जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी · जयपुर हॉस्पिटल
जयपुर में मास्टेक्टॉमी
आपको स्तन कैंसर की सर्जरी की ज़रूरत है। हम आपको स्पष्ट आकलन और चरण-दर-चरण योजना देते हैं।
- 1991 से जयपुर की सेवा में (35 साल)
- एनएबीएच मान्यता प्राप्त
- 24×7 इमरजेंसी और आईसीयू
- कैशलेस: RGHS, मा योजना, CGHS + 22 बीमा कंपनियाँ
- ऑपरेशन का समय
- 2 से 3 घंटे
- एनेस्थीसिया
- जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी)
- रिकवरी (ठीक होना)
- सामान्य गतिविधि से पहले 3 से 6 सप्ताह
- कीमत
- ₹1,00,000 से ₹2,50,000भारत में सामान्य रेंज; हमसे अनुमानित खर्च पूछें
स्तन कैंसर की सर्जरी भारी लगती है
आपको कैंसर का पता चला है और जल्दी सर्जरी का फैसला लेना है
स्तन कैंसर का पता चलने पर ऑपरेशन, स्तन चले जाने, लिम्फ नोड निकाले जाने, ड्रेन लगने, और हफ्तों तक काम व परिवार से दूर रहने का डर होता है।
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ऑपरेशन का डर
दर्द, एनेस्थीसिया, और स्तन निकलने के बाद छाती कैसी दिखेगी इसकी चिंता।
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लिम्फ नोड की चिंता
इस बात की अनिश्चितता कि नोड निकालने पड़ेंगे या नहीं और उससे बाजू में सूजन (लिम्फोइडिमा) का क्या मतलब है।
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काम से छुट्टी
ड्रेन और बाजू की सीमित हरकत के साथ घर पर हफ्तों रिकवरी से आमदनी और परिवार की देखभाल पर असर पड़ता है।
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खर्च की अनिश्चितता
कुल खर्च कितना होगा और बीमा कितना कवर करेगा, यह न जानने से तनाव बढ़ता है।
मास्टेक्टॉमी कैंसर के इलाज के लिए पूरे स्तन ऊतक को सर्जरी से निकालना है।
जयपुर हॉस्पिटल क्यों
आप दर्द, ड्रेन, काम से छुट्टी, और बाद में अपने रूप व महसूस को लेकर चिंतित हैं।
आपके इलाज का प्लान
हमारे साथ आपके पहले कदम
- 1 सर्जन से परामर्श के लिए कॉल करें या ओपीडी आएं
- 2 अस्पताल में ही स्कैन और लैब जांच पूरी करें
- 3 सर्जरी के विकल्प और लागत अनुमान की समीक्षा करें
- 4 सर्जरी कराएं और फॉलो-अप देखभाल के साथ रिकवर करें
ऑपरेशन कैसे किया जाता है
जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) में, सर्जन स्तन ऊतक और अक्सर निप्पल निकालते हैं। बगल के लिम्फ नोड जांचे या निकाले जाते हैं। ड्रेन लगाए जाते हैं। ऑपरेशन आमतौर पर दो से तीन घंटे लेता है।
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मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी
स्तन और बगल के लिम्फ नोड निकाले जाते हैं। यह तब किया जाता है जब नोड में कैंसर होने की पुष्टि हो।
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सिंपल मास्टेक्टॉमी विद सेंटिनल नोड बायोप्सी
स्तन निकाला जाता है और केवल पहले ड्रेन होने वाले नोड की जांच होती है। अगर वे साफ हैं, तो आगे नोड सर्जरी की ज़रूरत नहीं।
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ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी (स्तन बचाने वाली सर्जरी)
केवल ट्यूमर और एक मार्जिन निकाला जाता है, फिर रेडियोथेरेपी दी जाती है। इससे स्तन का अधिकांश हिस्सा बच जाता है।
मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं
- 1991 35 साल से जयपुर की सेवा में
- एनएबीएच मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल
- 3 जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कंसल्टेंट
- 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू और एम्बुलेंस
- 25 कैशलेस योजनाएँ और बीमा कंपनियाँ
शोध मास्टेक्टॉमी के नतीजों के बारे में क्या दिखाता है
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3 से 4 सप्ताह रिकवरी
अध्ययनों में सभी मास्टेक्टॉमी प्रकारों के लिए समान रिकवरी समय बताया गया है, अधिकांश मरीज़ एक महीने के भीतर सामान्य गतिविधि पर लौट आते हैं।
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22 प्रतिशत कुल जटिलता दर
पुनर्निर्माण अध्ययनों के संयुक्त डेटा दिखाते हैं कि लगभग पांच में से एक मरीज़ को संक्रमण या घाव भरने में देरी जैसी जटिलता होती है।
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1.8 प्रतिशत लोकोरिजनल रिकरेंस (छाती क्षेत्र में दोबारा होना)
निप्पल-स्पेयरिंग मास्टेक्टॉमी के बाद लंबे फॉलो-अप में छाती क्षेत्र में कैंसर लौटने की दर कम पाई गई।
अगर इलाज न कराया जाए
सर्जरी के बिना, स्तन कैंसर बढ़कर लिम्फ नोड और दूर के अंगों में फैल सकता है, जिससे इलाज अधिक जटिल हो जाता है और जीवित रहने की संभावना कम होती है।
इलाज के बाद जीवन
अधिकांश लोग कुछ हफ्तों में दैनिक दिनचर्या पर लौट आते हैं। संवेदना में बदलाव और फैंटम अनुभूति (निकले हुए स्तन का एहसास) आम हैं लेकिन आमतौर पर समय के साथ कम होते हैं।
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सामान्य गतिविधि पर वापसी
अधिकांश लोग सर्जरी के तीन से छह सप्ताह के भीतर सामान्य काम और घरेलू कार्य फिर से शुरू कर देते हैं।
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संवेदना बदलाव को प्रबंधित करें
सुन्नपन, झुनझुनी, या फैंटम स्तन भावनाएं आम हैं और आमतौर पर पहले कुछ महीनों में कम हो जाती हैं।
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लिम्फोइडिमा (बाजू की सूजन) जागरूकता
अगर नोड निकाले गए थे, तो आप बाजू की सूजन के शुरुआती लक्षण पहचानते हैं और जोखिम कम करने के व्यायाम सीखते हैं।
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नियमित फॉलो-अप
निर्धारित जांच और इमेजिंग किसी भी रिकरेंस (दोबारा होने) का जल्दी पता लगाने में मदद करती हैं, जब यह सबसे अधिक इलाज योग्य होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मास्टेक्टॉमी के बारे में मरीज़ों के सवाल
मास्टेक्टॉमी (स्तन निकालने का ऑपरेशन) और एक्सिलरी क्लीयरेंस (बगल के लिम्फ नोड्स निकालना) के लिए अपॉइंटमेंट में मैं किन बातों पर चर्चा कर सकता हूँ?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में आप अपने कैंसर की स्टेज के हिसाब से सुझाई गई मास्टेक्टॉमी के प्रकार, क्या एक्सिलरी क्लीयरेंस या सेंटिनल नोड बायोप्सी (पहले निकलने वाले लिम्फ नोड की जाँच) प्लान की गई है, और दो से चार रात अस्पताल में रहने की उम्मीद पर बात कर सकते हैं। आप ऑपरेशन के समय (दो से तीन घंटे), जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी), और सामान्य गतिविधि शुरू करने से पहले तीन से छह हफ्ते की आम रिकवरी के बारे में भी पूछ सकते हैं।
विस्तार से
सर्जिकल टीम मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी (जिसमें स्तन और बगल के लिम्फ नोड्स निकाले जाते हैं) और सिंपल मास्टेक्टॉमी विद सेंटिनल नोड बायोप्सी (जिसमें केवल पहले ड्रेन होने वाले नोड्स की जाँच होती है) का अंतर समझाएगी।
अध्ययन बताते हैं कि दोनों तरीकों से कैंसर का कंट्रोल समान रहता है, जबकि सेंटिनल नोड बायोप्सी से बाजू की सूजन (लिम्फोडीमा) का खतरा कम होता है।
आप ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी (स्तन बचाने वाला ऑपरेशन) और उसके बाद रेडियोथेरेपी पर भी चर्चा कर सकते हैं, अगर यह आपके ट्यूमर के आकार और जगह के मुताबिक सही हो।
टीम यह भी देखेगी कि तुरंत रिकंस्ट्रक्शन (पुनर्निर्माण) संभव है या इसे रेडिएशन या इम्यूनोथेरेपी जैसे अतिरिक्त इलाज के बाद करना बेहतर होगा।
एक आम धारणा
कई लोगों को लगता है कि हर मास्टेक्टॉमी में सारे लिम्फ नोड्स निकलते हैं, लेकिन शुरुआती कैंसर में सेंटिनल नोड बायोप्सी अब मानक है और इससे लिम्फोडीमा की आशंका कम होती है।
असल में क्या होता है
रिकंस्ट्रक्शन का समय भी इस पर निर्भर करता है कि सर्जरी के बाद रेडियोथेरेपी चाहिए या नहीं।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
कंसल्टेशन में अपनी बायोप्सी रिपोर्ट, इमेजिंग फिल्म्स, और चल रही दवाओं की लिस्ट साथ लाएं। सर्जन प्लान की गई प्रक्रिया, संभावित तारीखें, और ज़रूरी प्री-ऑपरेटिव टेस्ट बताएंगे। आपको ₹1,00,000 से ₹2,50,000 की आम रेंज में अनुमानित खर्च बताया जाएगा।
मास्टेक्टॉमी कंसल्टेशन के लिए मुझे कौन से मेडिकल रिकॉर्ड, पिछली रिपोर्ट्स, और दवाओं का ब्योरा लाना चाहिए?
