जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी · जयपुर हॉस्पिटल
जयपुर में नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी
आपकी नाभि पर उभार दर्द देता है और चिंता होती है। हम उसकी जाँच करते हैं और आपको एक साफ योजना बताते हैं।
- 1991 से जयपुर की सेवा में (35 साल)
- एनएबीएच मान्यता प्राप्त
- 24×7 इमरजेंसी और आईसीयू
- कैशलेस: RGHS, मा योजना, CGHS + 22 बीमा कंपनियाँ
- ऑपरेशन का समय
- 30 से 60 मिनट
- एनेस्थीसिया (बेहोशी)
- जनरल या स्पाइनलछोटे हर्निया के लिए लोकल
- रिकवरी (ठीक होना)
- डेस्क का काम 1 से 2 हफ्ते मेंभारी वजन उठाना 4 से 6 हफ्ते बाद
- कीमत
- ₹40,000 से ₹1,10,000भारत में सामान्य रेंज; हमसे अनुमानित खर्च पूछें
ऐसा उभार जो अपने आप न जाए
आपको नाभि पर एक गांठ महसूस होती है जो खाँसने या वजन उठाने पर बड़ी हो जाती है
नाभि का हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) पेट की दीवार में नाभि पर एक कमजोरी है। चर्बी या आँत उसमें से निकल कर उभार और तकलीफ पैदा करती है। यह अपने आप ठीक नहीं होता और समय के साथ बड़ा हो सकता है।
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दिखने वाला उभार
नाभि पर एक मुलायम गांठ जो जोर लगाने या खड़े होने पर ज्यादा बाहर निकल सकती है।
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तकलीफ या दर्द
नाभि के आसपास दबाव, दर्द या तेज दर्द, खासकर वजन उठाने या देर तक खड़े रहने के बाद।
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फँसने का खतरा
हर्निया अटक सकता है, जिससे तेज दर्द, उल्टी और मितली होती है। इसके लिए इमरजेंसी देखभाल जरूरी है।
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सर्जरी (ऑपरेशन) की चिंता
आप सोचते हैं कि क्या ऑपरेशन जरूरी है, काम से कितने दिन दूर रहना पड़ेगा और खर्च कितना होगा।
वयस्कों में नाभि का हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) इलाज के बिना अपने आप न तो जाता है और न ही ठीक होता है।
जयपुर हॉस्पिटल क्यों
आप बच्चे को उठाते वक्त होने वाले दर्द, उभार की शर्मिंदगी और इस डर से थक चुके हैं कि कहीं यह इमरजेंसी न बन जाए।
आपके इलाज का प्लान
हमारे साथ आपके पहले कदम
- 1 कॉल करें या ओपीडी में आकर सर्जन से सलाह लें
- 2 जाँच करवाएँ और जरूरत पड़ने पर इन-हाउस स्कैन देखें
- 3 मरम्मत का तरीका तय करें और अनुमानित खर्च लें
- 4 सर्जरी (ऑपरेशन) करवाएँ और रिकवरी (ठीक होने) के लिए फॉलो-अप करें
ऑपरेशन कैसे किया जाता है
सर्जन उभार को अंदर धकेलते हैं, छेद को बंद करते हैं और आमतौर पर मेश (जाली) से मजबूत करते हैं। ऑपरेशन 30 से 60 मिनट में जनरल, स्पाइनल या लोकल एनेस्थीसिया (बेहोशी) में होता है। आप उसी दिन घर जा सकते हैं या एक रात रुक सकते हैं।
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मेश (जाली) के साथ ओपन रिपेयर
नाभि के पास एक छोटा चीरा। दीवार को मजबूत करने के लिए मेश (जाली) लगाया जाता है। लगभग 1 सेमी से बड़े ज्यादातर वयस्क हर्निया के लिए मानक तरीका।
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स्यूचर रिपेयर (टाँके से मरम्मत)
छेद को मेश (जाली) के बिना टाँके से बंद किया जाता है। बहुत छोटे हर्निया के लिए इस्तेमाल होता है।
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लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) रिपेयर
कैमरे और मेश (जाली) के साथ कीहोल सर्जरी। अक्सर बड़े या दोबारा हुए हर्निया के लिए चुना जाता है।
मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं
- 1991 35 साल से जयपुर की सेवा में
- एनएबीएच मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल
- 3 जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कंसल्टेंट
- 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू और एम्बुलेंस
- 25 कैशलेस योजनाएँ और बीमा कंपनियाँ
शोध इस इलाज के बारे में क्या बताता है
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1 से 2 हफ्ते
ज्यादातर लोग सर्जरी (ऑपरेशन) के बाद एक से दो हफ्ते में डेस्क का काम पर लौट आते हैं।
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3.6% बनाम 11.4%
दो साल में, मेश (जाली) रिपेयर में दोबारा होने की दर 3.6% थी, जबकि स्यूचर रिपेयर में वयस्कों में 11.4%।
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35% बनाम 58%
लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) रिपेयर के दौरान फेशियल डिफेक्ट बंद करने से 30 दिन में सीरोमा की दर 58% से घटकर 35% हो गई।
अगर इलाज न कराया जाए
अगर इलाज न करवाया जाए, तो हर्निया आमतौर पर बड़ा और ज्यादा तकलीफदेह होता जाता है। यह अटक सकता है (इनकार्सरेटेड), जिससे आँत की खून की सप्लाई कट जाती है। इससे तेज दर्द, उल्टी होती है और इमरजेंसी सर्जरी (ऑपरेशन) जरूरी हो जाती है।
इलाज के बाद की जिंदगी
ज्यादातर लोग जल्दी सामान्य दिनचर्या पर लौट आते हैं। उभार चला जाता है और इमरजेंसी का खतरा खत्म हो जाता है।
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डेस्क के काम पर वापसी
ज्यादातर लोग एक से दो हफ्ते में ऑफिस का काम शुरू कर देते हैं।
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भारी वजन बाद में
आमतौर पर भारी वजन उठाने या कड़ी कसरत के लिए चार से छह हफ्ते इंतजार करना पड़ता है।
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उभार खत्म
नाभि फिर से सपाट दिखती है और ज्यादातर मरीजों की तकलीफ रुक जाती है।
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दोबारा होने का कम खतरा
मेश (जाली) रिपेयर से ज्यादातर वयस्कों में हर्निया के दोबारा होने का खतरा बहुत कम रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी के बारे में मरीज़ों के सवाल
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी में क्या होता है?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी में उभरे हुए टिश्यू को वापस पेट में डालकर नाभि के पास की कमजोर जगह को मजबूत किया जाता है। ऑपरेशन आमतौर पर 30 से 60 मिनट लेता है। हर्निया के आकार के हिसाब से आपको जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी), स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न), या लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) दिया जा सकता है। ज्यादातर मरीज उसी दिन घर चले जाते हैं या एक रात अस्पताल में रुकते हैं।
विस्तार से
सर्जन नाभि के पास एक छोटा चीरा लगाकर हर्निया की थैली तक पहुंचते हैं। बाहर निकली चर्बी या आंत को पेट की गुहा में वापस पहुंचाया जाता है।
लगभग एक सेंटीमीटर से बड़े डिफेक्ट के लिए आमतौर पर सिंथेटिक मेश (जाली) लगाई जाती है ताकि दीवार मजबूत हो और दोबारा होने का खतरा कम रहे।
अध्ययन बताते हैं कि मेश रिपेयर से केवल टांके वाले रिपेयर के मुकाबले दोबारा होने के मामले कम होते हैं।
तरीका ओपन सर्जरी (चीरे वाली) या लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) हो सकता है; लेप्रोस्कोपिक रिपेयर अक्सर बड़े या दोबारा हुए हर्निया के लिए चुना जाता है और इसमें ऑपरेशन का समय थोड़ा ज्यादा लग सकता है। सर्जिकल टीम हर्निया का आकार, पिछली सर्जरी और आपकी सेहत देखकर तरीका तय करती है।
एक आम धारणा
बहुत लोग सोचते हैं कि उभार को बस टांके से बंद कर दिया जाता है।
असल में क्या होता है
