फेफड़ा रोग (पल्मोनोलॉजी) · जयपुर हॉस्पिटल
जयपुर में पल्मोनरी वैस्कुलर रोग देखभाल (पल्मोनरी वैस्कुलर डिजीज केयर)
जब सांस फूलना या सीने में बेचैनी आपका दिन मुश्किल कर दे, तो हमारी टीम मूल्यांकन, स्कैन और एक व्यवस्थित मेडिकल प्लान देती है।
- 1991 से जयपुर की सेवा में (35 साल)
- एनएबीएच मान्यता प्राप्त
- 24×7 इमरजेंसी और आईसीयू
- कैशलेस: RGHS, मा योजना, CGHS + 22 बीमा कंपनियाँ
- इलाज की अवधि
- एक्यूट PE: 5 से 10 दिन एंटीकोगुलेशनPH: आजीवन मेडिकल थेरेपी
- एनेस्थीसिया (बेहोशी)
- जरूरत नहीं (मेडिकल)जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) (CTEPH के लिए PTE सर्जरी)
- रिकवरी (ठीक होना)
- एक्यूट PE: 3 से 6 महीने एंटीकोगुलेशनPH: क्रोनिक मैनेजमेंट · PTE सर्जरी: 8 से 12 हफ्ते
- कीमत
- ₹50,000 से ₹3,00,000 (एक्यूट)₹20,00,000+ (रेफरल सेंटर पर PTE सर्जरी)भारत में आम रेंज; हमसे अनुमानित खर्च पूछें
सांस लेने में तकलीफ
आपको सांस फूलती है और थकान रहती है, पर जवाब साफ नहीं मिलते
अचानक या लंबे समय से चली आ रही सांस की तकलीफ रोज के काम मुश्किल कर देती है। आप सोचते होंगे कि लक्षण दिल से हैं, फेफड़ों से, या खून के थक्के से, और समझ नहीं आता कि अगला कदम क्या हो।
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बिना कारण सांस फूलना
आसान काम करते हुए सांस फूल सकती है, भले ही आराम के टेस्ट नॉर्मल दिखें।
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लगातार सीने में दर्द
सीने में बेचैनी या भारीपन कभी-कभी मांसपेशियों का खिंचाव समझ लिया जाता है, जबकि वह वैस्कुलर स्ट्रेन होता है।
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थक्के के बाद थकान
डीप वेन क्लॉट या एक्यूट पल्मोनरी घटना के महीनों बाद भी सांस फूलती रह सकती है।
बिना कारण डिस्प्निया (सांस फूलना) की शिकायत को एंग्जायटी या हाइपरवेंटिलेशन मानकर नजरअंदाज करना मैनेजमेंट में एक आम गलती है।
जयपुर हॉस्पिटल क्यों
आपको अचानक अस्पताल के खर्च, काम छूटने, या साफ डायग्नोसिस न मिलने की चिंता हो सकती है, जब सांस लेना ही मुश्किल हो।
आपके इलाज का प्लान
हमारे साथ आपके पहले कदम
- 1 हमारे OPD में पल्मोनोलॉजी मूल्यांकन के लिए आएं।
- 2 इन-हाउस खून की जाँच, इमेजिंग या हार्ट असेसमेंट पूरे करें।
- 3 अपने फिजिशियन से मेडिकल विकल्पों पर चर्चा करें।
- 4 अपना निर्धारित मेडिकल प्लान मानें और रिव्यू का समय तय करें।
पल्मोनरी वैस्कुलर कंडीशन का मूल्यांकन कैसे होता है
आपका फिजिशियन आपकी क्लिनिकल हिस्ट्री देखेगा, क्लॉट के जोखिम आंकेगा, और टार्गेटेड इमेजिंग या हेमोडायनामिक मूल्यांकन करेगा, ताकि सही मेडिकल या प्रोसीजरल अप्रोच तय हो सके।
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CT पल्मोनरी एंजियोग्राफी (CTPA)
यह इमेजिंग विकल्प पल्मोनरी आर्टरी का विस्तृत दृश्य देता है ताकि एक्यूट क्लॉट देखे जा सकें, जैसा आपका फिजिशियन बताएगा।
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राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन (RHC)
यह प्रोसीजर दिल और पल्मोनरी आर्टरी के अंदर के प्रेशर को सीधे मापता है, एक विकल्प जिस पर आपका फिजिशियन चर्चा करेगा।
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एंटीकोगुलेशन / थ्रोम्बोलिसिस
खून पतला करने वाली दवाएं या क्लॉट घोलने वाली थेरेपी मेडिकल विकल्प हैं, जिन पर आपका फिजिशियन क्लिनिकल स्थिरता के आधार पर चर्चा करेगा।
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पल्मोनरी वैसोडायलेटर थेरेपी
टार्गेटेड दवाएं पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन में सिकुड़ी पल्मोनरी वेसल को आराम देती हैं, जिस पर आपका फिजिशियन चर्चा करेगा।
मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं
- 1991 35 साल से जयपुर की सेवा में
- एनएबीएच मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल
- 1 फेफड़ा रोग (पल्मोनोलॉजी) कंसल्टेंट
- 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू और एम्बुलेंस
- 25 कैशलेस योजनाएँ और बीमा कंपनियाँ
वैस्कुलर केयर में क्लिनिकल नतीजे
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1.1%
4832 एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म मरीजों के एक अध्ययन में, रिवेरोक्साबान लेने वाले 1.1% मरीजों में मेजर ब्लीडिंग हुई।
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3.3%
राइट वेंट्रिकुलर डिसफंक्शन वाले सबग्रुप के एक ट्रायल में, एडोक्साबान के साथ रिकरेंट वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म की दर 3.3% थी।
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20% से 24%
स्ट्रक्चर्ड क्लिनिकल एल्गोरिदम लागू करने से फॉलो-अप इकोकार्डियोग्राफी जांच की जरूरत टेस्ट किए गए मरीजों के 20% से 24% तक कम हो गई।
अगर इलाज न कराया जाए
पल्मोनरी वैस्कुलर कंडीशन को नजरअंदाज करने से राइट हार्ट पर बढ़ता दबाव, लगातार एक्सरसाइज लिमिटेशन, या बार-बार खून के थक्के हो सकते हैं। संदिग्ध पल्मोनरी एम्बोलिज्म में समय पर डायग्नोस्टिक वर्कअप या सही एंटीकोगुलेशन शुरू न करने से गंभीर क्लिनिकल जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) हो सकती है।
मैनेज्ड केयर के साथ जीवन
स्ट्रक्चर्ड मेडिकल थेरेपी और नियमित रिव्यू से ज्यादातर मरीजों को रोज के कदम साफ दिखते हैं और एक तय मैनेजमेंट रूटीन मिलता है।
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व्यवस्थित दवा रूटीन
ज्यादातर लोग अपने लोकल केमिस्ट से ओरल एंटीकोगुलेशन या वैसोडायलेटर थेरेपी का व्यवस्थित शेड्यूल बना लेते हैं।
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साफ एक्टिविटी पेसिंग
मरीज आमतौर पर मेडिकल सलाह और फॉलो-अप गाइडेंस के मुताबिक रोज का काम और चलना प्लान करते हैं।
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नियमित OPD मॉनिटरिंग
नियमित विजिट से आपके अटेंडेंट और फिजिशियन को स्कैन, रिपोर्ट देखने और मेडिकल प्लान एडजस्ट करने का मौका मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग देखभाल (पल्मोनरी वैस्कुलर डिजीज केयर) के बारे में मरीज़ों के सवाल
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग देखभाल (पल्मोनरी वैस्कुलर डिजीज केयर) में किन समस्याओं की जाँच होती है?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में पल्मोनरी वैस्कुलर रोग देखभाल (पल्मोनरी वैस्कुलर डिजीज केयर) में एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म, पल्मोनरी हाइपरटेंशन और क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन शामिल हैं। ये स्थितियाँ फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती हैं और साँस फूलना, सीने में बेचैनी और व्यायाम क्षमता कम होने का कारण बन सकती हैं।
विस्तार से
एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म फेफड़े की धमनी में अचानक रुकावट है, जो आमतौर पर पैरों से आए खून के थक्के के कारण होती है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन का मतलब है फेफड़े की धमनियों में दबाव सामान्य से अधिक होना, जिससे दिल का दायाँ हिस्सा अधिक मेहनत करता है।
क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन तब विकसित होता है जब पुराने थक्के नहीं घुलते और निशान ऊतक छोड़ देते हैं जो धमनियों को संकरा कर देते हैं।
राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लिए निश्चित हीमोडायनामिक निदान देता है, जबकि सीटी पल्मोनरी एंजियोग्राफी एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लिए मुख्य इमेजिंग टेस्ट है।
हॉस्पिटल अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण का पालन करता है जो इन बीमारियों को साझा पैथोलॉजी और उपचार दृष्टिकोण के आधार पर समूहित करता है।
एक आम धारणा
लोग अक्सर सोचते हैं कि साँस फूलना केवल फेफड़े या दिल की समस्या है।
असल में क्या होता है
वास्तव में, फेफड़े की रक्त वाहिकाएँ स्वयं बीमारी की प्राथमिक जगह हो सकती हैं, जिन्हें कन्फर्म करने के लिए राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन जैसे विशिष्ट टेस्ट चाहिए।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अगर आपको इनमें से किसी स्थिति का निदान हुआ है या लगातार अस्पष्ट साँस फूलना रहता है, तो आप हमारे पल्मोनोलॉजी टीम से परामर्श बुक कर सकते हैं। पिछली इमेजिंग, खून की जाँच के नतीजे और वर्तमान दवाओं की सूची साथ लाएँ। डॉक्टर आपका इतिहास देखेंगे, तय करेंगे कि कौन से टेस्ट चाहिए और एक प्रबंधन योजना पर चर्चा करेंगे।