संक्षेप में
अपनी कोर नीडल बायोप्सी रिपोर्ट, मैमोग्राफी और अल्ट्रासाउंड फिल्म्स या CDs, MRI रिपोर्ट अगर हुई हो, स्टेजिंग के लिए PET-CT या CT स्कैन रिपोर्ट्स, और वर्तमान दवाओं की पूरी लिस्ट जिसमें ब्लड थिनर, हार्मोनल टैबलेट्स, और सप्लीमेंट्स शामिल हों, साथ लाएं। जयपुर हॉस्पिटल को पिछली सर्जरी के नोट्स और एलर्जी रिकॉर्ड भी चाहिए।
विस्तार से
सर्जिकल टीम बायोप्सी से कैंसर का प्रकार और ग्रेड कन्फर्म करती है, इमेजिंग से ट्यूमर का आकार नापती है और नोडल इन्वॉल्वमेंट देखती है, और स्टेजिंग स्कैन से दूर के प्रसार को रूल आउट करती है।
ब्लड थिनर का ब्योरा इसलिए अहम है क्योंकि वे सर्जिकल ब्लीडिंग रिस्क और जनरल एनेस्थीसिया से पहले रोकने के समय को प्रभावित करते हैं। हार्मोनल थेरेपी रिकॉर्ड से टीम नियोएडजुवेंट या एडजुवेंट इलाज के क्रम तय करती है।
एलर्जी की जानकारी एंटीबायोटिक और एनेस्थेटिक चुनने में मदद करती है। पहले विजिट पर ये दस्तावेज होने से देरी रुकती है और टीम ऑपरेटिव प्लान और ₹1,00,000 से ₹2,50,000 की आम रेंज में लागत अनुमान फाइनल कर पाती है।
एक आम धारणा
मरीज अक्सर ब्लड थिनर का ब्योरा या पुरानी इमेजिंग भूल जाते हैं, जिससे सर्जरी प्लान में देरी हो सकती है।
असल में क्या होता है
टीम को हर रिपोर्ट चाहिए ताकि ऑपरेशन का प्रकार, एनेस्थीसिया सेफ्टी, और रिकंस्ट्रक्शन टाइमिंग तय हो सके।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
रिपोर्ट्स को फोल्डर में रखें, सबसे हाल की ऊपर। दवाओं के नाम, डोज़, और समय लिख लें। अगर ब्लड थिनर ले रहे हैं, तो सर्जन के कहने तक बंद न करें। अपना इंश्योरेंस कार्ड और RGHS या CGHS जैसी योजना के दस्तावेज साथ रखें। सभी रिकॉर्ड तैयार करके जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि मूल्यांकन स्मूथ रहे।
मास्टेक्टॉमी के लिए टीम मेरा डायग्नोसिस और इलाज के विकल्प कैसे समझाएगी?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में सर्जिकल टीम आपका डायग्नोसिस और मास्टेक्टॉमी के विकल्प सादी भाषा में समझाती है, आपकी इमेजिंग और बायोप्सी रिपोर्ट का इस्तेमाल करके, ताकि आप अपने परिवार के साथ फैसला ले सकें।
विस्तार से
सर्जन पैथोलॉजी रिपोर्ट देखते हैं, जिसमें दिखता है कि कैंसर इनवेसिव है या नॉन-इनवेसिव, उसका ग्रेड, हार्मोन रिसेप्टर स्टेटस, और HER2 स्टेटस।
फिर वे सर्जरी के विकल्प बताते हैं: मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी में ब्रेस्ट और आर्मपिट के नोड्स निकाले जाते हैं; सिंपल मास्टेक्टॉमी विद सेंटिनल नोड बायोप्सी में ब्रेस्ट निकालकर केवल पहले ड्रेन होने वाले नोड्स की जांच होती है; ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी में ट्यूमर को मार्जिन के साथ निकालकर फिर रेडियोथेरेपी दी जाती है।
टीम बताती है कि आमतौर पर 2 से 4 रात अस्पताल में रहना पड़ता है, रिकवरी 3 से 6 हफ्ते में होती है, और ड्रेन लग सकते हैं।
वे यह भी बताते हैं कि रिकंस्ट्रक्शन तुरंत या बाद में हो सकता है, और अंतिम फैसला ट्यूमर के साइज़, लोकेशन और आपकी पसंद पर निर्भर करता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आपको चर्चा का लिखित सारांश मिलेगा, जिसमें सुझाई गई प्रक्रिया और सर्जरी से पहले जरूरी अतिरिक्त टेस्ट शामिल होंगे। अपने अटेंडेंट के साथ बात करने का समय लें और अगली विज़िट पर सवाल पूछें। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि आपके पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट प्लान पर चर्चा हो सके।
मेरे डायग्नोसिस के लिए ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी और मास्टेक्टॉमी की तुलना कैसे करें?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी में सिर्फ़ ट्यूमर को स्वस्थ टिश्यू के मार्जिन के साथ निकाला जाता है और आमतौर पर उसके बाद रेडियोथेरेपी दी जाती है। मास्टेक्टॉमी में पूरा ब्रेस्ट निकाला जाता है और इसमें लिम्फ नोड सर्जरी भी शामिल हो सकती है। दोनों तरीक़े यहाँ आपके कैंसर स्टेज, ट्यूमर के आकार और आपकी पसंद के आधार पर ऑफ़र किए जाते हैं।
विस्तार से
लंबे समय के अध्ययनों से पता चलता है कि मॉडिफ़ाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी से ब्रेस्ट-कंजर्विंग थेरेपी की तुलना में बेहतर लोकल कंट्रोल मिलता है, लेकिन ओवरऑल सर्वाइवल और डिस्टेंट मेटास्टेसिस का समय दोनों ग्रुप में समान रहता है।
800 से ज़्यादा मरीज़ों वाले ट्रायल में, 20 साल की ओवरऑल सर्वाइवल मास्टेक्टॉमी के बाद 44.5 प्रतिशत और ब्रेस्ट-कंजर्विंग थेरेपी के बाद 39.1 प्रतिशत थी, यह अंतर स्टैटिस्टिकली सिग्निफ़िकेंट नहीं था।
स्किन-स्पेयरिंग और निप्पल-स्पेयरिंग मास्टेक्टॉमी के नतीजे नॉन-कंजर्वेटिव मास्टेक्टॉमी जैसे ही हैं, और उनसे मरीज़ों की संतुष्टि ज़्यादा होती है। चुनाव ट्यूमर की जगह, ब्रेस्ट के आकार, रेडियोथेरेपी की ज़रूरत और बॉडी इमेज के आपके लक्ष्य पर निर्भर करता है।
एक आम धारणा
कई लोग सोचते हैं कि मास्टेक्टॉमी से सर्वाइवल बेहतर होता है, लेकिन बड़े अध्ययन बताते हैं कि ओवरऑल सर्वाइवल और डिस्टेंट मेटास्टेसिस की दर समान रहती है।
असल में क्या होता है
मास्टेक्टॉमी से लोकल कंट्रोल बेहतर मिलता है, जबकि ब्रेस्ट-कंजर्विंग थेरेपी ब्रेस्ट का आकार बचाती है पर रेडिएशन की ज़रूरत होती है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आपकी सर्जिकल टीम OPD कंसल्टेशन में इमेजिंग, बायोप्सी नतीजे और मेडिकल हिस्ट्री देखेगी। वे बताएँगे कि आपके कैंसर स्टेज के लिए कौन सा विकल्प सही है और बाद में रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी या हॉर्मोन थेरेपी की संभावना पर चर्चा करेंगे।
आप रिकवरी टाइम, ड्रेन और सेंसेशन में बदलाव के बारे में पूछ सकते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करके पर्सनलाइज़्ड प्लान और अनुमानित खर्च जानें।