ज्यादातर बड़ों में अकेले टांकों से दोबारा होने की दर ज्यादा होती है। मेश (जाली) रिपेयर को लंबी मजबूती देता है, और लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) विकल्प बड़े हर्निया के लिए छोटे चीरे का मतलब हो सकता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
सर्जरी से पहले आपका शारीरिक परीक्षण और बुनियादी खून की जाँच होगी। आपको एक अटेंडेंट का इंतजाम करना होगा जो आपको घर ले जाए और पहले 24 घंटे साथ रहे।
डेस्क का काम आमतौर पर एक से दो हफ्ते में शुरू हो सकता है, जबकि भारी वजन उठाना चार से छह हफ्ते तक मना है। टीम आपको घाव की देखभाल, दर्द की दवा और फॉलो-अप विजिट कब आना है, इस पर लिखित निर्देश देगी। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि आपके केस के लिए सही तरीके पर चर्चा हो सके।
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की रिपेयर से पहले मुझे कौन-से टेस्ट और स्कैन चाहिए?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की रिपेयर से पहले आपको आमतौर पर शारीरिक जाँच और बुनियादी खून की जाँच चाहिए, जैसे हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, और क्लॉटिंग प्रोफाइल। अगर जाँच पर हर्निया का आकार या सामग्री स्पष्ट न हो, तो पेट का अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) कराया जा सकता है। उम्र और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर ईसीजी या चेस्ट एक्स-रे जैसे अतिरिक्त टेस्ट मांगे जा सकते हैं।
विस्तार से
सर्जन क्लिनिकल जाँच से डिफेक्ट को मापते हैं और रिड्यूसिबिलिटी जांचते हैं। अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) निदान की पुष्टि करने, डिफेक्ट का आकार आंकने, और जाँच अनिश्चित होने पर अन्य पेट की पैथोलॉजी को खारिज करने में मदद करता है।
खून की जाँच यह सुनिश्चित करती है कि आप एनेस्थीसिया (बेहोशी) और सर्जरी (ऑपरेशन) के लिए फिट हैं।
अगर आपको लिवर की बीमारी, जलोदर (एसाइटिस), या हृदय की स्थितियाँ हैं, तो लिवर फंक्शन टेस्ट या कार्डियोलॉजी क्लीयरेंस जैसे आगे के मूल्यांकन की आवश्यकता हो सकती है।
प्री-एनेस्थीसिया चेक-अप सभी परिणामों की समीक्षा करता है और एनेस्थीसिया (बेहोशी) के प्रकार — जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी), स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न), या लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) — पर फैसला करता है। यह वर्क-अप आमतौर पर एक या दो विज़िट में पूरा हो जाता है।
एक आम धारणा
मरीज़ अक्सर सीटी स्कैन (CT scan) या एमआरआई (MRI) की उम्मीद करते हैं।
असल में क्या होता है
अधिकांश नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) के लिए, एक अच्छी क्लिनिकल जाँच और एक साधारण अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) पर्याप्त हैं। अतिरिक्त स्कैन केवल तभी कराए जाते हैं जब कुछ असामान्य संदेह हो।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अपनी प्री-ऑपरेटिव अपॉइंटमेंट पर कोई भी पिछली रिपोर्ट साथ लाएं। नर्सिंग टीम आपको उपवास के निर्देश और दवा समायोजन पर मार्गदर्शन करेगी। अधिकांश मरीज़ सर्जिकल कंसल्टेशन (परामर्श) के एक सप्ताह के भीतर टेस्ट पूरे कर लेते हैं।
फिर सर्जरी (ऑपरेशन) पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तारीख पर तय की जाती है। जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श (अपॉइंटमेंट) बुक करें ताकि हमारी सर्जिकल और एनेस्थीसिया (बेहोशी) टीमों के साथ प्री-ऑपरेटिव मूल्यांकन शुरू हो सके।
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी और शुरुआती रिकवरी (ठीक होना) में कितना दर्द होता है?
