यूरोलॉजी · जयपुर हॉस्पिटल
जयपुर में प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी (रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी)
आपके पास प्रोस्टेट कैंसर की रिपोर्ट है और मन में शंका है। जयपुर हॉस्पिटल साफ आकलन, आसान भाषा में विकल्प और व्यवस्थित देखभाल योजना देता है।
- 1991 से जयपुर की सेवा में (35 साल)
- एनएबीएच मान्यता प्राप्त
- 24×7 इमरजेंसी और आईसीयू
- कैशलेस: RGHS, मा योजना, CGHS + 22 बीमा कंपनियाँ
- ऑपरेशन का समय
- 2 से 4 घंटे
- एनेस्थीसिया (बेहोशी)
- जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी)
- रिकवरी (ठीक होना)
- कैथेटर 1 से 2 हफ्ते के लिए, सामान्य गतिविधि 4 से 6 हफ्ते में
- कीमत
- ₹1,50,000 से ₹4,00,000भारत में सामान्य रेंज; हमसे अनुमानित खर्च पूछें
पता चलने के बाद अनिश्चितता
आप सर्जरी और उसके बाद को लेकर चिंतित हैं
प्रोस्टेट कैंसर का पता चलने पर कई सवाल उठते हैं। आप सोच सकते हैं कि क्या सर्जरी ज़रूरी है, पेशाब और अंतरंगता पर क्या असर पड़ेगा, और काम से कितने दिन दूर रहना पड़ेगा।
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मूत्र नियंत्रण की चिंता
कई पुरुषों को डर होता है कि पेशाब अपने आप निकल जाएगा और सर्जरी के बाद नियंत्रण वापस आएगा या नहीं।
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इरेक्शन (कठोरता) की चिंता
प्रोस्टेट सर्जरी पास की नसों को प्रभावित कर सकती है, जिससे पुरुष अंतरंगता और लंबे समय तक इरेक्शन को लेकर चिंतित रहते हैं।
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परिवार और काम में रुकावट
आप रिकवरी की अवधि, अस्पताल में रहने और परिवार के खर्चों को लेकर चिंतित हो सकते हैं।
प्रोस्टेट सर्जरी प्रोस्टेट के पास की उन नसों को प्रभावित करती है जो लिंग में रक्त प्रवाह को नियंत्रित करती हैं।
जयपुर हॉस्पिटल क्यों
आप पेशाब लीक होने, अंतरंग जीवन में बदलाव और काम से दूर रहने को लेकर चिंतित महसूस कर सकते हैं।
आपके इलाज का प्लान
हमारे साथ आपके पहले कदम
- 1 हमारी यूरोलॉजी टीम के साथ ओपीडी अपॉइंटमेंट बुक करें।
- 2 अपनी PSA रिपोर्ट और स्कैन अपने सर्जन के साथ देखें।
- 3 सर्जरी के विकल्पों पर चर्चा करें और पारदर्शी अनुमानित खर्च प्राप्त करें।
- 4 अपनी प्रक्रिया पूरी करें और निर्देशित रिकवरी शेड्यूल का पालन करें।
ऑपरेशन कैसे किया जाता है
रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी में प्रोस्टेट ग्रंथि निकाली जाती है। आपका सर्जन आपकी सेहत और कैंसर की स्टेज के अनुसार बताएगा कि कौन सा तरीका सही है। इसमें आमतौर पर जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) में 2 से 4 घंटे लगते हैं।
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ओपन रेट्रोप्यूबिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी
पारंपरिक तरीका जिसमें पेट के निचले हिस्से में एक चीरा लगाकर प्रोस्टेट तक पहुंचा जाता है और उसे निकाला जाता है।
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लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी
न्यूनतम इनवेसिव तरीका जिसमें छोटे कीहोल चीरे और सर्जिकल पोर्ट का इस्तेमाल होता है।
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रोबोट-असिस्टेड लेप्रोस्कोपिक प्रोस्टेटेक्टॉमी
न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया जिसमें नसों को बचाने वाले चरणों में सटीकता के लिए रोबोटिक उपकरणों का उपयोग होता है।
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पेरिनियल रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी
अंडकोश और गुदा के बीच चीरा लगाने वाला तरीका, जिसे कम चुना जाता है।
मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं
- 1991 35 साल से जयपुर की सेवा में
- एनएबीएच मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल
- 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू और एम्बुलेंस
- 25 कैशलेस योजनाएँ और बीमा कंपनियाँ
क्लिनिकल अध्ययन प्रोस्टेट सर्जरी के बारे में क्या दिखाते हैं
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21.4%
एक क्लिनिकल ट्रायल में, सर्जरी के 30 दिन के भीतर 21.4% पुरुषों में प्रतिकूल घटनाएं हुईं।
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लगभग 10 में से 9
अस्पताल के शोध में, लगभग 10 में से 9 मरीज़ों ने समय के साथ पेशाब पर नियंत्रण वापस पाया।
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12 महीने
अध्ययनों में मरीज़ अक्सर सर्जरी के 12 महीने के भीतर, या कुछ महीनों में ही पहले की तरह पेशाब करने लगते हैं।
अगर इलाज न कराया जाए
इलाज न किए गए प्रोस्टेट कैंसर बढ़ सकते हैं और प्रोस्टेट से आगे लिम्फ नोड्स और हड्डियों तक फैल सकते हैं। क्लिनिकल ट्रायल में, सक्रिय निगरानी की तुलना में सर्जरी से बीमारी बढ़ने और दूर फैलने (डिस्टेंट मेटास्टेसिस) की दर कम देखी गई।
इलाज के बाद का जीवन
रिकवरी में धैर्य चाहिए। निर्देशित ऑपरेशन के बाद की देखभाल से ज्यादातर पुरुष धीरे-धीरे रोजमर्रा की दिनचर्या में लौट आते हैं।
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घर वापसी
अस्पताल में रहना आमतौर पर 2 से 4 रातों का होता है, साथ में एक अटेंडेंट रहता है जो शुरुआती रिकवरी में मदद करता है।
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कैथेटर का प्रबंधन
मूत्र कैथेटर आमतौर पर 1 से 2 हफ्ते तक लगा रहता है, उसके बाद सामान्य पेशाब शुरू होता है।
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दिनचर्या फिर से शुरू करना
अधिकांश मरीज़ लगभग दो हफ्ते में डेस्क वर्क पर लौट आते हैं और 4 से 6 हफ्ते में सामान्य शारीरिक गतिविधि शुरू कर देते हैं।
हमारी टीम से मिलें
हमारे यूरोलॉजी विशेषज्ञ
Care led by Jaipur Hospital's यूरोलॉजी consultants, backed by round-the-clock surgical, diagnostic and critical care support.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी (रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी) के बारे में मरीज़ों के सवाल
रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी में क्या होता है?