सर्जन कैसे तय करेंगे कि ऑपरेशन ज़रूरी है या नहीं?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में सर्जरी का फैसला कन्फर्म कैंसर डायग्नोसिस, ट्यूमर स्टेज और मल्टीडिसिप्लिनरी रिव्यू पर आधारित होता है। कोर नीडल बायोप्सी से मैलिग्नेंसी कन्फर्म होती है। मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) और कभी-कभी एमआरआई (MRI) जैसे इमेजिंग से ट्यूमर की हद पता चलती है। ट्यूमर बोर्ड हर केस पर चर्चा करके सबसे सही सर्जिकल अप्रोच की सलाह देता है।
विस्तार से
गाइडलाइंस के मुताबिक मास्टेक्टॉमी (स्तन निकालने का ऑपरेशन) कार्सिनोमा या DCIS के लिए बताई जाती है जिसमें स्तन निकालना ज़रूरी हो, इसमें नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी के बाद के केस भी शामिल हैं।
निप्पल-स्पेयरिंग मास्टेक्टॉमी तब सही है जब ट्यूमर निप्पल-एरिओला कॉम्प्लेक्स के पास न हो और ऑपरेशन के दौरान निप्पल मार्जिन नेगेटिव आए। यह हाई-रिस्क महिलाओं में रिस्क-रिड्यूसिंग बाइलेटरल मास्टेक्टॉमी के लिए भी एक विकल्प है।
सर्जन ट्यूमर के साइज़ को ब्रेस्ट वॉल्यूम से, मल्टीफोकैलिटी, पिछली रेडिएशन और मरीज़ की पसंद को देखते हैं। अगर ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी (स्तन बचाने वाली सर्जरी) से क्लियर मार्जिन और ठीक कॉस्मेसिस मिल सके, तो वह ऑफर की जाती है।
वरना मास्टेक्टॉमी, रिकंस्ट्रक्शन के साथ या बिना, बताई जाती है। फाइनल प्लान सारे इमेजिंग, पैथोलॉजी और आपकी पूरी सेहत देखने के बाद बनता है।
एक आम धारणा
कुछ मरीज़ समझते हैं कि बायोप्सी के बाद सर्जरी अपने आप हो जाती है, लेकिन टीम देखती है कि क्या ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी मुमकिन है, क्या नियोएडजुवेंट थेरेपी से ट्यूमर पहले छोटा हो सकता है, और क्या आपकी सेहत एनेस्थीसिया (बेहोशी) झेल सकती है।
असल में क्या होता है
चुनाव इंडिविजुअल होता है, ऑटोमैटिक नहीं।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आप ओपीडी (OPD) कंसल्टेशन में आएंगे जहां सर्जन आपकी जांच करेंगे, रिपोर्ट देखेंगे और वजह समझाएंगे। एमआरआई (MRI) या जेनेटिक काउंसलिंग जैसे और टेस्ट बताए जा सकते हैं। ट्यूमर बोर्ड की राय आपके साथ शेयर की जाती है। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि आपका केस रिव्यू हो और सर्जिकल प्लान तैयार हो।
मास्टेक्टॉमी के लिए कंसल्टेशन कब बुक करना चाहिए?
संक्षेप में
आपको जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन तुरंत बुक कर लेना चाहिए जब आपकी बायोप्सी ब्रेस्ट कैंसर कन्फर्म करे या आपके रेफर करने वाले डॉक्टर सर्जिकल मूल्यांकन की सलाह दें। जल्दी बुक करने से स्टेजिंग स्कैन, मल्टीडिसिप्लिनरी चर्चा, और जनरल एनेस्थीसिया में दो से तीन घंटे की आम ऑपरेशन विंडो में सर्जरी प्लान करने का समय मिलता है।
विस्तार से
दिशानिर्देश कहते हैं कि मास्टेक्टॉमी उन कार्सिनोमा या DCIS के लिए ज़रूरी है जिनमें स्तन निकालना पड़ता है, जिसमें नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी के बाद के केस भी शामिल हैं।
तुरंत कंसल्टेशन से सर्जिकल टीम ट्यूमर का आकार, निप्पल से दूरी, और लिम्फ नोड स्टेटस देखकर मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी, सिंपल मास्टेक्टॉमी विद सेंटिनल नोड बायोप्सी, या ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी के बीच फैसला ले सकती है।
विजिट टालने से ज़रूरी इलाज में देरी हो सकती है और एडजुवेंट थेरेपी जैसे रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी की शेड्यूलिंग प्रभावित हो सकती है।
एक आम धारणा
ज़्यादा इंतज़ार करने से ऑपरेशन और फॉलो-अप इलाज जैसे रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी में देरी हो सकती है।
असल में क्या होता है
सर्जिकल प्लान ट्यूमर के आकार, नोड स्टेटस, और निप्पल से दूरी पर निर्भर करता है, जिनका सही मूल्यांकन ज़रूरी है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
हॉस्पिटल कॉल करें या OPD जाकर अपॉइंटमेंट तय करें। अपनी बायोप्सी रिपोर्ट, इमेजिंग, और दवाओं की लिस्ट साथ लाएं। टीम अगले कदम बताएगी, जिसमें प्री-ऑपरेटिव टेस्ट शामिल हैं, और ₹1,00,000 से ₹2,50,000 की आम रेंज में लागत का अनुमान देगी।
क्या मुझे मास्टेक्टॉमी (स्तन निकालने का ऑपरेशन) के अपॉइंटमेंट से पहले लक्षणों की डायरी रखनी चाहिए?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन से पहले एक संक्षिप्त लक्षण डायरी रखने से सर्जन को ट्यूमर की प्रगति, दर्द का पैटर्न, त्वचा में बदलाव, और स्तन या बगल में किसी नई सूजन को समझने में मदद मिलती है। उन हफ्तों की तारीखें, गंभीरता, और कोई भी ट्रिगर जो आप देखते हैं, नोट करें।
विस्तार से
एक डायरी एक टाइमलाइन देती है जो इमेजिंग और बायोप्सी निष्कर्षों को पूरा करती है।
उदाहरण के लिए, गांठ के आकार में तेजी से वृद्धि या नई त्वचा की लाली आक्रामक जीव विज्ञान या संक्रमण का संकेत दे सकती है, जिससे योजनाबद्ध सर्जरी की तात्कालिकता और प्रकार प्रभावित होता है।
बांह की सूजन रिकॉर्ड करने से लसीका भागीदारी का आकलन करने में मदद मिलती है। दर्द के स्कोर प्री-ऑपरेटिव दर्द प्रबंधन योजना का मार्गदर्शन करते हैं।
डायरी किसी भी चल रहे नियोएडजुवेंट थेरेपी के दुष्प्रभावों को भी दर्ज करती है, जिसकी समीक्षा टीम ऑपरेटिव दृष्टिकोण और पुनर्निर्माण के समय को अंतिम रूप देते समय करती है।
एक आम धारणा
केवल याददाश्त धीरे-धीरे होने वाले बदलावों को भूल सकती है।
असल में क्या होता है
एक लिखित रिकॉर्ड टीम को तात्कालिकता का आकलन करने, सही ऑपरेशन चुनने, और दर्द नियंत्रण व पुनर्निर्माण की योजना अधिक सटीक बनाने में मदद करता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
एक छोटी नोटबुक या फोन ऐप का उपयोग करें। गांठ का आकार, त्वचा में बदलाव, दर्द का स्तर, बांह की परिधि (यदि मापने योग्य हो), और सामान्य स्वास्थ्य के लिए दैनिक प्रविष्टियाँ रिकॉर्ड करें। डायरी को अपने ओपीडी विजिट पर लाएं।
सर्जन इसे आपकी रिपोर्ट के साथ समीक्षा करेगा। जयपुर हॉस्पिटल में अपना कंसल्टेशन बुक करें और अधिक सटीक योजना के लिए अपना लक्षण रिकॉर्ड साझा करें।
अगर मास्टेक्टॉमी से पहले मेरे ब्रेस्ट लक्षणों का कारण साफ़ न हो तो क्या होगा?