डॉक्टर कैसे तय करेंगे कि मुझे कौन से टेस्ट चाहिए?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल के डॉक्टर आपके लक्षणों, क्लिनिकल जांच के नतीजों, जोखिम कारकों और संदिग्ध डायग्नोसिस के आधार पर टेस्ट तय करते हैं। तरीका चरणबद्ध है: पहले क्लिनिकल असेसमेंट, फिर नॉन-इनवेसिव टेस्ट, और जरूरत हो तो इनवेसिव कन्फर्मेशन।
विस्तार से
अगर एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म का शक हो, तो डॉक्टर वेल्स या सिम्प्लिफाइड PESI जैसे क्लिनिकल प्रोबेबिलिटी स्कोर इस्तेमाल करते हैं, फिर D-डाइमर और CT पल्मोनरी एंजियोग्राफी।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लिए, इकोकार्डियोग्राफी शुरुआती स्क्रीनिंग टेस्ट है जिससे पल्मोनरी आर्टरी प्रेशर का अंदाजा लगता है और राइट हार्ट फंक्शन देखा जाता है।
अगर इकोकार्डियोग्राफी में पल्मोनरी हाइपरटेंशन की इंटरमीडिएट या हाई प्रोबेबिलिटी दिखे, तो डेफिनिटिव हीमोडायनामिक डायग्नोसिस के लिए राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन की सलाह दी जाती है।
क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लिए, गाइडलाइन परफ्यूजन इमेजिंग जैसे VQ SPECT, डुअल-एनर्जी CT या MR परफ्यूजन मैपिंग की सलाह देती हैं, इकोकार्डियोग्राफी के साथ।
InShape एल्गोरिदम इंडेक्स पल्मोनरी एम्बोलिज्म की CTPA रीडिंग, ECG और NT-proBNP का इस्तेमाल करके तय करते हैं कि किसे इकोकार्डियोग्राफिक स्क्रीनिंग चाहिए। डॉक्टर कंट्रास्ट स्टडी या इनवेसिव टेस्ट लिखने से पहले आपके ब्लीडिंग रिस्क, किडनी फंक्शन और कॉमॉर्बिडिटी भी देखते हैं।
एक आम धारणा
मरीज कभी-कभी एक साथ सारे टेस्ट मांगते हैं।
असल में क्या होता है
गाइडलाइन दिखाती हैं कि स्ट्रक्चर्ड प्रक्रिया गैर-जरूरी टेस्ट रोकती है: इकोकार्डियोग्राफी पल्मोनरी हाइपरटेंशन स्क्रीन करती है, CT पल्मोनरी एंजियोग्राफी एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म डायग्नोज करती है, और राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन पल्मोनरी हाइपरटेंशन को हीमोडायनामिकली कन्फर्म करती है। हर टेस्ट की एक खास भूमिका है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
कंसल्टेशन के बाद, टीम जरूरी टेस्ट शेड्यूल करेगी, आमतौर पर कुछ दिनों में। कंट्रास्ट इमेजिंग से पहले खून की जाँच हो सकती है। राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन के लिए थोड़े समय हॉस्पिटल में रहना पड़ता है। डॉक्टर हर टेस्ट का मकसद और जरूरी तैयारी समझाएंगे।
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग के लिए चुने गए इलाज के बाद सुधार की उम्मीद कब करनी चाहिए?
संक्षेप में
सुधार की समय-सीमा स्थिति और इलाज पर निर्भर करती है। एंटीकोगुलेशन पर एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लिए, सांस फूलना अक्सर दिनों से हफ्तों में कम होता है, जबकि पूरी एक्सरसाइज रिकवरी में तीन से छह महीने लग सकते हैं। टार्गेटेड थेरेपी पर पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन के लिए, फंक्शनल क्लास में सुधार आमतौर पर तीन से छह महीनों में दिखता है। क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लिए पल्मोनरी एंडारटेरेक्टोमी के बाद, हीमोडायनामिक सुधार तुरंत होता है लेकिन फंक्शनल रिकवरी में आठ से बारह हफ्ते लगते हैं।
विस्तार से
एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म में, एंटीकोगुलेशन नए थक्के रोकता है जबकि शरीर धीरे-धीरे मौजूदा थक्के को घोलता है; लक्षण राहत थक्के के घुलने और राइट वेंट्रिकुलर रिकवरी से जुड़ी होती है।
अध्ययन दिखाते हैं कि डायरेक्ट ओरल एंटीकोगुलेंट्स पर ज्यादातर मरीजों को स्टैंडर्ड थेरेपी के समान रिकरेंस और ब्लीडिंग परिणाम मिलते हैं।
पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन के लिए, एंडोथेलिन रिसेप्टर एंटागोनिस्ट्स, फॉस्फोडिएस्टरेज-5 इनहिबिटर्स और प्रोस्टासाइक्लिन एनालॉग्स महीनों में एक्सरसाइज क्षमता और हीमोडायनामिक्स में सुधार करते हैं; कॉम्बिनेशन थेरेपी प्रतिक्रिया को तेज कर सकती है।
पल्मोनरी एंडारटेरेक्टोमी के बाद, मरीज WHO फंक्शनल क्लास, एक्सरसाइज क्षमता और जीवन की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार अनुभव करते हैं, जिसमें मीडियन फॉलो-अप निरंतर लाभ दिखाता है। फॉलो-अप पर राइट हार्ट कैथेटराइजेशन हीमोडायनामिक नॉर्मलाइजेशन की पुष्टि करता है।
रिकवरी के दौरान रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम फंक्शनल लाभ बढ़ाते हैं। अपेक्षित समय-सीमा से आगे लगातार लक्षण अवशिष्ट रोग, रिकरेंट एम्बोलिज्म या लेफ्ट हार्ट डिजीज जैसे वैकल्पिक निदान के लिए पुनर्मूल्यांकन का संकेत देते हैं।
एक आम धारणा
कई मरीज तुरंत राहत की उम्मीद करते हैं।
असल में क्या होता है
पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन में, दवाएं धीरे-धीरे वेसल्स को रीमॉडल करती हैं। सर्जरी के बाद, दिल और फेफड़ों को अनुकूल होने में समय लगता है। तीन महीने पर लगातार सांस फूलना इलाज की विफलता नहीं दर्शाता; यह पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता का संकेत देता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आपका सर्जन आपकी बेसलाइन गंभीरता और इलाज प्रकार के आधार पर विशिष्ट मील के पत्थर तय करेगा। तीन महीने और छह महीने पर फॉलो-अप इकोकार्डियोग्राफी प्रगति को ट्रैक करती है।
यदि लक्षण अपेक्षा के अनुरूप नहीं सुधरते हैं, तो आगे की इमेजिंग या राइट हार्ट कैथेटराइजेशन की आवश्यकता हो सकती है। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि आपकी अपेक्षित रिकवरी समय-सीमा पर चर्चा हो सके।
मैं कैसे तय करूं कि पल्मोनरी एम्बोलिज्म के इलाज के लिए सलाह कब लेनी चाहिए?
संक्षेप में
अचानक सांस फूलना, सांस लेते समय सीने में दर्द, बेहोशी, खून की उल्टी, या पैर में सूजन और दर्द होने पर तुरंत सलाह लें। जयपुर हॉस्पिटल में 24 घंटे का इमरजेंसी विभाग है जहां तुरंत जांच होती है। लक्षण हल्के हों या आते-जाते हों, फिर भी हाल की सर्जरी, बेड रेस्ट, कैंसर, प्रेगनेंसी या पहले कभी क्लॉट होने का इतिहास पल्मोनरी एम्बोलिज्म की संभावना बढ़ाता है।
विस्तार से
क्लिनिकल शक पहला कदम है। गाइडलाइंस में वेल्स स्कोर, रिवाइज्ड जिनीवा स्कोर और PERC रूल से संभावना आंकी जाती है। अगर संभावना कम नहीं है, तो D-डाइमर टेस्ट या तुरंत CT पल्मोनरी एंजियोग्राफी की जाती है।
कम जोखिम वाले मरीज जिनमें PERC नेगेटिव हो, उन्हें टेस्ट की जरूरत नहीं हो सकती। लेकिन बिना वजह सांस फूलने को एंग्जायटी समझना या सीने के दर्द को मांसपेशियों का दर्द मानना आम गलतियां हैं जिनसे डायग्नोसिस में देरी होती है।
जब क्लिनिकल संभावना इंटरमीडिएट या हाई हो, तो कन्फर्मेटरी इमेजिंग से पहले ही थैरेप्यूटिक एंटीकॉगुलेशन शुरू करने की सलाह है।
अगर आपको पहले पल्मोनरी एम्बोलिज्म हुआ हो और नए या बढ़े हुए लक्षण आएं, तो दोबारा होने या क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक बीमारी को रूल आउट करने के लिए दोबारा जांच जरूरी है।
2019 ESC गाइडलाइंस के मुताबिक लगातार सांस फूलने या CTEPH के रिस्क फैक्टर होने पर 3 से 6 महीने में फॉलो-अप इकोकार्डियोग्राम कराने की सलाह है।
एक आम धारणा
कई लोग सांस फूलने को एंग्जायटी या अनफिट होना समझते हैं।
असल में क्या होता है
सीने के दर्द को अक्सर मांसपेशियों का खिंचाव मान लेते हैं। ये देरी जानलेवा हो सकती है। साथ ही, हाई-प्रोबेबिलिटी केस में नॉर्मल D-डाइमर PE को रूल आउट नहीं करता; इमेजिंग जरूरी है। और अगर पहले PE हुआ हो, तो नए लक्षण सिर्फ रिकरेंस नहीं हैं; वे क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक बीमारी का इशारा हो सकते हैं जिसके लिए अलग वर्कअप चाहिए।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
खुद डायग्नोस न करें और लक्षण ठीक होने का इंतजार न करें। इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें या जयपुर हॉस्पिटल की OPD में आएं। जल्दी जांच से जटिलताएं रुकती हैं। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि पूरी रिस्क असेसमेंट और समय पर इलाज हो सके।
पल्मोनरी वैस्कुलर डिजीज क्या हैं?