संक्षेप में
रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी सर्जरी है जिसमें पूरा प्रोस्टेट ग्लैंड और सेमिनल वेसिकल्स निकाले जाते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में यह ऑपरेशन जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) में 2 से 4 घंटे चलता है। आपका सर्जन पेल्विस के कुछ लिम्फ नोड्स भी निकाल सकता है ताकि पता चले कि कैंसर फैला है या नहीं। आपको 2 से 4 रात अस्पताल में रहना पड़ता है और 1 से 2 हफ्ते तक कैथेटर लगा रहता है।
विस्तार से
प्रोस्टेट पेल्विस में गहरा होता है, इसलिए सर्जन कई तरीकों से उस तक पहुंचता है। ओपन रेट्रोप्यूबिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी में पेट के निचले हिस्से में चीरा लगाया जाता है।
लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) और रोबोट-असिस्टेड लेप्रोस्कोपिक प्रोस्टेटेक्टोमी में छोटे पोर्ट और कैमरे का इस्तेमाल होता है; रोबोट से नर्व-स्पेयरिंग में ज्यादा सटीकता मिलती है। पेरिनियल रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी में अंडकोश और गुदा के बीच चीरा लगाते हैं, लेकिन यह तरीका कम होता है।
अध्ययनों में ओपन और मिनिमली इनवेसिव तरीकों के लॉन्ग-टर्म कैंसर नतीजे समान पाए गए हैं। चुनाव ट्यूमर के फैक्टर, आपकी शारीरिक बनावट और सर्जन के अनुभव पर निर्भर करता है।
एक आम धारणा
कई लोग समझते हैं कि केवल ओपन चीरे वाला तरीका होता है, लेकिन लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) और रोबोट-असिस्टेड तरीके भी विकल्प हैं।
असल में क्या होता है
अध्ययनों में सभी तकनीकों से लॉन्ग-टर्म कैंसर कंट्रोल समान मिला है; फर्क रिकवरी की रफ्तार और नर्व-स्पेयरिंग की सटीकता में है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आपके यूरोलॉजिस्ट आपके स्कैन और बायोप्सी देखने के बाद बताएंगे कि कौन सा तरीका आपके लिए सही है। आपको प्री-ऑपरेटिव टेस्ट और एनेस्थीसिया चेकअप कराने होंगे। सामान्य गतिविधि पर लौटने के लिए 4 से 6 हफ्ते का समय रखें। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करके तकनीक और रिकवरी पर विस्तार से बात करें।
रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी से पहले मुझे कौन से टेस्ट और स्कैन कराने होंगे?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी से पहले आपको हाल का PSA ब्लड टेस्ट, प्रोस्टेट MRI या पेट और पेल्विस का CT स्कैन, और अक्सर बोन स्कैन कराना होता है ताकि पता चले कैंसर फैला तो नहीं। रूटीन खून की जांच में कम्पलीट ब्लड काउंट, किडनी और लिवर फंक्शन, और कोएगुलेशन प्रोफाइल शामिल हैं। ECG और चेस्ट X-रे के साथ प्री-एनेस्थीसिया चेक भी ज़रूरी है।
विस्तार से
MRI से सर्जन ट्यूमर की हद देखता है और नर्व-स्पेयरिंग प्लान करता है। CT या बोन स्कैन लिम्फ नोड्स या हड्डियों में मेटास्टेसिस रूल आउट करता है, जो ट्रीटमेंट प्लान बदल देगा।
खून की जांच पक्का करती है कि आप जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) और सर्जरी सहन कर सकते हैं। अगर दिल या फेफड़ों की दिक्कत है, तो फिजिशियन या कार्डियोलॉजिस्ट से अतिरिक्त क्लीयरेंस लेनी पड़ सकती है। सभी रिपोर्ट हाल की होनी चाहिए, आमतौर पर प्लांड ऑपरेशन के चार हफ्ते के अंदर।
एक आम धारणा
मरीज़ कभी-कभी मान लेते हैं कि केवल PSA काफी है।
असल में क्या होता है
इमेजिंग ज़रूरी है ताकि कन्फर्म हो सके कि कैंसर प्रोस्टेट के बाहर नहीं फैला। इसके बिना सर्जन पक्का नहीं कर सकता कि सर्जरी सही इलाज है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
हमारी यूरोलॉजी टीम आपको ज़रूरी जांच की चेकलिस्ट देगी। ज्यादातर टेस्ट हमारी इन-हाउस लैब और रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में हो सकते हैं। अपनी पिछली बायोप्सी स्लाइड और इमेजिंग डिस्क प्री-ऑपरेटिव विज़िट पर साथ लाएं। जयपुर हॉस्पिटल में प्री-सर्जरी असेसमेंट बुक करके पूरी लिस्ट पाएं और अपने टेस्ट शेड्यूल करें।
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी और शुरुआती रिकवरी में कितना दर्द होता है?
संक्षेप में
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी के बाद दर्द तकनीक और व्यक्तिगत प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। जयपुर हॉस्पिटल में सर्जिकल टीम एक प्लांड प्रोटोकॉल से दर्द कंट्रोल करती है जिसमें अस्पताल में दो से चार रात रहने के दौरान नियमित दवा शामिल है। ज्यादातर मरीज असहजता को मध्यम बताते हैं और घर जाने पर गोलियों से अच्छी तरह कंट्रोल हो जाता है।
विस्तार से
ओपन रेट्रोपबिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी में पेट के निचले हिस्से में बड़ा चीरा लगता है इसलिए पहले हफ्ते में घाव की जगह ज्यादा दर्द होता है।
लेप्रोस्कोपिक और रोबोट-असिस्टेड तरीकों में कई छोटे पोर्ट लगते हैं जिससे आमतौर पर चीरे का दर्द कम होता है और जल्दी चलना-फिरना शुरू हो जाता है। सभी तकनीकों में जनरल एनेस्थीसिया दी जाती है।
कैथेटर एक से दो हफ्ते लगा रहता है और ब्लैडर स्पाज्म या अर्जेंसी का अहसास दे सकता है जिसे टीम एंटीस्पाज्मोडिक दवा से ठीक करती है अगर जरूरत हो।
सबूत दिखाते हैं कि बड़े सीरीज में तीस दिन के अंदर एडवर्स इवेंट लगभग इक्कीस प्रतिशत पुरुषों में हुए लेकिन कुछ दिनों के बाद तेज दर्द के लिए स्ट्रॉन्ग ओपिओइड की जरूरत असामान्य है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
डिस्चार्ज पर आपको लिखित दर्द प्लान मिलेगा जिसमें पैरासिटामोल और तेज दर्द के लिए स्ट्रॉन्ग गोली की डोज और टाइमिंग होगी। घर पर हल्का चलते रहें; हर कुछ घंटे में थोड़ी दूर चलने से आंत का काम ठीक रहता है और अकड़न कम होती है।
चार से छह हफ्ते भारी वजन न उठाएं। अगर दर्द अचानक बढ़े, बुखार आए या घाव लाल और गर्म हो तो तुरंत अस्पताल संपर्क करें। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि आपकी चुनी तकनीक के लिए दर्द प्लान पर चर्चा हो सके।
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी (रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी) के बाद रिकवरी (ठीक होना) में आमतौर पर कितना समय लगता है?