संक्षेप में
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी के दौरान आपको कोई दर्द महसूस नहीं होगा क्योंकि ऑपरेशन जनरल या स्पाइनल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी या कमर से नीचे सुन्न) के तहत किया जाता है। सर्जरी के बाद, ज्यादातर लोगों को नाभि के आसपास कुछ दिनों तक दर्द रहता है। जयपुर हॉस्पिटल दर्द की दवा और स्पष्ट निर्देश देता है ताकि आप घर पर आराम से रह सकें।
विस्तार से
ऑपरेशन के दौरान आप सोए हुए होते हैं या कमर से नीचे सुन्न होते हैं, इसलिए दर्द नहीं होता। पहले 24 से 48 घंटों में हिलने, खांसने या हंसने पर आपको सुस्त दर्द या खिंचाव महसूस हो सकता है।
सबूत (एविडेंस) दिखाते हैं कि लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) रिपेयर में आमतौर पर ओपन सर्जरी (चीरे वाली) के मुकाबले कम दर्द होता है क्योंकि कट छोटे होते हैं।
आपकी सर्जिकल टीम आपको दर्द की दवा का प्रिस्क्रिप्शन देगी और खांसते समय घाव पर तकिया दबाकर रखने की सलाह देगी। ज्यादातर मरीज़ कहते हैं कि तीसरे या चौथे दिन तक तकलीफ काफी कम हो जाती है।
एक आम धारणा
कई लोग तेज़ दर्द की उम्मीद करते हैं, लेकिन अध्ययन (स्टडी) दिखाते हैं कि ज्यादातर मरीज़ इसे सुस्त दर्द बताते हैं जो तीसरे या चौथे दिन तक कम हो जाता है।
असल में क्या होता है
लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) कट, एक बड़े ओपन कट (चीरे वाली) के मुकाबले कम दर्द देते हैं।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
पहले दो दिन नियमित रूप से बताई गई दर्द की गोलियां लें, फिर ज़रूरत पड़ने पर ही लें। पहले दिन से धीरे-धीरे चलें लेकिन कम से कम दो हफ्ते तक केतली से भारी कुछ न उठाएं।
अगर दर्द अचानक बढ़ जाए, बुखार आए, या घाव लाल और गर्म हो जाए, तो तुरंत हॉस्पिटल से संपर्क करें। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करके अपने पर्सनल दर्द-प्रबंधन प्लान पर चर्चा करें।
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी के बाद रिकवरी (ठीक होना) में आमतौर पर कितना समय लगता है?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी के बाद रिकवरी (ठीक होना) आमतौर पर डेस्क का काम एक से दो हफ्ते में शुरू करने देती है और भारी सामान उठाना चार से छह हफ्ते बाद। ऑपरेशन खुद 30 से 60 मिनट का होता है। ज्यादातर मरीज़ उसी दिन घर चले जाते हैं या एक रात अस्पताल में रुकते हैं।
विस्तार से
प्रमाण दिखाते हैं कि लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) सर्जरी में रिकवरी (ठीक होना) आमतौर पर ओपन सर्जरी (चीरे वाली) से तेज़ होती है, दर्द कम होता है और सामान्य कामकाज में जल्दी लौटते हैं। आपको कुछ दिनों में बेहतर महसूस होना चाहिए।
सर्जरी के अगले दिन से चलना-फिरना बढ़ावा दिया जाता है, लेकिन कसरत, भारी सामान उठाना, और पेट पर ज़ोर डालने वाले काम तब तक रोकें जब तक आपका सर्जन इजाज़त न दे, आमतौर पर चार से छह हफ्ते के आसपास। सूजन कम करने और घाव को सहारा देने के लिए एक बाइंडर दिया जा सकता है।
एक आम धारणा
आम गलती है बहुत जल्दी भारी काम पर लौट जाना।
असल में क्या होता है
अध्ययन दिखाते हैं कि लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) वाले मरीज़ तेज़ी से ठीक होते हैं, लेकिन दोनों तरीकों में भारी सामान उठाने से पहले चार से छह हफ्ते का इंतज़ार ज़रूरी है ताकि दोबारा न हो।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
घर ले जाने के लिए एक अटेंडेंट का इंतज़ाम करें और पहली रात साथ रुकने को कहें। चीरे को साफ रखें, मंज़ूरी मिलने पर 24 से 48 घंटे बाद नहाएं, और दो हफ्ते तक टब में न नहाएं।
दी गई दर्द की दवा और एंटीबायोटिक ठीक वैसे ही लें जैसे बताया गया हो। जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श बुक करें ताकि आपकी सर्जिकल टीम आपको निजी रिकवरी (ठीक होने) का टाइमलाइन दे सके।
क्या नाभि का हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) अपने आप ठीक हो सकता है?