संक्षेप में
पल्मोनरी वैस्कुलर डिजीज वे कंडीशन हैं जो फेफड़ों की ब्लड वेसल्स को असर करती हैं, जिनमें पल्मोनरी एम्बोलिज्म, पल्मोनरी हाइपरटेंशन, और क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन शामिल हैं। जयपुर हॉस्पिटल इन कंडीशन के डायग्नोसिस और मैनेजमेंट के लिए इमेजिंग, हेमोडायनामिक असेसमेंट, और टार्गेटेड मेडिकल या सर्जिकल थेरेपी देता है।
विस्तार से
पल्मोनरी एम्बोलिज्म है थ्रोम्बस से पल्मोनरी आर्टरीज का एक्यूट ब्लॉकेज, जिसका डायग्नोसिस CT पल्मोनरी एंजियोग्राफी से होता है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन है रेस्ट पर राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन पर मीन पल्मोनरी आर्टरी प्रेशर 25 mmHg या ज्यादा, जिसे पैथोलॉजिकल और हेमोडायनामिक फीचर शेयर करने वाले पांच ग्रुप में बांटा गया है।
ग्रुप 1 है पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन, जिसे प्री-कैपिलरी पल्मोनरी हाइपरटेंशन और पल्मोनरी वैस्कुलर रेजिस्टेंस तीन वुड यूनिट या ज्यादा होने से डिफाइन किया जाता है। ग्रुप 4 है क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन, जो एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के बाद ऑर्गनाइज्ड थ्रोम्बोएम्बोलिक ऑब्सट्रक्शन से होती है।
एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म मैनेजमेंट में लो मॉलिक्युलर वेट हेपरिन या डायरेक्ट ओरल एंटीकॉगुलेंट्स से एंटीकॉगुलेशन, मासिव पल्मोनरी एम्बोलिज्म विद शॉक के लिए थ्रोम्बोलिसिस, और चुनिंदा केस में इन्फीरियर वेना कावा फिल्टर शामिल हैं।
पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन थेरेपी में एंडोथेलिन रिसेप्टर एंटागोनिस्ट, फॉस्फोडिएस्टरेज-5 इन्हिबिटर, प्रोस्टासाइक्लिन एनालॉग, और सॉल्यूबल ग्वानिलेट साइक्लेज स्टिमुलेटर आते हैं, अक्सर कॉम्बिनेशन में। क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन का इलाज पल्मोनरी एंडारटेरेक्टॉमी, बैलून पल्मोनरी एंजियोप्लास्टी, या मेडिकल थेरेपी से हो सकता है। राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन पल्मोनरी हाइपरटेंशन के डेफिनिटिव डायग्नोसिस के लिए जरूरी बना रहता है।
एक आम धारणा
लोग अक्सर पल्मोनरी हाइपरटेंशन को शरीर का हाई ब्लड प्रेशर समझ लेते हैं।
असल में क्या होता है
पल्मोनरी हाइपरटेंशन खासकर लंग आर्टरीज में हाई प्रेशर है, जिसे राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन से नापा जाता है। इसके पांच अलग ग्रुप हैं जिनके कारण और इलाज अलग हैं। एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म मेडिकल इमरजेंसी है, जबकि क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन महीनों बाद ऑर्गनाइज्ड क्लॉट से डेवलप होती है। हर एक के लिए अलग डायग्नोस्टिक पाथवे और ट्रीटमेंट स्ट्रैटेजी चाहिए।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अगर आपको पल्मोनरी वैस्कुलर डिजीज के लक्षण लगें, तो जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें। आपके सर्जन सही इमेजिंग और हेमोडायनामिक टेस्ट कराएंगे, डायग्नोसिस समझाएंगे, और आपकी कंडीशन के हिसाब से मैनेजमेंट प्लान डिस्कस करेंगे।
सांस लेने, छाती के लक्षणों या ऑक्सीजन लेवल में कौन से बदलाव तुरंत मदद मांगते हैं?
संक्षेप में
अचानक तेज सांस फूलना, सांस लेते समय बढ़ने वाला सीने का दर्द, खून की उल्टी होना, चक्कर आना या बेहोशी, ठंडा पसीना, या आराम पर ऑक्सीजन सैचुरेशन 90 प्रतिशत से नीचे जाने पर तुरंत मदद लें। जयपुर हॉस्पिटल में 24 घंटे का इमरजेंसी विभाग है जो एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म और पल्मोनरी हाइपरटेंशन क्राइसिस की तेज जांच के लिए तैयार है।
विस्तार से
एक्यूट मासिव पल्मोनरी एम्बोलिज्म में हीमोडायनामिक अस्थिरता, शॉक या कार्डियक अरेस्ट होता है। सबमासिव पल्मोनरी एम्बोलिज्म में इमेजिंग पर राइट वेंट्रिकुलर डिसफंक्शन या बिना हीमोडायनामिक पतन के बढ़ा हुआ ट्रोपोनिन दिखता है। दोनों को तुरंत अस्पताल में भर्ती करना जरूरी है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन में एक्यूट राइट हार्ट फेलियर तेजी से बढ़ती सांस फूलना, सिंकोप, पेरिफेरल ओएडिमा और बढ़ा हुआ जुगुलर वीनस प्रेशर के रूप में सामने आता है। आराम पर या हल्की मेहनत पर ऑक्सीजन डिसैचुरेशन वेंटिलेशन-परफ्यूजन मिसमैच या राइट-टू-लेफ्ट शंटिंग का संकेत देता है।
गाइडलाइंस कहती हैं कि कन्फर्मेटरी इमेजिंग से पहले संदिग्ध पल्मोनरी एम्बोलिज्म में थेराप्यूटिक एंटीकॉगुलेशन शुरू न करना एक आम गलती है। इसी तरह, अनएक्सप्लेंड डिस्पनोइया को एंग्जायटी मानना या सीने के दर्द को मस्कुलोस्केलेटल कारण बताना जान बचाने वाले इलाज में देरी करता है।
पल्स ऑक्सीमेट्री एक सिंपल स्क्रीनिंग टूल है लेकिन नॉर्मल सैचुरेशन पल्मोनरी एम्बोलिज्म को बाहर नहीं करता। वेल्स या रिवाइज्ड जिनेवा जैसे क्लिनिकल प्रोबेबिलिटी स्कोर D-डिमर या तुरंत CT पल्मोनरी एंजियोग्राफी की जरूरत तय करते हैं।
एक आम धारणा
कई लोग इंतजार करते हैं, सोचते हैं सांस फूलना एंग्जायटी, पैनिक अटैक या छाती का इन्फेक्शन है।
असल में क्या होता है
गाइडलाइंस दिखाती हैं कि अनएक्सप्लेंड डिस्पनोइया को एंग्जायटी मानना एक आम गलती है जो पल्मोनरी एम्बोलिज्म डायग्नोसिस में देरी करती है। पल्मोनरी एम्बोलिज्म का सीने का दर्द अक्सर प्ल्यूरिटिक होता है और मसल स्ट्रेन समझा जाता है। नॉर्मल ऑक्सीजन सैचुरेशन पल्मोनरी एम्बोलिज्म को रूल आउट नहीं करता। लक्षणों के बजाय क्लिनिकल प्रोबेबिलिटी स्कोर तुरंत इमेजिंग और एंटीकॉगुलेशन ट्रिगर करने चाहिए।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अगर आपको इनमें से कोई लक्षण हो तो एम्बुलेंस बुलाएं या नजदीकी इमरजेंसी विभाग जाएं। जयपुर हॉस्पिटल में 24 घंटे इमरजेंसी केयर है जिसमें इन-हाउस CT पल्मोनरी एंजियोग्राफी, इकोकार्डियोग्राफी और इंटेंसिव केयर है। अगर पल्मोनरी वैस्कुलर डिजीज का शक हो तो आपके सर्जन को तुरंत असेसमेंट के लिए सूचित किया जाएगा।
कौन से लक्षण होने पर मुझे विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए?