संक्षेप में
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी (रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी) के बाद रिकवरी (ठीक होना) चरणों में होती है। जयपुर हॉस्पिटल में आमतौर पर हॉस्पिटल स्टे दो से चार रात का होता है। कैथेटर एक से दो हफ्ते लगा रहता है। ज्यादातर लोग कुछ हफ्तों में हल्की दैनिक गतिविधि शुरू कर देते हैं और चार से छह हफ्ते में सामान्य रूटीन पर लौट आते हैं।
विस्तार से
ओपन रेट्रोपबिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी में बड़े चीरे की वजह से स्टे और रिकवरी की लम्बी अवधि लगती है। लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) और रोबोट-असिस्टेड तरीकों में अक्सर अगले दिन डिस्चार्ज हो जाता है और डेस्क वर्क पर दो हफ्ते में वापसी सम्भव होती है।
ब्लैडर कंट्रोल आमतौर पर कई हफ्तों से महीनों में धीरे-धीरे लौटता है; सबूत बताते हैं कि रोबोट-असिस्टेड सर्जरी के बाद बारह महीने की कॉन्टिनेंस दर चौरासी से सत्तानवे प्रतिशत होती है।
इरेक्टाइल फंक्शन की रिकवरी बहुत अलग-अलग होती है और तीन साल तक लग सकती है। भारी सामान उठाना और कड़ी कसरत कम से कम छह हफ्ते न करें। पहले महीने थकान आम है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
डेस्क जॉब हो तो एक से दो हफ्ते की छुट्टी प्लान करें, शारीरिक काम हो तो ज्यादा। रोज चलें, दूरी धीरे-धीरे बढ़ाएँ। सिखाए गए पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज करें। कैथेटर हटाने की अपॉइंटमेंट और सारे फॉलो-अप पर जाएँ। बुखार, तेज रक्तस्राव, घाव में लाली, या कैथेटर हटने के बाद पेशाब न आने पर तुरन्त बताएँ।
प्रोस्टेट कैंसर में टाइप, ग्रेड और स्टेज का क्या मतलब होता है?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में टाइप, ग्रेड और स्टेज से कैंसर का पूरा ब्यौरा मिलता है। टाइप बताता है कि कौन सी कोशिकाएं शामिल हैं, लगभग हमेशा एडेनोकार्सिनोमा। ग्रेड, ग्लीसन स्कोर या ग्रेड ग्रुप के रूप में दिखाया जाता है, जिससे पता चलता है कि कोशिकाएं कितनी असामान्य दिखती हैं और कितनी तेजी से बढ़ सकती हैं। स्टेज ट्यूमर के आकार और यह बताता है कि यह प्रोस्टेट से आगे फैला है या नहीं।
विस्तार से
डॉक्टर ग्लीसन स्कोर का उपयोग करते हैं, जो माइक्रोस्कोप के नीचे देखे गए दो सबसे सामान्य पैटर्न को जोड़ता है, ताकि 1 से 5 तक का ग्रेड ग्रुप दिया जा सके। अधिक ग्रुप का मतलब अधिक आक्रामक कैंसर।
स्टेजिंग TNM सिस्टम का उपयोग करती है: T ट्यूमर के आकार और स्थानीय प्रसार के लिए, N लिम्फ नोड की भागीदारी के लिए, और M दूर के प्रसार के लिए।
MRI, बोन स्कैन, या PSMA PET-CT जैसी इमेजिंग स्टेज की पुष्टि करने में मदद करती है। ये विवरण तय करते हैं कि रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी, रेडियोथेरेपी, या एक्टिव सर्विलांस उपयुक्त है या नहीं।
एक आम धारणा
कई मरीज ग्रेड और स्टेज में भ्रमित होते हैं।
असल में क्या होता है
ग्रेड कोशिका की उपस्थिति और वृद्धि की गति के बारे में है। स्टेज इस बारे में है कि कैंसर कितनी दूर तक गया है। सही उपचार चुनने के लिए दोनों की आवश्यकता होती है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आपका सर्जन परामर्श में आपका विशिष्ट ग्रेड और स्टेज समझाएगा और उन उपचार विकल्पों पर चर्चा करेगा जो आपकी स्थिति से मेल खाते हैं। आपको अगले चरणों के लिए एक स्पष्ट योजना मिलेगी, जिसमें किसी भी आगे की इमेजिंग या बायोप्सी की आवश्यकता शामिल है।
प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी के बाद किन पेशाब के लक्षणों पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत होती है?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी के बाद कुछ पेशाब के लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना ज़रूरी है। इनमें पेशाब बिल्कुल न आना, थक्कों के साथ भारी खून आना, पेट के निचले हिस्से या कमर में तेज़ दर्द, ठंड के साथ बुखार, और पैरों में अचानक सूजन शामिल हैं। अगर कैथेटर ब्लॉक हो जाए या निकल जाए, तो तुरंत हॉस्पिटल से संपर्क करें।
विस्तार से
सर्जरी के बाद कैथेटर पेशाब निकालता है जबकि यूरेथ्रल एनास्टोमॉसिस (जुड़ाव) ठीक होता है। खून के थक्कों से ब्लॉकेज होने पर ब्लैडर फूल सकता है और दर्द हो सकता है। भारी खून बहना किसी नस के खराब होने का संकेत हो सकता है।
बुखार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का इशारा हो सकता है जो फैल सकता है। पैरों की सूजन डीप वेन थ्रॉम्बोसिस का संकेत हो सकती है।
खांसने या ज़ोर लगाने पर पेशाब लीक होना (स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस) आम है और आमतौर पर समय के साथ ठीक होता है, लेकिन अचानक बिगड़ना या नए लक्षण आने पर बताना चाहिए। हॉस्पिटल का 24×7 इमरजेंसी विभाग इन समस्याओं का तुरंत मूल्यांकन करने के लिए तैयार है।
एक आम धारणा
कुछ मरीज़ यह सोचकर देर कर देते हैं कि लक्षण नॉर्मल हैं।
असल में क्या होता है
कैथेटर ब्लॉकेज या भारी खून जल्दी गंभीर हो सकते हैं। 24×7 इमरजेंसी विभाग मदद के लिए तैयार है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
इमरजेंसी नंबर संभाल कर रखें और इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर कॉल करने में संकोच न करें। आपका सर्जन डिस्चार्ज से पहले कैथेटर की देखभाल और चेतावनी के संकेतों की समीक्षा भी करेगा।
जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि ऑपरेशन के बाद की देखभाल और तुरंत ध्यान देने वाले लक्षणों पर चर्चा कर सकें।
मेरा डॉक्टर रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी की सलाह क्यों दे सकता है?
संक्षेप में
जब कैंसर केवल प्रोस्टेट तक सीमित हो और इलाज न करने पर उसके बढ़ने या फैलने की आशंका हो, तो डॉक्टर जयपुर हॉस्पिटल में रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी की सलाह दे सकते हैं। सर्जरी लोकलाइज़्ड ट्यूमर का एक आम इलाज है जो लिम्फ नोड्स या हड्डियों तक नहीं पहुंचा है। मकसद कैंसर को पूरी तरह निकालना है जब तक वह सीमित है।
विस्तार से
गाइडलाइंस उन ट्यूमर के लिए सर्जरी सुझाती हैं जिनमें हाई-रिस्क खूबियां हों, जैसे बढ़ता हुआ PSA, हाई ग्लीसन स्कोर, या क्लिनिकल स्टेज जो ज्यादा वॉल्यूम बताती हो।
