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जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी · जयपुर हॉस्पिटल

जयपुर में ब्रेस्ट की गांठ निकालना

ब्रेस्ट में गांठ मिली है? साफ जांच और आसान इलाज योजना पाएं।

  • 1991 से जयपुर की सेवा में (35 साल)
  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त
  • 24×7 इमरजेंसी और आईसीयू
  • कैशलेस: RGHS, मा योजना, CGHS + 22 बीमा कंपनियाँ
फ़ाइल थामे सोच में डूबी एक महिला, साथ में फ़ाइल और टील रंग का रिबन
प्रोसीजर का समय
30 से 60 मिनट
एनेस्थीसिया
लोकल या जनरल एनेस्थीसिया
रिकवरी
अधिकतर मरीज 3 से 7 दिन में सामान्य काम पर लौटते हैं
कीमत
₹25,000 से ₹70,000भारत में आम रेंज; हमसे अनुमानित खर्च पूछें

गांठ चिंता लाती है

आपको गांठ मिली है और पता नहीं इसका क्या मतलब है

ब्रेस्ट की गांठ डरा सकती है। आपको कैंसर, सर्जरी, खर्च या काम से छुट्टी की चिंता हो सकती है। ज्यादातर गांठें बिनाइन (कैंसर नहीं) होती हैं, लेकिन पक्का करने के लिए सही जांच जरूरी है।

  • पता नहीं यह गंभीर है या नहीं

    ज्यादातर गांठें कैंसर नहीं होतीं, लेकिन सिर्फ जांच से पुष्टि हो सकती है।

  • सर्जरी और निशान का डर

    आप कट, आकार बदलने और लंबी रिकवरी को लेकर चिंतित हैं।

  • खर्च और काम से छुट्टी

    प्राइवेट इलाज का खर्च अलग-अलग होता है; आपको पहले ही साफ अनुमानित खर्च चाहिए।

  • उलझाने वाले मेडिकल शब्द

    बायोप्सी, लम्पेक्टॉमी, मार्जिन — आप आसान भाषा में समझना चाहते हैं।

फाइब्रोएडेनोमा एक आम नॉन-कैंसरस ब्रेस्ट ट्यूमर है जो ग्रंथि और कनेक्टिव टिश्यू से बना होता है।

जयपुर हॉस्पिटल क्यों

आप जल्दी जानना चाहते हैं कि गांठ खतरनाक है या नहीं और खर्च क्या होगा, बिना लंबे इंतजार या छिपे शुल्क के।

  • 1991 से एनएबीएच मान्यता प्राप्त मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल
  • मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और इन-हाउस लैब व इमेजिंग
  • RGHS, मा योजना, CGHS और एम्पैनल्ड इंश्योरर के तहत कैशलेस इलाज

आपके इलाज का प्लान

हमारे साथ आपके पहले कदम

  1. 1 सर्जन कंसल्टेशन के लिए कॉल करें या ओपीडी आएं
  2. 2 जरूरत पड़ने पर इन-हाउस स्कैन और बायोप्सी करवाएं
  3. 3 विकल्पों पर चर्चा करें और लागत का अनुमान पाएं
  4. 4 प्रोसीजर करवाएं और फॉलो-अप के साथ रिकवर करें

ऑपरेशन कैसे किया जाता है

सर्जन गांठ को स्वस्थ टिश्यू के मार्जिन के साथ निकालते हैं, आमतौर पर डे-केयर प्रोसीजर की तरह लोकल या जनरल एनेस्थीसिया में।

  • ओपन एक्सिशन

    गांठ को एक छोटे कट से निकाला जाता है, अक्सर एरियोला के किनारे पर, और टिश्यू को जांच के लिए भेजा जाता है।

  • वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिशन

    छोटी बिनाइन गांठों को अल्ट्रासाउंड गाइडेंस में सुई के जरिए एक बहुत छोटे चीरे से निकाला जाता है।

  • वॉचफुल वेटिंग (इंतजार और निगरानी)

    कई छोटे फाइब्रोएडेनोमा को तुरंत सर्जरी के बजाय नियमित इमेजिंग से निगरानी में रखा जाता है।

मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं

  • 1991 35 साल से जयपुर की सेवा में
  • एनएबीएच मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल
  • 3 जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कंसल्टेंट
  • 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू और एम्बुलेंस
  • 25 कैशलेस योजनाएँ और बीमा कंपनियाँ

शोध इस इलाज के बारे में क्या दिखाता है

  • ज्यादातर महिलाएं एक हफ्ते में सामान्य गतिविधियों पर लौटती हैं

    अध्ययनों में लम्पेक्टॉमी के बाद लगभग एक हफ्ते में सामान्य गतिविधि पर रिकवरी बताई गई है।

  • री-एक्सिशन दर लगभग 14 से 22 प्रतिशत

    पूल्ड डेटा दिखाता है कि 14 से 22 प्रतिशत मरीजों को मार्जिन क्लियर करने के लिए दूसरा ऑपरेशन चाहिए।

  • सर्जरी के बाद ब्रेस्ट का आकार बदल सकता है

    शोध में गांठ निकालने के बाद संभावित डिंपल, निशान या दोनों ब्रेस्ट के आकार में अंतर नोट किया गया है।

अगर इलाज न कराया जाए

अगर कैंसर वाली गांठ का इलाज न किया जाए, तो यह बढ़ सकती है और लिम्फ नोड्स या दूसरे अंगों में फैल सकती है, जिससे इलाज ज्यादा जटिल हो जाता है। बिनाइन गांठें भी समय के साथ बड़ी हो सकती हैं या तकलीफ दे सकती हैं।

इलाज के बाद जीवन

ज्यादातर लोग उसी दिन घर जाते हैं और एक हफ्ते के अंदर सामान्य रूटीन शुरू कर देते हैं, फॉलो-अप के साथ हीलिंग और नतीजों की जांच होती है।

  • जल्दी रूटीन पर वापसी

    ज्यादातर लोग प्रोसीजर के एक हफ्ते के अंदर सामान्य गतिविधियों पर लौट आते हैं।

  • पैथोलॉजी से साफ जवाब

    निकाले गए टिश्यू की जांच होती है ताकि आपको सटीक डायग्नोसिस और अगले कदम पता चलें।

  • लगातार सहयोग

    फॉलो-अप विजिट में हीलिंग जांची जाती है और जरूरत पड़ने पर आगे की देखभाल पर चर्चा होती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ब्रेस्ट की गांठ निकालना के बारे में मरीज़ों के सवाल

ब्रेस्ट की गांठ निकालने की सर्जरी में क्या होता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में ब्रेस्ट की गांठ निकालने की सर्जरी ब्रेस्ट से गांठ को निकालने का ऑपरेशन है। सर्जन एक छोटा चीरा लगाते हैं, गांठ और उसके आसपास का थोड़ा नॉर्मल टिशू निकालते हैं, और टांके लगाकर त्वचा को बंद कर देते हैं। यह प्रक्रिया आमतौर पर 30 से 60 मिनट में लोकल या जनरल एनेस्थीसिया (बेहोशी) में पूरी होती है। ज्यादातर मरीज़ उसी दिन घर चले जाते हैं।