संक्षेप में
अगर आपके ब्रेस्ट लक्षणों का कारण साफ़ नहीं है, तो जयपुर हॉस्पिटल की टीम किसी भी मास्टेक्टॉमी की योजना बनाने से पहले आगे की इमेजिंग या रिपीट बायोप्सी करवाएगी।
विस्तार से
कभी-कभी मैमोग्राम, अल्ट्रासाउंड, या MRI से पक्का जवाब नहीं मिलता, या कोर बायोप्सी में एटिपिकल सेल्स दिखते हैं पर कैंसर नहीं। ऐसे में सर्जन वैक्यूम-असिस्टेड बायोप्सी, MRI ब्रेस्ट, या शॉर्ट-इंटरवल फॉलो-अप स्कैन की सलाह दे सकते हैं।
अगर शक बना रहता है, तो जनरल एनेस्थीसिया में एक्सिज़न बायोप्सी करके बड़ा टिशू सैंपल लिया जा सकता है। कैंसर या हाई-रिस्क लेशन की पुष्टि होने के बाद ही मास्टेक्टॉमी पर चर्चा होगी।
यह चरणबद्ध तरीका गैर-ज़रूरी बड़ी सर्जरी से बचाता है और पक्का करता है कि ऑपरेशन असली पैथोलॉजी से मेल खाए।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आपको अगले टेस्ट की पक्की तारीखें और एक फोन नंबर दिया जाएगा जिस पर कॉल करके आप टेस्ट से पहले ब्रेस्ट में कोई बदलाव दिखने पर बता सकें। सर्जन नए रिजल्ट आपके साथ OPD में देखेंगे और फिर मास्टेक्टॉमी की ज़रूरत तय करेंगे। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि अगले जांच चरण पर बात हो सके।
क्या लिम्फ नोड की जाँच या उन्हें निकालना ज़रूरी होगा?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में लिम्फ नोड असेसमेंट ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी का नियमित हिस्सा है। ज़्यादातर मरीज़ों की सेंटिनल नोड बायोप्सी होती है, जिसमें डाई या रेडियोट्रेसर से पहले ड्रेन होने वाले नोड की पहचान करके उसे निकालकर जाँचा जाता है। अगर उन नोड में कैंसर मिले, तो बगल के और लिम्फ नोड निकालने पड़ सकते हैं।
विस्तार से
मास्टेक्टॉमी या ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी के दौरान सर्जन ट्यूमर के पास ब्लू डाई, टेक्नीशियम-99 रेडियोट्रेसर या दोनों इंजेक्ट करते हैं। ये सेंटिनल नोड तक पहुँचकर उन्हें नीला कर देते हैं या सिग्नल देते हैं।
सर्जन फिर एक या ज़्यादा सेंटिनल नोड निकालकर पैथोलॉजी के लिए भेजते हैं। अगर एक या दो सेंटिनल नोड में कैंसर है और आपको रेडियोथेरेपी मिलनी है, तो गाइडलाइन कहती है कि शायद और नोड निकालने की ज़रूरत न पड़े।
अगर तीन या ज़्यादा नोड पॉज़िटिव हैं, या कैंसर सेंटिनल नोड के बाहर मिला, तो आमतौर पर एक्सिलरी लिम्फ नोड डिसेक्शन करके बगल के ज़्यादातर या सभी नोड निकाले जाते हैं। यह स्टेज तय करने और रेडियोथेरेपी व सिस्टेमिक थेरेपी के फ़ैसले में मदद करता है।
एक आम धारणा
पहले लगभग सभी का फ़ुल एक्सिलरी डिसेक्शन होता था, जिससे बाँह में सूजन का ख़तरा ज़्यादा था।
असल में क्या होता है
आज सेंटिनल नोड बायोप्सी आम है और रिकवरी तेज़ होती है। कई पॉज़िटिव नोड वाले मरीज़ों को ही बड़ा डिसेक्शन चाहिए।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अंतिम प्लान आपकी इमेजिंग, बायोप्सी और ऑपरेशन के दौरान सर्जन को जो मिले, उस पर निर्भर करता है। प्री-ऑपरेटिव मुलाक़ात में आप सेंटिनल नोड बायोप्सी बनाम फ़ुल डिसेक्शन की संभावना पर चर्चा करेंगे।
ड्रेन आमतौर पर लगाए जाते हैं और दो से तीन हफ़्ते तक रहते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करके अपने केस के लिए अप्रोच समझें।
क्या मैं नॉन-सर्जिकल ऑप्शन या कम इनवेसिव अप्रोच पर बात कर सकता हूँ?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में आप अपने सर्जिकल और ऑन्कोलॉजी टीम से सारे ट्रीटमेंट ऑप्शन पर बात कर सकते हैं। अर्ली-स्टेज ब्रेस्ट कैंसर के लिए ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी के साथ रेडियोथेरेपी, मास्टेक्टॉमी से कम इनवेसिव सर्जिकल अप्रोच है। नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी या हार्मोन थेरेपी से ट्यूमर ऑपरेशन से पहले छोटा हो सकता है, जिससे कभी-कभी मास्टेक्टॉमी की जगह ब्रेस्ट कंजर्वेशन मुमकिन हो जाता है। अकेले नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट क्योरेबल ब्रेस्ट कैंसर के लिए स्टैंडर्ड नहीं है लेकिन खास हालात में सोचा जा सकता है।
विस्तार से
सबूत दिखाते हैं कि ब्रेस्ट-कंजर्विंग थेरेपी (लम्पेक्टॉमी के साथ एक्सिलरी क्लीयरेंस और रेडियोथेरेपी) की ओवरऑल सर्वाइवल और डिस्टेंट मेटास्टेसिस रेट मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी जैसी ही होती है, हालांकि लोकल कंट्रोल मास्टेक्टॉमी से बेहतर होता है।
नियोएडजुवेंट सिस्टेमिक थेरेपी ट्यूमर को डाउनस्टेज कर सकती है, जिससे कुछ मरीज़ों में ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी मुमकिन हो जाती है जिन्हें वरना मास्टेक्टॉमी करनी पड़ती।
जो मरीज़ उम्र या सीवियर कॉमॉर्बिडिटी की वजह से सर्जरी के लिए फिट नहीं हैं, उनके लिए प्राइमरी हार्मोन थेरेपी नॉन-सर्जिकल अप्रोच के तौर पर इस्तेमाल हो सकती है, लेकिन यह पैलिएटिव है क्योरेटिव नहीं।
सेंटिनल नोड बायोप्सी फुल एक्सिलरी डिसेक्शन से कम इनवेसिव है और क्लिनिकली नेगेटिव नोड्स में स्टैंडर्ड है। टीम बताएगी कि लोकलाइज़्ड ब्रेस्ट कैंसर के लिए सर्जरी प्राइमरी ट्रीटमेंट क्यों रहती है और कौन सी कम इनवेसिव सर्जिकल टेक्नीक उपलब्ध हैं।
एक आम धारणा