अध्ययनों में रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी ने एक्टिव मॉनिटरिंग के मुकाबले मेटास्टेसिस का जोखिम कम किया और लॉन्ग-टर्म फॉलो-अप में प्रोस्टेट कैंसर मृत्यु दर घटाई। जब कैंसर लोकली फैला हो या हाई रिस्क हो तो ओपन सर्जरी अक्सर पसंद की जाती है।
आपका सर्जन कैंसर की खूबियों को आपकी उम्र, सेहत और निजी पसंद के साथ तौलेगा फिर सर्जरी की सलाह देगा।
एक आम धारणा
कुछ मरीज़ समझते हैं कि सर्जरी केवल एडवांस केस में होती है।
असल में क्या होता है
असल में यह सबसे असरदार तब होती है जब कैंसर अभी लिम्फ नोड्स या हड्डियों तक नहीं फैला। ज्यादा इंतज़ार करने से पूरी तरह निकालने का मौका कम हो सकता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
फैसला आपकी बायोप्सी, इमेजिंग, PSA ट्रेंड और एनेस्थीसिया के लिए फिटनेस देखने के बाद होता है। आपको फायदों और साइड इफेक्ट्स जैसे इन्कॉन्टिनेंस और इरेक्टाइल डिसफंक्शन पर बात करने का समय मिलेगा।
जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि हमारी यूरोलॉजी टीम आपकी रिपोर्ट देख सके और बता सके कि सर्जरी आपके लिए सही विकल्प है या नहीं।
रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी से पहले के दिनों में मुझे कैसे तैयारी करनी चाहिए?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी से पहले के दिनों में अपने सर्जन के निर्देशों का पालन करें दवाओं, खाने और आंत की सफाई के बारे में। खून पतला करने वाली दवाएं जैसे एस्पिरिन या क्लोपिडोग्रेल तभी बंद करें जब आपका डॉक्टर कहे। सर्जरी से एक शाम पहले आपको लैक्सेटिव या एनिमा लेने को कहा जा सकता है ताकि आंत साफ हो जाए।
विस्तार से
ऑपरेशन की सुबह एंटीसेप्टिक साबुन से नहाएं। धूम्रपान और शराब से बचें क्योंकि ये भरने में बाधा डालते हैं। अस्पताल में रहने के दौरान एक अटेंडेंट साथ रहने का इंतजाम करें।
आरामदायक कपड़े, अपनी नियमित दवाएं उनके असली पैकेट में और कोई भी जांच रिपोर्ट साथ ले जाएं। अगर आपको डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है तो प्री-ऑपरेटिव चेक के दौरान एनेस्थीसिया टीम आपकी दवाएं एडजस्ट करेगी।
एक आम धारणा
कुछ मरीज खुद ही सारी दवाएं बंद कर देते हैं जो खतरनाक हो सकता है।
असल में क्या होता है
दूसरे अटेंडेंट का इंतजाम करना भूल जाते हैं। दोनों से सर्जरी में देरी हो सकती है। अपने सर्जन की लिखी चेकलिस्ट को ठीक से फॉलो करें।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
एडमिशन डेस्क से अपना एडमिशन टाइम कन्फर्म करें। एनेस्थेटिस्ट आपको फास्टिंग के नियम बताएंगे, आमतौर पर सर्जरी से छह घंटे पहले कुछ भी मुंह से नहीं। अपने अटेंडेंट और सभी कागजात के साथ अस्पताल पहुंचें।
जयपुर हॉस्पिटल में अपना प्री-एडमिशन अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि कागजी काम पूरा हो सके और एनेस्थीसिया टीम से मिल सकें।
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी के आम साइड इफेक्ट और कम आम गंभीर जटिलताएं क्या हैं?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी के बाद आम साइड इफेक्ट में यूरिन लीकेज और इरेक्शन में दिक्कत शामिल हैं। फर्टिलिटी खत्म हो जाती है क्योंकि प्रोस्टेट और सेमिनल वेसिकल्स निकाल दिए जाते हैं। कम आम गंभीर जटिलताओं में ब्लीडिंग जिससे ट्रांसफ्यूजन चाहिए, संक्रमण, रेक्टम को चोट, खून के थक्के और एनेस्थीसिया के रिएक्शन हो सकते हैं। लिम्फोएडेमा या पैरों में सूजन दुर्लभ है।
विस्तार से
MSKCC के सबूत दिखाते हैं लगभग दस में से नौ लोग समय के साथ यूरिन कंट्रोल वापस पा लेते हैं जबकि पांच से दस प्रतिशत को हल्का स्ट्रेस लीकेज बना रह सकता है।
इरेक्टाइल फंक्शन रिकवरी बहुत अलग होती है; इसमें हफ्ते, महीने या तीन साल तक लग सकते हैं और कुछ पुरुषों को पूरे इरेक्शन वापस नहीं मिलते। MD Anderson नोट करता है हाई-वॉल्यूम सेंटर में इनकॉन्टिनेंस की समस्या कम होती है।
एक यूरोपियन स्टडी में तीस दिन के अंदर एडवर्स इवेंट लगभग इक्कीस प्रतिशत पुरुषों में मिले और मृत्यु दर बहुत कम है। आपका सर्जन चर्चा करेगा कि आपकी उम्र, सेहत और कैंसर स्टेज इन जोखिमों को कैसे प्रभावित करते हैं।
एक आम धारणा
मरीज अक्सर सोचते हैं इनकॉन्टिनेंस और इम्पोटेंस सभी के लिए लंबे समय तक रहते हैं।
असल में क्या होता है
डेटा दिखाती है ज्यादातर पुरुष ब्लैडर कंट्रोल वापस पा लेते हैं और कई समय के साथ इरेक्शन रिकवर कर लेते हैं खासकर नर्व-स्पेयरिंग तकनीकों से। हाई-वॉल्यूम सेंटर में जटिलता दर कम होती है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
सर्जरी से पहले स्पर्म बैंकिंग के बारे में पूछें अगर आप बाद में बच्चे चाहते हैं। डिस्चार्ज के बाद भारी ब्लीडिंग, बुखार, घाव की लाली, पिंडली में दर्द या पेशाब न आने पर नजर रखें और होने पर तुरंत अस्पताल संपर्क करें।
पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज जल्दी शुरू करने से ब्लैडर कंट्रोल में मदद मिल सकती है। फॉलो-अप विजिट आमतौर पर दो से तीन हफ्ते पर और फिर नियमित अंतराल पर होती हैं। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि आपका पर्सनल रिस्क प्रोफाइल रिव्यू हो सके।
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी (रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी) के बाद कौन से लक्षण सामान्य हैं और किनमें तुरन्त मेडिकल अटेंशन चाहिए?
संक्षेप में
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी (रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी) के बाद सामान्य लक्षणों में चीरे वाली जगह पर हल्का दर्द, कैथेटर लगे रहने तक ब्लैडर स्पाज्म या अर्जेंसी, थकान, और हिलने-खांसने पर थोड़ा पेशाब निकलना शामिल हैं। जयपुर हॉस्पिटल में डिस्चार्ज के समय टीम आपको लक्षणों की चेकलिस्ट देती है ताकि आप जान सकें कि क्या सामान्य है।
विस्तार से
कैथेटर से पेशाब आने का अहसास या थोड़ी देर की ऐंठन हो सकती है; एंटीस्पाज्मोडिक दवा इससे आराम देती है। गतिविधि के साथ कुछ बूँद निकलना पहले महीनों में आम है। एक हफ्ते तक बॉवेल मूवमेंट अनियमित रह सकते हैं।
पोर्ट या चीरे के आसपास सूजन या नील सामान्य है।
तुरन्त ध्यान देने वाले लक्षण हैं: कैथेटर बैग या पेशाब में चमकीला लाल खून या बड़े थक्के, अड़तीस डिग्री से ऊपर बुखार, घाव की बढ़ती लाली, गर्माहट या मवाद, अचानक पिंडली में दर्द या सूजन, सांस फूलना या सीने में दर्द, और कैथेटर हटने के बाद पेशाब न आना। इनके लिए तुरन्त इमरजेंसी डिपार्टमेंट में जाएँ।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
