरीज़ों में, टीबी इलाज के चार हफ्ते के अंदर ART शुरू करने से मौतें 12.1 से घटकर 5.4 प्रति 100 पर्सन-ईयर हो गईं।

अगर इलाज न कराया जाए

इलाज के बिना सक्रिय टीबी जानलेवा हो सकती है। आप परिवार और करीबी संपर्कों के लिए संक्रामक बने रहते हैं। दवाएँ जल्दी बंद करने से बचे हुए कीटाणु दवा-प्रतिरोधी बन जाते हैं, जिससे बीमारी इलाज के लिए ज़्यादा मुश्किल और लंबी हो जाती है।

टीबी इलाज पूरा होने के बाद की ज़िंदगी

ज़्यादातर लोग इलाज पूरा करते हैं, संक्रामक नहीं रहते, और नियमित फॉलो-अप के साथ सामान्य काम और पारिवारिक ज़िंदगी में लौट आते हैं।

  • अब संक्रामक नहीं

    इंटेंसिव फेज के बाद ज़्यादातर मरीज़ दूसरों को टीबी नहीं फैला सकते।

  • रोज़मर्रा की दिनचर्या में वापसी

    ताकत और भूख आमतौर पर हफ्तों में लौट आती है; आप काम और घरेलू ज़िम्मेदारियाँ फिर से संभाल सकते हैं।

  • नियमित चेक-अप आसान रहते हैं

    फॉलो-अप विज़िट और कभी-कभी थूक की जाँच यह पक्का करती हैं कि ठीक होना बरकरार रहे।

  • अपने घरवालों को सुरक्षित रखें

    परिवार के सदस्यों की स्क्रीनिंग हो सकती है और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें प्रिवेंटिव थेरेपी दी जा सकती है।

हमारी टीम से मिलें

आपके फेफड़ा रोग (पल्मोनोलॉजी) डॉक्टर

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्षय रोग इलाज (टीबी ट्रीटमेंट) के बारे में मरीज़ों के सवाल

क्षय रोग की देखभाल में किन समस्याओं का आकलन किया जाता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में फुफ्फुसीय और फुफ्फुसोत्तर दोनों तरह के क्षय रोग का आकलन किया जाता है। हमारी टीम सक्रिय टीबी रोग, दवा-संवेदनशील और दवा-प्रतिरोधी रूपों, और सुप्त टीबी संक्रमण का मूल्यांकन करती है। हम टीबी-एचआईवी सह-संक्रमण, गर्भावस्था में टीबी, और बच्चों में टीबी वाले रोगियों की भी समीक्षा करते हैं। प्ल्यूरल इफ्यूजन, टीबी मेनिनजाइटिस, और हड्डी या जोड़ की टीबी जैसी जटिलताएं भी आकलन में शामिल हैं।

विस्तार से

क्षय रोग शरीर के लगभग किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है। सक्रिय फुफ्फुसीय टीबी संक्रामक होता है, जबकि फुफ्फुसोत्तर टीबी में मस्तिष्क, रीढ़, या गुर्दे जैसे अंग शामिल होते हैं।

दवा-प्रतिरोधी टीबी, जिसमें MDR-TB और XDR-TB शामिल हैं, के लिए विशेष रेजिमेन की आवश्यकता होती है। सुप्त टीबी संक्रमण का अर्थ है कि बैक्टीरिया नियंत्रण में हैं लेकिन पुनः सक्रिय हो सकते हैं।

हमारा आकलन NTEP दिशानिर्देशों का पालन करता है और प्रकार और दवा संवेदनशीलता की पुष्टि के लिए CBNAAT और कल्चर जैसे आणविक परीक्षणों का उपयोग करता है।

एक आम धारणा

बहुत से लोग सोचते हैं कि टीबी केवल फेफड़ों की बीमारी है, लेकिन यह मस्तिष्क, रीढ़, गुर्दे, और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकती है।

असल में क्या होता है

दवा-प्रतिरोधी रूपों के लिए अलग दवाओं और लंबे इलाज की आवश्यकता होती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आपको चिकित्सकीय समीक्षा, थूक या ऊतक के नमूने, और सलाह के अनुसार इमेजिंग की आवश्यकता होगी। कार्य में आमतौर पर कुछ दिन लगते हैं। पिछले एक्स-रे, परीक्षण रिपोर्ट, और वर्तमान दवाओं की सूची साथ लाएं। जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श बुक करके उचित मूल्यांकन शुरू करें।

डॉक्टर कैसे तय करेंगे कि मुझे कौन से परीक्षणों की आवश्यकता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में डॉक्टर संदिग्ध रोग स्थल, लक्षण प्रोफ़ाइल, पिछले उपचार इतिहास और दवा प्रतिरोध के जोखिम कारकों के आधार पर परीक्षणों का चयन करते हैं। फुफ्फुसीय टीबी के लिए, थूक CBNAAT पहला परीक्षण है क्योंकि यह माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस और रिफैम्पिसिन प्रतिरोध का पता घंटों में लगा लेता है। यदि CBNAAT नकारात्मक है लेकिन नैदानिक संदेह अधिक रहता है, तो तरल कल्चर (MGIT) भेजा जाता है। फुफ्फुसोत्तर टीबी के लिए, प्रासंगिक नमूना — लिम्फ नोड एस्पिरेट, सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड, प्ल्यूरल फ्लूइड, साइनोवियल फ्लूइड, या ऊतक बायोप्सी — CBNAAT और कल्चर के लिए भेजा जाता है।

विस्तार से

साक्ष्य नोट करता है कि कई नए टीबी निदान विकसित किए गए हैं, जिनमें त्वरित आणविक परीक्षण शामिल हैं, और यह कि सभी दवाओं के लिए दवा संवेदनशीलता परीक्षण आवश्यक है।

डॉक्टर इलाज शुरू करने से पहले बेसलाइन यकृत कार्य परीक्षण, गुर्दा कार्य, पूर्ण रक्त गणना, HIV परीक्षण, और सीरम यूरिक एसिड का भी आदेश देते हैं। यदि आपको मधुमेह है, तो HbA1c की जांच की जाती है।

दूसरी पंक्ति की दवाओं पर या गुर्दे की हानि वाले रोगियों के लिए, इलेक्ट्रोलाइट निगरानी जोड़ी जाती है। एथेम्बुटोल चिकित्सा से पहले और दौरान दृष्टि तीक्ष्णता और रंग दृष्टि परीक्षण किए जाते हैं। परीक्षण पैनल को निदान उपज, गति, और सुरक्षा निगरानी को संतुलित करने के लिए व्यक्तिगत बनाया जाता है।

एक आम धारणा

कुछ रोगी सोचते हैं कि केवल छाती का एक्स-रे पर्याप्त है।

असल में क्या होता है

एक्स-रे छाया दिखाता है लेकिन टीबी की पुष्टि नहीं कर सकता या दवा प्रतिरोध का पता नहीं लगा सकता। निश्चित निदान और सही रेजिमेन के लिए आणविक और कल्चर परीक्षण आवश्यक हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आप इन-हाउस प्रयोगशाला में थूक या अन्य नमूने देंगे। CBNAAT परिणाम आमतौर पर 24 घंटों के भीतर उपलब्ध होते हैं। कल्चर और पूर्ण दवा संवेदनशीलता परिणामों में दो से छह सप्ताह लगते हैं। खून की जांच सुबह खाली पेट की जाती है।

डॉक्टर सभी परिणामों की समीक्षा करते हैं और कुछ दिनों के भीतर रेजिमेन को अंतिम रूप देते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श बुक करें उचित परीक्षणों का आदेश और व्याख्या कराने के लिए।

ट्यूबरकुलोसिस का इलाज शुरू करने के बाद मुझे सुधार कब महसूस होने की उम्मीद करनी चाहिए?