विस्तार से

इस ऑपरेशन को एक्सिज़नल ब्रेस्ट बायोप्सी या लम्पेक्टॉमी भी कहते हैं। बड़ी गांठ के लिए ओपन एक्सिज़न (चीरे वाली सर्जरी) की जाती है; चीरा अक्सर एरियोला के किनारे पर लगाया जाता है।

छोटी बिनाइन (साधारण) गांठ के लिए वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिज़न एक विकल्प हो सकता है, जिसमें अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) की गाइडेंस में सुई का इस्तेमाल होता है। सर्जन भविष्य के मैमोग्राम के लिए उस जगह को मार्क करने के लिए छोटी मेटल क्लिप्स लगा सकते हैं।

अगर गांठ कैंसर वाली है, तो पैथोलॉजिस्ट निकाले गए टिशू के किनारों की जांच करता है कि सारा कैंसर निकल गया है या नहीं। बगल के लिम्फ नोड्स भी निकाले जा सकते हैं यह देखने के लिए कि कैंसर फैला तो नहीं। तकनीक गांठ के आकार, प्रकार और जगह पर निर्भर करती है।

एक आम धारणा

कुछ लोगों को लगता है कि पूरा ब्रेस्ट निकाल दिया जाता है।

असल में क्या होता है

वह मास्टेक्टॉमी है, जो तभी की जाती है जब कैंसर का हिस्सा बहुत बड़ा हो या एक से ज़्यादा ट्यूमर हों। एक्सिज़न में आपका ज्यादातर ब्रेस्ट बचा रहता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सर्जरी के बाद, आप आमतौर पर 3 से 7 दिन में सामान्य गतिविधि पर लौट सकते हैं। आपको घाव की देखभाल करनी होगी, सपोर्टिव ब्रा पहननी होगी, और 1 से 2 हफ्ते तक भारी वजन उठाने से बचना होगा।

टांके लगभग एक हफ्ते में घुल सकते हैं या निकाले जा सकते हैं। आपका सर्जन फॉलो-अप विज़िट पर पैथोलॉजी रिपोर्ट के नतीजे बताएगा।

ब्रेस्ट की गांठ निकालने की सर्जरी से पहले मुझे कौन से टेस्ट और स्कैन चाहिए?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में ब्रेस्ट की गांठ निकालने की सर्जरी से पहले, आपको आमतौर पर इमेजिंग और बायोप्सी की ज़रूरत होती है। अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) आम है और मैमोग्राफी आपकी उम्र और गांठ की खासियत के हिसाब से जोड़ी जा सकती है। कोर नीडल बायोप्सी या फाइन-नीडल एस्पिरेशन से टिशू का पता चलता है। खून की जाँच और एनेस्थीसिया (बेहोशी) के लिए फिटनेस चेक भी सर्जरी से पहले किए जाते हैं।

विस्तार से

इमेजिंग से सर्जन को गांठ का पता लगाने और ऑपरेशन प्लान करने में मदद मिलती है। अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) लगभग 72 प्रतिशत केस में और मैमोग्राफी लगभग 26 प्रतिशत केस में इस्तेमाल होती है।

अगर गांठ छूकर महसूस न हो, तो रेडियोलॉजिस्ट सर्जरी से पहले नीडल वायर लगा सकता है या दूसरे लोकलाइज़ेशन तरीके इस्तेमाल कर सकता है। बायोप्सी कन्फर्म करती है कि गांठ बिनाइन है, जैसे फाइब्रोएडेनोमा, या मैलिग्नेंट।

कैंसर के लिए, पैथोलॉजी रिपोर्ट में हॉर्मोन रिसेप्टर स्टेटस (ER, PgR) और HER2 स्टेटस होता है, जो आगे के इलाज को गाइड करते हैं। प्री-ऑपरेटिव खून की जाँच आपका हीमोग्लोबिन, क्लॉटिंग, और बेसिक ऑर्गन फंक्शन चेक करती है। आपका सर्जन आपको बताएंगे कि आपके केस के लिए कौन से टेस्ट ज़रूरी हैं।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ सोचते हैं कि सिर्फ स्कैन काफी है।

असल में क्या होता है

बायोप्सी ज़रूरी है क्योंकि यह सर्जन को ठीक-ठीक बताती है कि गांठ क्या है और क्या यह कैंसर है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सारे टेस्ट हॉस्पिटल के इन-हाउस डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी और इमेजिंग सेंटर में हो सकते हैं। नतीजे आमतौर पर कुछ दिनों में आ जाते हैं। रिपोर्ट तैयार होने पर, आपका सर्जन उन्हें देखेगा और सर्जरी प्लान कन्फर्म करेगा।

ब्रेस्ट की गांठ निकालना और शुरुआती रिकवरी कितनी दर्दनाक होती है?

संक्षेप में

अधिकांश मरीजों को ब्रेस्ट की गांठ निकालने के दौरान बहुत कम दर्द होता है क्योंकि एनेस्थीसिया दी जाती है। जयपुर हॉस्पिटल में सर्जरी के बाद, कुछ दिनों तक हल्की तकलीफ होना आम है जो आमतौर पर साधारण दर्द निवारक दवा से ठीक हो जाती है। प्रक्रिया में 30 से 60 मिनट लगते हैं और यह आमतौर पर डे केयर (दिन में भर्ती, शाम को छुट्टी) के रूप में की जाती है।

विस्तार से

ऑपरेशन के दौरान आपको लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) या जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) दी जाती है, इसलिए आपको दर्द महसूस नहीं होता।

अध्ययन (स्टडी) दिखाते हैं कि सिंपल लम्पेक्टॉमी के बाद कई महिलाओं को बहुत कम दर्द होता है; अगर दर्द हो तो ओवर-द-काउंटर दवाएं जैसे एसिटामिनोफेन मदद करती हैं।

ओपन एक्सिशन (चीरे वाली सर्जरी) में एक छोटा कट लगाया जाता है, जबकि वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिशन में अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) गाइडेंस में सुई का इस्तेमाल होता है और अक्सर टांके नहीं लगते। दोनों तकनीकें बड़ी सर्जरी के मुकाबले टिश्यू को कम नुकसान पहुंचाती हैं।

निशान या निप्पल के पास सुन्नपन हो सकता है लेकिन यह आमतौर पर हफ्तों में ठीक हो जाता है। आपका सर्जन गांठ के आकार और प्रकार के आधार पर तरीका चुनेगा।

एक आम धारणा

लोग अक्सर सर्जरी समझकर तेज दर्द की उम्मीद करते हैं, लेकिन कट छोटा होता है और वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिशन जैसी तकनीकों में टांके नहीं लगते।

असल में क्या होता है

निशान के पास सुन्नपन हो सकता है लेकिन आमतौर पर यह चला जाता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सर्जरी वाले दिन आराम करने की योजना बनाएं। ज्यादातर लोग 3 से 7 दिन में सामान्य गतिविधि पर लौट आते हैं।

जरूरत पड़ने पर बताई गई दर्द की गोलियां लें, सपोर्टिव स्पोर्ट्स ब्रा पहनें, और 1 से 2 हफ्ते तक भारी सामान उठाने या जॉगिंग से बचें। ड्रेसिंग को साफ रखें और नर्स के निर्देश के अनुसार इसे बदलें।

अगर दर्द बढ़े या कुछ दिनों बाद भी ठीक न हो, तो हॉस्पिटल से संपर्क करें। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि आपके दर्द प्रबंधन की योजना पर चर्चा हो सके।

ब्रेस्ट की गांठ निकालने के बाद रिकवरी में आमतौर पर कितना समय लगता है?