संक्षेप में
आपको जयपुर हॉस्पिटल में विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए अगर आपको मेहनत पर नया या बढ़ता हुआ साँस फूलना, अस्पष्ट सीने में बेचैनी, बेहोशी या लगभग बेहोशी के एपिसोड, टखनों में सूजन, या लगातार खाँसी है। ये लक्षण पल्मोनरी एम्बोलिज्म, पल्मोनरी हाइपरटेंशन या क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक बीमारी का संकेत दे सकते हैं, खासकर अगर ये ज्ञात थक्के के तीन महीने बाद भी बने रहें।
विस्तार से
दैनिक गतिविधि को सीमित करने वाला साँस फूलना पल्मोनरी वैस्कुलर रोग की सबसे आम प्रस्तुति है। एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म में अचानक साँस फूलना, प्ल्यूरिटिक सीने में दर्द, तेज़ दिल की धड़कन और कभी-कभी खून की खाँसी होती है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन में साँस फूलना धीरे-धीरे बढ़ता है, अक्सर थकान, मेहनत पर चक्कर और बाद में दाएँ दिल के तनाव से टखनों की सूजन के साथ।
क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन आमतौर पर एक्यूट थक्के के बाद होता है; मरीज़ एंटीकोगुलेशन के तीन महीने बाद भी साँस फूलना महसूस करते हैं।
दिशानिर्देश इकोकार्डियोग्राफी की सलाह देते हैं उन लोगों के लिए जिनमें एम्बोलिज्म के तीन से छह महीने बाद लगातार डिस्पनिया हो या जोखिम कारक हों जैसे कोई बड़ा क्षणिक ट्रिगर न होना, ऑटोइम्यून बीमारी या बार-बार थक्के बनना।
NT-proBNP महत्वपूर्ण पल्मोनरी हाइपरटेंशन की संभावना को वर्गीकृत करने में मदद करता है। कम इकोकार्डियोग्राफिक संभावना बीमारी को खारिज नहीं करती अगर लक्षण प्रमुख हों; कार्डियोपल्मोनरी एक्सरसाइज टेस्टिंग या दोबारा इमेजिंग की आवश्यकता हो सकती है।
एक आम धारणा
लोग अक्सर साँस फूलने को उम्र, वजन या चिंता मानकर नज़रअंदाज करते हैं।
असल में क्या होता है
दिशानिर्देश दिखाते हैं कि अस्पष्ट डिस्पनिया को चिंता मानना एक आम गलती है। थक्के के बाद लगातार लक्षणों को उचित इमेजिंग की आवश्यकता होती है, केवल आश्वासन की नहीं।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
लक्षण गंभीर होने का इंतज़ार न करें। जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श बुक करें अगर साँस फूलना कुछ हफ्तों से अधिक रहता है या ज्ञात थक्के के बाद होता है। पिछले डिस्चार्ज सारांश, स्कैन इमेज और दवा सूची साथ लाएँ।
डॉक्टर आपकी जोखिम प्रोफाइल का आकलन करेंगे, इकोकार्डियोग्राफी और खून की जाँच का आदेश देंगे, और तय करेंगे कि सीटी पल्मोनरी एंजियोग्राफी, वेंटिलेशन-परफ्यूजन स्कैनिंग या राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन की आवश्यकता है या नहीं। जल्दी रेफरल उपचार विकल्पों में सुधार करता है।
नतीजे मेरा केयर प्लान कैसे बदलेंगे?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में टेस्ट नतीजे सीधे आपके इलाज को आकार देते हैं। कन्फर्म्ड एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म तुरंत एंटीकॉएगुलेशन शुरू करता है; शॉक के साथ मैसिव एम्बोलिज्म में थ्रोम्बोलिसिस या इंटरवेंशन जुड़ता है। राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन से पल्मोनरी हाइपरटेंशन के हीमोडायनामिक्स WHO ग्रुप तय करते हैं और टार्गेटेड वेसोडायलेटर थेरेपी गाइड करते हैं। ऑपरेबल बीमारी के साथ क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन पल्मोनरी एंडारटेरेक्टॉमी या बैलून पल्मोनरी एंजियोप्लास्टी के लिए रेफरल की ओर ले जाता है।
विस्तार से
हर नतीजा आपको एक खास रास्ते पर ले जाता है। एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म रिस्क स्ट्रेटिफिकेशन PESI, sPESI, RV डिसफंक्शन और ट्रोपोनिन का इस्तेमाल करके आउटपेशेंट केयर, वार्ड एडमिशन या ICU मॉनिटरिंग के बीच तय करता है।
एंटीकॉएगुलेशन का चुनाव गाइडलाइन के मुताबिक होता है: डायरेक्ट ओरल एंटीकॉएगुलेंट्स ज्यादातर मरीजों के लिए विटामिन K एंटागोनिस्ट्स से बेहतर हैं, जिनमें एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम न हो। पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लिए, राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन के नंबर प्री-कैपिलरी और पोस्ट-कैपिलरी बीमारी अलग करते हैं।
प्री-कैपिलरी पल्मोनरी हाइपरटेंशन जिसमें पल्मोनरी वैस्कुलर रेजिस्टेंस तीन वुड यूनिट या ज्यादा हो, पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन थेरेपी के लिए क्वालिफाई करता है जैसे एंडोथेलिन रिसेप्टर एंटागोनिस्ट्स, फॉस्फोडिएस्टरेज-5 इन्हिबिटर्स, प्रोस्टासाइक्लिन एनालॉग्स या सॉल्युबल गुआनिलेट साइक्लेज स्टिमुलेटर्स।
पोस्ट-कैपिलरी बीमारी लेफ्ट हार्ट कारण के इलाज पर फोकस करती है। क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन में, रेफरल सेंटर पर मल्टीडिसिप्लिनरी टीम की ऑपरेबिलिटी असेसमेंट तय करती है कि पल्मोनरी एंडारटेरेक्टॉमी संभव है या नहीं।
इनऑपरेबल या रेजिडुअल बीमारी को बैलून पल्मोनरी एंजियोप्लास्टी या मेडिकल थेरेपी मिल सकती है। लो प्रोबेबिलिटी वाले पल्मोनरी हाइपरटेंशन के साथ लगातार सांस फूलने पर कार्डियोपल्मोनरी एक्सरसाइज टेस्टिंग की जरूरत हो सकती है असामान्य वैस्कुलर रिस्पॉन्स पकड़ने के लिए।
एक आम धारणा
मरीज अक्सर सारी सांस फूलने के लिए एक इलाज की उम्मीद करते हैं।
असल में क्या होता है
असल में, राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन से हीमोडायनामिक प्रोफाइल उन बीमारियों को अलग करता है जो इको पर एक जैसी दिखती हैं लेकिन पूरी तरह अलग दवाओं या सर्जरी की मांग करती हैं। गलत क्लासिफिकेशन गलत थेरेपी की ओर ले जाता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
नतीजे आने के बाद, स्पेशलिस्ट डायग्नोसिस, सुझाया इलाज और अपेक्षित अवधि पर चर्चा करेंगे। एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म को आमतौर पर तीन से छह महीने एंटीकॉएगुलेशन चाहिए; कुछ को लाइफलॉन्ग थेरेपी। पल्मोनरी हाइपरटेंशन को लाइफलॉन्ग मेडिकल फॉलो-अप चाहिए।
अगर सर्जरी की सलाह हो, तो रेफरल सेंटर प्री-ऑपरेटिव वर्कअप और 10 से 14 रात की स्टे बताएगा। जयपुर हॉस्पिटल में फॉलो-अप बुक करें अपने नतीजे रिव्यू करने और सही प्लान शुरू करने के लिए।
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग के इलाज के बाद लक्षण बने रहें या बिगड़ें तो मुझे क्या करना चाहिए?
संक्षेप में
यदि इलाज शुरू करने के बाद लक्षण बने रहें या बिगड़ें, तो जयपुर हॉस्पिटल में जयपुर में अपनी केयर टीम से तुरंत संपर्क करें। चिकित्सकीय सलाह के बिना दवाएं बंद या न बदलें। नई या बढ़ती सांस फूलना, सीने में दर्द, बेहोशी, पैरों में सूजन या खून की खांसी को तत्काल मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।
विस्तार से
एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के बाद तीन से छह महीने पर लगातार डिस्पनिया इकोकार्डियोग्राफी और संभवतः पल्मोनरी हाइपरटेंशन सेंटर रेफरल की मांग करता है।
दिशानिर्देश सलाह देते हैं कि अगर इकोकार्डियोग्राफिक संभावना इंटरमीडिएट या हाई है तो परफ्यूजन इमेजिंग और राइट हार्ट कैथेटराइजेशन के साथ क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन का आकलन करें।
पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन में, बिगड़ती फंक्शनल क्लास या नए राइट हार्ट फेल्योर के संकेत इलाज बढ़ाने, कॉम्बिनेशन थेरेपी या एडवांस्ड थेरेपी के लिए रेफरल की आवश्यकता दर्शा सकते हैं।
चिकित्सीय एंटीकोगुलेशन के बावजूद रिकरेंट वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म के लिए पालन, ड्रग इंटरैक्शन, रीनल फंक्शन और संभावित एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता होती है। एंटीकोगुलेंट्स पर ब्लीडिंग को डोज, संकेत और अवधि की तत्काल समीक्षा की आवश्यकता होती है।
आपकी टीम लेफ्ट हार्ट डिजीज, लंग डिजीज, एनीमिया या डीकंडीशनिंग जैसे वैकल्पिक कारणों पर भी विचार करेगी। कार्डियोपल्मोनरी एक्सरसाइज टेस्टिंग वैस्कुलर और नॉन-वैस्कुलर सीमा को अलग करने में मदद कर सकती है।
एक आम धारणा
मरीज अक्सर बहुत देर तक इंतजार करते हैं, उम्मीद करते हैं कि लक्षण गुजर जाएंगे।
असल में क्या होता है
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग में, देरी से मूल्यांकन रिकरेंट एम्बोलिज्म, क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन में प्रगति, या राइट हार्ट फेल्योर को मिस कर सकता है। जल्दी पुनर्मूल्यांकन परिणाम बदलता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
एक लक्षण डायरी रखें और इसे अपने फॉलो-अप पर लाएं। सभी निर्धारित इकोकार्डियोग्राफी और प्रयोगशाला अपॉइंटमेंट में भाग लें। यदि आपको अचानक गंभीर सांस फूलना, सिंकोप या हीमोप्टाइसिस होता है, तो इमरजेंसी विभाग जाएं।
मैं कैसे तय करूं कि पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लिए सलाह कब लेनी चाहिए?