संक्षेप में

स्टैंडर्ड TB इलाज शुरू करने के 2 से 4 हफ्ते में ज्यादातर लोग बेहतर महसूस करने लगते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में बुखार, खांसी, और वजन घटना आमतौर पर इस दौरान सुधरते हैं, लेकिन बैक्टीरिया महीनों तक ज़िंदा रहते हैं। लक्षण गायब होने के बाद भी 6 से 9 महीने के रेजिमेन की हर डोज़ जारी रखनी ज़रूरी है ताकि पूरी तरह ठीक हों और रेज़िस्टेंस न बने।

विस्तार से

पहले कुछ हफ्तों में क्लिनिकल सुधार आम है क्योंकि इंटेंसिव फेज़ की दवाएं बैक्टीरियल लोड तेजी से घटाती हैं। हालांकि, सबूत बताते हैं कि TB के कीटाणु मजबूत होते हैं और पूरी तरह मरने में लंबा समय लेते हैं।

दवाएं जल्दी बंद करने से बचे हुए बैक्टीरिया बढ़कर रेज़िस्टेंस पैदा कर लेते हैं, जिससे बीमारी का इलाज कठिन हो जाता है। इंटेंसिव और कंटिन्यूएशन फेज़ में नियमित थूक जांच और क्लिनिकल रिव्यू से पता चलता है कि इलाज काम कर रहा है। लिवर फंक्शन और नज़र की भी निगरानी की जाती है क्योंकि साइड इफेक्ट जल्दी आ सकते हैं।

एक आम धारणा

बेहतर महसूस करने का मतलब यह नहीं कि इन्फेक्शन खत्म हो गया।

असल में क्या होता है

जल्दी बंद करना ड्रग-रेज़िस्टेंट TB की मुख्य वजह है, जिसका इलाज बहुत मुश्किल होता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सभी फॉलो-अप विज़िट और DOTS अपॉइंटमेंट पर जाएं ताकि डॉक्टर प्रोग्रेस देख सके और साइड इफेक्ट संभाल सके। खुद से दवा बंद न करें भले आप अच्छा महसूस करें। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि अपना इलाज प्लान शुरू या रिव्यू कर सकें।

टीबी शब्द का क्षय रोग की देखभाल से क्या संबंध है?

संक्षेप में

टीबी, ट्यूबरकुलोसिस का आम संक्षिप्त नाम है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से होने वाली हवा से फैलने वाली संक्रामक बीमारी है। जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल में हम मरीजों से बातचीत, रिकॉर्ड और डॉट्स कार्यक्रम में हर जगह टीबी शब्द का इस्तेमाल करते हैं। यह उसी स्थिति को दर्शाता है चाहे वह फेफड़ों को प्रभावित करे (पल्मोनरी टीबी) या दूसरे अंगों को (एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी)।

विस्तार से

वैश्विक गाइडलाइनों के सबूत पुष्टि करते हैं कि टीबी की पहचान के लिए बलगम माइक्रोस्कोपी, सीबीएनएएटी जैसे रैपिड मॉलिक्यूलर टेस्ट या कल्चर द्वारा बैक्टीरिया का पता लगाना जरूरी है। टीबी शब्द ड्रग-ससेप्टिबल और ड्रग-रेसिस्टेंट दोनों रूपों को कवर करता है।

इलाज नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम के प्रोटोकॉल के तहत होता है: ड्रग-ससेप्टिबल बीमारी के लिए मानक 6 से 9 महीने का रेजिमेंन और एमडीआर-टीबी के लिए लंबे ऑल-ओरल रेजिमेंन। संक्षिप्त नाम से क्लिनिकल दृष्टिकोण नहीं बदलता।

एक आम धारणा

कुछ लोग सोचते हैं कि टीबी हल्का रूप है या केवल फेफड़ों की बीमारी है।

असल में क्या होता है

असल में टीबी किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है और नाम चाहे जो हो, उतना ही सख्त इलाज चाहिए।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

जब आप टीबी सुनें, तो एक ठीक होने योग्य संक्रमण समझें जिसे डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन के तहत कई एंटीबायोटिक्स के पूरे कोर्स की जरूरत होती है। अपने डॉक्टर से पूछें कि आपका टीबी पल्मोनरी है या एक्स्ट्रापल्मोनरी और क्या ड्रग ससेप्टिबिलिटी के नतीजे उपलब्ध हैं। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि पूर्ण टीबी मूल्यांकन और डॉट्स-आधारित इलाज हो सके।

कौन-सी जाँचें सक्रिय क्षय रोग को लेटेंट संक्रमण से अलग करती हैं?

संक्षेप में

सक्रिय टीबी की पुष्टि बलगम या टिशू में सीबीएनएएटी, स्मीयर माइक्रोस्कोपी या लिक्विड कल्चर द्वारा माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस मिलने से होती है। लेटेंट टीबी संक्रमण में ट्यूबरकुलिन स्किन टेस्ट या इंटरफेरॉन-गामा रिलीज एसे पॉजिटिव होता है, लेकिन बलगम की जाँच में बैक्टीरिया नहीं मिलते और कोई लक्षण नहीं होते। जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल की लैब ये सभी जाँचें करती है ताकि फर्क साफ हो सके।

विस्तार से

सबूत बताते हैं कि सीबीएनएएटी दो घंटे में टीबी डीएनए और रिफैम्पिसिन प्रतिरोध पकड़ लेता है। लिक्विड कल्चर (एमजीआईटी) बैक्टीरिया उगाने और सभी दवाओं के प्रति संवेदनशीलता जाँचने की रेफरेंस विधि है। चेस्ट एक्स-रे सक्रिय पल्मोनरी बीमारी पहचानने में मदद करता है।

लेटेंट संक्रमण की जाँचें केवल इम्यून सेंसिटाइजेशन दिखाती हैं; वे सक्रिय बीमारी का निदान नहीं कर सकतीं। दोनों स्थितियों का प्रबंधन अलग है: सक्रिय टीबी को पूर्ण मल्टी-ड्रग रेजिमेंन चाहिए, जबकि लेटेंट संक्रमण को प्रिवेंटिव थेरेपी की जरूरत हो सकती है।

एक आम धारणा

अकेला पॉजिटिव स्किन टेस्ट सक्रिय टीबी नहीं दर्शाता।

असल में क्या होता है

बहुत से लोग लेटेंट संक्रमण को बीमारी समझकर अनावश्यक दवाएँ ले लेते हैं। सही जाँच से वह गलती बचती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

अगर आपको दो हफ्ते से ज्यादा खाँसी, वजन घटना या बुखार है, तो सीबीएनएएटी और कल्चर के लिए बलगम के नमूने दें।

अगर आप टीबी मरीज के करीबी संपर्क में हैं लेकिन ठीक महसूस करते हैं, तो लेटेंट संक्रमण के लिए स्किन टेस्ट या ब्लड टेस्ट के बारे में पूछें। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि आपकी स्थिति के लिए सही जाँच हो सके।

मैं कैसे तय करूं कि मुझे थूक (स्पुटम) और CBNAAT डायग्नोसिस के लिए सलाह लेनी चाहिए?