संक्षेप में

ब्रेस्ट की गांठ निकालने के बाद ज्यादातर मरीज़ 3 से 7 दिन में सामान्य गतिविधि पर लौट आते हैं। त्वचा को पूरी तरह भरने में लगभग एक महीना लगता है। जयपुर हॉस्पिटल में यह प्रक्रिया आमतौर पर डे केयर होती है, इसलिए आप उसी दिन घर जा सकते हैं। रिकवरी की रफ्तार इस्तेमाल की गई तकनीक और आपकी सेहत पर निर्भर करती है।

विस्तार से

सबूत दिखाते हैं कि सिंपल लम्पेक्टॉमी के बाद रिकवरी का समय बहुत कम होता है। कई महिलाओं को बहुत कम दर्द होता है; अगर दर्द हो तो साधारण दर्द निवारक दवा मदद करती है।

वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिज़न बायोप्सी के बाद कुछ दिन दर्द और नील पड़ सकते हैं, लेकिन आप आराम महसूस होते ही सामान्य काम शुरू कर सकते हैं। ओपन एक्सिज़न में टांके लग सकते हैं जो लगभग एक हफ्ते में घुल जाते हैं या निकाले जाते हैं।

1 से 2 हफ्ते तक भारी सामान उठाने, जॉगिंग करने या सर्जरी वाली जगह पर दर्द पैदा करने वाली गतिविधियों से बचें। सपोर्टिव स्पोर्ट्स ब्रा पहनने से आराम मिलता है। अगर ड्रेन लगाया गया है, तो उसे 1 से 2 हफ्ते तक खाली करना पड़ सकता है।

एक आम धारणा

कुछ लोग हफ्तों बेड रेस्ट की उम्मीद करते हैं, लेकिन कट छोटा होता है और वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिज़न जैसी आधुनिक तकनीकों में टांके नहीं लगते।

असल में क्या होता है

भारी सामान उठाना और जॉगिंग 1 से 2 हफ्ते रोकनी चाहिए।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सर्जरी वाले दिन आराम करने का प्लान रखें। पहले हफ्ते दिन-रात आरामदायक सपोर्टिव ब्रा पहनें। नर्स की सलाह के मुताबिक ड्रेसिंग बदलें। अगर पारंपरिक टांके लगे हैं तो टांके निकलने तक स्पंज बाथ लें।

ज्यादातर लोग एक हफ्ते में डेस्क वर्क पर लौट आते हैं; मेहनत वाले काम में दो हफ्ते लग सकते हैं। ड्राइविंग शुरू करने से पहले अपने सर्जन से पूछ लें। घाव की जांच और पैथोलॉजी रिपोर्ट के लिए फॉलो-अप विज़िट पर ज़रूर जाएं। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करके अपने लिए पर्सनलाइज़्ड रिकवरी टाइमलाइन पता करें।

एक बिनाइन (साधारण) ब्रेस्ट की गांठ को कैंसर से कैसे अलग किया जाता है?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में पूरी जांच करके बिनाइन ब्रेस्ट की गांठ को कैंसर से अलग किया जाता है। सर्जन क्लिनिकल जांच करते हैं, अल्ट्रासाउंड या मैमोग्राफी जैसे इमेजिंग करते हैं, और सेल्स देखने के लिए नीडल बायोप्सी करते हैं। इन सबको मिलाकर पता चलता है कि गांठ फाइब्रोएडेनोमा या कोई और बिनाइन हालत है या कैंसर के सेल्स मौजूद हैं।

विस्तार से

अध्ययनों में, इमेजिंग में 72.5% मामलों में अल्ट्रासाउंड और 26.1% में मैमोग्राफी शामिल थी। टिश्यू डायग्नोसिस 18.3% मामलों में कोर नीडल बायोप्सी से, 25.5% में फाइन-नीडल एस्पिरेशन से, और 11.1% मरीजों में एक्सिजनल बायोप्सी से मिली।

फाइब्रोएडेनोमा में कनेक्टिव और ग्लैंडुलर टिश्यू का मिश्रण होता है और यह कैंसर नहीं है। साधारण फाइब्रोएडेनोमा आमतौर पर 1 से 3 सेंटीमीटर आकार के होते हैं। पैथोलॉजिस्ट बायोप्सी सैंपल देखकर पक्का डायग्नोसिस देते हैं। सर्जन आपको नतीजे समझाएंगे और बताएंगे कि आपके इलाज के लिए इनका क्या मतलब है।

एक आम धारणा

कई लोगों को लगता है कि कैंसर की गांठ छूने में अलग लगती है, लेकिन बिनाइन और कैंसर वाली गांठें एक जैसी महसूस हो सकती हैं।

असल में क्या होता है

सिर्फ बायोप्सी से पक्का पता चलता है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

पहली जांच के बाद आपका सर्जन बताएगा कि आपको कौन से टेस्ट चाहिए। ज्यादातर टेस्ट हॉस्पिटल के डायग्नोस्टिक डिपार्टमेंट में होते हैं। नतीजे आमतौर पर कुछ दिनों में आ जाते हैं। फिर आप अपने सर्जन से अगले कदम पर बात कर सकते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करके अपनी जांच शुरू करें।

सर्जन कैसे तय करेंगे कि ऑपरेशन ज़रूरी है या नहीं?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल के सर्जन पूरी जाँच के नतीजे आने के बाद सर्जरी (ऑपरेशन) का फ़ैसला लेते हैं। इसमें बायोप्सी की रिपोर्ट, गांठ का आकार, उसका बढ़ना या दर्द होना, आपकी उम्र, और आपके या परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास देखा जाता है। कई छोटी फ़ाइब्रोएडिनोमा (फाइब्रोएडिनोमा) को बस निगरानी में रखा जाता है, निकाला नहीं जाता। सर्जरी तब सुझाई जाती है जब गांठ बड़ी हो, बढ़ रही हो, दर्द दे रही हो, या बायोप्सी में असामान्य सेल्स (atypical cells) दिखें।

विस्तार से

अध्ययनों में, फ़ाइब्रोएडिनोमा निकालने के लिए सर्जरी तब सुझाई जा सकती है जब परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास हो या गांठ बड़ी हो।

डॉक्टर फ़ैसला इस आधार पर ले सकते हैं कि गांठ बढ़ रही है या बदल रही है — यह शारीरिक जाँच और इमेजिंग के नतीजों से पता चलता है — या उसमें दर्द है।

साधारण फ़ाइब्रोएडिनोमा जो तकलीफ़ न दे रहे हों, उनके लिए 6 से 24 महीने के अंतर पर फॉलो-अप इमेजिंग के साथ निगरानी रखी जा सकती है।

अगर बायोप्सी में कॉम्प्लेक्स फ़ाइब्रोएडिनोमा निकले और आपको या परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास हो, तो निकालना सुझाया जा सकता है। सर्जन आपके साथ सारे विकल्पों पर चर्चा करेंगे।