संक्षेप में
एक वयस्क में नाभि का हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) इलाज के बिना दूर नहीं जाएगा या अपने आप ठीक नहीं होगा। जयपुर में जयपुर हॉस्पिटल में, सर्जिकल टीम बताती है कि पेट की दीवार में डिफेक्ट खुला रहता है जब तक कि इसे सर्जिकल रूप से ठीक नहीं किया जाता।
विस्तार से
अध्ययन कहते हैं कि वयस्क अम्बिलिकल हर्निया सहज रूप से बंद नहीं होते। समय के साथ, खांसने, जोर लगाने, या वजन बढ़ने से बढ़ा हुआ इंट्रा-एब्डोमिनल दबाव डिफेक्ट को बड़ा कर सकता है और इनकार्सरेशन या स्ट्रैंगुलेशन का खतरा बढ़ा सकता है।
शिशुओं में, छोटे अम्बिलिकल हर्निया अक्सर तीन से चार साल की उम्र तक बंद हो जाते हैं, लेकिन वयस्कों में फाइब्रस रिंग अपने आप ठीक नहीं होती। सर्जरी अंतर को बंद करने और जटिलताओं को रोकने का एकमात्र तरीका है।
एक आम धारणा
कुछ लोग वयस्क हर्निया को शिशु वाले से भ्रमित करते हैं, जो अक्सर चार साल की उम्र तक बंद हो जाते हैं।
असल में क्या होता है
वयस्कों में ऊतक उस तरह पुनर्जीवित नहीं होता, और मरम्मत में देरी से हर्निया बढ़ सकता है या फंस सकता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
कभी-कभी बहुत छोटे, बिना लक्षण वाले हर्निया के लिए इंतजार करना और देखना पेश किया जाता है, लेकिन हर्निया गायब नहीं होगा। अगर आप उभार, असुविधा, या कोई बदलाव देखते हैं, तो तुरंत सर्जिकल राय लें।
जयपुर हॉस्पिटल में जनरल और लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) सर्जरी विभाग के साथ परामर्श बुक करें ताकि मरम्मत विकल्पों और समय पर चर्चा की जा सके।
सर्जन (कंसल्टेंट / सर्जन) कैसे तय करेंगे कि नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की मरम्मत के लिए ऑपरेशन (सर्जरी) जरूरी है?
संक्षेप में
सर्जन (कंसल्टेंट / सर्जन) आपके लक्षणों, हर्निया के आकार, और क़ैद (इन्कार्सरेशन) जैसी जटिलताओं के खतरे के आधार पर तय करते हैं। जयपुर हॉस्पिटल इस दिशानिर्देश का पालन करता है कि ज्यादातर लक्षण वाले वयस्कों के लिए सर्जरी (ऑपरेशन) से मरम्मत सुझाई जाती है। बिना लक्षण वाले छोटे हर्निया पर निगरानी रखी जा सकती है, लेकिन ज्यादातर को अंत में मरम्मत की जरूरत पड़ती है क्योंकि वे समय के साथ बिगड़ते हैं।
विस्तार से
पता लगाने के लिए इतिहास लेकर पूरी शारीरिक जाँच की जाती है; शक होने पर अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) इस्तेमाल हो सकता है।
सर्जरी (ऑपरेशन) तब सुझाई जाती है जब हर्निया दर्द, तकलीफ, या ऐसा उभार दे जो रोजमर्रा के काम में दखल दे, या आंत के फँसने (इन्कार्सरेशन) का खतरा हो।
1 सेमी या बड़े छेद के लिए मेश (जाली) से मरम्मत आमतौर पर सुझाई जाती है क्योंकि अध्ययनों (स्टडी) में टाँके वाली मरम्मत के मुकाबले दोबारा होने की दर कम पाई गई है।
आपका सर्जन (कंसल्टेंट / सर्जन) आपकी सेहत और जलोदर जैसी उन स्थितियों पर भी गौर करेगा जो भरने पर असर डालती हैं।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
जयपुर हॉस्पिटल की जनरल और लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) सर्जरी ओपीडी में क्लिनिकल आकलन के लिए जाएँ। सर्जन (कंसल्टेंट / सर्जन) आपकी जाँच करेंगे, खतरे और फायदे बताएंगे, और योजना सुझाएंगे।