संक्षेप में

यदि आपको दो हफ्ते से ज्यादा खांसी, बुखार, रात को पसीना, या बिना वजह वजन घटना है, तो आपको जयपुर हॉस्पिटल में थूक और CBNAAT डायग्नोसिस के लिए सलाह लेनी चाहिए। ये लक्षण एक्टिव पल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस की ओर इशारा करते हैं और तुरंत जांच की जरूरत होती है। हॉस्पिटल का पल्मोनोलॉजी विभाग आउटपेशेंट आधार पर थूक जांच और रैपिड मॉलिक्यूलर टेस्टिंग की व्यवस्था करता है।

विस्तार से

CBNAAT (GeneXpert MTB/RIF) एक रैपिड मॉलिक्यूलर टेस्ट है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस के DNA और रिफैम्पिसिन प्रतिरोध का कुछ ही घंटों में पता लगा लेता है।

सबूत दिखाते हैं कि रैपिड मॉलिक्यूलर टेस्ट जल्दी डायग्नोसिस में सुधार करते हैं और सही रेजिमेन जल्दी शुरू करने में मदद करते हैं। थूक स्मीयर माइक्रोस्कोपी और कल्चर भी उपलब्ध हैं; पूरी ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग के लिए कल्चर अब भी रेफरेंस है।

इलाज का इंटेंसिव फेज आमतौर पर बैक्टीरियोलॉजिकल पुष्टि के बाद शुरू होता है, और जल्दी पता लगने से करीबी संपर्क वालों में संक्रमण कम होता है।

एक आम धारणा

बहुत से लोग लक्षण बिगड़ने का इंतजार करते हैं या केवल चेस्ट एक्स-रे पर भरोसा करते हैं।

असल में क्या होता है

CBNAAT तेज, अधिक विशिष्ट रिजल्ट देता है और साथ ही रिफैम्पिसिन प्रतिरोध भी जांचता है, ताकि बिना देरी सही इलाज शुरू हो सके।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

संभव हो तो एक अटेंडेंट के साथ पल्मोनरी मेडिसिन OPD जाएं। पिछले चेस्ट एक्स-रे, पुराने इलाज के रिकॉर्ड और वर्तमान दवाओं की लिस्ट साथ लाएं। डॉक्टर थूक CBNAAT का ऑर्डर देंगे और चेस्ट एक्स-रे या खून की जांच भी मांग सकते हैं। रिजल्ट आमतौर पर एक दिन में मिल जाते हैं।

सांस, सीने के लक्षण, या ऑक्सीजन लेवल में कौन से बदलाव तुरंत मदद मांगते हैं?

संक्षेप में

जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल पर तुरंत मदद चाहिए अगर आपको आराम करते हुए अचानक सांस फूलना, सांस लेते वक्त बढ़ने वाला सीने का दर्द, एक चम्मच से ज्यादा खून की उल्टी, होंठ या उंगलियों का नीला पड़ना, पूरे वाक्य बोलने में असमर्थता, या घर के पल्स ऑक्सीमीटर पर ऑक्सीजन सैचुरेशन 94% से नीचे गिरना हो। ये बड़े रक्तस्राव, न्यूमोथोरैक्स, या एक्यूट रेस्पिरेटरी फेल्योर जैसे गंभीर जटिलताओं के संकेत हैं।

विस्तार से

कुछ टीबी मरीजों में हेमोप्टाइसिस (खून की उल्टी) होती है; बड़ा हेमोप्टाइसिस (24 घंटे में 200 से 600 mL से ज्यादा) जानलेवा होता है। कैविटी फटने से न्यूमोथोरैक्स हो सकता है जिसमें अचानक तेज सीने का दर्द और सांस फूलना होता है।

एंडोब्रोंकियल टीबी या लिम्फ नोड दबाव से एयरवे रुकावट स्ट्राइडर पैदा कर सकती है। अध्ययन बताते हैं कि छह महीने से एक साल बाद रेस्पिरेटरी दवा रिएक्शन में सीने का दर्द, खांसी, और न्यूमोथोरैक्स आ सकते हैं।

HIV साथ होने पर तेजी से बिगड़ने का खतरा बढ़ता है। जयपुर हॉस्पिटल का 24×7 इमरजेंसी विभाग ICU, इमेजिंग, और ब्रोंकोस्कोपी बैकअप के साथ तुरंत इलाज के लिए तैयार है।

एक आम धारणा

कुछ मरीज समझते हैं कि बढ़ती सांस फूलना बस टीबी बढ़ना या साइड इफेक्ट है।

असल में क्या होता है

यह न्यूमोथोरैक्स, बड़ा रक्तस्राव, या दवा रिएक्शन हो सकता है जिसे तुरंत इलाज चाहिए। घर पर इंतजार जानलेवा हो सकता है। इमरजेंसी टीम मिनटों में हवा निकाल सकती है, खून रोक सकती है, या दवाएं बदल सकती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो एम्बुलेंस (+91-7414-001-001) कॉल करें या सीधे 24×7 इमरजेंसी विभाग जाएं। OPD अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें। मरीज को बैठाकर रखें, भारी हेमोप्टाइसिस हो तो खाना-पीना न दें, और ट्रीटमेंट कार्ड व दवा की पट्टी साथ लाएं। नियमित फॉलो-अप के लिए जयपुर हॉस्पिटल पर अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि जटिलताएं जल्दी पकड़ी जाएं।

किन लक्षणों पर मुझे विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए?