एक आम धारणा

लोग अक्सर सोचते हैं कि हर गांठ निकालनी ही पड़ती है।

असल में क्या होता है

असल में, गाइडलाइन कई बिनाइन (benign) गांठों की निगरानी का समर्थन करती हैं, जब तक कोई साफ़ वजह न हो सर्जरी की।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आपकी जाँच के बाद सर्जन नतीजे समझाएंगे और बताएंगे कि सर्जरी की सलाह है या नहीं। अगर निगरानी का विकल्प हो, तो आपको फॉलो-अप का शेड्यूल मिलेगा। अगर सर्जरी सुझाई जाए, तो सर्जन तकनीक, एनेस्थीसिया (बेहोशी) और रिकवरी (ठीक होना) के बारे में बताएंगे।

डॉक्टर कैसे तय करेंगे कि मुझे ब्रेस्ट की गांठ निकालने की सर्जरी चाहिए?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में डॉक्टर क्लिनिकल जांच, इमेजिंग जैसे अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) या मैमोग्राम, और बायोप्सी के नतीजों के आधार पर फैसला लेते हैं। कोर नीडल बायोप्सी या फाइन-नीडल एस्पिरेशन से टिशू का पता चलता है। गांठ का आकार, प्रकार, बढ़ने का पैटर्न, और आपकी निजी व पारिवारिक हिस्ट्री सब देखी जाती है। कैंसर होने पर, स्टेज और रिसेप्टर स्टेटस भी प्लान तय करते हैं।

विस्तार से

इमेजिंग ज्यादातर केस में इस्तेमाल होती है; अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) आम है और मैमोग्राफी ज़रूरत के हिसाब से। कोर नीडल बायोप्सी से कई मरीज़ों में डायग्नोसिस मिल जाता है, जबकि कुछ को फाइनल जवाब के लिए एक्सिज़नल बायोप्सी चाहिए होती है।

पैथोलॉजी रिपोर्ट बताती है कि गांठ बिनाइन है, जैसे फाइब्रोएडेनोमा, या मैलिग्नेंट। बिनाइन गांठ के लिए डॉक्टर देखते हैं कि क्या यह बढ़ रही है, दर्द दे रही है, या पारिवारिक हिस्ट्री जैसे रिस्क फैक्टर हैं।

कैंसर के लिए, ट्यूमर का आकार, लिम्फ नोड स्टेटस, और हॉर्मोन रिसेप्टर स्टेटस (ER, PgR, HER2) देखे जाते हैं। SSO-ASTRO मार्जिन गाइडलाइन का मकसद क्लियर मार्जिन पाना है ताकि दोबारा सर्जरी की ज़रूरत कम हो। आपका सर्जन बताएंगे कि ये बातें आप पर कैसे लागू होती हैं।

एक आम धारणा

कुछ मरीज़ सोचते हैं कि सिर्फ स्कैन काफी है।

असल में क्या होता है

सर्जरी का फैसला करने से पहले बायोप्सी आमतौर पर ज़रूरी होती है ताकि पता चले गांठ असल में क्या है।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

आपका एक कंसल्टेशन होगा जहां सर्जन सारी रिपोर्ट देखेंगे और आपकी जांच करेंगे। अगर सर्जरी चाहिए, तो तकनीक और एनेस्थीसिया (बेहोशी) गांठ की खासियत के हिसाब से चुनी जाती है। शेड्यूल करने से पहले प्री-ऑपरेटिव टेस्ट और फिटनेस चेक होता है।

ब्रेस्ट की गांठ निकालने की सर्जरी से पहले के दिनों में मुझे कैसे तैयारी करनी चाहिए?

संक्षेप में

जयपुर हॉस्पिटल में ब्रेस्ट की गांठ निकालने की सर्जरी से पहले के दिनों में, आपको अपने सर्जन को सारी दवाएं, सप्लीमेंट, और हर्बल प्रोडक्ट बताने चाहिए जो आप लेते हैं। आपको खून पतला करने वाली दवाएं जैसे एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन, नेप्रोक्सेन, क्लोपिडोग्रेल, या वारफारिन कुछ समय के लिए रोकने को कहा जा सकता है। अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो प्रोसीजर से कम से कम दो हफ्ते पहले बंद करने की कोशिश करें। अपने सर्जन के खास निर्देशों का पालन करें।

विस्तार से

आपका सर्जन आपकी दवाओं की लिस्ट देखेगा और बताएगा कि कौन सी रोकनी हैं और कितने समय के लिए। कुछ दवाएं सर्जरी के दिन भी थोड़े पानी के साथ लेनी होती हैं।

आपको दवाओं, खाने, या लेटेक्स से किसी भी एलर्जी के बारे में भी बताना चाहिए। प्री-एनेस्थीसिया चेक-अप आपकी फिटनेस जांचने के लिए होगा। हॉस्पिटल आपको सर्जरी से पहले खाने-पीने के बारे में निर्देश देगा।

एक अटेंडेंट का इंतज़ाम करना ज़रूरी है जो आपके साथ रहे और घर जाने में मदद करे, क्योंकि यह प्रोसीजर आमतौर पर डे केयर होता है।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर हर्बल प्रोडक्ट या बिना पर्चे के पेनकिलर बताना भूल जाते हैं।

असल में क्या होता है

ये ब्लीडिंग और एनेस्थीसिया (बेहोशी) पर असर डाल सकते हैं, इसलिए सर्जन को सब पता होना चाहिए जो आप लेते हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

सर्जरी की तारीख से कुछ दिन पहले सारे प्री-ऑपरेटिव टेस्ट पूरे कर लें। एक दिन पहले, हॉस्पिटल से अपना पहुंचने का समय कन्फर्म करें। ढीले, आरामदायक कपड़े पहनें और प्रोसीजर के बाद पहनने के लिए एक सपोर्टिव ब्रा साथ लाएं।

ब्रेस्ट की गांठ निकालने के आम साइड इफेक्ट और कम आम लेकिन गंभीर जटिलताएं क्या हैं?

संक्षेप में

ब्रेस्ट की गांठ निकालने के बाद आम साइड इफेक्ट में एक छोटा निशान, हल्की चोट (ब्रूजिंग), सूजन, और कट या निप्पल के पास अस्थायी सुन्नपन शामिल हैं। कम आम लेकिन गंभीर जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) हैं संक्रमण (इन्फेक्शन), ब्लीडिंग जो न रुके, घाव का ठीक से न भरना, या दोबारा ऑपरेशन की जरूरत अगर निकाले गए टिश्यू के किनारे पर कैंसर सेल्स मिलें। जयपुर हॉस्पिटल इन पर बारीकी से नजर रखता है।

विस्तार से

अध्ययन (स्टडी) दिखाते हैं कि ब्रेस्ट का आकार डिंपलिंग (गड्ढे), निशान, या दोनों ब्रेस्ट के आकार में अंतर से बदल सकता है। निशान या निप्पल के पास का एरिया सुन्न महसूस हो सकता है।