कैथेटर ट्यूब मुड़ने न दें और बैग को ब्लैडर लेवल से नीचे रखें। रोज दो से तीन लीटर पानी पिएँ जब तक मना न किया जाए। पहले कुछ दिन दर्द की गोली टाइम पर लें, फिर जरूरत पड़ने पर।
पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज दिन में तीन बार करें। कोई अर्जेंट लक्षण दिखे तो अगली क्लिनिक विजिट का इंतजार न करें; तुरन्त जयपुर हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट जाएँ।
सवाल-जवाब
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी (रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी): सवाल और जवाब
जब आप हमसे संपर्क करते हैं
जयपुर में हमारी यूरोलॉजी टीम से सलाह लें
जयपुर हॉस्पिटल से संपर्क करें अपनी प्रोस्टेट रिपोर्ट पर चर्चा करने, इलाज के विकल्पों का मूल्यांकन करने और अपनी देखभाल की योजना बनाने के लिए।
- ओपीडी में यूरोलॉजिस्ट से परामर्श
- आपके स्कैन और रिपोर्ट की समीक्षा, ज़रूरत पड़ने पर इन-हाउस जांच (लैब, एक्स-रे और इमेजिंग)
- आपके विकल्प आसान शब्दों में समझाए जाएंगे, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या आपको सर्जरी की ज़रूरत है भी या नहीं
- फैसला लेने से पहले अनुमानित खर्च बताया जाएगा
- RGHS, मा योजना, CGHS और पैनल में शामिल बीमाकर्ताओं और TPAs के तहत कैशलेस इलाज में मदद
- आपके इलाज के बाद फॉलो-अप विज़िट
पूरी जानकारी
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी (रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी): ज़रूरी जानकारी
स्थानीयकृत प्रोस्टेट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी क्या है
- प्रोस्टेट ग्रंथि
- पुरुषों में मूत्राशय के नीचे छोटी ग्रंथि
- कैंसर की शुरुआत
- ग्रंथि के अंदर कोशिकाएं अनियंत्रित बढ़ती हैं
- स्थानीयकृत कैंसर
- ट्यूमर प्रोस्टेट या पास के ऊतक के अंदर रहता है
- सर्जरी का नाम
- रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी पूरी प्रोस्टेट और सेमिनल वेसिकल्स निकालती है
प्रोस्टेट एक छोटी ग्रंथि है जो केवल पुरुषों में पाई जाती है, मूत्राशय के ठीक नीचे स्थित होती है। प्रोस्टेट कैंसर तब शुरू होता है जब इस ग्रंथि के अंदर की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं।
जब कैंसर कोशिकाएं केवल प्रोस्टेट ग्रंथि के अंदर या उसके ठीक बगल के ऊतक में रहती हैं, तो डॉक्टर इसे स्थानीयकृत प्रोस्टेट कैंसर कहते हैं। इसका मतलब है कि ट्यूमर प्रोस्टेट के बाहर लिम्फ नोड्स या हड्डियों तक नहीं फैला है।
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी को प्रोस्टेटेक्टॉमी कहा जाता है, जो प्रोस्टेट ग्रंथि के कुछ हिस्से या पूरे हिस्से को सर्जरी द्वारा निकालने की प्रक्रिया है। स्थानीयकृत कैंसर के लिए, आपका सर्जन आमतौर पर रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी करता है। रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी पूरी प्रोस्टेट ग्रंथि को सेमिनल वेसिकल्स (वीर्य पुटिकाओं) के साथ निकालने की सर्जरी है।
कुछ मामलों में, आपका सर्जन आपकी पेल्विस (श्रोणि) के कुछ लिम्फ नोड्स को भी निकाल सकता है ताकि यह जांचा जा सके कि कैंसर कोशिकाएं फैल चुकी हैं या नहीं।
जयपुर हॉस्पिटल हमारे यूरोलॉजी विभाग के माध्यम से स्थानीयकृत प्रोस्टेट कैंसर के लिए मूल्यांकन और सर्जिकल देखभाल प्रदान करता है। जब आप हमारे ओपीडी में आते हैं, तो हमारी सर्जिकल टीम आपके कैंसर के चरण और ग्रेड का मूल्यांकन करके आपके लिए सही देखभाल योजना तय करती है।
प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण और तत्काल चेतावनी संकेत
- पेशाब न कर पाना मूत्राशय दर्दनाक रूप से भरा महसूस हो
- पेशाब में बहुत खून
- ठंड के साथ तेज बुखार
- अचानक असहनीय पेल्विक दर्द
शुरुआती स्थानीयकृत प्रोस्टेट कैंसर से पहले कोई स्पष्ट तकलीफ या लक्षण नहीं हो सकते। जैसे-जैसे ट्यूमर विकसित होता है, यह निचले मूत्र मार्ग के लक्षण पैदा कर सकता है।
आपको इस तरह की कठिनाइयां हो सकती हैं:
- पेशाब करने में परेशानी
- पेशाब की धार धीमी होना
- रात में बार-बार पेशाब जाने की जरूरत
कुछ पुरुषों को पेशाब अपने आप निकल जाने या इरेक्शन (लिंग का सख्त होना) पाने या बनाए रखने में परेशानी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ये मूत्र संबंधी और यौन परिवर्तन आपके रोजमर्रा के आराम को प्रभावित कर सकते हैं, और हमारी सर्जिकल टीम इनका मूल्यांकन हमारे ओपीडी में कर सकती है।
कुछ चेतावनी संकेतों के लिए उसी दिन तत्काल चिकित्सा ध्यान देने की जरूरत होती है। यदि आप बिल्कुल पेशाब नहीं कर पा रहे हैं और आपका मूत्राशय दर्दनाक रूप से भरा हुआ महसूस होता है, तो आपको तुरंत चिकित्सा देखभाल लेनी चाहिए।
यदि आपको पेशाब में बहुत खून दिखे, तेज बुखार ठंड लगने के साथ आए, या अचानक असहनीय पेल्विक (श्रोणि) दर्द हो, तो भी आपको तत्काल देखभाल लेनी चाहिए। जयपुर हॉस्पिटल 24×7 इमरजेंसी विभाग चलाता है जिसमें प्रयोगशाला और इमेजिंग सहायता उपलब्ध है, ताकि तीव्र मूत्र रुकावट और संबंधित जटिलताओं को संभाला जा सके।
प्रोस्टेट कैंसर के कारण और किन्हें अधिक खतरा है
- उम्र
- निदान होने वाले अधिकांश पुरुष 75 वर्ष से कम; उम्र के साथ खतरा बढ़ता है
- स्वास्थ्य माप
- बीएमआई, कॉमोरबिडिटी इंडेक्स, मूत्र लक्षण, प्रोस्टेट वॉल्यूम
- ट्यूमर जोखिम स्तर
- इंटरमीडिएट-रिस्क या हाई-रिस्क इलाज के विकल्प तय करते हैं
प्रोस्टेट कैंसर तब विकसित होता है जब सामान्य ग्रंथि कोशिकाओं में आनुवंशिक परिवर्तन होते हैं जो उन्हें असामान्य रूप से विभाजित होने का कारण बनते हैं। हालांकि हर रोगी के लिए सटीक ट्रिगर हमेशा ज्ञात नहीं होता, शोधकर्ताओं ने कई महत्वपूर्ण जोखिम कारकों की पहचान की है जो प्रोस्टेट ट्यूमर के विकास और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
आपकी उम्र एक महत्वपूर्ण कारक है। 50 से 69 वर्ष की आयु के पुरुषों का प्रोस्टेट परिवर्तनों के लिए अक्सर मूल्यांकन किया जाता है, और स्थानीयकृत कैंसर का निदान होने वाले अधिकांश पुरुष 75 वर्ष से कम आयु के होते हैं। जैसे-जैसे पुरुष बड़े होते हैं, प्रोस्टेट स्थितियों के विकसित होने का खतरा बढ़ता जाता है।
अन्य व्यक्तिगत स्वास्थ्य विशेषताएं भी भूमिका निभाती हैं। नैदानिक अध्ययनों में, बॉडी मास इंडेक्स, कॉमोरबिडिटी इंडेक्स, मौजूदा निचले मूत्र मार्ग के लक्षण, और कुल प्रोस्टेट वॉल्यूम जैसे कारक डॉक्टरों द्वारा जांचे जाने वाले महत्वपूर्ण माप हैं।