संक्षेप में
अगर बिना वजह सांस फूले जिससे रोज का काम प्रभावित हो, लगातार थकान रहे, सीने में बेचैनी हो, या टखनों में सूजन आए, तो पल्मोनरी हाइपरटेंशन की सलाह लेनी चाहिए। जयपुर हॉस्पिटल में एक स्ट्रक्चर्ड इवैल्यूएशन पाथवे है जो क्लिनिकल असेसमेंट और नॉन-इनवेसिव टेस्टिंग से शुरू होता है ताकि पता चले कि राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन जरूरी है या नहीं।
विस्तार से
पल्मोनरी हाइपरटेंशन की परिभाषा है: रेस्ट पर मीन पल्मोनरी आर्टरी प्रेशर 25 mmHg या ज्यादा, जो राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन से नापा जाता है। इकोकार्डियोग्राफी पल्मोनरी हाइपरटेंशन की संभावना बताती है लेकिन कन्फर्म नहीं कर सकती।
गाइडलाइंस कहती हैं कि जब इकोकार्डियोग्राफी में इंटरमीडिएट या हाई प्रोबेबिलिटी दिखे, या लक्षण बने रहें जबकि प्रोबेबिलिटी कम हो और कोई दूसरा कार्डियोपल्मोनरी कारण न मिले, तो पल्मोनरी हाइपरटेंशन सेंटर रेफर करना चाहिए।
जल्दी डायग्नोसिस से टार्गेटेड थेरेपी — एंडोथेलिन रिसेप्टर एंटागोनिस्ट, फॉस्फोडिएस्टरेज-5 इन्हिबिटर, या प्रोस्टासाइक्लिन एनालॉग — मिलती है जो पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन में एक्सरसाइज कैपेसिटी और क्वालिटी ऑफ लाइफ सुधारती है।
देरी से डायग्नोसिस आम है क्योंकि सांस फूलने को एंग्जायटी, डीकंडीशनिंग, या लेफ्ट हार्ट डिजीज मान लिया जाता है। क्लिनिकल असेसमेंट, पल्मोनरी फंक्शन टेस्टिंग, बायोमार्कर, और इकोकार्डियोग्राफी का सिस्टमैटिक अप्रोच अकेली इकोकार्डियोग्राफी से ज्यादा प्रेडिक्टिव वैल्यू देता है।
एक आम धारणा
कई लोग सांस फूलने को उम्र, एंग्जायटी, या अनफिट होना मानकर टाल देते हैं।
असल में क्या होता है
गाइडलाइंस दिखाती हैं कि इससे डायग्नोसिस सालों लेट होती है। अकेली इकोकार्डियोग्राफी पल्मोनरी हाइपरटेंशन मिस कर सकती है, खासकर अगर लेफ्ट हार्ट डिजीज साथ हो। बायोमार्कर, लंग फंक्शन, और इकोकार्डियोग्राफी का स्ट्रक्चर्ड पाथवे इर्रिवर्सिबल वैस्कुलर बदलाव आने से पहले डिटेक्शन सुधारता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अगर कुछ हफ्तों से ज्यादा सांस फूल रही है जो किसी ज्ञात लंग या हार्ट कंडीशन से एक्सप्लेन नहीं होती, तो जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें।
आपके सर्जन हिस्ट्री देखेंगे, इकोकार्डियोग्राम और खून की जांच कराएंगे, और बताएंगे कि राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन जरूरी है या नहीं। ज्यादातर मरीज रेफरल के एक हफ्ते के अंदर देखे जाते हैं।
सवाल-जवाब
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग देखभाल (पल्मोनरी वैस्कुलर डिजीज केयर): सवाल और जवाब
जब आप हमसे संपर्क करते हैं
जयपुर में हमारी पल्मोनोलॉजी टीम से सलाह लें
जयपुर हॉस्पिटल से संपर्क कर अपना OPD असेसमेंट बुक करें और अपने स्कैन हमारी मेडिकल टीम से रिव्यू करवाएं।
- OPD में पल्मोनोलॉजिस्ट (चेस्ट फिजिशियन) से परामर्श
- आपके स्कैन और रिपोर्ट की समीक्षा, जरूरत हो तो इन-हाउस टेस्ट (लैब, एक्स-रे और इमेजिंग)
- आपके विकल्प सादे शब्दों में समझाए जाएंगे, जिसमें यह भी कि सर्जरी की जरूरत है या नहीं
- फैसला लेने से पहले लागत का अनुमानित खर्च
- RGHS, मा योजना, CGHS और पैनल्ड इंश्योरर व TPA के तहत कैशलेस इलाज में मदद
- आपके इलाज के बाद फॉलो-अप विजिट
पूरी जानकारी
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग देखभाल (पल्मोनरी वैस्कुलर डिजीज केयर): ज़रूरी जानकारी
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग देखभाल (पल्मोनरी वैस्कुलर डिजीज केयर) क्या है
- खून की नसों की समस्या
- दिल और फेफड़ों के बीच की नसें सिकुड़ जाती हैं, बंद हो जाती हैं या सख्त हो जाती हैं
- एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म
- खून का थक्का फेफड़ों तक पहुँचकर पल्मोनरी आर्टरी को बंद कर देता है
- पल्मोनरी हाइपरटेंशन
- फेफड़ों की धमनियों में ज्यादा दबाव, आराम पर औसत दबाव 25 mmHg या अधिक
- क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक रोग
- पुराने थक्के महीनों में रेशेदार ऊतक में बदल जाते हैं
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग में आपके दिल और फेफड़ों को जोड़ने वाली खून की नलियाँ शामिल होती हैं। ये नलियाँ खून को ले जाती हैं ताकि उसे ताज़ा ऑक्सीजन मिल सके। जब ये नलियाँ संकरी, अवरुद्ध या सख्त हो जाती हैं, तो सामान्य खून का दौरा बाधित होता है।
हमारी देखभाल इन स्थितियों को कवर करती है:
- एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म
- पल्मोनरी हाइपरटेंशन
- क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन
एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म तब होता है जब खून का थक्का आपके फेफड़ों तक पहुँचता है और पल्मोनरी आर्टरी को अवरुद्ध कर देता है। एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के इलाज की बुनियाद एंटीकॉगुलेशन है ताकि और थक्के न बनें।
कुछ मामलों में, पुराने खून के थक्के पूरी तरह से घुलते नहीं और महीनों में रेशेदार ऊतक में बदल जाते हैं, जिससे क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी रोग या क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन होता है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन का मतलब आपके फेफड़ों की धमनियों में हाई ब्लड प्रेशर है। इसे राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन के दौरान आराम की हालत में 25 mmHg या उससे अधिक के मीन पल्मोनरी आर्टेरियल प्रेशर के रूप में परिभाषित किया गया है।
हाल के वैज्ञानिक मानक आराम की हालत में 20 mmHg से ऊपर के मीन पल्मोनरी आर्टेरियल प्रेशर को सामान्य से अधिक मानते हैं।
पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन में, इस स्थिति का एक विशेष रूप, बढ़ा हुआ प्रेशर 15 mmHg या उससे कम के सामान्य पल्मोनरी आर्टेरियल वेज प्रेशर और 3 वुड यूनिट से अधिक के पल्मोनरी वैस्कुलर रेजिस्टेंस के साथ होता है।
क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिज्म में, डेड-स्पेस वेंटिलेशन बढ़ने और साँस लेने की क्षमता घटने के कारण, आराम के समय पल्मोनरी हाइपरटेंशन न होने पर भी व्यायाम करने में परेशानी हो सकती है।
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग के लक्षण और चेतावनी के संकेत
- अचानक साँस फूलना तेज़ी से बढ़ती साँस की तकलीफ
- बिना वजह सीने में दर्द बिना स्पष्ट कारण के दर्द
- पैर में दर्द, सूजन, या लाली डीप वेन थ्रोम्बोसिस का संकेत हो सकता है
- चक्कर आना या बेहोशी लो ब्लड प्रेशर के संकेत
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे विकसित होते हैं और नज़रअंदाज़ करना आसान होता है। आप रोज़मर्रा के कामों या नियमित सैर के दौरान बिना वजह साँस फूलना महसूस कर सकते हैं। व्यायाम करने की क्षमता कम होना या असामान्य रूप से थकान महसूस होना भी हो सकता है।
क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिज्म में, आराम के समय प्रेशर सामान्य होने पर भी मेहनत के दौरान साँस लेने में तकलीफ हो सकती है।