संक्रमण के लक्षणों में कट वाली जगह से लाली, सूजन, या ड्रेनेज (स्राव) शामिल हैं। अध्ययनों में, ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी के बाद री-ऑपरेशन (दोबारा सर्जरी) की दर मार्जिन गाइडलाइन्स के आधार पर 14% से 22% तक रही।

वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिशन से ब्रेस्ट के आकार पर असर पड़ने की संभावना कम होती है। आपका सर्जन निकाले गए टिश्यू के मार्जिन (किनारे) जांचता है; अगर कैंसर किनारे के बहुत पास है, तो और टिश्यू निकालने की जरूरत पड़ सकती है। अतिरिक्त तरल निकालने के लिए ड्रेन ट्यूब शायद ही कभी लगाई जाती है।

एक आम धारणा

कई लोग सोचते हैं कि किसी भी गांठ निकालने से बड़ा डिफॉर्मिटी (विकृति) होता है, लेकिन वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिशन से ब्रेस्ट का आकार मुश्किल से बदलता है।

असल में क्या होता है

अध्ययनों में री-ऑपरेशन दर 14% से 22% तक अलग-अलग होती है, इसलिए साफ मार्जिन मायने रखते हैं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

घाव को रोज देखें कि कहीं लाली, सूजन, गर्मी, या मवाद तो नहीं बढ़ रही। अगर ब्लीडिंग न रुके, बुखार आए, या अचानक तेज दर्द हो, तो हॉस्पिटल कॉल करें। ज्यादातर साइड इफेक्ट एक महीने में ठीक हो जाते हैं।

टांके घुल सकते हैं या लगभग एक हफ्ते बाद निकाले जा सकते हैं। फॉलो-अप अपॉइंटमेंट पर जाएं ताकि टीम हीलिंग जांच सके और पैथोलॉजी रिजल्ट पर चर्चा कर सके। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि आपके खास जोखिमों के बारे में और जान सकें।

ब्रेस्ट की गांठ निकालने के बाद कौन से लक्षण सामान्य हैं और किनके लिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

संक्षेप में

सामान्य लक्षणों में हल्का दर्द, नील पड़ना, सूजन, कट के साथ एक सख्त रिज, और निशान या निप्पल के पास सुन्नपन शामिल हैं। ये आमतौर पर हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। खतरे के संकेत हैं: खून बहना जो रुके नहीं, घाव के आसपास बढ़ती लाली या गर्मी, मवाद निकलना, बुखार, अचानक तेज दर्द, या नई गांठ। जयपुर हॉस्पिटल आपको चिंता होने पर 24 घंटे का संपर्क नंबर देता है।

विस्तार से

सबूत में सामान्य पोस्ट-ऑपरेटिव लक्षण बताए गए हैं: कई दिनों तक बेचैनी, नील, और निशान जिससे डिंपल या आकार में बदलाव आ सकता है। निशान या निप्पल के पास सुन्नपन आम है। ड्रेन लगाया जा सकता है; आपको तरल मापकर रिकॉर्ड करना होता है।

संक्रमण के संकेत हैं: कट से लाली, सूजन, या स्राव। अध्ययनों में, कुछ मामलों में दोबारा ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ी जब मार्जिन इन्वॉल्व्ड थे। वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिज़न से आकार में कम बदलाव आता है। सर्जरी के दौरान लगाए गए मेटल क्लिप सामान्य हैं और भविष्य की इमेजिंग में मदद करते हैं।

एक आम धारणा

मरीज़ अक्सर चिंता करते हैं कि कट के साथ सख्त रिज नई गांठ है, लेकिन यह हीलिंग टिशू है।

असल में क्या होता है

सुन्नपन हफ्तों रह सकता है पर आमतौर पर चला जाता है। ड्रेन अस्थायी है और कॉम्प्लिकेशन नहीं।

जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम

घाव को रोज़ चेक करें। पहले 48 घंटे नियमित रूप से दी गई दर्द की दवा लें। सपोर्टिव ब्रा पहनें और अगर ब्रा रगड़ती है तो कट पर गॉज़ रखें। ड्रेन है तो उसका आउटपुट खाली करके रिकॉर्ड करें।

बेकाबू खून बहने, 38°C से ऊपर बुखार, फैलती लाली, या बदबूदार स्राव होने पर तुरंत हॉस्पिटल कॉल करें। टांके निकलवाने और पैथोलॉजी पर चर्चा के लिए फॉलो-अप अपॉइंटमेंट पर जाएं। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करके पूरा पोस्ट-ऑपरेटिव इंस्ट्रक्शन शीट लें।

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  • ओपीडी में जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जन के साथ कंसल्टेशन
  • आपके स्कैन और रिपोर्ट की समीक्षा, जरूरत पड़ने पर इन-हाउस टेस्ट (लैब, एक्स-रे और इमेजिंग)
  • आपके विकल्प आसान शब्दों में समझाए गए, जिसमें यह भी कि क्या आपको सर्जरी की जरूरत है भी
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  • आपके इलाज के बाद फॉलो-अप विजिट
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पूरी जानकारी

ब्रेस्ट की गांठ निकालना: ज़रूरी जानकारी

ब्रेस्ट की गांठ क्या होती है और यह कैसे बनती है

ब्रेस्ट की गांठ क्या है
बिनाइन गांठ
कैंसर नहीं, अक्सर फाइब्रोएडेनोमा
आकार की रेंज
आमतौर पर 1 से 3 सेंटीमीटर
क्लियर मार्जिन
निकाले गए टिश्यू के किनारे पर कैंसर सेल नहीं

ब्रेस्ट की गांठ एक अलग सी सूजन या मास होती है जो आसपास के ब्रेस्ट टिश्यू से अलग महसूस होती है। कई गांठें बिनाइन होती हैं, यानी वे कैंसर नहीं होतीं। एक आम बिनाइन गांठ फाइब्रोएडेनोमा होती है, जो कनेक्टिव और ग्लैंडुलर टिश्यू से बनी होती है।

सिंपल फाइब्रोएडेनोमा का आकार आमतौर पर 1 से 3 सेंटीमीटर के बीच होता है। गांठ का पता चलना चिंता की बात हो सकती है, लेकिन फाइब्रोएडेनोमा कैंसर नहीं होता। ब्रेस्ट की गांठ निकालना एक सर्जरी है जिसमें उस गांठ को निकाला जाता है जो ब्रेस्ट कैंसर हो सकती है। इस प्रक्रिया को एक्सिज़नल ब्रेस्ट बायोप्सी या लम्पेक्टॉमी भी कहते हैं। जब निकाले गए टिश्यू के किनारों के पास कैंसर सेल नहीं मिलते, तो इसे क्लियर मार्जिन कहते हैं।

कुछ सिंपल फाइब्रोएडेनोमा मेनोपॉज़ के बाद अपने आप छोटे हो सकते हैं। किशोरावस्था और गर्भावस्था के बाद सिंपल फाइब्रोएडेनोमा का आकार आमतौर पर कम होने लगता है। हालांकि, किशोरावस्था और गर्भावस्था के दौरान ये बड़े भी हो सकते हैं। ज्यादातर मरीज़ एक ही ब्रेस्ट मास के साथ आते हैं। कभी-कभी जांच करने पर डॉक्टर को गांठ महसूस नहीं होती।