ट्यूमर का जोखिम स्तर, जिसमें यह शामिल है कि क्या इसे इंटरमीडिएट-रिस्क या हाई-रिस्क के रूप में वर्गीकृत किया गया है, यह भी डॉक्टरों को यह समझने में मदद करता है कि कैंसर कैसे व्यवहार कर सकता है।
प्रोस्टेट कैंसर का निदान कैसे होता है: जांच और टेस्ट
स्थानीयकृत प्रोस्टेट कैंसर का निदान करने में क्लिनिकल जांच और विशेष डायग्नोस्टिक टेस्ट शामिल हैं। जब आप हमारे ओपीडी में आते हैं, तो आपका सर्जन आपके लक्षणों पर चर्चा करेगा, विस्तृत चिकित्सा इतिहास लेगा, और शारीरिक जांच करेगा।
प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग और मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल होने वाला एक सामान्य खून का टेस्ट प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (PSA) ब्लड टेस्ट है। नैदानिक परीक्षणों में, 10 ng प्रति मिलीलीटर से अधिक PSA वैल्यू वाले पुरुषों में बीमारी के जोखिम के विशिष्ट पैटर्न दिखे। डॉक्टर PSA लेवल को अन्य निष्कर्षों के साथ जांचकर ट्यूमर की गतिविधि का आकलन करते हैं।
डायग्नोस्टिक पुष्टि के लिए प्रोस्टेट बायोप्सी की आवश्यकता होती है, जहां प्रोस्टेट से छोटे ऊतक नमूने लेकर माइक्रोस्कोप के नीचे जांचे जाते हैं। यह जांच ट्यूमर की हिस्टोलॉजिक विशेषताओं की पहचान करती है और कैंसर को एक जोखिम ग्रेड देती है।
इसके अलावा, पेल्विक MRI या अल्ट्रासाउंड जैसे इमेजिंग स्कैन प्रोस्टेट ग्रंथि का निरीक्षण करने, प्रोस्टेट वॉल्यूम का आकलन करने, और यह पुष्टि करने के लिए किए जा सकते हैं कि कैंसर क्लिनिकली स्थानीयकृत है या नहीं। जयपुर हॉस्पिटल इन मूल्यांकनों में सहायता के लिए एक इन-हाउस डायग्नोस्टिक प्रयोगशाला और इमेजिंग सेवाएं रखता है।
सर्जरी के बिना इलाज के विकल्प और प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी कब सुझाई जाती है
स्थानीयकृत प्रोस्टेट कैंसर वाले हर रोगी को तत्काल सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। क्योंकि स्थानीयकृत ट्यूमर अक्सर धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जिन रोगियों को सर्जरी की आवश्यकता होती है उन्हें हमेशा तुरंत प्रोस्टेटेक्टॉमी कराने की जरूरत नहीं होती; वे देखभाल के विकल्पों पर चर्चा करते हुए आमतौर पर एक या दो महीने की देरी कर सकते हैं।
गैर-सर्जिकल विकल्पों में सक्रिय निगरानी, अवलोकन, या वॉचफुल वेटिंग शामिल हैं, जहां डॉक्टर तत्काल हस्तक्षेप के बिना समय के साथ ट्यूमर को बारीकी से ट्रैक करते हैं। नैदानिक परीक्षणों में, वॉचफुल वेटिंग के तहत लंबे समय तक जीवित रहने वाले रोगियों के एक बड़े अनुपात को किसी पैलिएटिव उपचार की आवश्यकता नहीं पड़ी।
सर्जरी का एक अन्य प्राथमिक विकल्प रेडियोथेरेपी है, जो कैंसर कोशिकाओं के इलाज के लिए लक्षित विकिरण का उपयोग करती है। उदाहरण के लिए, हाइपोफ्रैक्शनेटेड रेडियोथेरेपी मानक रेडियोथेरेपी की तुलना में कम समय में प्रति उपचार बड़ी खुराक देकर दी जाती है और इसे इंटरमीडिएट-रिस्क प्रोस्टेट कैंसर के लिए माना जा सकता है।
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी आमतौर पर तब सुझाई जाती है जब ट्यूमर अभी तक प्रोस्टेट के बाहर लिम्फ नोड्स या हड्डियों तक नहीं फैला है, लेकिन उसके तेजी से बढ़ने और फैलने की संभावना है।
सर्जरी की सिफारिश आमतौर पर इंटरमीडिएट-रिस्क या हाई-रिस्क स्थानीयकृत ट्यूमर के लिए, या अन्यथा स्वस्थ 75 वर्ष से कम उम्र के रोगियों के लिए भी की जाती है। बड़े परीक्षणों में, रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी, सक्रिय निगरानी की तुलना में बीमारी की प्रगति और दूर के मेटास्टेसिस की कम घटनाओं से जुड़ी थी।
सर्जरी का उपयोग कभी-कभी अन्य उपचारों के साथ भी किया जा सकता है, जैसे उच्च जोखिम वाले मामलों के लिए पोस्टऑपरेटिव रेडियोथेरेपी। जयपुर हॉस्पिटल में आपका सर्जन आपके स्वास्थ्य और कैंसर के चरण के अनुकूल दृष्टिकोण चुनने के लिए आपके साथ सभी देखभाल विकल्पों पर चर्चा करेगा।
जयपुर हॉस्पिटल में प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी की तैयारी
करें
- पूरा चिकित्सा इतिहास साझा करें
- स्पर्म बैंकिंग के बारे में पूछें
- नियमित टेस्ट पूरे करें
- उपवास के निर्देशों का पालन करें
- दस्तावेज साथ लाएं
- एक वयस्क परिचारक साथ लाएं
आपकी प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी से पहले, हमारी सर्जिकल टीम आपकी सामान्य फिटनेस और नियोजित प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। आप अपने प्री-ऑपरेटिव मूल्यांकन के लिए ओपीडी में अपने सर्जन से मिलेंगे। रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी आमतौर पर अन्यथा स्वस्थ उन रोगियों पर की जाती है जिनकी उम्र 75 वर्ष से कम है और जिन्हें स्थानीयकृत कैंसर है जो फैला नहीं है।
सर्जरी एक सामान्य उपचार है जब ट्यूमर प्रोस्टेट के बाहर लिम्फ नोड्स या हड्डियों तक नहीं फैला हो। यह उन ट्यूमर के लिए भी सुझाई जाती है जिनके तेजी से बढ़ने और फैलने की संभावना होती है।
यदि आपको सर्जरी की आवश्यकता है, तो आमतौर पर आपको इसे तुरंत कराने की जरूरत नहीं होती; कई स्थितियों में, रोगी योजना बनाते समय एक या दो महीने की देरी कर सकते हैं।
अपनी ओपीडी विजिट के दौरान, अपना पूरा चिकित्सा इतिहास अपने सर्जन के साथ साझा करें। यदि आप प्रोस्टेट निकालने के बाद प्रजनन क्षमता खोने को लेकर चिंतित हैं, तो अपने ऑपरेशन से पहले स्पर्म बैंकिंग के बारे में अपने डॉक्टर से पूछें।
सर्जरी प्रोस्टेट को निकाल देती है और अंडकोष और मूत्रमार्ग के बीच का रास्ता काट देती है, इसलिए शुक्राणु आपके शरीर से बाहर नहीं निकल सकते। जब तक आप पहले से स्पर्म स्टोर न कर लें, सर्जरी के बाद आप अपने शुक्राणुओं से बच्चे पैदा नहीं कर पाएंगे।
ऑपरेशन के दिन से पहले, आप हमारी इन-हाउस डायग्नोस्टिक प्रयोगशाला और इमेजिंग सेवाओं के माध्यम से नियमित प्रयोगशाला खून की जांच, ईसीजी, और इमेजिंग पूरी करेंगे। हमारे एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर विभाग की एनेस्थीसिया टीम जनरल एनेस्थीसिया के लिए आपकी फिटनेस का आकलन करेगी। ऑपरेशन से पहले उपवास के बारे में अपनी देखभाल टीम के निर्देशों का पालन करें।
साथ लाएं:
- सरकारी फोटो पहचान पत्र
- पिछली स्कैन रिपोर्ट
- टेस्ट परिणाम
- बीमा दस्तावेज
- नियमित प्रिस्क्रिप्शन पर्ची
एक वयस्क परिचारक को आपके साथ अस्पताल में रहने के लिए आना चाहिए।