बिना वजह सीने के दर्द को मांसपेशियों का खिंचाव समझना एक आम क्लिनिकल गलती है। इसी तरह, बिना वजह साँस फूलने को चिंता या हाइपरवेंटिलेशन समझना एक और मान्य गलती है। जाँच से पहले लंबे समय तक साँस के लक्षणों का इतिहास पहले से मौजूद क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन की ओर इशारा कर सकता है।
कुछ चेतावनी के संकेतों के लिए उसी दिन तत्काल मेडिकल जाँच की ज़रूरत होती है:
- अचानक साँस फूलना या तेज़ी से बढ़ती साँस की तकलीफ
- बिना वजह सीने में दर्द
- पैर में दर्द, सूजन, या लाली जो डीप वेन थ्रोम्बोसिस का संकेत हो सकती है
- चक्कर आना, बेहोशी, या लो ब्लड प्रेशर और हेमोडायनामिक कॉम्प्रोमाइज के संकेत
डीप वेन थ्रोम्बोसिस को न पहचानना या संदिग्ध पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लिए तत्काल जाँच शुरू न करना गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। जयपुर हॉस्पिटल अचानक लक्षण महसूस होने पर इमरजेंसी मेडिकल केयर देता है।
कारण और किन्हें अधिक जोखिम है
- 0.8% मेजर ट्रांसिएंट रिस्क फैक्टर के साथ
- 2.8% बिना ट्रांसिएंट रिस्क फैक्टर के
- 33% से 42% सिस्टमिक स्क्लेरोसिस प्रोग्रेशन
पल्मोनरी वैस्कुलर स्थितियाँ कई अलग-अलग कारणों और अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं से उत्पन्न होती हैं। जब पल्मोनरी हाइपरटेंशन आपके फेफड़ों की धमनियों को अवरुद्ध करने वाले खून के थक्कों के कारण होता है, तो एंटीकॉगुलेंट दवाएँ और थक्के रोकने में मदद करती हैं।
जब यह दिल या फेफड़ों की समस्याओं जैसी अन्य मेडिकल समस्याओं से उपजा हो, तो इलाज उस अंतर्निहित स्थिति पर केंद्रित होता है। उदाहरण के लिए, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज या लेफ्ट हार्ट डिजीज पल्मोनरी आर्टरी के प्रेशर को बढ़ा सकते हैं।
कुछ समूहों को पल्मोनरी वैस्कुलर समस्याएँ विकसित होने का अधिक जोखिम होता है:
- जिन लोगों को पहले डीप वेन थ्रोम्बोसिस या पल्मोनरी एम्बोलिज्म हुआ हो, खासकर नॉन-ट्रांसिएंट जोखिमों के साथ
- जिन लोगों को ऑटोइम्यून स्थितियाँ हों जैसे सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस या सिस्टमिक स्क्लेरोसिस
- जिन महिलाओं का बार-बार गर्भपात हुआ हो, स्टिलबर्थ हुआ हो, या गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया हुआ हो
- जिन लोगों को खून जमने की स्थितियाँ हों जैसे एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम या एंटीथ्रोम्बिन, प्रोटीन सी, या प्रोटीन एस की विरासत में मिली कमी
- जिन व्यक्तियों को लिवेडो रेटिकुलरिस, कम प्लेटलेट काउंट, या हार्ट वॉल्व की असामान्यताएँ हों
धूम्रपान, गर्भावस्था, और ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव्स जैसे जोखिम कारकों के बारे में मरीज़ों को सलाह न देना एक मान्य गलती है। पल्मोनरी एम्बोलिज्म के बाद के मरीज़ों के एक अध्ययन में, क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन उन 0.8% लोगों में विकसित हुआ जिनमें मेजर ट्रांसिएंट रिस्क फैक्टर था, जबकि 2.8% उन लोगों में विकसित हुआ जिनमें ट्रांसिएंट रिस्क फैक्टर नहीं थे।
सिस्टमिक स्क्लेरोसिस के अध्ययनों में, 21 से 24 mmHg के बीच आराम के प्रेशर वाले मरीज़ों में फॉलो-अप के दौरान 33% से 42% मामलों में खुला पल्मोनरी हाइपरटेंशन विकसित हुआ।
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग की पहचान कैसे होती है: जाँच और टेस्ट
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग की पहचान के लिए ज़रूरी है:
- शारीरिक जाँच
- खून की जाँच
- विशेष इमेजिंग
सीटी पल्मोनरी एंजियोग्राफी एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म की पुष्टि के लिए इस्तेमाल होने वाला रेफरेंस स्टैंडर्ड इमेजिंग टेस्ट है। इकोकार्डियोग्राम अल्ट्रासाउंड का उपयोग करके दिल के कामकाज का मूल्यांकन करता है, राइट वेंट्रिकुलर स्ट्रेन की जाँच करता है, और पल्मोनरी हाइपरटेंशन की संभावना का आकलन करता है। NT-proBNP खून की जाँच भी महत्वपूर्ण पल्मोनरी हाइपरटेंशन की संभावना को वर्गीकृत करने में मदद करती है।
राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन पल्मोनरी हाइपरटेंशन या पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन के निश्चित निदान के लिए आवश्यक बना हुआ है। इस टेस्ट के दौरान, एक पतली कैथेटर दिल और पल्मोनरी आर्टरी के अंदर सीधे प्रेशर को मापती है।
एक सामान्य पल्मोनरी आर्टरी वेज प्रेशर प्रिजर्व्ड इजेक्शन फ्रैक्शन के साथ हार्ट फेल्योर को पूरी तरह से खारिज नहीं करता, जिससे सटीक माप महत्वपूर्ण हो जाती है।
पुराने खून के थक्कों और 3 से 6 महीने से लगातार साँस फूलने वाले लोगों में, लंग परफ्यूजन स्कैन, सीटी स्कैन, और इकोकार्डियोग्राम क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक रोग की जाँच करते हैं। अध्ययनों में, एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लगभग एक साल बाद 29% से 52% मरीज़ों में अवशिष्ट परफ्यूजन डिफेक्ट पाए गए।
थ्रोम्बोफिलिया टेस्ट आमतौर पर सभी अनचयनित मरीज़ों के लिए ज़रूरी नहीं होते, लेकिन 50 साल से कम उम्र के उन मरीज़ों में इन पर विचार किया जा सकता है जिनमें स्पष्ट उकसाने वाले जोखिम कारक न हों। अगर आपका मेडिकल इतिहास या शारीरिक जाँच इसका सुझाव दे, तो आपका डॉक्टर अंतर्निहित स्थितियों या गुप्त समस्याओं का मूल्यांकन कर सकता है।
बिना सर्जरी के इलाज के विकल्प, और सर्जरी कब सुझाई जाती है
पल्मोनरी एंडारटेरेक्टोमी
- संगठित पुराने थक्कों को निकालता है
बैलून पल्मोनरी एंजियोप्लास्टी
- गुब्बारे से वाहिकाओं को चौड़ा करता है
एट्रियल सेप्टोस्टोमी
- दिल के कक्षों के बीच छेद बनाता है
नॉन-सर्जिकल मेडिकल मैनेजमेंट ज्यादातर पल्मोनरी वैस्कुलर स्थितियों के इलाज का आधार बनता है। एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लिए, एंटीकॉगुलेशन आमतौर पर शुरू में 5 से 10 दिनों के लिए दिया जाता है, जिसके बाद 3 से 6 महीने तक खून पतला करने की दवा चलती है।
लो-रिस्क पल्मोनरी एम्बोलिज्म का इलाज घर पर उचित रूप से हो सकता है, जबकि अधिक गंभीर मामलों में आमतौर पर 3 से 7 रातों तक अस्पताल में रहना पड़ता है। हेमोडायनामिक शॉक वाले मरीज़ों के लिए, थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी सुझाई जाती है।
डायरेक्ट ओरल एंटीकॉगुलेंट्स जैसे रिवारोक्साबैन, एपिक्साबैन, एडोक्साबैन, या डाबीगैट्रान आमतौर पर विटामिन K एंटागोनिस्ट्स पर पसंद किए जाते हैं क्योंकि वे ब्लीडिंग के जोखिम को कम करते हैं और नियमित लैब मॉनिटरिंग की ज़रूरत नहीं होती। दवाएँ आपके स्थानीय केमिस्ट या अस्पताल के डिस्पेंसरी से ली जाती हैं।
पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन के लिए, आमतौर पर आजीवन मेडिकल थेरेपी की ज़रूरत होती है। जबकि थेरेपी लक्षणों को कम करने और दैनिक जीवन की गुणवत्ता का समर्थन करने में सहायता कर सकती हैं, ज्यादातर मामलों को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता।
टार्गेटेड ड्रग क्लास में एंडोथेलिन रिसेप्टर एंटागोनिस्ट्स, फॉस्फोडिएस्टरेज-5 इन्हिबिटर्स, प्रोस्टासाइक्लिन एनालॉग्स, और सॉल्युबल ग्वानिलेट साइक्लेज स्टिमुलेटर्स शामिल हैं, जिनका अक्सर संयोजन में उपयोग किया जाता है।