संक्षेप में

आपको जयपुर हॉस्पिटल में विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए यदि आपको दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी है, विशेष रूप से शाम को बुखार, रात को पसीना, अस्पष्ट वजन घटना, भूख न लगना, सीने में दर्द, या खांसी में खून आना। फुफ्फुसोत्तर टीबी के लिए, लिम्फ नोड्स की लगातार सूजन, अकड़न के साथ पीठ दर्द, पेट फूलना, भ्रम के साथ सिरदर्द, या ठीक न होने वाली जोड़ों की सूजन पर ध्यान दें।

विस्तार से

सक्रिय टीबी रोग आमतौर पर फेफड़ों के शामिल होने पर श्वसन लक्षणों के साथ प्रस्तुत होता है। साक्ष्य बताता है कि सक्रिय टीबी रोग वाले लोग बीमार महसूस करते हैं, और रोगाणु शरीर में बढ़ते हैं।

फुफ्फुसोत्तर लक्षण प्रभावित अंग पर निर्भर करते हैं: रीढ़ की टीबी से पीठ दर्द और विकृति होती है; टीबी मेनिनजाइटिस से सिरदर्द, उल्टी और चेतना में बदलाव; पेट की टीबी से दर्द, फूलना और मल त्याग की आदतों में बदलाव।

लंबे समय तक बुखार, रात को पसीना और वजन घटना जैसे संवैधानिक लक्षण सभी रूपों में आम हैं। प्रारंभिक विशेषज्ञ समीक्षा से समय पर CBNAAT या कल्चर पुष्टि होती है और संचरण रुकता है।

एक आम धारणा

लोग अक्सर लंबी खांसी को धूम्रपान की खांसी या एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

असल में क्या होता है

मूल्यांकन में देरी से बीमारी बढ़ती है और परिवार के सदस्यों को संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

यदि इनमें से कोई भी लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो प्रतीक्षा न करें। पिछले एक्स-रे, थूक रिपोर्ट या दवा रिकॉर्ड OPD में साथ लाएं। डॉक्टर CBNAAT, कल्चर और बेसलाइन खून की जांच का आदेश देंगे।

CBNAAT के परिणाम आमतौर पर 24 से 48 घंटों में उपलब्ध होते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श बुक करें त्वरित मूल्यांकन और उचित चिकित्सा शुरू करने के लिए।

मेरे इलाज की योजना पर नतीजों का क्या असर पड़ेगा?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में टेस्ट के नतीजे सीधे दवा का कॉम्बिनेशन, इलाज की अवधि और निगरानी की योजना तय करते हैं। CBNAAT पॉज़िटिव और रिफैम्पिसिन सेंसिटिव होने पर DOTS के तहत स्टैंडर्ड छह महीने का HRZE रेजिमेन दिया जाता है। अगर रिफैम्पिसिन रेज़िस्टेंस मिले, तो डॉक्टर बेडाक्विलाइन-बेस्ड ऑल-ओरल MDR-TB रेजिमेन पर स्विच करते हैं जो कल्चर कन्वर्जन के बाद 15 से 24 महीने चलता है। कल्चर से फुल ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग से फ्लोरोक्विनोलोन, इंजेक्टेबल दवाओं और नई दवाओं के प्रति सेंसिटिविटी पता चलती है और रेजिमेन को और सटीक बनाती है।

विस्तार से

सबूत बताते हैं कि इलाज की योजना में दवाओं के अलग-अलग कॉम्बिनेशन इस्तेमाल होते हैं और रेजिमेन ड्रग ससेप्टिबिलिटी पर निर्भर करता है। अगर केवल आइसोनियाज़िड रेज़िस्टेंस मिले, तो आइसोनियाज़िड हटा दिया जाता है और बाकी तीन दवाएं छह महीने जारी रखी जाती हैं।

अगर मरीज़ को HIV है, तो एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी का समय तय किया जाता है — आमतौर पर TB इलाज शुरू होने के दो से चार हफ्ते के भीतर।

लिवर फंक्शन में गड़बड़ी होने पर डोज़ एडजस्टमेंट या हेपेटोटॉक्सिक दवाओं को अस्थायी रूप से बदलना पड़ सकता है। किडनी की खराबी एथेम्बुटोल और कुछ सेकेंड-लाइन एजेंट की डोज़ बदल देती है। दो महीने पर पॉज़िटिव कल्चर इंटेंसिव फेज़ बढ़ा देता है। देखभाल की योजना डायनामिक है और हर फॉलो-अप विज़िट पर अपडेट होती है।

एक आम धारणा

आम धारणा है कि हर TB में एक जैसी दवाएं चलती हैं।

असल में क्या होता है

असल में, ड्रग रेज़िस्टेंस पैटर्न, HIV स्टेटस और ऑर्गन फंक्शन — हर चीज़ दवाओं, डोज़ और अवधि को काफी बदल देती है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

CBNAAT का नतीजा आते ही आपको चर्चा के लिए बुलाया जाएगा। कल्चर के नतीजे दो हफ्ते पर और फिर हर महीने देखे जाते हैं। हर विज़िट पर अपना ट्रीटमेंट कार्ड साथ लाएं। DOTS प्रोवाइडर आपकी खुराक देखेगा और साइड इफेक्ट नोट करेगा। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि हर टेस्ट रिजल्ट के आधार पर आपका रेजिमेन जल्दी एडजस्ट हो सके।

इलाज के दौरान टीबी के लक्षण बने रहें या बढ़ जाएँ तो मुझे क्या करना चाहिए?

संक्षेप में

अगर बुखार, खाँसी, साँस फूलना या वजन घटना चार हफ्ते के इलाज के बाद भी जारी रहे या नए लक्षण दिखें, तो जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल के अपने इलाज करने वाले डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। अपनी मर्जी से दवाएँ बंद या न बदलें। टीम जल्दी बलगम की जाँच, खून की जाँच और क्लिनिकल रिव्यू कराएगी ताकि दवा प्रतिरोध, साइड इफेक्ट या कोई दूसरी बीमारी पता चल सके।

विस्तार से

सबूत बताते हैं कि लक्षण बने रहने का मतलब हो सकता है कि बैक्टीरिया एक या एक से ज्यादा दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हैं, कि दवाएँ ठीक से अवशोषित नहीं हो रहीं, या कि हेपेटोटॉक्सिसिटी जैसा प्रतिकूल दवा प्रभाव विकसित हो रहा है।

गाइडलाइन जल्दी मॉलिक्यूलर टेस्ट (सीबीएनएएटी) और ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग के साथ कल्चर कराने की सलाह देती हैं ताकि प्रतिरोध का पैटर्न पहचाना जा सके। तुरंत रेजिमेंन में बदलाव से फेफड़ों को और नुकसान और संपर्क में आए लोगों में फैलाव रुकता है।

एक आम धारणा

मरीज अक्सर हफ्तों इंतजार करते हैं कि हालत सुधरेगी।

असल में क्या होता है

रिव्यू में देरी से प्रतिरोधी बैक्टीरिया बढ़ते हैं और इलाज मुश्किल हो जाता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

रोजाना लक्षणों की डायरी रखें और हर विजिट पर साथ लाएँ। अगर खुराक छूट जाए, तो डॉट्स प्रोवाइडर को ईमानदारी से बताएँ ताकि योजना एडजस्ट हो सके। गंभीर साइड इफेक्ट या जटिलता होने पर पाँच से दस दिन अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। अगर लक्षणों में सुधार न हो तो जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि समय पर रिव्यू हो सके।

जब आप हमसे संपर्क करते हैं

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  • OPD में पल्मोनोलॉजिस्ट (चेस्ट फिजिशियन) के साथ कंसल्टेशन
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  • आपके विकल्प आसान शब्दों में समझाए जाएँगे, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या आपको सर्जरी की ज़रूरत है
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  • RGHS, मा योजना, CGHS और पैनल वाले इंश्योरर और TPA के तहत कैशलेस इलाज में मदद
  • आपके इलाज के बाद फॉलो-अप विज़िट
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पूरी जानकारी