मेरा डॉक्टर नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी की सलाह क्यों दे सकता है?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल के डॉक्टर नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी की सलाह तब दे सकते हैं जब हर्निया दर्द, तकलीफ या दिखने वाला उभार पैदा करे जो रोजमर्रा के काम में दिक्कत दे। रिपेयर की सलाह तब भी दी जाती है अगर आंत के फंसने का खतरा हो, जिसे इन्कार्सरेशन कहते हैं, जो सर्जिकल इमरजेंसी बन सकता है। बड़ों के ज्यादातर हर्निया बिना सर्जरी के ठीक नहीं होते।
विस्तार से
सबूत बताते हैं कि बड़ों में नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) समय के साथ बड़े होते हैं और इन्कार्सरेटेड हो सकते हैं, जिससे तेज दर्द, मतली, उल्टी और गैस न निकलना होता है।
सर्जिकल रिपेयर इन जटिलताओं (कॉम्प्लिकेशन) को रोकता है और लक्षण दूर करता है। लगभग एक सेंटीमीटर से बड़े डिफेक्ट के लिए मेश (जाली) रिपेयर मानक है क्योंकि अध्ययनों में टांके वाले रिपेयर के मुकाबले कम दोबारा होने की दर बताई गई है।
फैसला आपकी सामान्य सेहत, हर्निया का आकार और इस बात पर भी निर्भर करता है कि क्या आपको ऐसी स्थितियां हैं जैसे एसाइटिस जो पेट का दबाव बढ़ाती हैं। एसाइटिस जैसी मूल स्थितियों को काबू करना सर्जरी के बाद दोबारा होने का खतरा घटाने के लिए जरूरी है।
एक आम धारणा
कुछ लोग इंतजार करते हैं कि यह अपने आप ठीक हो जाए।
असल में क्या होता है
बड़ों में ऐसा नहीं होता। देर करने से रिपेयर मुश्किल होता है और अर्जेंट ऑपरेशन की संभावना बढ़ती है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अगर आपको बढ़ता हुआ उभार दिखे, खांसने या वजन उठाने पर तकलीफ हो, या इन्कार्सरेशन के कोई लक्षण जैसे अचानक तेज दर्द या उल्टी हों, तो तुरंत मेडिकल जांच करवाएं। सर्जन आपकी जांच करेंगे, जोखिम और फायदे बताएंगे, और सुविधाजनक समय पर ऑपरेशन तय करेंगे।
रिकवरी में आमतौर पर डेस्क का काम एक से दो हफ्ते में शुरू हो जाता है। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि हमारी सर्जिकल टीम आपके हर्निया का आकलन कर सके।
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की रिपेयर से पहले के दिनों में मुझे कैसे तैयारी करनी चाहिए?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल आपको नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की रिपेयर से पहले एक स्पष्ट चेकलिस्ट देगा। सर्जरी (ऑपरेशन) से कुछ दिन पहले आमतौर पर खून की जाँच और फिटनेस चेक होता है। अगर संभव हो तो धूम्रपान बंद कर दें, क्योंकि यह घाव भरने को धीमा करता है। हल्का, स्वस्थ भोजन खाएं और हाइड्रेटेड रहें। आपका सर्जन आपसे ऑपरेशन से एक रात पहले या सुबह एंटीसेप्टिक साबुन से नहाने को कह सकता है।
विस्तार से
तैयारियों का उद्देश्य एनेस्थीसिया (बेहोशी) के दौरान संक्रमण (इन्फेक्शन) और सांस की समस्याओं का जोखिम कम करना है। खून की जाँच हीमोग्लोबिन, क्लॉटिंग, और शुगर लेवल जांचती है ताकि एनेस्थेटिस्ट सुरक्षित योजना बना सके।
थोड़े समय के लिए भी धूम्रपान बंद करने से ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुँच बेहतर होती है। एंटीसेप्टिक नहाने से त्वचा के बैक्टीरिया कम होते हैं जो घाव में प्रवेश कर सकते हैं।
अगर आप नियमित दवाएं लेते हैं, तो टीम बताएगी कि किन्हें जारी रखना है और किन्हें रोकना है। इन चरणों का पालन करने से ऑपरेशन सुचारू रूप से चलता है और तेज़ रिकवरी (ठीक होना) में मदद मिलती है।
एक आम धारणा
कई मरीज़ सोचते हैं कि वे सामान्य खा सकते हैं या शॉवर छोड़ सकते हैं।
असल में क्या होता है