सर्जरी या कैथेटर इंटरवेंशन तब सुझाए जाते हैं जब अकेले दवाएँ पर्याप्त न हों या जब क्रोनिक अवरोध मौजूद हों:
- पल्मोनरी एंडारटेरेक्टोमी जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) के तहत एक ऑपरेशन है जिसमें योग्य मरीज़ों में क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन के साथ फेफड़ों की धमनियों से संगठित पुराने थक्कों को निकाला जाता है। रिकवरी में आमतौर पर 8 से 12 सप्ताह लगते हैं, जिसमें एक विशेष रेफरल सेंटर में 10 से 14 रातों तक अस्पताल में रहना शामिल है।
- बैलून पल्मोनरी एंजियोप्लास्टी फेफड़ों की धमनियों में एक छोटे गुब्बारे को गाइड करके वाहिकाओं को चौड़ा करती है जब सर्जरी उपयुक्त न हो।
- एट्रियल सेप्टोस्टोमी दिल के कक्षों के बीच एक छोटा सा छेद बनाकर दिल के दाहिने हिस्से पर तनाव को कम करती है।
- गंभीर स्थितियों में लंग ट्रांसप्लांट या हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट पर विचार किया जा सकता है।
आपका सर्जन और केयर टीम सलाह देंगे कि कौन सा दृष्टिकोण आपकी स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुकूल है। भारत में सामान्य लागत एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म केयर के लिए ₹50,000 से ₹3,00,000 तक और सर्जिकल एंडारटेरेक्टोमी के लिए एक रेफरल सेंटर में ₹20,00,000 या अधिक होती है, जो बीमारी की गंभीरता और ठहरने की अवधि पर निर्भर करती है।
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग देखभाल के लिए आपकी पहली मुलाकात और टेस्ट
- डॉक्टर लक्षणों और इतिहास के बारे में पूछते हैं खून के थक्कों का पारिवारिक इतिहास शामिल है
- शारीरिक जाँच और बुनियादी टेस्ट ईसीजी, चेस्ट एक्स-रे, खून की जाँच, ऑक्सीजन लेवल
- पल्मोनरी आर्टरी प्रेशर का अनुमान लगाने के लिए इकोकार्डियोग्राम दिल के दाहिने हिस्से के कामकाज की जाँच करता है
- ज़रूरत पड़ने पर आगे के टेस्ट राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन या सीटी पल्मोनरी एंजियोग्राफी
जब आप पल्मोनरी वैस्कुलर रोग देखभाल के लिए जयपुर हॉस्पिटल आते हैं, तो आपका डॉक्टर आपके लक्षणों, पिछली बीमारियों, ली जाने वाली दवाओं, और खून के थक्कों या फेफड़ों की बीमारी के किसी भी पारिवारिक इतिहास के बारे में पूछेगा। सभी हालिया रिपोर्ट, डिस्चार्ज समरी, और अपनी वर्तमान दवाओं की सूची साथ लाएँ।
डॉक्टर आपके दिल और फेफड़ों को सुनेगा, आपके पैरों में सूजन की जाँच करेगा, और आपके ऑक्सीजन लेवल को मापेगा।
आपके ये टेस्ट हो सकते हैं:
- एक ईसीजी
- एक चेस्ट एक्स-रे
- खून की जाँच जिसमें किडनी और लिवर फंक्शन, कम्पलीट ब्लड काउंट, और NT-proBNP शामिल हैं
इकोकार्डियोग्राम आमतौर पर आपकी पल्मोनरी आर्टरी में प्रेशर का अनुमान लगाने और यह जाँचने के लिए किया जाता है कि आपके दिल का दाहिना हिस्सा कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है।
अगर इकोकार्डियोग्राम पल्मोनरी हाइपरटेंशन की इंटरमीडिएट या हाई संभावना दिखाता है, तो आपका डॉक्टर आपको राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन के लिए रेफर करेगा, जो निदान की पुष्टि करने और सीधे प्रेशर मापने का निश्चित टेस्ट है। संदिग्ध एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लिए, सीटी पल्मोनरी एंजियोग्राफी निदान की पुष्टि के लिए रेफरेंस स्टैंडर्ड इमेजिंग टेस्ट है।
अगर आपको पहले पल्मोनरी एम्बोलिज्म हुआ हो और एंटीकॉगुलेशन के तीन महीने बाद भी साँस फूलती रहे, तो इकोकार्डियोग्राफी और संभवतः वेंटिलेशन-परफ्यूजन स्कैन या सीटी परफ्यूजन इमेजिंग के साथ आगे के मूल्यांकन की सिफारिश की जाती है।
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग के इलाज कैसे काम करते हैं
इलाज खास बीमारी पर निर्भर करता है। एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लिए, एंटीकॉगुलेशन (खून पतला करने की दवा) इलाज की बुनियाद है और अगर कोई पक्की मनाही न हो तो इसे आमतौर पर तुरंत शुरू किया जाता है।
पहले अक्सर लो-मॉलिक्यूलर-वेट हेपरिन दिया जाता है, फिर डायरेक्ट ओरल एंटीकॉगुलेंट जैसे रिवैरोक्साबैन, एपिक्साबैन, डाबीगैट्रान, या एडोक्साबैन दिया जाता है, जो ज्यादातर मरीजों के लिए विटामिन K एंटागोनिस्ट से बेहतर माने जाते हैं। बड़े पल्मोनरी एम्बोलिज्म में शॉक होने पर, सिस्टमिक थ्रोम्बोलिसिस दी जा सकती है ताकि थक्का जल्दी घुल जाए।
कुछ कम जोखिम वाले मरीजों का इलाज क्लिनिकल स्कोर जैसे हेस्टिया क्राइटेरिया, PESI, या सिम्प्लीफाइड PESI से जांच के बाद आउटपेशेंट की तरह किया जा सकता है। पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन (WHO ग्रुप 1) के लिए, टारगेटेड मेडिकल थेरेपी में एंडोथेलिन रिसेप्टर एंटागोनिस्ट, फॉस्फोडिएस्टरेज-5 इन्हिबिटर, प्रोस्टासाइक्लिन एनालॉग, और सॉल्यूबल गुआनिलेट साइक्लेज स्टिमुलेटर शामिल हैं, जिन्हें अक्सर मिलाकर दिया जाता है।
ये दवाएं जिंदगी भर लेनी पड़ती हैं और डोज एडजस्ट करने और साइड इफेक्ट पर नजर रखने के लिए नियमित फॉलो-अप की जरूरत होती है। क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन (CTEPH) के लिए, संभावित रूप से ठीक करने वाला इलाज पल्मोनरी एंडारटेरेक्टोमी (जिसे पल्मोनरी थ्रोम्बोएंडारटेरेक्टोमी भी कहते हैं) है, जो पल्मोनरी आर्टरी से जमे हुए थक्के निकालने का ऑपरेशन है।
यह सर्जरी एक स्पेशलाइज्ड रेफरल सेंटर पर जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) में की जाती है और इसमें लगभग 10 से 14 रात अस्पताल में रहना पड़ता है। बैलून पल्मोनरी एंजियोप्लास्टी उन मरीजों के लिए एक और विकल्प है जिनकी सर्जरी नहीं हो सकती या सर्जरी के बाद बीमारी बाकी रह गई हो।
गंभीर मामलों में जहां दूसरे इलाज मुमकिन न हों, एट्रियल सेप्टोस्टोमी या लंग ट्रांसप्लांट पर विचार किया जा सकता है। CTEPH के सभी मरीजों और बिना वजह हुए पल्मोनरी एम्बोलिज्म वालों के लिए लंबे समय तक एंटीकॉगुलेशन की सलाह दी जाती है।
आपका सर्जन या डॉक्टर बीमारी की जगह और फैलाव, आपकी सेहत, और मौजूद एक्सपर्टीज के आधार पर बताएंगे कि आपके लिए कौन सा विकल्प सही है।
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग के इलाज के जोखिम और संभावित जटिलताएं
एंटीकॉगुलेशन का मुख्य जोखिम ब्लीडिंग (खून बहना) है। एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लिए रिवैरोक्साबैन बनाम स्टैंडर्ड थेरेपी के एक बड़े ट्रायल में, रिवैरोक्साबैन वाले 1.1% मरीजों और स्टैंडर्ड थेरेपी वाले 2.2% मरीजों में मेजर ब्लीडिंग हुई; मेजर या क्लिनिकली रेलेवेंट नॉन-मेजर ब्लीडिंग का मिला-जुला नतीजा क्रमशः 10.3% और 11.4% में हुआ।
डायरेक्ट ओरल एंटीकॉगुलेंट, विटामिन K एंटागोनिस्ट के मुकाबले कम ब्लीडिंग से जुड़े हैं, खासकर बुजुर्ग मरीजों और मीडियम किडनी खराबी वालों में। बड़े पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लिए थ्रोम्बोलिसिस में मेजर ब्लीडिंग का जोखिम ज्यादा होता है, जिसमें इंट्राक्रैनियल हैमरेज (दिमाग में खून बहना) शामिल है।
पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन की दवाओं के आम साइड इफेक्ट दवा के क्लास पर निर्भर करते हैं: एंडोथेलिन रिसेप्टर एंटागोनिस्ट से लिवर एंजाइम गड़बड़ और एनीमिया हो सकती है; फॉस्फोडिएस्टरेज-5 इन्हिबिटर से सिरदर्द, फ्लशिंग, और नाक बंद हो सकती है; प्रोस्टासाइक्लिन एनालॉग से जबड़े में दर्द, मितली, दस्त, और इन्फ्यूजन साइट रिएक्शन हो सकते हैं अगर इंट्रावेनस या सबक्यूटेनियस दिया जाए।