कुछ मरीज़ पूरी तरह सर्जरी से बचना चाहते हैं, लेकिन लोकलाइज़्ड ब्रेस्ट कैंसर के लिए सर्जरी ट्यूमर निकालने का प्राइमरी ट्रीटमेंट बनी रहती है।
असल में क्या होता है
लम्पेक्टॉमी के साथ रेडिएशन या सेंटिनल नोड बायोप्सी जैसी कम इनवेसिव सर्जिकल ऑप्शन अच्छी तरह स्टडी की गई हैं और जब सही हो तो ऑफर की जाती हैं।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अपने कंसल्टेशन में सर्जन से नियोएडजुवेंट थेरेपी, ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी और सेंटिनल नोड बायोप्सी के बारे में पूछें। अगर एनेस्थीसिया (बेहोशी) की फिटनेस को लेकर चिंता है तो एनेस्थीसिया टीम आपका असेसमेंट करेगी। ट्यूमर बोर्ड आपके केस को अल्टरनेटिव अप्रोच के लिए रिव्यू कर सकता है।
जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि आपके डायग्नोसिस के लिए सबसे कम इनवेसिव असरदार ऑप्शन पर बात हो सके।
सवाल-जवाब
मास्टेक्टॉमी: सवाल और जवाब
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- ओपीडी में जनरल और लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) सर्जन से परामर्श
- आपके स्कैन और रिपोर्ट की समीक्षा, ज़रूरत पड़ने पर अस्पताल में ही जांच (लैबोरेटरी, एक्स-रे और इमेजिंग)
- आपके विकल्प सरल शब्दों में समझाए गए, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या आपको सर्जरी की ज़रूरत है भी या नहीं
- फैसला लेने से पहले लागत अनुमान
- RGHS, मा योजना, CGHS और पैनल में शामिल बीमाकर्ताओं और टीपीए के तहत कैशलेस इलाज में मदद
- आपके इलाज के बाद फॉलो-अप विज़िट
पूरी जानकारी
मास्टेक्टॉमी: ज़रूरी जानकारी
मास्टेक्टॉमी क्या है और यह क्यों की जाती है
मास्टेक्टॉमी (मास्टेक्टॉमी) सर्जरी (ऑपरेशन) है जिसमें स्तन के ऊतक (टिश्यू) को निकाल दिया जाता है ताकि स्तन कैंसर का इलाज या रोकथाम हो सके। यूनिलेटरल मास्टेक्टॉमी में एक स्तन निकाला जाता है; बाइलेटरल मास्टेक्टॉमी में दोनों स्तन निकाले जाते हैं।
ऑपरेशन (ऑपरेशन) में बगल (आर्मपिट) के लिम्फ नोड्स (लिम्फ नोड्स) को भी निकाला जा सकता है ताकि पता चले कि कैंसर फैला है या नहीं। मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी में स्तन और एक्सिलरी लिम्फ नोड्स (बगल की लिम्फ ग्रंथियाँ) एक साथ निकाले जाते हैं।
सिम्पल मास्टेक्टॉमी विद सेंटिनल नोड बायोप्सी में स्तन निकालकर केवल पहली ड्रेनिंग नोड्स की जाँच की जाती है। ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी (स्तन संरक्षण सर्जरी) में केवल ट्यूमर (गाँठ) और उसके आसपास का थोड़ा स्वस्थ ऊतक निकाला जाता है और उसके बाद आमतौर पर रेडियोथेरेपी (विकिरण चिकित्सा) दी जाती है। आपका सर्जन (सर्जन) बताएगा कि आपकी स्थिति के लिए कौन सा तरीका सही है।
स्तन कैंसर के लक्षण और वे चेतावनी संकेत जिनमें तुरंत इलाज ज़रूरी है
- तेज़ी से बढ़ती गाँठ
- अचानक सूजन या लाली
- स्तन दर्द के साथ बुखार
- साँस फूलना या सीने में दर्द
आम लक्षण ये हैं:
- स्तन या बगल में गाँठ
- स्तन के आकार या शेप में बदलाव
- त्वचा में गड्ढे पड़ना या लाली आना
- निप्पल (निप्पल) का अंदर धँसना या उसमें से स्राव निकलना
- एक ही जगह पर लगातार दर्द बने रहना
जिन चेतावनी संकेतों में उसी दिन डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है वे हैं: तेज़ी से बढ़ती गाँठ, स्तन में अचानक सूजन या लाली, स्तन दर्द के साथ बुखार, स्तन की त्वचा पर खुला घाव या अल्सर, और साँस फूलना या सीने में दर्द।
अगर आपको इनमें से कोई भी दिखे तो बिना देर किए अपने डॉक्टर से संपर्क करें या इमरजेंसी (इमरजेंसी) विभाग में जाएँ।
कारण और किन लोगों को ज़्यादा जोखिम है
- उम्र और पारिवारिक इतिहास
- उम्र के साथ और खुद या परिवार में स्तन या ओवेरियन कैंसर का इतिहास होने पर जोखिम बढ़ता है
- आनुवंशिक जीन परिवर्तन
- कुछ आनुवंशिक जीन परिवर्तन जोखिम बढ़ाते हैं
- हार्मोनल कारक
- जल्दी माहवारी, देर से मीनोपॉज़, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी
- जीवनशैली के कारक
- मीनोपॉज़ के बाद मोटापा और शराब का सेवन जोखिम बढ़ाते हैं
स्तन कैंसर तब होता है जब स्तन की कोशिकाएँ (सेल्स) बेकाबू होकर बढ़ने लगती हैं।
सटीक कारण हमेशा पता नहीं चलते, लेकिन जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है, अगर खुद को या परिवार में किसी को स्तन या ओवेरियन (डिम्बग्रंथि) कैंसर रहा हो, कुछ आनुवंशिक जीन परिवर्तन हों, माहवारी जल्दी शुरू हुई हो या मीनोपॉज़ (रजोनिवृत्ति) देर से हो, बच्चे न हों या पहला बच्चा 30 साल की उम्र के बाद हुआ हो, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (हॉर्मोन थेरेपी) ली हो, मीनोपॉज़ के बाद मोटापा हो, या शराब का सेवन करते हों।
कुछ मामलों में मास्टेक्टॉमी (मास्टेक्टॉमी) उन महिलाओं में बचाव के तौर पर भी की जाती है जिनमें कैंसर का जोखिम बहुत ज़्यादा माना जाता है। एक या एक से ज़्यादा जोखिम कारक होने का मतलब यह नहीं कि कैंसर होगा ही; बहुत से लोग जोखिम कारक होने के बावजूद कभी कैंसर नहीं पाते।
स्तन कैंसर की पहचान कैसे होती है: जाँच और टेस्ट
पहचान की शुरुआत क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन (स्तन की नैदानिक जाँच) से होती है। मैमोग्राफी (मैमोग्राफी), अल्ट्रासाउंड (अल्ट्रासाउंड / सोनोग्राफी), या एमआरआई (एमआरआई) जैसे इमेजिंग टेस्ट से ट्यूमर (गाँठ) दिखता है। बायोप्सी (बायोप्सी) में ऊतक का छोटा टुकड़ा लेकर कैंसर और उसके प्रकार की पुष्टि की जाती है।