क्षय रोग इलाज (टीबी ट्रीटमेंट): ज़रूरी जानकारी

क्षय रोग (टीबी) क्या है और यह कैसे होता है

टीबी संक्रमण कैसे बढ़ता है
  1. कीटाणु फेफड़ों में पहुंचे सक्रिय टीबी मरीज के खांसने या छींकने से हवा से फैलाव
  2. लेटेंट संक्रमण शरीर ने जीवाणुओं को घेरा; संक्रामक नहीं
  3. सक्रिय रोग प्रतिरक्षा प्रणाली कीटाणुओं को न रोक पाई; संक्रामक हुआ

क्षय रोग (टीबी) एक हवा से फैलने वाला संक्रामक रोग है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु से होता है। जब फेफड़ों के सक्रिय टीबी वाले व्यक्ति को खांसी, छींक आती है या वह बोलता है, तो कीटाणु हवा में फैलते हैं। आप उन कीटाणुओं को सांस के साथ अंदर लेते हैं, और वे आपके फेफड़ों में जाकर बढ़ने लगते हैं।

हर व्यक्ति जो कीटाणुओं को सांस से लेता है, बीमार नहीं होता। कई लोगों में शरीर की रक्षा प्रणाली जीवाणुओं को घेर लेती है। कीटाणु जिंदा रहते हैं लेकिन निष्क्रिय। इसे लेटेंट टीबी इन्फेक्शन (सुप्त संक्रमण) कहते हैं। जब संक्रमण लेटेंट होता है तो आप दूसरों को कीटाणु नहीं फैला सकते।

अगर आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कीटाणुओं को बढ़ने से नहीं रोक पाती, तो संक्रमण सक्रिय टीबी रोग बन जाता है। केवल सक्रिय पल्मोनरी टीबी (फेफड़ों का टीबी) संक्रामक होता है।

कीटाणु खून के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों में भी जा सकते हैं, जैसे:

  • लिम्फ नोड्स (लसिका ग्रंथियां)
  • हड्डियां
  • दिमाग
  • गुर्दे

इसे एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी (फेफड़ों के बाहर का टीबी) कहते हैं।

टीबी के कीटाणु मजबूत होते हैं और मरने में लंबा समय लेते हैं। इसलिए इलाज कई महीने चलता है। अगर आप दवाएं जल्दी बंद कर देते हैं, तो आप फिर बीमार हो सकते हैं। अगर आप दवाएं सही तरीके से नहीं लेते, तो जिंदा बचे कीटाणु उन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (रेजिस्टेंट) हो सकते हैं। दवाओं के प्रति प्रतिरोधी टीबी का इलाज कठिन होता है।

क्षय रोग के लक्षण और वे चेतावनी संकेत जिनमें उसी दिन इलाज जरूरी है

गंभीर दुष्प्रभाव जिनमें उसी दिन देखभाल जरूरी
  • लीवर को चोट पेट दर्द, मितली, उल्टी, पीली त्वचा या आंखें
  • नसों की समस्या हाथों या पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन
  • फ्लू जैसे लक्षण चक्कर या भूख न लगने के साथ
इमरजेंसी? 0141 255 1500 पर कॉल करें, 24×7

सक्रिय टीबी रोग वाले व्यक्ति बीमार महसूस करते हैं।

पल्मोनरी टीबी के आम लक्षणों में शामिल हैं:

  • दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय से खांसी
  • कभी-कभी बलगम में खून
  • सीने में दर्द
  • बुखार (अक्सर हल्का और शाम को बढ़ा हुआ)
  • रात को पसीना
  • भूख न लगना
  • वजन घटना

एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी के लक्षण इस पर निर्भर करते हैं कि कौन सा अंग प्रभावित है। जैसे, लिम्फ नोड्स का टीबी गर्दन में सूजन ला सकता है। रीढ़ की हड्डी का टीबी कमर दर्द और अकड़न दे सकता है। दिमाग का टीबी (मेनिनजाइटिस) सिरदर्द, भ्रम और उल्टी दे सकता है।

टीबी की दवाओं के कुछ दुष्प्रभावों में उसी दिन चिकित्सकीय ध्यान जरूरी है। गंभीर दुष्प्रभावों में लीवर को चोट, पेट दर्द, मितली और उल्टी, त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया), चक्कर या हल्कापन, भूख न लगना, फ्लू जैसे लक्षण, और हाथों या पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन शामिल हैं।

अगर आप आइसोनियाजिड ले रहे हैं, तो हाथों और पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन हो सकता है। रिफैम्पिसिन या रिफापेंटिन दवाओं से पेशाब, लार, आंसू, पसीना और स्तन का दूध नारंगी रंग का हो सकता है। यह सामान्य और हानिरहित है।

अगर आपको कोई गंभीर दुष्प्रभाव हो, तो तुरंत अपने स्वास्थ्य प्रदाता से संपर्क करें। आपको दवाएं रोकने या जांच के लिए क्लिनिक आने को कहा जा सकता है।

क्षय रोग के कारण और किन्हें ज्यादा खतरा है

एक्टिव टीबी का खतरा बढ़ाने वाली स्थितियां
एचआईवी इन्फेक्शन
टीबी के कीटाणुओं पर इम्यून कंट्रोल कमजोर करता है
डायबिटीज
एक्टिव टीबी और दवाओं से नर्व डैमेज का खतरा बढ़ाती है

टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस जीवाणु से होता है। कीटाणु हवा के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं। आमतौर पर सक्रिय पल्मोनरी टीबी वाले व्यक्ति के साथ लंबे समय तक नजदीक रहने पर ही संक्रमण होता है।

कुछ स्थितियां लेटेंट संक्रमण के सक्रिय रोग बनने की आशंका बढ़ा देती हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • एचआईवी संक्रमण
  • डायबिटीज (मधुमेह)
  • कुपोषण
  • कैंसर का इलाज
  • प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करने वाली दवाएं जैसे स्टेरॉयड

अधिक उम्र और रोज शराब पीने से दवाओं से लीवर को चोट का खतरा बढ़ता है। धीमे एसिटाइलेटर स्टेटस नामक आनुवंशिक विशेषता आइसोनियाजिड के दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ा सकती है।

डायबिटीज, एचआईवी संक्रमण, गुर्दे की विफलता, कुपोषण, और शराबखोरी आइसोनियाजिड से नसों को नुकसान (पेरिफेरल न्यूरोपैथी) का खतरा बढ़ाते हैं। 60 साल से अधिक उम्र और एचआईवी संक्रमण का संबंध कुल मिलाकर दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की अधिक दर से है। पहले से लीवर या गुर्दे की बीमारी पायराजिनामाइड के दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ा सकती है।

एथेम्बुटोल की अधिक खुराक, लंबा इलाज, गुर्दे की समस्या, अधिक उम्र, और पहले से आंख की बीमारी ऑप्टिक नर्व को नुकसान का खतरा बढ़ाते हैं।

टीबी की दवाओं के साथ शराब पीना खतरनाक हो सकता है और लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ दवाएं टीबी की दवाओं के साथ मिलकर दुष्प्रभाव पैदा कर सकती हैं।