लक्षण और चेतावनी के संकेत जिनमें उसी दिन इलाज ज़रूरी है

तुरंत देखभाल वाले संकेत
  • अचानक लालिमा, सूजन, गर्माहट या स्राव
  • अचानक दर्द वाली गांठ और तेज़ बुखार
  • प्रक्रिया के बाद संक्रमण के लक्षण
इमरजेंसी? 0141 255 1500 पर कॉल करें, 24×7

आपको ब्रेस्ट या बगल के हिस्से में एक अलग सी गांठ या मोटापन महसूस हो सकता है। गांठ नरम या सख्त हो सकती है और दर्द न करने वाली भी हो सकती है।

आप यह देख सकते हैं:

  • ब्रेस्ट के आकार या शेप में बदलाव
  • त्वचा में गड्ढे पड़ना
  • निप्पल में बदलाव जैसे अंदर धंसना या डिस्चार्ज

अगर आपको अचानक लालिमा, सूजन, गर्माहट या ब्रेस्ट की त्वचा से कोई स्राव दिखे, तो उसी दिन डॉक्टर को दिखाएं क्योंकि ये संक्रमण या फोड़े का संकेत हो सकते हैं। अगर गांठ अचानक उभरे और बहुत दर्द हो, या ब्रेस्ट के लक्षणों के साथ तेज़ बुखार आए, तो इमरजेंसी डिपार्टमेंट जाएं।

किसी भी ब्रेस्ट प्रक्रिया के बाद, कट वाली जगह पर लालिमा, सूजन या स्राव जैसे संक्रमण के लक्षणों पर नज़र रखें। अगर दर्द बढ़े, खून बहना न रुके, या घाव ठीक न हो, तो अपने सर्जन से संपर्क करें।

कारण और किन्हें ज़्यादा जोखिम है

कारण और जोखिम कारक
हार्मोन
गांठ बनने में भूमिका निभाते हैं
हार्मोन थेरेपी
फाइब्रोएडेनोमा का आकार बढ़ा सकती है
कॉम्प्लेक्स फाइब्रोएडेनोमा
भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम थोड़ा बढ़ाता है
पारिवारिक इतिहास
सर्जरी की सलाह दी जा सकती है

कई ब्रेस्ट गांठों का सटीक कारण पूरी तरह पता नहीं है, लेकिन हार्मोन की भूमिका होती है। हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से सिंपल फाइब्रोएडेनोमा का आकार बढ़ सकता है। सिंपल फाइब्रोएडेनोमा शायद ही कभी कैंसर बनते हैं। कॉम्प्लेक्स फाइब्रोएडेनोमा से भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है।

अगर आपके परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास है तो सर्जरी की सलाह दी जा सकती है। डॉक्टर आपकी उम्र, गांठ का आकार, बढ़ना, बदलना या तकलीफ देना देखकर निकालने की सलाह दे सकते हैं।

उन सिंपल फाइब्रोएडेनोमा के लिए जो तकलीफ नहीं दे रहे, हर 6 से 24 महीने में इमेजिंग फॉलो-अप के साथ इंतज़ार करने का तरीका अपनाया जा सकता है। गांठ के आकार के हिसाब से हो सकता है कि आपको तुरंत न निकालना पड़े।

ब्रेस्ट की गांठ की पहचान कैसे होती है: जांच और टेस्ट

इमेजिंग और बायोप्सी का उपयोग
  • 72.5% अल्ट्रासाउंड उपयोग
  • 26.1% मैमोग्राफी उपयोग
  • 18.3% कोर नीडल बायोप्सी
  • 25.5% FNA बायोप्सी

आपका डॉक्टर आपके ब्रेस्ट की जांच करेगा और मेडिकल हिस्ट्री पूछेगा। गांठ देखने के लिए इमेजिंग टेस्ट किए जाते हैं। लगभग 72.5% मामलों में अल्ट्रासाउंड और लगभग 26.1% मामलों में मैमोग्राफी इस्तेमाल होती है। फाइब्रोएडेनोमा मैमोग्राम या अल्ट्रासाउंड जैसे इमेजिंग पर दिख सकता है।

पक्की पहचान के लिए टिश्यू का सैंपल चाहिए।

यह इनसे किया जा सकता है:

  • फाइन-नीडल एस्पिरेशन (FNA)
  • कोर नीडल बायोप्सी
  • एक्सिज़नल बायोप्सी

अध्ययनों में, टिश्यू डायग्नोसिस कोर नीडल बायोप्सी से 18.3% मामलों में, FNA से 25.5% में, और एक्सिज़नल बायोप्सी से 11.1% मरीज़ों में मिला। कोर नीडल बायोप्सी की तुलना ओपन एक्सिज़न बायोप्सी से करने पर ER स्टेटस के लिए पूल्ड सेंसिटिविटी 0.970, PgR स्टेटस के लिए 0.911, और HER2 स्टेटस के लिए 0.799 थी।

जिन मरीज़ों में ओपन एक्सिज़न बायोप्सी में हार्मोनल रिसेप्टर नेगेटिव ट्यूमर निकले, उनमें ER और PgR एक्सप्रेशन को कोर नीडल बायोप्सी पर दोबारा जांचना चाहिए।

सर्जरी के बिना इलाज के विकल्प और कब सर्जरी की सलाह दी जाती है

हर ब्रेस्ट गांठ को सर्जरी की ज़रूरत नहीं होती। उन सिंपल फाइब्रोएडेनोमा के लिए जो तकलीफ नहीं दे रहे, डॉक्टर हर 6 से 24 महीने में रेगुलर इमेजिंग फॉलो-अप के साथ इंतज़ार करने की सलाह दे सकते हैं। क्रायोएब्लेशन, जिसमें फ्रीज़िंग तकनीक से फाइब्रोएडेनोमा टिश्यू को नष्ट किया जाता है, छोटे फाइब्रोएडेनोमा के लिए एक और विकल्प है।

वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिज़न बायोप्सी और थर्मल एब्लेशन कम इनवेसिव प्रक्रियाएं हैं जिनमें जल्दी रिकवरी होती है और निशान कम पड़ते हैं। इनकी उपयुक्तता गांठ के प्रकार और आकार पर निर्भर करती है।

सर्जरी की सलाह तब दी जाती है जब गांठ को कैंसर माना जाए या शक हो, जब बिनाइन गांठ बड़ी, बढ़ रही, दर्द वाली या चिंता का कारण हो, या जब आपको या आपके परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास हो। छोटी ब्रेस्ट गांठों के लिए लम्पेक्टॉमी अक्सर पसंद की जाती है।

आपको और आपके सर्जन को ट्यूमर का आकार, आपकी उम्र, और आप गर्भवती हैं या नहीं, यह देखना चाहिए। अगर कैंसर का क्षेत्र बहुत बड़ा हो या कई ट्यूमर हों जिन्हें ब्रेस्ट का शेप बिगाड़े बिना न निकाला जा सके, तो पूरा ब्रेस्ट टिश्यू निकालने के लिए मास्टेक्टॉमी की जा सकती है। चुनी गई तकनीक से खर्च पर भी असर पड़ता है।