अगर कैंसर मिले तो आगे खून की जाँच (खून की जाँच), चेस्ट एक्स-रे (चेस्ट एक्स-रे), सीटी स्कैन (सीटी स्कैन), पीईटी स्कैन (पीईटी स्कैन), या बोन स्कैन (बोन स्कैन) किए जा सकते हैं ताकि स्टेज (चरण) पता चले और यह जान सकें कि कैंसर फैला है या नहीं।
आपका डॉक्टर इस जानकारी से कैंसर का स्टेज बताता है और इलाज की योजना बनाता है। सर्जरी (सर्जरी / ऑपरेशन) के दौरान अक्सर सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी (सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी) की जाती है ताकि पता चले कि कैंसर बगल की नोड्स तक पहुँचा है या नहीं।
सर्जरी के बिना इलाज के विकल्प और सर्जरी कब सुझाई जाती है
गैर-सर्जिकल इलाज में ये शामिल हैं:
- कीमोथेरेपी (कीमोथेरेपी)
- हार्मोनल थेरेपी (हार्मोनल थेरेपी)
- टार्गेटेड थेरेपी (टार्गेटेड थेरेपी)
- इम्यूनोथेरेपी (इम्यूनोथेरेपी)
- रेडियोथेरेपी (रेडियोथेरेपी)
इन्हें सर्जरी (सर्जरी / ऑपरेशन) से पहले ट्यूमर (गाँठ) को छोटा करने के लिए या सर्जरी के बाद दोबारा होने (दोबारा होना) का जोखिम कम करने के लिए दिया जा सकता है।
सर्जरी तब सुझाई जाती है जब ट्यूमर स्तन के मुकाबले बड़ा हो, स्तन के अलग-अलग हिस्सों में एक से ज़्यादा ट्यूमर हों, कैंसर निप्पल (निप्पल) या त्वचा में फैला हो, पहले रेडियोथेरेपी (रेडियोथेरेपी) होने से ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी (स्तन संरक्षण सर्जरी) असुरक्षित हो, या मरीज़ ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी के बजाय मास्टेक्टॉमी (मास्टेक्टॉमी) चुनें।
मास्टेक्टॉमी के संकेतों में कार्सिनोमा (कार्सिनोमा) या डीसीआईएस (डीसीआईएस) शामिल हैं जिनमें मास्टेक्टॉमी ज़रूरी हो, नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी (नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी) के बाद भी। चुनाव कैंसर के स्टेज, ट्यूमर की विशेषताओं, आपकी सेहत और आपकी पसंद पर निर्भर करता है। आपकी सर्जिकल टीम (सर्जिकल टीम) आपके साथ विकल्पों पर चर्चा करेगी।
मास्टेक्टॉमी सर्जरी की तैयारी
करें
- ढीले आगे से खुलने वाले शर्ट या कुर्ते बाँहें ऊपर उठाए बिना पहनने में आसान
- आरामदायक पतलून और अंडरवियर
- बिना अंडरवायर वाली मुलायम ब्रा या कैमिसोल
- रेगुलर दवाएँ और एलर्जी की लिस्ट
- बीमा या योजना के कार्ड RGHS, मा योजना, CGHS, या प्राइवेट इंश्योरर
- फोन चार्जर
आपकी मास्टेक्टॉमी (मास्टेक्टॉमी) से पहले जयपुर हॉस्पिटल (जयपुर हॉस्पिटल) की सर्जिकल टीम (सर्जिकल टीम) आपकी जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) के लिए फिटनेस जाँचने और ऑपरेशन (ऑपरेशन) की योजना बनाने के लिए कई टेस्ट करवाएगी।
इनमें आमतौर पर ये शामिल हैं:
- खून की जाँच (खून की जाँच)
- चेस्ट एक्स-रे (चेस्ट एक्स-रे)
- ईसीजी (ईसीजी)
- स्तन और बगल की इमेजिंग (इमेजिंग)
नतीजों से आपके सर्जन (सर्जन) को तय करने में मदद मिलती है कि कौन सी तकनीक सही है और क्या दवाओं में बदलाव ज़रूरी है।
आप अपने डॉक्टर को हर दवा के बारे में बताएँ जो आप ले रहे हैं, जिसमें ब्लड थिनर (ब्लड थिनर), एस्पिरिन (एस्पिरिन), हर्बल प्रोडक्ट (हर्बल उत्पाद), और सप्लीमेंट (सप्लीमेंट) शामिल हैं। इनमें से कुछ को सर्जरी से कुछ दिन पहले रोकना पड़ सकता है ताकि ब्लीडिंग (रक्तस्राव) का जोखिम कम हो। आपके एनेस्थेटिस्ट (एनेस्थेटिस्ट) आपकी लिस्ट देखेंगे और ऑपरेशन (ऑपरेशन) की सुबह क्या लेना है, इस पर साफ निर्देश देंगे।
आपसे प्रोसीजर (प्रोसीजर) से कम से कम छह घंटे पहले उपवास रखने को कहा जाएगा। इसका मतलब है कोई खाना, दूध, या दूध वाली चाय नहीं। सादा पानी अस्पताल आने से दो घंटे पहले तक पीने की छूट हो सकती है; नर्सिंग स्टाफ (नर्सिंग स्टाफ) सही समय कन्फर्म करेगा।
दो से चार रात रुकने के लिए एक छोटा बैग पैक करें। ढीले, आगे से खुलने वाले शर्ट या कुर्ते लाएँ जिन्हें बाँहें ऊपर उठाए बिना पहना जा सके, आरामदायक पतलून, अंडरवियर, और बिना अंडरवायर (अंडरवायर) वाली मुलायम ब्रा या कैमिसोल।
अपनी रेगुलर दवाएँ, एलर्जी की लिस्ट, अपने बीमा (बीमा / इंश्योरेंस) या योजना के कार्ड (RGHS, मा योजना, CGHS, या प्राइवेट इंश्योरर की डिटेल्स), और फोन चार्जर रख लें। एक अटेंडेंट (अटेंडेंट) आपके साथ कमरे में रुक सकता है।
मास्टेक्टॉमी सर्जरी कैसे की जाती है
- जनरल एनेस्थीसिया दी जाती है ऑपरेशन में दो से तीन घंटे लगते हैं
- सुन्न करने की दवा इंजेक्ट की जाती है जागने के बाद दर्द कम करने में मदद करती है
- स्तन का टिश्यू निकाला जाता है तकनीक कैंसर स्टेज और पसंद पर निर्भर करती है
- सेंटिनल नोड बायोप्सी की जाती है ब्लू डाई या रेडियोट्रेसर से पहले नोड्स का पता चलता है
- ड्रेन लगाए जाते हैं आमतौर पर हर तरफ एक ड्रेन
मास्टेक्टॉमी (स्तन निकालने का ऑपरेशन) ब्रेस्ट कैंसर के इलाज या रोकथाम के लिए किया जाता है। यह ऑपरेशन जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) में होता है और आमतौर पर दो से तीन घंटे लगते हैं। सर्जरी के दौरान सर्जन आसपास के टिश्यू में सुन्न करने की दवा इंजेक्ट करते हैं ताकि जागने के बाद दर्द कम रहे।