रिफैम्पिसिन लीवर द्वारा कई अन्य दवाओं के प्रसंस्करण को दृढ़ता से प्रभावित करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • एंटीरेट्रोवायरल
  • एंटीकॉगुलेंट
  • एंटीकॉन्वल्सेंट
  • कुछ एंटीफंगल
  • इम्यूनोसप्रेसेन्ट
  • डाइजॉक्सिन
  • बीटा-ब्लॉकर
  • कैल्शियम चैनल ब्लॉकर
  • खाने वाली डायबिटीज की दवाएं
  • थियोफाइलिन
  • मेथाडोन

खाने वाली गर्भनिरोधक गोलियां टीबी की दवाओं के साथ उतनी असरदार नहीं रह सकतीं।

क्षय रोग की पहचान: जांच और परीक्षण

टीबी की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाले टेस्ट

त्वरित आणविक परीक्षण

  • सीबीएनएएटी (जीनएक्सपर्ट एमटीबी/आरआईएफ)

संदर्भ मानक

  • लिक्विड कल्चर (एमजीआईटी) डीएसटी के साथ

बुनियादी परीक्षण

  • थूक की स्मीयर माइक्रोस्कोपी

इमेजिंग

  • चेस्ट एक्स-रे

आपका डॉक्टर आपके लक्षणों, चिकित्सा इतिहास, और टीबी वाले किसी व्यक्ति के संपर्क के बारे में पूछेगा। शारीरिक जांच की जाएगी। अगर टीबी का संदेह हो, तो निदान की पुष्टि और दवा प्रतिरोध की जांच के लिए कई परीक्षण किए जाते हैं।

सीबीएनएएटी (जीनएक्सपर्ट एमटीबी/आरआईएफ) नामक एक त्वरित आणविक परीक्षण कुछ घंटों में टीबी के जीवाणुओं का पता लगा सकता है और रिफैम्पिसिन प्रतिरोध की जांच कर सकता है। यह परीक्षण अक्सर पहला कदम होता है। ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग (डीएसटी) के साथ लिक्विड कल्चर (एमजीआईटी) जीवाणुओं को उगाने और यह जांचने की सबसे संवेदनशील विधि है कि कौन सी दवाएं काम करेंगी।

थूक की स्मीयर माइक्रोस्कोपी माइक्रोस्कोप के नीचे जीवाणुओं को देखती है लेकिन दवा प्रतिरोध का पता नहीं लगा सकती। चेस्ट एक्स-रे फेफड़ों में रोग की सीमा देखने में मदद करता है।

एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी के लिए, प्रभावित जगह से नमूने लिए जा सकते हैं, जैसे:

  • लिम्फ नोड बायोप्सी
  • रीढ़ की हड्डी का तरल (लम्बर पंक्चर)
  • पेशाब

इलाज शुरू करने से पहले बेसलाइन स्वास्थ्य जांचने और सुरक्षित खुराक तय करने के लिए खून की जांचें की जाती हैं, जिनमें कम्पलीट ब्लड काउंट, लीवर और किडनी फंक्शन, और एचआईवी टेस्ट शामिल हैं। आपका स्वास्थ्य प्रदाता सुनिश्चित करेगा कि दवाएं आपके शरीर में टीबी के कीटाणुओं को मार सकें।

क्षय रोग के इलाज के विकल्प बिना सर्जरी के और कब सर्जरी की सलाह दी जाती है

सक्रिय टीबी रोग का इलाज कई महीनों तक चलने वाले एंटीबायोटिक्स के संयोजन से किया जाता है। ड्रग-ससेप्टिबल टीबी के लिए मानक रेजिमेन नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम (एनटीईपी) के दिशानिर्देशों का पालन करता है। इसके दो चरण होते हैं। गहन चरण दो महीने का होता है और इसमें आमतौर पर चार दवाएं शामिल होती हैं: आइसोनियाजिड, रिफैम्पिसिन, पायराजिनामाइड, और एथेम्बुटोल।

निरंतरता चरण चार महीने का होता है जिसमें दो दवाएं होती हैं: आइसोनियाजिड और रिफैम्पिसिन। कुल इलाज की अवधि आमतौर पर छह महीने होती है। कुछ स्थितियों में, जैसे दो महीने बाद भी पॉजिटिव कल्चर के साथ कैविटरी रोग, थेरेपी बढ़ाई जाती है।

इलाज डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड थेरेपी (डॉट) के तहत दिया जाता है। एक स्वास्थ्यकर्मी आपको हर खुराक लेते हुए देखता है ताकि आप कोर्स पूरा कर सकें। यह व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉल से किया जा सकता है। डॉट अपनी दवाएं याद रखने का सबसे उपयुक्त तरीका है।

अगर आप खुद दवाएं लेते हैं, तो सुझाव हैं: रोज एक ही समय पर गोलियां लें, अलार्म लगाएं, पिल बॉक्स इस्तेमाल करें, कैलेंडर पर निशान लगाएं, या परिवार के किसी सदस्य को याद दिलाने को कहें।

इलाज के दौरान आपका डॉक्टर खून की जांच, थूक की जांच, और कभी-कभी चेस्ट एक्स-रे से आपकी निगरानी करेगा। अगर आपके जोखिम कारक हैं तो गहन चरण के दौरान हर दो से चार हफ्ते में लीवर एंजाइम जांचे जाते हैं। विटामिन बी6 (पाइरिडोक्सिन) अक्सर नसों को नुकसान रोकने के लिए दिया जाता है।

अगर टीबी रिफैम्पिसिन के प्रति प्रतिरोधी है (एमडीआर-टीबी), तो बेडाक्विलिन सहित एक लंबा ऑल-ओरल रेजिमेन इस्तेमाल किया जाता है। यह रेजिमेन कल्चर कन्वर्जन के बाद 15 से 24 महीने चलता है। जब अकेले दवा इलाज का परिणाम खराब हो, तो एमडीआर-टीबी के लिए फेफड़े के एक हिस्से को निकालने की सर्जरी पर विचार किया जा सकता है।

प्रक्रियाओं में शामिल हैं:

  • सेगमेंटेक्टॉमी
  • लोबेक्टॉमी
  • न्यूमोनेक्टॉमी

सर्जरी कम मृत्यु दर के साथ की जाती है और उसके बाद एक साल से ज्यादा दवा इलाज जारी रहता है। आपका सर्जन बताएगा कि सर्जरी आपके लिए उपयुक्त है या नहीं।

क्षय रोग के इलाज की तैयारी

टीबी इलाज शुरू करने से पहले

करें

  • गर्भावस्था या स्तनपान के बारे में बताएं डॉक्टर गर्भावस्था-सुरक्षित दवाएं चुनेंगे
  • इलाज से पहले शराब बंद करें शराब टीबी इलाज के दौरान लीवर को नुकसान पहुंचाती है
  • रिकॉर्ड और बीमा कार्ड साथ लाएं पिछले टीबी रिकॉर्ड, आरजीएचएस, मा योजना, सीजीएचएस, निजी बीमाकर्ता