ब्रेस्ट की गांठ निकालने की सर्जरी की तैयारी

आपके ऑपरेशन से पहले

करें

  • सर्जन को सभी दवाएं बताएं
  • सलाह के मुताबिक खून पतला करने वाली दवाएं बंद करें
  • फास्टिंग के निर्देश मानें
  • सपोर्टिव ब्रा साथ लाएं

जयपुर हॉस्पिटल में आपके ऑपरेशन से पहले, आपकी सर्जिकल टीम आपसे कुछ रूटीन जांच करवाएगी। खून की जांच, चेस्ट एक्स-रे और ईसीजी आम हैं ताकि पता चले कि आप एनेस्थीसिया के लिए फिट हैं।

अगर गांठ आसानी से महसूस न हो, तो रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड या मैमोग्राम गाइडेंस से ब्रेस्ट में एक पतला तार या मार्कर लगा सकते हैं ताकि सर्जन को सही जगह मिल जाए।

अपने सर्जन को हर दवा के बारे में बताएं जो आप ले रहे हैं, जिसमें बिना प्रिस्क्रिप्शन की दवाएं और हर्बल प्रोडक्ट भी शामिल हैं। खून पतला करने वाली दवाएं — जैसे एस्पिरिन, आइबूप्रोफेन, नेप्रोक्सेन, क्लोपिडोग्रेल या वारफारिन — आमतौर पर सर्जरी से कुछ दिन पहले बंद कर दी जाती हैं ताकि खून बहने का खतरा कम हो।

आपका सर्जन बताएगा कि कौन सी दवा कब तक रोकनी है। साथ ही दवाओं, खाने, लेटेक्स या रबर से किसी एलर्जी के बारे में भी बताएं।

अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो प्रक्रिया से कम से कम दो हफ्ते पहले बंद करने की कोशिश करें; धूम्रपान घाव भरने में देरी कर सकता है। सर्जरी वाले दिन, एनेस्थीसिया टीम के दिए फास्टिंग निर्देश मानें — आमतौर पर जनरल एनेस्थीसिया से छह घंटे पहले कुछ न खाएं-पिएं।

केवल वही दवाएं लें जो आपके सर्जन ने बताई हों, थोड़े पानी के साथ। ढीले, आरामदायक कपड़े पहनें और बाद में पहनने के लिए एक सपोर्टिव ब्रा (स्पोर्ट्स ब्रा अच्छी रहती है) साथ लाएं। अगर आप उसी दिन घर जाएं तो एक अटेंडेंट को पहले 24 घंटे आपके साथ रहने का इंतज़ाम करना चाहिए।

ब्रेस्ट की गांठ निकालने की सर्जरी कैसे की जाती है

सर्जरी कैसे की जाती है
  1. एनेस्थीसिया दी जाती है जनरल या लोकल सेडेशन के साथ
  2. सर्जन गांठ निकालते हैं ओपन एक्सिज़न या वैक्यूम-असिस्टेड
  3. ऊतक पैथोलॉजी के लिए भेजा जाता है विस्तृत जांच

ब्रेस्ट की गांठ निकालना (जिसे एक्सिज़नल ब्रेस्ट बायोप्सी या लम्पेक्टॉमी भी कहते हैं) जयपुर हॉस्पिटल के मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर में किया जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर 30 से 60 मिनट लेती है और डे केयर के रूप में की जाती है — ज्यादातर मरीज़ उसी दिन घर चले जाते हैं।

आपको या तो जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) दी जाएगी या लोकल एनेस्थीसिया के साथ सेडेशन (ब्रेस्ट सुन्न हो जाता है और आप रिलैक्स रहते हैं)। आपका सर्जन बताएगा कि आपके लिए कौन सा विकल्प सही है।

तीन सामान्य तरीके हैं, और आपका सर्जन सलाह देगा कि आपकी स्थिति के लिए कौन सा ठीक है:

  • ओपन एक्सिज़न: सर्जन एक छोटा चीरा लगाते हैं, अक्सर एरियोला के किनारे पर, गांठ को सामान्य ऊतक के एक घेरे के साथ निकालते हैं, और त्वचा को टांकों से बंद करते हैं जो घुल सकते हैं या बाद में निकाले जा सकते हैं। भविष्य के मैमोग्राम या रेडिएशन प्लानिंग के लिए उस जगह को चिह्नित करने के लिए छोटे मेटल क्लिप लगाए जा सकते हैं।
  • वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिज़न: छोटी बिनाइन गांठों के लिए, अल्ट्रासाउंड गाइडेंस में एक सुई डाली जाती है और ऊतक को हल्के सक्शन से खींचकर निकाला जाता है; केवल एक बहुत छोटा चीरा लगता है और आमतौर पर टांकों की ज़रूरत नहीं होती।
  • वॉचफुल वेटिंग: कई छोटे फाइब्रोएडेनोमा को बस नियमित इमेजिंग से हर 6 से 24 महीने में निगरानी की जाती है, उन्हें निकाला नहीं जाता, खासकर अगर वे बढ़ नहीं रहे या तकलीफ नहीं दे रहे।

अगर गांठ कैंसर है या कैंसर का शक है, तो सर्जन बगल से कुछ लिम्फ नोड भी निकाल सकते हैं यह देखने के लिए कि कैंसर फैला तो नहीं। निकाला गया ऊतक पैथोलॉजिस्ट के पास विस्तृत जांच के लिए भेजा जाता है।

ब्रेस्ट की गांठ निकालने के जोखिम और संभावित जटिलताएं

जोखिम और री-एक्सिज़न दरें
  • लगभग 22% गाइडलाइन से पहले री-एक्सिज़न दर
  • 14% गाइडलाइन के बाद री-एक्सिज़न दर
  • 1 से 2 हफ्ते ड्रेन ट्यूब की अवधि

हर ऑपरेशन में कुछ जोखिम होता है। अध्ययनों में, ब्लीडिंग और संक्रमण सबसे ज्यादा बताए जाने वाले सर्जिकल जोखिम हैं। घर जाने के बाद, लाली, सूजन, बढ़ता दर्द, घाव से स्राव, या ब्लीडिंग जो न रुके — इन पर ध्यान दें, ये हॉस्पिटल कॉल करने के संकेत हैं।

ब्रेस्ट का रूप और एहसास बदल सकता है। आपको निशान, डिंपल, या दोनों ब्रेस्ट के आकार या साइज़ में अंतर दिख सकता है। निशान या निप्पल के पास का हिस्सा सुन्न महसूस हो सकता है। वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिज़न बायोप्सी से ब्रेस्ट का आकार बदलने की संभावना कम होती है।

अगर गांठ कैंसर है और पैथोलॉजिस्ट को निकाले गए ऊतक के किनारे पर या बहुत पास कैंसर सेल मिलते हैं (पॉजिटिव मार्जिन), तो और ऊतक निकालने के लिए एक और ऑपरेशन करना पड़ सकता है।

बड़े अध्ययनों में, इंवेसिव कैंसर के लिए पहली लम्पेक्टॉमी कराने वाले लगभग 5 में से 1 मरीज़ को बाद में री-एक्सिज़न या मास्टेक्टॉमी की ज़रूरत पड़ी। क्लियर मार्जिन की गाइडलाइन अपनाने के बाद, री-एक्सिज़न दर लगभग 22% से घटकर 14% हो गई।