आपका सर्जन बताएंगे कि आपकी कैंसर स्टेज, ट्यूमर की जगह और आपकी पसंद के हिसाब से कौन सी तकनीक सही है। मुख्य विकल्प हैं:
- मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी: पूरा स्तन और बगल के लिम्फ नोड्स निकाले जाते हैं।
- सिंपल मास्टेक्टॉमी विद सेंटिनल नोड बायोप्सी: स्तन निकाला जाता है और केवल पहले ड्रेन होने वाले लिम्फ नोड्स की जाँच होती है। अगर वे साफ़ हैं तो और नोड्स नहीं निकाले जाते।
- ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी: केवल ट्यूमर और उसके आसपास का थोड़ा स्वस्थ टिश्यू निकाला जाता है, फिर स्तन को रेडियोथेरेपी दी जाती है। यह मास्टेक्टॉमी नहीं है लेकिन छोटे और उपयुक्त कैंसर में पेश की जाती है।
स्किन-स्पेयरिंग और निप्पल-स्पेयरिंग तरीकों में स्तन की ज्यादातर त्वचा या निप्पल-एरिओला कॉम्प्लेक्स बचा रहता है ताकि तुरंत रीकंस्ट्रक्शन हो सके। ये आमतौर पर रीकंस्ट्रक्शन के साथ किए जाते हैं — इम्प्लांट, टिश्यू एक्सपैंडर, या शरीर के दूसरे हिस्से के अपने टिश्यू से। क्योंकि चीरा छोटा होता है, ये ऑपरेशन अनुभवी ब्रेस्ट सर्जन और प्लास्टिक सर्जन मिलकर करते हैं।
ऑपरेशन के दौरान सर्जन छाती की मांसपेशी का छोटा हिस्सा तभी निकालते हैं जब कैंसर उसके पास या उससे छू रहा हो। ज्यादातर सर्जरी में छाती की मांसपेशियों को नुकसान नहीं होता। लिम्फ नोड्स की जाँच सेंटिनल नोड बायोप्सी से होती है जिसमें ब्लू डाई, रेडियोट्रेसर, या दोनों का इस्तेमाल करके पहले नोड्स का पता लगाया जाता है।
अगर सेंटिनल नोड्स में कैंसर मिले तो और नोड्स निकालने की सर्जरी उसी समय या बाद में हो सकती है। आप कम से कम एक ड्रेन के साथ जागेंगे जो तरल इकट्ठा करता है; आमतौर पर हर तरफ एक ड्रेन लगता है, कभी-कभी दो।
मास्टेक्टॉमी के जोखिम और संभावित जटिलताएँ
- लगभग 53 प्रतिशत टू-स्टेज एक्सपैंडर-टू-इम्प्लांट
- लगभग 17 प्रतिशत वन-स्टेज डायरेक्ट-टू-इम्प्लांट
- लगभग 24 प्रतिशत ऑटोलॉगस (अपने टिश्यू) रीकंस्ट्रक्शन
मास्टेक्टॉमी बड़ा ऑपरेशन है और हर सर्जरी की तरह इसमें जोखिम होते हैं। अध्ययनों में मास्टेक्टॉमी के बाद रीकंस्ट्रक्शन के साथ कुल जटिलता दर लगभग 22 प्रतिशत पाई गई। जटिलता दर रीकंस्ट्रक्शन के प्रकार के साथ बदलती है: टू-स्टेज एक्सपैंडर-टू-इम्प्लांट रीकंस्ट्रक्शन में लगभग 53 प्रतिशत, वन-स्टेज डायरेक्ट-टू-इम्प्लांट में लगभग 17 प्रतिशत, और ऑटोलॉगस (अपने टिश्यू) रीकंस्ट्रक्शन में लगभग 24 प्रतिशत।
खास जटिलताओं में शामिल हैं:
- घाव का संक्रमण
- खून बहना
- सेरोमा (तरल जमा होना)
- घाव का ठीक से न भरना
निप्पल नेक्रोसिस (निप्पल का खराब होना) तब बड़ी चिंता होती है जब निप्पल बचाया जाता है। अध्ययनों में कुल निप्पल नेक्रोसिस दर लगभग 7 प्रतिशत थी।
यह चीरे के प्रकार से बदलती थी: रेडियल चीरे में लगभग 9 प्रतिशत, पेरिअरिओलर या सर्कमअरिओलर में लगभग 18 प्रतिशत, इन्फ्रामैमरी में लगभग 9 प्रतिशत, मैस्टोपेक्सी-टाइप में लगभग 5 प्रतिशत, और ट्रांसअरिओलर में बहुत ज्यादा लगभग 82 प्रतिशत।
टू-स्टेज एक्सपैंडर-टू-इम्प्लांट रीकंस्ट्रक्शन में निप्पल नेक्रोसिस दर लगभग 4.5 प्रतिशत, वन-स्टेज डायरेक्ट-टू-इम्प्लांट में लगभग 4 प्रतिशत, और ऑटोलॉगस रीकंस्ट्रक्शन में लगभग 17 प्रतिशत थी। सर्जन के अनुभव से ये दरें समय के साथ कम होती हैं।
जोखिम बढ़ाने वाले कारकों में बड़े या ढीले स्तन, धूम्रपान, मोटापा, और पहले से हुई या प्लान की गई रेडियोथेरेपी शामिल हैं। अगर आप धूम्रपान करते हैं तो सर्जरी से कई हफ्ते पहले छोड़ देने से जोखिम कम होता है।
मास्टेक्टॉमी के बाद आप उस तरफ स्तनपान नहीं करा पाएंगे और स्तन की त्वचा में सनसनी चली जाएगी। कुछ लोगों को फैंटम सनसेशन होते हैं — लगता है जैसे स्तन या निप्पल अभी भी है — साथ में कोमलता, सुन्नता, या छाती की दीवार या बांह में झटके महसूस होते हैं। ये आमतौर पर पहले कुछ महीनों में कम होते जाते हैं।
लिम्फ नोड निकालने से लिम्फोएडेमा (बांह में सूजन), कंधे में अकड़न, या बांह के अंदरूनी ऊपरी हिस्से में सुन्नता हो सकती है। सेंटिनल नोड बायोप्सी में लिम्फोएडेमा का जोखिम फुल एक्सिलरी डिसेक्शन से कम होता है। आपकी टीम एक्सरसाइज और सावधानियाँ बताएगी ताकि ये जोखिम कम रहें।
मास्टेक्टॉमी के बाद रिकवरी और देखभाल
- हॉस्पिटल में रुकना दो से चार रात; ऑटोलॉगस रीकंस्ट्रक्शन के साथ पांच दिन तक
- सामान्य गतिविधि पर लौटना बिना रीकंस्ट्रक्शन तीन हफ्ते; रीकंस्ट्रक्शन के साथ चार से छह हफ्ते
- तैराकी या टब में नहाने से बचें कम से कम छह हफ्ते या जब तक चीरा पूरी तरह भर न जाए
ऑपरेशन के बाद आप कुछ घंटे रिकवरी एरिया में रहेंगे फिर अपने कमरे में जाएंगे। जयपुर हॉस्पिटल में आमतौर पर दो से चार रात रुकना होता है। अगर तुरंत ऑटोलॉगस रीकंस्ट्रक्शन हुआ है तो रुकना लंबा हो सकता है, चार से पांच दिन तक। बिना रीकंस्ट्रक्शन वाले कुछ मरीज उसी दिन या एक रात रुककर घर जा सकते हैं।
आपके पास एक या ज्यादा ड्रेन लगे होंगे जो छोटी बोतल से जुड़े होते हैं। नर्सिंग टीम आपको और आपके अटेंडेंट को दिखाएगी कि ड्रेन कैसे खाली करना है और आउटपुट कैसे नापना है। ड्रेन आमतौर पर तब निकाला जाता है जब आउटपुट लगातार दो दिन तक 20 से 30 मिलीलीटर प्रति दिन से कम हो जाए।