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी (रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी) कैसे की जाती है
ओपन रेट्रोप्यूबिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी
- ओपन रेट्रोप्यूबिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी
लेप्रोस्कोपिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी
- लेप्रोस्कोपिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी
रोबोट-असिस्टेड लेप्रोस्कोपिक प्रोस्टेटेक्टोमी
- रोबोट-असिस्टेड लेप्रोस्कोपिक प्रोस्टेटेक्टोमी
पेरिनियल रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी
- पेरिनियल रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी, या रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी, एक ऑपरेशन है जिसमें पूरे प्रोस्टेट ग्लैंड और सीमिनल वेसिकल्स को निकाला जाता है। यह ऑपरेशन आमतौर पर जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) में 2 से 4 घंटे लेता है।
प्रक्रिया के दौरान, आपका सर्जन पेल्विक लिम्फ नोड्स में से कुछ को भी निकाल सकता है ताकि पता लगाया जा सके कि कैंसर सेल्स प्रोस्टेट से आगे फैले हैं या नहीं। आपके ऑपरेशन के दिन, हमारी टीम आपको तैयार करेगी और हमारे मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर में ले जाएगी।
रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी के लिए कई सामान्य सर्जिकल तकनीकें हैं। आपका सर्जन सलाह देगा कि आपके लिए कौन सा तरीका सही है:
- ओपन रेट्रोप्यूबिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी: एक पारंपरिक सर्जिकल तरीका जिसमें सर्जन प्रोस्टेट को पेट के निचले हिस्से में एक चीरे के जरिए निकालता है। ओपन सर्जरी पूरे देश में आम है और आसानी से उपलब्ध है। यह अक्सर उस कैंसर के इलाज के लिए बेहतर होता है जो स्थानीय स्तर पर फैला हो या हाई रिस्क वाला हो।
- लेप्रोस्कोपिक रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी: एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक जिसमें सर्जन छोटे कीहोल पोर्ट्स और छोटे सर्जिकल उपकरणों का उपयोग करके ऑपरेशन करता है। इस तरीके में छोटे कट लगते हैं, कम निशान पड़ते हैं और कम दर्द होता है।
- रोबोट-असिस्टेड लेप्रोस्कोपिक प्रोस्टेटेक्टोमी: एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया जिसमें सर्जन पेट के निचले हिस्से में कई छोटे कट लगाता है और बेहतर सटीकता के लिए एक रोबोटिक कंसोल का उपयोग करता है। यह तरीका नर्व स्पेयरिंग और फंक्शनल परिणामों को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- पेरिनियल रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी: एक कम प्रचलित सर्जिकल तरीका जिसमें चीरा अंडकोश और गुदा के बीच की त्वचा पर लगाया जाता है।
अध्ययनों में, जिन मरीजों की ओपन सर्जरी या मिनिमली इनवेसिव सर्जरी हुई, उनमें लंबे समय तक कैंसर कंट्रोल समान पाया गया। मिनिमली इनवेसिव तरीकों में कट छोटे होते हैं और निशान कम पड़ते हैं। एडवांस्ड रोबोटिक उपकरण केवल चुनिंदा केंद्रों पर उपलब्ध हैं।
आपका सर्जन आपकी स्थिति पर चर्चा करेगा और आपके ट्यूमर रिस्क और स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार सही तरीका चुनने में मदद करेगा।
प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी के जोखिम और संभावित जटिलताएं
- 21.4% 30-दिन की प्रतिकूल घटनाएं
- एक मृत्यु 30-दिन की मृत्यु दर
कई बड़े ऑपरेशन की तरह, प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी में सामान्य जोखिम होते हैं जैसे जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) का रिएक्शन, खून के थक्के, या ब्लीडिंग। अध्ययनों में, जटिलताएं तब होने की संभावना बहुत कम होती है जब प्रक्रिया एक अनुभवी सर्जन द्वारा की जाती है जो बड़ी संख्या में प्रोस्टेटेक्टोमी करते हैं।
एक अध्ययन में, सर्जरी कराने वाले मरीजों में ऑपरेशन के 30 दिनों के भीतर प्रतिकूल घटनाएं 21.4% पुरुषों में हुईं। उसी अध्ययन समूह में, सर्जरी के 30 दिनों के भीतर एक मृत्यु हुई।
रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी के बाद विशिष्ट दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ऑपरेशन प्रोस्टेट के पास की उन नाजुक नसों को प्रभावित करता है जो लिंग में रक्त प्रवाह को नियंत्रित करती हैं। इस नर्व डिस्टर्बेंस के कारण, इरेक्टाइल डिसफंक्शन, जिसे ED या नपुंसकता भी कहते हैं, एक ज्ञात दुष्प्रभाव है। इसका मतलब है इरेक्शन पाने या बनाए रखने में कठिनाई।
अध्ययनों में, इरेक्टाइल डिसफंक्शन का जोखिम बढ़ती उम्र के साथ बढ़ता है। नर्व-स्पेयरिंग सर्जिकल तकनीकें इरेक्टाइल डिसफंक्शन की संभावना को कम कर सकती हैं। इसके अलावा, प्रोस्टेट निकालने की सर्जरी के कारण बांझपन होता है, यानी पूर्व योजना के बिना आप अपने स्पर्म से जैविक बच्चे पैदा नहीं कर सकते।
यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस, यानी पेशाब का अनजाने में रिसाव, एक और दुष्प्रभाव है। कई पुरुष स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस का अनुभव करते हैं, जिसमें खांसी, छींक, हंसी या व्यायाम करते समय ब्लैडर पर दबाव पड़ने से पेशाब की कुछ बूंदें निकल जाती हैं।
रोबोट-असिस्टेड सर्जरी के प्रकाशित अध्ययनों में, 12 महीनों में यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस की दर 4% से 31% तक रही (जब इसे बिना पैड के परिभाषित किया गया), जिसका औसत 16% था। जब इसे बिना पैड या सिंगल सेफ्टी पैड के रूप में परिभाषित किया गया, तो 8% से 11% पुरुषों में रिसाव हुआ, जिसका औसत 9% था।
बढ़ती उम्र, बॉडी मास इंडेक्स, पहले से मौजूद यूरिनरी लक्षण, और प्रोस्टेट का आकार जैसे कारक सर्जरी के बाद पेशाब रिसाव की संभावना को प्रभावित करते हैं।
एक दुर्लभ जटिलता लिम्फोएडिमा है, जिसमें पैरों में तरल पदार्थ की सूजन आ जाती है, यह तब हो सकता है जब पेल्विक लिम्फ नोड्स निकाले जाएं। जब लिम्फोएडिमा होता है, तो इसे फिजियोथेरेपी से प्रबंधित किया जा सकता है।
जब सर्जरी पिछली रेडिएशन थेरेपी के बाद की जाती है, जिसे साल्वेज प्रोस्टेटेक्टोमी कहते हैं, तो दुष्प्रभावों का जोखिम अधिक होता है। इनमें पेशाब का रुकना या मलाशय जैसे आस-पास के अंगों को दुर्लभ चोट शामिल हो सकती है।
रिकवरी और देखभाल: पहले दिन और हफ्ते
- अस्पताल में रहना आमतौर पर 2 से 4 रातें; मिनिमली इनवेसिव के लिए 1 से 2 दिन