जयपुर हॉस्पिटल में टीबी का इलाज शुरू करने से पहले, आपका डॉक्टर आपका चिकित्सा इतिहास और अभी ली जा रही दवाओं की समीक्षा करेगा। अपने डॉक्टर को सभी प्रिस्क्रिप्शन दवाएं, बिना प्रिस्क्रिप्शन की दवाएं, और सप्लीमेंट्स के बारे में बताएं। कुछ दवाएं टीबी की दवाओं के साथ मिलकर उनके असर को बदल सकती हैं या दुष्प्रभाव बढ़ा सकती हैं।

अगर आप गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं, तो अपने डॉक्टर से चर्चा करें क्योंकि रिफैम्पिसिन उन्हें कम असरदार बना सकता है। अपने डॉक्टर को बताएं अगर आप गर्भवती हैं, गर्भवती हो सकती हैं, या स्तनपान करा रही हैं। आपका डॉक्टर गर्भावस्था में उपयोग के लिए अनुशंसित दवाएं चुनेगा।

अगर आप शराब पीते हैं, तो आपका डॉक्टर आपको रोकने की सलाह देगा क्योंकि शराब टीबी की दवाओं के दौरान आपके लीवर को नुकसान पहुंचा सकती है।

इलाज शुरू होने से पहले आपके लीवर और किडनी फंक्शन जांचने के लिए बेसलाइन खून की जांचें होंगी। अगर आपके रेजिमेन में एथेम्बुटोल है तो आपका डॉक्टर आपकी दृष्टि और रंग पहचान की भी जांच कर सकता है।

अगर आपको एचआईवी या डायबिटीज है, तो इलाज से पहले और दौरान अतिरिक्त खून, थूक, या पेशाब की जांचें की जा सकती हैं। अपनी पहली मुलाकात पर अपनी वर्तमान दवाओं की सूची, पिछले टीबी इलाज के रिकॉर्ड, और अपने बीमा या योजना के कार्ड (आरजीएचएस, मा योजना, सीजीएचएस, या निजी बीमाकर्ता) साथ लाएं।

परामर्श या जांच के लिए उपवास की जरूरत नहीं है। आरामदायक कपड़े पहनें और चाहें तो एक परिचारक साथ लाएं।

क्षय रोग का इलाज कैसे दिया जाता है

जयपुर हॉस्पिटल में क्षय रोग का इलाज नेशनल TB एलिमिनेशन प्रोग्राम (NTEP) के दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाता है। दवा-संवेदनशील TB के लिए मानक रेजिमेन छह से नौ महीने का कोर्स है जो डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट, शॉर्ट-कोर्स (DOTS) के तहत दिया जाता है। इसके दो चरण होते हैं।

गहन चरण दो महीने तक चलता है और आमतौर पर इसमें चार दवाएं शामिल होती हैं: आइसोनियाजिड, रिफैम्पिसिन, पायराजिनामाइड, और एथमब्युटोल। निरंतरता चरण चार महीने तक चलता है और आमतौर पर इसमें दो दवाएं शामिल होती हैं: आइसोनियाजिड और रिफैम्पिसिन। आपका सर्जन आपकी जांच के नतीजों के आधार पर बताएगा कि आपके लिए कौन सा कॉम्बिनेशन सही है।

अगर TB रिफैम्पिसिन के प्रति प्रतिरोधी है (MDR-TB), तो बेडाक्विलाइन वाला एक लंबा ऑरल रेजिमेन इस्तेमाल किया जाता है। एक्सटेंसिवली ड्रग-रेसिस्टेंट TB (XDR-TB) के लिए, प्रीटोमैनिड जोड़ा जा सकता है। डायग्नोसिस के लिए CBNAAT (GeneXpert MTB/RIF) जैसे रैपिड मॉलिक्यूलर टेस्ट का उपयोग किया जाता है ताकि TB और रिफैम्पिसिन प्रतिरोध का पता कुछ घंटों में लग सके। लिक्विड कल्चर (MGIT) ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग (DST) के साथ सभी दवाओं के प्रति संवेदनशीलता जांचने का रेफरेंस स्टैंडर्ड है।

इलाज आउटपेशेंट आधार पर होता है। आपको रोजाना या हफ्ते में कई बार हॉस्पिटल या DOT सेंटर आना होगा। एक स्वास्थ्यकर्मी आपको गोली निगलते हुए देखेगा और जांचेगा कि आप उसे कैसे सहन कर रहे हैं।

अगर आप खुद दवाएं लेते हैं, तो आपका डॉक्टर आपको खुराक याद रखने के टिप्स देगा, जैसे अलार्म लगाना, पिल बॉक्स इस्तेमाल करना, या कैलेंडर पर निशान लगाना। विटामिन B6 (पाइरिडॉक्सिन) आमतौर पर आइसोनियाजिड से होने वाली नसों की समस्या को रोकने के लिए दिया जाता है।

गहन चरण के दौरान लिवर एंजाइम्स की निगरानी हर दो से चार हफ्ते में की जाती है, खासकर अगर आपके पास जोखिम कारक हैं। अगर आप पायराजिनामाइड ले रहे हैं तो यूरिक एसिड लेवल समय-समय पर चेक किया जाता है।

अगर आप एथमब्युटोल ले रहे हैं तो नजर की जांच इलाज शुरू होने पर और इलाज के दौरान की जाती है। जटिलताएं आने पर ही पांच से दस दिन के लिए भर्ती होने की जरूरत पड़ती है।

क्षय रोग के इलाज के जोखिम और संभावित जटिलताएं

टीबी की दवाओं के सामान्य और गंभीर साइड इफेक्ट्स
नारंगी रंग के शरीर के तरल पदार्थ
रिफैम्पिसिन का सामान्य हानिरहित असर
लिवर इंजरी
असामान्य लेकिन गंभीर, ज्यादातर पहले दो से नौ हफ्तों में
दृष्टि में बदलाव
एथमब्युटोल से दुर्लभ ऑप्टिक नर्व डैमेज

TB की दवाओं के साइड इफेक्ट हो सकते हैं। अलग-अलग लोगों पर असर अलग होता है। ज्यादातर साइड इफेक्ट मामूली होते हैं। आम हैं: त्वचा पर चकत्ते, पेट खराब होना या मितली, और रिफैम्पिसिन या रिफापेंटाइन से पेशाब, लार, आंसू, पसीना, या मां के दूध का नारंगी रंग का हो जाना। यह रंग बदलना सामान्य और हानिरहित है। सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लेंस पर स्थायी दाग लग सकते हैं।

गंभीर साइड इफेक्ट के लिए तुरंत चिकित्सा सहायता चाहिए। इनमें शामिल हैं:

  • लिवर को नुकसान
  • पेट दर्द
  • मितली और उल्टी
  • त्वचा या आंखों का पीला पड़ना (पीलिया)
  • चक्कर आना
  • भूख न लगना
  • फ्लू जैसे लक्षण
  • हाथों या पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन

आइसोनियाजिड से हाथों और पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन हो सकता है। आइसोनियाजिड या रिफैम्पिसिन से लिवर को नुकसान असामान्य है लेकिन हो सकता है। हेपेटोटॉक्सिसिटी पहले दो से नौ हफ्तों में सबसे आम है। अध्ययनों में, प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं के कारण लगभग 24% घटनाओं में दवाएं रोकनी पड़ीं।