ड्रेन लगे रहने का औसत समय दो से तीन हफ्ते होता है। आप ड्रेन लगे हुए ही घर जा सकते हैं; सर्जिकल टीम ड्रेन निकालने के लिए फॉलो-अप विजिट तय करेगी।
दर्द आमतौर पर रेगुलर पैरासिटामोल या आइबुप्रोफेन से कंट्रोल होता है। कुछ लोगों को थोड़े समय के लिए स्ट्रॉन्ग पेनकिलर की जरूरत पड़ती है।
आपको भारी सामान न उठाने और ऑपरेशन वाली तरफ बांह को कंधे की ऊंचाई से ऊपर न उठाने की सलाह दी जाएगी जब तक ड्रेन न निकल जाएं, ताकि ड्रेन या स्पेसर अपनी जगह से न हटे। तब तक गाड़ी न चलाएं जब तक सर्जन इजाजत न दें, और स्ट्रॉन्ग पेन दवा लेते हुए तो बिल्कुल न चलाएं।
कम से कम छह हफ्ते या जब तक चीरा पूरी तरह भर न जाए, तैराकी या टब में नहाने से बचें।
सामान्य गतिविधि पर लौटने का रिकवरी टाइम आमतौर पर तीन से छह हफ्ते होता है। बिना रीकंस्ट्रक्शन के हीलिंग तीन हफ्ते के करीब होती है; रीकंस्ट्रक्शन के साथ आमतौर पर चार से छह हफ्ते।
आप सर्जन से मिलेंगे घाव की जाँच और पैथोलॉजी रिपोर्ट पर चर्चा के लिए, जो आगे के इलाज जैसे कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, या हार्मोन थेरेपी का रास्ता तय करती है।
अगर 38°C से ऊपर बुखार आए, घाव के आसपास लाली या गर्मी बढ़े, बांह में अचानक सूजन या दर्द हो, ड्रेन का आउटपुट अचानक बढ़ जाए या बदबू आए, या आप किसी भी तरह से बीमार महसूस करें तो तुरंत हॉस्पिटल कॉल करें या इमरजेंसी डिपार्टमेंट जाएं।
मास्टेक्टॉमी के नतीजे: यह कितना कारगर है और दोबारा होने की दर
- 44% मास्टेक्टॉमी बनाम 39% ब्रेस्ट-कंजर्विंग 20 साल की ओवरऑल सर्वाइवल
- 43% मास्टेक्टॉमी बनाम 47% ब्रेस्ट-कंजर्विंग 20 साल पर डिस्टेंट मेटास्टेसिस
- 0 से 3.7 प्रतिशत निप्पल-स्पेयरिंग के बाद निप्पल में रिकरेंस
लंबे समय के अध्ययनों में मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी की तुलना ब्रेस्ट-कंजर्विंग थेरेपी (लम्पेक्टॉमी और रेडियोथेरेपी) से की गई। लोकल कंट्रोल मास्टेक्टॉमी में बेहतर था, लेकिन ओवरऑल सर्वाइवल और डिस्टेंट मेटास्टेसिस तक का समय दोनों में खास अलग नहीं था। इसका मतलब है उपयुक्त मरीजों के लिए दोनों तरीके लगभग बराबर जीवन प्रत्याशा देते हैं।
जिन महिलाओं की एक्सिलरी डिसेक्शन हुई और नोड्स पॉजिटिव नहीं थे, उनमें रेडियोथेरेपी जोड़ने से लोकोरिजनल रिकरेंस या ब्रेस्ट कैंसर मृत्यु दर में खास कमी नहीं आई। एक से तीन पॉजिटिव नोड्स वाली महिलाओं में रेडियोथेरेपी ने लोकोरिजनल रिकरेंस, कुल रिकरेंस, और ब्रेस्ट कैंसर मृत्यु दर घटाई। नोड-पॉजिटिव बीमारी में रेडियोथेरेपी ने ओवरऑल मृत्यु दर भी घटाई।
स्किन-स्पेयरिंग और निप्पल-स्पेयरिंग मास्टेक्टॉमी के अध्ययन दिखाते हैं कि कैंसर के नतीजे नॉन-कंजर्वेटिव मास्टेक्टॉमी जैसे ही हैं। निप्पल-स्पेयरिंग मास्टेक्टॉमी के बाद निप्पल-एरिओला कॉम्प्लेक्स में रिकरेंस दर स्वीकार्य रूप से कम बताई गई है, 0 से 3.7 प्रतिशत के बीच। निप्पल-स्पेयरिंग तकनीकों से मरीजों की संतुष्टि और मनोवैज्ञानिक तालमेल आमतौर पर अच्छा रहता है।
20 साल से ज्यादा फॉलो-अप वाले एक बड़े ट्रायल में 20 साल की ओवरऑल सर्वाइवल मास्टेक्टॉमी ग्रुप में लगभग 44 प्रतिशत और ब्रेस्ट-कंजर्विंग ग्रुप में लगभग 39 प्रतिशत थी; फर्क स्टैटिस्टिकली सिग्निफिकेंट नहीं था। 20 साल पर डिस्टेंट मेटास्टेसिस दर लगभग 43 प्रतिशत और 47 प्रतिशत थी।
आपका व्यक्तिगत नतीजा कैंसर स्टेज, ट्यूमर बायोलॉजी, और आपको मिलने वाले अतिरिक्त इलाज पर निर्भर करता है। सर्जरी के बाद की पैथोलॉजी रिपोर्ट आपके रिकरेंस जोखिम की सबसे साफ तस्वीर देती है। आपकी ऑन्कोलॉजी टीम बताएगी कि नतीजे आपके लिए क्या मायने रखते हैं।
जयपुर में मास्टेक्टॉमी का खर्च और बीमा
भारत में मास्टेक्टॉमी सर्जरी की आम कीमत रेंज ₹1,00,000 से ₹2,50,000 है। इस रेंज में ऑपरेशन, एनेस्थीसिया, दो से चार रात का हॉस्पिटल स्टे, और बेसिक जाँचें शामिल हैं।
अंतिम खर्च कई बातों पर निर्भर करता है:
- मास्टेक्टॉमी का प्रकार (मॉडिफाइड रेडिकल, सिंपल विद सेंटिनल नोड, या स्किन-/निप्पल-स्पेयरिंग)
- रीकंस्ट्रक्शन साथ में हो रहा है या बाद में
- इम्प्लांट या ऑटोलॉगस टिश्यू का चुनाव
- आईसीयू या वार्ड में रुकने की अवधि
- प्री-ऑपरेटिव टेस्ट की संख्या और प्रकार
जब दोनों स्तन निकाले जाते हैं तो खर्च बढ़ जाता है।
मास्टेक्टॉमी के बाद ब्रेस्ट रीकंस्ट्रक्शन का खर्च आमतौर पर अतिरिक्त ₹70,000 से ₹1,50,000 होता है, तरीके के अनुसार। रीकंस्ट्रक्शन तुरंत मास्टेक्टॉमी के दौरान किया जा सकता है या दूसरे कैंसर इलाज पूरे होने के बाद देर से। अगर रेडियोथेरेपी जरूरी है तो डॉक्टर अक्सर इलाज खत्म होने तक रीकंस्ट्रक्शन रोकने की सलाह देते हैं।
मास्टेक्टॉमी को मेडिकली जरूरी प्रक्रिया माना जाता है, इसलिए इसका खर्च आमतौर पर हेल्थ इंश्योरेंस से कवर होता है। कवरेज पॉलिसी की शर्तों और सर्जरी के कारण के हिसाब से आंशिक या पूरा हो सकता है। जयपुर हॉस्पिटल RGHS, मा योजना, CGHS, और प्राइवेट इंश्योरर्स व TPAs के पैनल में शामिल है।
एडमिशन के समय अपना स्कीम या इंश्योरेंस कार्ड और प्री-ऑथराइजेशन लेटर साथ लाएं। हॉस्पिटल का इंश्योरेंस डेस्क कागजी काम और कैशलेस या रीइम्बर्समेंट प्रोसेस में मदद करेगा। व्यक्तिगत अनुमानित खर्च के लिए सीधे हॉस्पिटल से संपर्क करें।