कॉम्बिनेशन थेरेपी से साइड इफेक्ट की आशंका बढ़ सकती है। पल्मोनरी एंडारटेरेक्टोमी एक बड़ा ऑपरेशन है जिसके जोखिमों में ब्लीडिंग, संक्रमण, एरिदमिया (दिल की धड़कन गड़बड़), और रीपरफ्यूजन पल्मोनरी ओडिमा शामिल हैं; हालांकि, अनुभवी सेंटरों में अस्पताल में मृत्यु दर बहुत कम हो सकती है।
बैलून पल्मोनरी एंजियोप्लास्टी में नस को चोट, खून की उल्टी, और रीपरफ्यूजन ओडिमा के जोखिम होते हैं। कोई भी इलाज शुरू करने से पहले आपका डॉक्टर आपकी स्थिति पर लागू होने वाले जोखिमों पर चर्चा करेगा।
पल्मोनरी वैस्कुलर रोग के लिए रिकवरी और बाद की देखभाल
एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के बाद, आप आमतौर पर 3 से 7 रात अस्पताल में रहेंगे जब तक एंटीकॉगुलेशन स्थिर न हो जाए। आप 3 से 6 महीने तक एंटीकॉगुलेशन जारी रखेंगे, या उससे ज्यादा अगर एम्बोलिज्म बिना वजह हुआ हो या आपको CTEPH हो।
आपको जितना आरामदायक लगे उतना चलना चाहिए, अगर सलाह दी जाए तो कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनें, और लंबे समय तक बिना हिले-डुले रहने से बचें। ब्लीडिंग के लक्षणों पर नजर रखें जैसे असामान्य नीले निशान, पेशाब या मल में खून, या तेज सिरदर्द, और ऐसा होने पर अस्पताल से संपर्क करें।
साथ ही मदद लें अगर अचानक सांस फूले, सीने में दर्द हो, या चक्कर आए, जो दोबारा थक्का जमने का इशारा हो सकता है। पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन के लिए, इलाज जिंदगी भर चलता है।
आपको हर कुछ महीने में नियमित फॉलो-अप विजिट करनी होगी जिसमें क्लिनिकल असेसमेंट, इकोकार्डियोग्राम, खून की जांच, और कभी-कभी रिपीट राइट हार्ट कैथेटेराइजेशन शामिल होता है ताकि पता चले कि इलाज कितना काम कर रहा है। आपको प्रेगनेंसी, ज्यादा ऊंचाई, और भारी आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज से बचने की सलाह दी जा सकती है।
इन्फ्लुएंजा और न्यूमोकोकस के टीके लगवाने की सलाह दी जाती है। रेफरल सेंटर पर पल्मोनरी एंडारटेरेक्टोमी के बाद, आमतौर पर 10 से 14 रात रुकना पड़ता है। रिकवरी में 8 से 12 हफ्ते लगते हैं। आप जिंदगी भर एंटीकॉगुलेशन पर रहेंगे।
आपको सर्जिकल सेंटर और अपने लोकल डॉक्टर के साथ इकोकार्डियोग्राम और क्लिनिकल रिव्यू के लिए नियमित फॉलो-अप की जरूरत होगी। सफल सर्जरी के बाद ज्यादातर मरीजों को सांस फूलने, एक्सरसाइज क्षमता, और जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार महसूस होता है।
अगर आपको सांस फूलना बढ़ता हुआ लगे, पैरों में सूजन, चक्कर, धड़कन तेज होना, या दवाओं का कोई साइड इफेक्ट दिखे तो जयपुर हॉस्पिटल या अपने इलाज करने वाले डॉक्टर से संपर्क करें।
अध्ययनों में पल्मोनरी वैस्कुलर रोग के इलाज के नतीजे
एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के अध्ययनों में, रिवैरोक्साबैन, स्टैंडर्ड थेरेपी (लो-मॉलिक्यूलर-वेट हेपरिन के बाद विटामिन K एंटागोनिस्ट) के मुकाबले दोबारा वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म रोकने में नॉन-इन्फीरियर (कम नहीं) पाया गया, और सेफ्टी प्रोफाइल भी मिलती-जुलती थी। एपिक्साबैन ने स्टैंडर्ड थेरेपी के मुकाबले दोबारा सिम्प्टोमैटिक वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म या VTE से जुड़ी मौत का जोखिम 16% कम दिखाया।
एडोक्साबैन, वारफैरिन के मुकाबले नॉन-इन्फीरियर था और गंभीर पल्मोनरी एम्बोलिज्म वाले मरीजों समेत कई तरह के मरीजों में काफी कम ब्लीडिंग का कारण बना। डाबीगैट्रान, वारफैरिन के मुकाबले नॉन-इन्फीरियर था और ब्लीडिंग रेट कम थी।
पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन के लिए, टारगेटेड थेरेपी एक्सरसाइज क्षमता, फंक्शनल क्लास, और हिमोडायनामिक्स सुधारती हैं, और कॉम्बिनेशन थेरेपी अक्सर सिंगल-ड्रग ट्रीटमेंट से ज्यादा असरदार होती है।
हालांकि, पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन एक प्रोग्रेसिव (बढ़ने वाली) बीमारी बनी रहती है; एक कोहोर्ट में, पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन का नया होना बेनाइन (हल्का) नहीं था, फॉलो-अप के दौरान मौतें हुईं, भले ही डुअल ओरल कॉम्बिनेशन थेरेपी या इंट्रावेनस प्रोस्टासाइक्लिन शुरू की गई हो।
क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लिए, पल्मोनरी एंडारटेरेक्टोमी से WHO फंक्शनल क्लास, एक्सरसाइज क्षमता, और जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार होता है। एक बड़े इंटरनेशनल रजिस्ट्री में, CTEPH के मरीजों की सर्जरी से पहले औसत पल्मोनरी आर्टरी प्रेशर 47 mmHg और औसत पल्मोनरी वैस्कुलर रेजिस्टेंस 8.9 वुड यूनिट थी।
यहां तक कि जिन मरीजों में औसत पल्मोनरी आर्टरी प्रेशर थोड़ा बढ़ा हुआ था (20–24 mmHg), उनकी पल्मोनरी वैस्कुलर रेजिस्टेंस आमतौर पर 3 वुड यूनिट से ऊपर थी। एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के बाद रेजिडुअल परफ्यूजन डिफेक्ट आम हैं, लगभग एक साल में 29% से 52% मरीजों में देखे गए।
CTEPH विकसित होने का जोखिम उन मरीजों में ज्यादा होता है जिनके पहले पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लिए कोई बड़ा अस्थायी रिस्क फैक्टर नहीं था; एक अध्ययन में ऐसे 2.8% मरीजों में CTEPH विकसित हुआ, जबकि बड़े अस्थायी रिस्क फैक्टर वालों में केवल 0.8% में।
बॉर्डरलाइन पल्मोनरी हाइपरटेंशन (औसत पल्मोनरी आर्टरी प्रेशर 21–24 mmHg) खुले पल्मोनरी हाइपरटेंशन में बढ़ने के ज्यादा जोखिम और नॉर्मल प्रेशर के मुकाबले खराब सर्वाइवल से जुड़ा है।
जयपुर में पल्मोनरी वैस्कुलर रोग की देखभाल का खर्च और बीमा
भारत में एक्यूट पल्मोनरी एम्बोलिज्म के इलाज का आम खर्च ₹50,000 से ₹3,00,000 के बीच होता है, यह अस्पताल में रहने की अवधि, इस्तेमाल किए गए एंटीकॉगुलेंट के प्रकार, थ्रोम्बोलिसिस या इन्फीरियर वेना कावा फिल्टर की जरूरत, और किसी भी इंटेंसिव केयर जरूरत पर निर्भर करता है।
CTEPH के लिए पल्मोनरी एंडारटेरेक्टोमी एक बेहद स्पेशलाइज्ड प्रक्रिया है जो रेफरल सेंटरों पर की जाती है; भारत में इसका आम खर्च ₹20,00,000 या उससे ज्यादा होता है, जिसमें सर्जरी, 10 से 14 रात का अस्पताल में रहना, और ऑपरेशन के बाद की देखभाल शामिल है।
पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन के लिए जिंदगी भर की मेडिकल थेरेपी में दवाओं का लगातार खर्च आता है जो लिखी गई दवाओं और उनकी डोज के हिसाब से अलग होता है। जयपुर हॉस्पिटल एक एनएबीएच मान्यता प्राप्त मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल है जिसकी स्थापना 1991 में हुई थी।
हम इनके तहत मरीजों को लेते हैं:
- RGHS
- मा योजना
- CGHS
- प्राइवेट इंश्योरर और TPA का एक पैनल
हमारी सुविधाओं में 24×7 इमरजेंसी डिपार्टमेंट, 24×7 एम्बुलेंस सेवा, इंटेंसिव केयर यूनिट, इन-हाउस फार्मेसी, इन-हाउस डायग्नोस्टिक लैब और इमेजिंग, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, और प्रिवेंटिव हेल्थ चेक पैकेज शामिल हैं। कृपया अपनी खास बीमारी और इलाज योजना के आधार पर हमसे अनुमानित खर्च पूछें।