- कैथेटर हटाना आमतौर पर सर्जरी के 1 से 2 सप्ताह बाद
- डेस्क वर्क लगभग 2 सप्ताह में फिर से शुरू करें
- सामान्य दैनिक गतिविधि 4 से 6 सप्ताह में वापसी
- पूरी रिकवरी ज्यादातर पुरुष 6 से 12 सप्ताह में पूरी तरह ठीक महसूस करते हैं
- ब्लैडर कंट्रोल अक्सर कुछ महीनों में लौट आता है; कई 12 महीनों तक पहले जैसे हो जाते हैं
सर्जरी के बाद, आपको हमारे रिकवरी एरिया या इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में निगरानी में रखा जाएगा, फिर आपके कमरे में शिफ्ट किया जाएगा। आपका अस्पताल में रहना आमतौर पर 2 से 4 रातों का होता है। मिनिमली इनवेसिव सर्जरी कराने वाले कई मरीज जल्दी चलना शुरू कर सकते हैं और 1 से 2 दिनों में घर जा सकते हैं।
आपके ब्लैडर को खाली करने के लिए एक यूरिनरी कैथेटर ट्यूब लगी होगी, जब तक अंदरूनी सर्जिकल एरिया ठीक नहीं हो जाता। कैथेटर आमतौर पर 1 से 2 सप्ताह तक लगा रहता है।
आपका अटेंडेंट आपके ठहरने के दौरान बुनियादी जरूरतों में मदद करेगा। हमारी नर्सिंग टीम और डॉक्टर आपको दिखाएंगे कि कैथेटर ट्यूब को कैसे साफ रखें और घर पर ड्रेनेज बैग को कैसे संभालें। केमिस्ट से दी गई सभी दवाएं निर्देशानुसार लें। आप लगभग 2 सप्ताह में डेस्क वर्क फिर से शुरू कर सकते हैं।
मरीज आमतौर पर 4 से 6 सप्ताह में सामान्य दैनिक गतिविधि पर लौट आते हैं। ज्यादातर पुरुष अपने ऑपरेशन के 6 से 12 सप्ताह के भीतर पूरी तरह ठीक महसूस करते हैं।
ब्लैडर कंट्रोल धीरे-धीरे सुधरता है। कुछ पुरुषों को हल्का स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस होता है जिसे ठीक होने में समय लगता है, लेकिन सामान्य पेशाब अक्सर कुछ महीनों में लौट आता है, और कई पुरुष 12 महीनों में सर्जरी से पहले की तरह पेशाब करने लगते हैं।
इरेक्शन को ठीक होने में अधिक समय लगता है क्योंकि आस-पास की नसों को ठीक होने के लिए समय चाहिए। संभोग के लिए पर्याप्त इरेक्शन आने में हफ्ते, महीने, या सर्जरी के बाद 3 साल तक लग सकते हैं, और शुरुआती हफ्तों में दवाएं काम नहीं कर सकतीं।
अगर आपको तेज बुखार, अचानक पेशाब न आना, कैथेटर के आसपास पेशाब का रिसाव, पैरों में सूजन, सीने में दर्द, सांस फूलना, या घाव से भारी ब्लीडिंग हो, तो तुरंत हमारे 24x7 इमरजेंसी विभाग को कॉल करें या अस्पताल आएं।
परिणाम: प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी कितनी अच्छी तरह काम करती है
रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी का उद्देश्य पूरे कैंसर को निकालना है जब वह प्रोस्टेट या आस-पास के ऊतक तक सीमित हो। 23.2 साल के फॉलो-अप वाले एक लंबे क्लिनिकल ट्रायल में, सर्जरी ग्रुप के 347 में से 200 पुरुषों की मृत्यु हुई, जबकि वॉचफुल-वेटिंग ग्रुप के 348 में से 247 पुरुषों की मृत्यु हुई।
सर्जरी ग्रुप में प्रोस्टेट कैंसर से 63 मौतें हुईं और वॉचफुल-वेटिंग ग्रुप में 99, जिससे रिलेटिव रिस्क 0.56 रहा। उस ट्रायल में, प्रोस्टेट कैंसर से एक मौत को रोकने के लिए सर्जरी से इलाज किए जाने वाले मरीजों की संख्या 8 थी। प्रोस्टेट कैंसर से मौतों में कमी 65 साल से कम उम्र के पुरुषों में सबसे अधिक थी।
10 साल के मीडियन फॉलो-अप वाले एक अन्य क्लिनिकल अध्ययन में, रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी दिए गए 364 में से 171 पुरुषों की किसी भी कारण से मृत्यु हुई, जबकि ऑब्जर्वेशन ग्रुप के 367 में से 183 पुरुषों की मृत्यु हुई।
उस अध्ययन में, सर्जरी ग्रुप में 21 पुरुष (5.8%) प्रोस्टेट कैंसर या इलाज से मरे, जबकि ऑब्जर्वेशन ग्रुप में 31 पुरुष (8.4%)। 10 ng प्रति मिलीलीटर से अधिक PSA वैल्यू वाले पुरुषों में सर्जरी समग्र मृत्यु दर में कमी से जुड़ी थी।
एक्टिव मॉनिटरिंग की तुलना में सर्जरी और रेडियोथेरेपी दोनों ही कैंसर की प्रगति और हड्डियों या अन्य अंगों में फैलाव की कम दरों से जुड़ी थीं।
स्थानीय हाई-रिस्क विशेषताओं या सर्जिकल किनारों के पास कैंसर सेल्स वाले कुछ पुरुषों के लिए, सर्जरी के बाद अतिरिक्त रेडियोथेरेपी की सिफारिश की जा सकती है।
10.6 साल के मीडियन फॉलो-अप वाले एक क्लिनिकल ट्रायल में, सर्जरी के बाद रेडियोथेरेपी देने से स्थानीय कैंसर कंट्रोल में उल्लेखनीय सुधार हुआ और PSA रिकरेंस (दोबारा होना) में देरी हुई, इंतजार करने की तुलना में।
जिन मामलों में पहले की रेडिएशन थेरेपी के बाद कैंसर लौट आता है, वहां साल्वेज रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी 10 साल या उससे अधिक समय तक बीमारी को नियंत्रित कर सकती है।
जयपुर में प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी का खर्च और बीमा
भारत में प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी की सामान्य कीमत ₹1,50,000 से ₹4,00,000 तक होती है। कृपया अपनी विशिष्ट स्थिति और देखभाल योजना के आधार पर हमसे अनुमानित खर्च पूछें। भारतीय अस्पतालों में, ओपन प्रोस्टेटेक्टोमी का खर्च आमतौर पर ₹1,60,000 से ₹2,00,000 के बीच होता है। लेप्रोस्कोपिक प्रोस्टेटेक्टोमी का खर्च आमतौर पर ₹2,30,000 से ₹3,00,000 के बीच होता है। रोबोटिक प्रोस्टेटेक्टोमी का खर्च आमतौर पर ₹3,70,000 से ₹5,00,000 के बीच होता है।
कुल खर्च कई कारकों के आधार पर अलग होता है। इनमें आपके सर्जन द्वारा चुनी गई सर्जिकल तकनीक, आपकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति, अस्पताल में बिताई गई रातों की संख्या, और आपके कमरे की श्रेणी शामिल हैं। अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां प्रोस्टेट सर्जरी के लिए अस्पताल में रहने और सर्जिकल शुल्क को कवर करती हैं।
हालांकि, पॉलिसी की शर्तें जैसे कमरे के किराए की सीमा, प्राइवेट या डीलक्स कमरों के कवरेज को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा, कुछ पॉलिसी में रोबोटिक प्रक्रियाओं के लिए विशिष्ट शर्तें या बहिष्करण हो सकते हैं।
जयपुर हॉस्पिटल में मेन टोंक रोड पर स्थित एक एनएबीएच मान्यता प्राप्त अस्पताल है। हम RGHS, मा योजना, और CGHS जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को स्वीकार करते हैं। हम कैशलेस क्लेम के लिए प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों और थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर्स (टीपीए) के एक पैनल के साथ भी काम करते हैं।
अस्पताल में हमारी बिलिंग और इंश्योरेंस स्टाफ भर्ती से पहले क्लेम प्री-ऑथराइजेशन और कागजी कार्रवाई में आपकी और आपके अटेंडेंट की सहायता करेगी।