हल्के से मध्यम प्रतिक्रियाएं लगभग 77% मामलों में देखी गईं, जबकि गंभीर प्रतिक्रियाएं लगभग 23% में। मितली और लिवर एंजाइम का बढ़ना सबसे आम थे, प्रत्येक लगभग 14%। चकत्ते, खुजली, और उल्टी भी बताई गईं। आइसोनियाजिड से पेरिफेरल न्यूरोपैथी हफ्तों या महीनों के बाद धीरे-धीरे विकसित होती है।

एथमब्युटोल से ऑप्टिक न्यूरोपैथी दुर्लभ है लेकिन हो सकती है; नजर में बदलाव दिखते ही दवा तुरंत बंद कर दी जाती है। पायराजिनामाइड यूरिक एसिड लेवल बढ़ा सकता है, जिससे जोड़ों में दर्द या गाउट हो सकता है। एक अध्ययन में पायराजिनामाइड लेने वाले 87% तक रोगियों में हाइपरयूरिसीमिया देखी गई।

कुछ सेकेंड-लाइन दवाओं से अवसाद, चिंता, या मतिभ्रम जैसे मनोरोग लक्षण बताए गए हैं। अगर आपको कोई गंभीर साइड इफेक्ट नजर आए, तो तुरंत अपने स्वास्थ्य प्रदाता को कॉल करें। आपका डॉक्टर खुराक एडजस्ट कर सकता है, दवा रोक सकता है, या सहायक इलाज दे सकता है।

क्षय रोग के इलाज के दौरान रिकवरी और देखभाल

टीबी इलाज के दौरान और बाद में

करें

  • कोर्स खत्म होने तक हर डोज़ लें
  • जांच के लिए सभी क्लिनिक अपॉइंटमेंट रखें

इलाज के कुछ हफ्तों बाद आप शायद बेहतर महसूस करने लगेंगे। क्लिनिकल सुधार आमतौर पर दो से चार हफ्तों में होता है। भले ही आप ठीक महसूस करें, आपको पूरा कोर्स खत्म होने तक हर खुराक लेनी ही होगी। जल्दी रोकने से आप फिर बीमार पड़ सकते हैं और बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो सकते हैं। प्रतिरोधी TB का इलाज कठिन होता है।

सभी क्लिनिक अपॉइंटमेंट पर जाएं। आपका डॉक्टर साइड इफेक्ट के बारे में पूछेगा और खून, थूक, या पेशाब की जांच करवाएगा ताकि पता चले कि दवाएं कैसे काम कर रही हैं और आपका शरीर उन्हें कैसे सहन कर रहा है। आपको चेस्ट एक्स-रे भी करवाने पड़ सकते हैं। अगर आपको HIV या डायबिटीज है, तो अतिरिक्त निगरानी की जाती है।

अपनी गोलियां हर दिन एक ही समय पर लें। खाने के साथ लेने से अवशोषण में मदद मिल सकती है। पिल बॉक्स इस्तेमाल करें, अलार्म लगाएं, या किसी परिवार के सदस्य को याद दिलाने को कहें। दवाएं बच्चों की पहुंच से दूर रखें।

अगर आपको दवाएं लेने में परेशानी हो, तो अपने डॉक्टर को बताएं। जरूरत पड़ने पर हॉस्पिटल खाने, साफ पानी, या ट्रांसपोर्ट में मदद कर सकता है। एक अटेंडेंट भावनात्मक सहारा दे सकता है और दैनिक जरूरतों में मदद कर सकता है। इलाज पूरा होने के बाद, अपने डॉक्टर से पूरा होने का लिखित रिकॉर्ड मांगें।

यह भविष्य में TB टेस्ट की जरूरत पड़ने पर मदद करता है क्योंकि सफल इलाज के बाद भी टेस्ट पॉजिटिव रह सकता है।

हॉस्पिटल को कॉल करें अगर आपको ये हों:

  • बुखार
  • लगातार मितली या उल्टी
  • पीली आंखें या त्वचा
  • गहरे रंग का पेशाब
  • बिना वजह थकान
  • नजर में बदलाव
  • हाथों या पैरों में सुन्नपन
  • नए चकत्ते

अध्ययनों में क्षय रोग के इलाज के नतीजे

अध्ययनों में, दवा-संवेदनशील TB के लिए मानक छह महीने का रेजिमेन पूरा लेने पर हाई सक्सेस रेट देता है। आइसोनियाजिड, रिफापेंटाइन, मॉक्सीफ्लोक्सासिन, और पायराजिनामाइड वाला चार महीने का रेजिमेन एक बड़े ट्रायल में मानक छह महीने के रेजिमेन के बराबर असरदार पाया गया।

MDR-TB के लिए, बेडाक्विलाइन-आधारित रेजिमेन में थूक कल्चर कन्वर्जन तेजी से हुआ: सप्ताह 24 में लगभग 78% रोगियों का कन्वर्जन हुआ जबकि प्लेसीबो पर लगभग 58% का। एक अन्य अध्ययन में, बेडाक्विलाइन जोड़ने से कल्चर कन्वर्जन 48% बनाम प्लेसीबो के साथ 9% हो गया।

नए रेजिमेन के साथ MDR-TB के लिए इलाज की सफलता थेरेपी खत्म होने के छह महीने बाद लगभग 89% बताई गई है। नतीजे बेहतर होते हैं जब संक्रमण अधिक दवाओं के प्रति संवेदनशील हो, पहले दवा का संपर्क कम रहा हो, और इलाज जल्दी शुरू हो जाए।

HIV और TB वाले रोगियों के लिए, एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी जल्दी शुरू करना (TB इलाज के चार हफ्ते के भीतर) बाद में शुरू करने की तुलना में मृत्यु दर को 56% कम करता है। एक ट्रायल में, HIV-पॉजिटिव रोगियों में नौ महीने के इलाज ने छह महीने की तुलना में बैक्टीरियोलॉजिकल पुनरावृत्ति कम की, हालांकि मृत्यु दर समान थी।

ये नतीजे अध्ययनों में रोगियों के समूहों से आए हैं; आपका अपना परिणाम आपकी बीमारी के प्रकार, दवा संवेदनशीलता, और आप कितनी नियमित रूप से दवाएं लेते हैं, इस पर निर्भर करता है।

जयपुर में क्षय रोग के इलाज का खर्च और बीमा

जयपुर हॉस्पिटल में, एक कंसल्टेशन का खर्च आमतौर पर ₹1,000 से ₹3,000 होता है। शुरुआती जांच, जिसमें CBNAAT और कल्चर शामिल हैं, का खर्च आमतौर पर ₹5,000 से ₹15,000 होता है। एंटी-TB दवाएं अक्सर नेशनल TB एलिमिनेशन प्रोग्राम (NTEP) के माध्यम से मुफ्त दी जाती हैं।

कुल खर्च TB के प्रकार (दवा-संवेदनशील या दवा-प्रतिरोधी), जरूरी जांचों की संख्या, जटिलताओं के लिए भर्ती की जरूरत (पांच से दस दिन), और इलाज की अवधि (मानक रेजिमेन के लिए छह से नौ महीने; MDR-TB के लिए लंबा) पर निर्भर करता है।

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