जनरल एनेस्थीसिया से जुड़े दुर्लभ लेकिन गंभीर जोखिमों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक शामिल हैं। कभी-कभी फ्लूइड निकालने के लिए ड्रेन ट्यूब लगाई जाती है; अगर आपके पास है, तो आपको दिखाया जाएगा कि 1 से 2 हफ्ते तक उसे कैसे खाली और मापना है।

ब्रेस्ट की गांठ निकालने के बाद रिकवरी और देखभाल

ज्यादातर लोग सर्जरी वाले दिन ही जयपुर हॉस्पिटल से चले जाते हैं। पहले कुछ दिनों में थोड़ा दर्द, नीले निशान और सूजन हो सकती है; पैरासिटामोल जैसी ओवर-द-काउंटर दर्द की दवा आमतौर पर मदद करती है।

अगर वैक्यूम-असिस्टेड एक्सिज़न हुई थी, तो तकलीफ अक्सर कम होती है और आप सामान्य गतिविधियां तब शुरू कर सकते हैं जब आप सहज महसूस करें।

घाव को साफ और सूखा रखें। ड्रेसिंग निर्देश के अनुसार बदलें। आपको चीरे पर गॉज़ लगाने की ज़रूरत पड़ सकती है ताकि ब्रा न रगड़े। अगर पारंपरिक टांके लगे थे, तो उन्हें आमतौर पर सर्जरी के लगभग एक हफ्ते बाद निकाला जाता है। टांके निकलने तक, स्पंज बाथ घाव को भिगोने से ज्यादा सुरक्षित है। त्वचा आमतौर पर लगभग एक महीने में ठीक हो जाती है।

भारी वजन उठाना, जॉगिंग या ऐसी कोई गतिविधि जो छाती पर खिंचाव डाले, 1 से 2 हफ्ते तक न करें। ज्यादातर मरीज़ एक हफ्ते में अपनी सामान्य दिनचर्या पर लौट आते हैं। गाड़ी चलाने या काम पर लौटने से पहले अपने सर्जन से पूछ लें।

हॉस्पिटल या अपने सर्जन को कॉल करें अगर आपको ये हों:

  • बुखार
  • घाव के आसपास बढ़ती लाली या गर्माहट
  • मवाद या बदबूदार स्राव
  • ब्लीडिंग जो ड्रेसिंग को भिगो दे
  • दर्द जो सुझाई गई दवा से कंट्रोल न हो

ब्रेस्ट की गांठ निकालने के नतीजे — यह कितना कारगर है

शुरुआती चरण के ब्रेस्ट कैंसर के लिए, लम्पेक्टॉमी के बाद रेडिएशन से सर्वाइवल के नतीजे मास्टेक्टॉमी जैसे ही होते हैं। आपका ज्यादातर ब्रेस्ट ऊतक जो कैंसर से प्रभावित नहीं है, बचा रहता है। लंबे समय का नतीजा मुख्य रूप से ट्यूमर के आकार और बायोलॉजी पर और इस पर निर्भर करता है कि लिम्फ नोड शामिल हैं या नहीं।

कैंसर के लिए सर्जरी के बाद आमतौर पर रेडिएशन थेरेपी, और कभी-कभी कीमोथेरेपी या हार्मोनल थेरेपी की सलाह दी जाती है। लम्पेक्टॉमी के बाद ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन की शायद ही कभी ज़रूरत पड़ती है।

बिनाइन गांठों जैसे फाइब्रोएडेनोमा के लिए, निकालना उस गांठ के लिए उपचारात्मक है। सिंपल फाइब्रोएडेनोमा शायद ही कभी कैंसर में बदलते हैं। कुछ किशोरावस्था, गर्भावस्था या मेनोपॉज के बाद अपने आप सिकुड़ सकते हैं।

अगर कॉम्प्लेक्स फाइब्रोएडेनोमा निकाला गया है, तो सामान्य आबादी की तुलना में भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर का थोड़ा बढ़ा हुआ जोखिम होता है, इसलिए नियमित स्क्रीनिंग की सलाह दी जाती है।

अल्ट्रासाउंड-गाइडेड सर्जरी और पैल्पेशन-गाइडेड सर्जरी की तुलना करने वाले अध्ययनों में, अल्ट्रासाउंड गाइडेंस से छोटे एक्सिज़न वॉल्यूम मिले (लगभग 38 सेमी³ बनाम 57 सेमी³) और कम मरीज़ों को अतिरिक्त इलाज की ज़रूरत पड़ी (11% बनाम 28%)। क्लियर मार्जिन (किनारे पर कोई कैंसर सेल नहीं) अल्ट्रासाउंड गाइडेंस से ज्यादा बार मिले।

जयपुर में ब्रेस्ट की गांठ निकालने का खर्च और बीमा

जयपुर हॉस्पिटल में ब्रेस्ट की गांठ निकालने की सामान्य कीमत ₹25,000 से ₹70,000 के बीच है।

अंतिम रकम कई बातों पर निर्भर करती है: प्रक्रिया का प्रकार (ओपन एक्सिज़न या वैक्यूम-असिस्टेड), जनरल या लोकल एनेस्थीसिया का उपयोग, गांठ की जटिलता और आकार, हॉस्पिटल स्टे की अवधि (डे केयर या ओवरनाइट), सर्जन की फीस, और प्री-ऑपरेटिव इमेजिंग जैसे अल्ट्रासाउंड, मैमोग्राम या एमआरआई और किसी बायोप्सी का खर्च। सर्जरी से पहले और बाद की दवाएं भी कुल में जुड़ती हैं।

जयपुर हॉस्पिटल कई सरकारी और निजी योजनाओं के तहत एम्पैनल्ड है:

  • राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS)
  • मा योजना
  • सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS)
  • निजी बीमाकर्ताओं और TPA का एक पैनल

अगर आप इनमें से किसी के तहत कवर हैं, तो अपना स्कीम कार्ड और कोई प्री-ऑथराइज़ेशन दस्तावेज़ साथ लाएं। हॉस्पिटल का इंश्योरेंस डेस्क कवरेज वेरिफाई करने और आपके आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है। एडमिशन से पहले हमेशा डिटेल्ड अनुमान मांगें ताकि आप जान सकें कि क्या उम्मीद करनी है।

पता नहीं किस डॉक्टर को दिखाएँ?

हमारी टीम सही डॉक्टर तक पहुँचने में आपकी मदद करेगी, हिन्दी या अंग्रेज़ी में।

अपॉइंटमेंट का अनुरोध करें

बस एक मिनट लगेगा। कोई अकाउंट या मेडिकल हिस्ट्री नहीं चाहिए।

10 अंकों का भारतीय मोबाइल नंबर

यह WhatsApp खोलेगा और आपका अनुरोध पहले से लिखा होगा। हमारी टीम डॉक्टर, तारीख और समय पक्का करके जवाब देगी — तब तक यह पक्की बुकिंग नहीं है। बात करना चाहते हैं? कॉल करें +91 74140 01001.

आपका नाम, नंबर और पसंद हमारी अपॉइंटमेंट टीम के लिए भी सहेजे जाते हैं, सिर्फ़ आपकी विज़िट तय करने के लिए।