दोनों संक्रमण (इन्फेक्शन) का जोखिम बढ़ाते हैं और ऑपरेशन में देरी कर सकते हैं। सूची का पालन करने से आप अधिक सुरक्षित रहते हैं।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आपको अपनी प्री-ऑपरेटिव विज़िट पर लिखित निर्देश मिलेंगे। सर्जरी (ऑपरेशन) से कम से कम दो दिन पहले सभी टेस्ट पूरे कर लें ताकि परिणाम तैयार हों। एक अटेंडेंट की व्यवस्था करें जो आपको घर ले जाए और पहली रात साथ रहे।
एनेस्थेटिस्ट द्वारा दिए गए उपवास समय के बाद कुछ न खाएं-पिएं। अगर तारीख से पहले आपको बुखार, खांसी, या कोई नई बीमारी हो, तो जयपुर हॉस्पिटल को कॉल करें। अभी अपना परामर्श (अपॉइंटमेंट) बुक करें ताकि आपको अपनी व्यक्तिगत तैयारी योजना मिल सके।
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी के आम साइड इफेक्ट और कम आम लेकिन गंभीर जटिलताएं (कॉम्प्लिकेशन) क्या हैं?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी के बाद सबसे आम साइड इफेक्ट सेरोमा है, जो घाव के पास तरल जमा होने से होता है और आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है। नाभि के आसपास नीले निशान और हल्की सूजन भी आम हैं। कम आम लेकिन गंभीर जटिलताओं (कॉम्प्लिकेशन) में घाव का संक्रमण (इन्फेक्शन), खून बहना, आंत में चोट, पैर में खून के थक्के, या हर्निया का दोबारा होना शामिल हैं।
विस्तार से
अध्ययन (स्टडी) बताते हैं कि सेरोमा सबसे आम पोस्टऑपरेटिव समस्या है। ओपन और लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन से) तकनीकों की तुलना करने वाले विश्लेषणों में संक्रमण (इन्फेक्शन), सेरोमा, या हेमेटोमा की दरों में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया।
दिल या फेफड़ों की समस्याओं जैसे सामान्य सर्जिकल जोखिम भी हो सकते हैं। आपकी सर्जिकल टीम बताएगी कि आपके हर्निया के आकार और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार कौन से जोखिम लागू होते हैं और आपको तत्काल देखभाल कब लेनी है, इसके स्पष्ट निर्देश देगी।
एक आम धारणा
मरीज़ अक्सर हर्निया के दोबारा होने की चिंता करते हैं, फिर भी अध्ययन (स्टडी) दिखाते हैं कि मेश (जाली) रिपेयर दो साल में रिकरेंस (दोबारा होना) को लगभग 3 से 4 प्रतिशत तक कम कर देता है।
असल में क्या होता है
संक्रमण (इन्फेक्शन) और थक्के असामान्य हैं लेकिन दिखने पर तुरंत कार्रवाई की ज़रूरत होती है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
कट पर बढ़ती लाली, गर्मी, या मवाद, बुखार, दवा से न ठीक होने वाला तेज़ दर्द, मल या गैस न निकलना, या पिंडली में सूजन और दर्द पर नज़र रखें। इनमें तुरंत मेडिकल अटेंशन की ज़रूरत होती है।
ज्यादातर लोग उसी दिन या एक रात रुकने के बाद घर चले जाते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि आपका सर्जन आपका पर्सनल रिस्क प्रोफाइल देख सके।
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी के बाद कौन से लक्षण सामान्य हैं और किनके लिए तुरंत चिकित्सा सहायता चाहिए?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी के बाद आपको हल्का दर्द, नाभि के आसपास सूजन, नीले निशान, और कुछ दिनों तक थकान महसूस हो सकती है। ये सामान्य हैं और आमतौर पर आराम और दी गई दर्द की दवा से ठीक हो जाते हैं। अपने सर्जन से संपर्क करें या इमरजेंसी विभाग जाएं अगर आपको बुखार आए, दवा से न ठीक होने वाला तेज़ दर्द हो, घाव से फैलती लाली हो, लगातार उल्टी हो, पेशाब या मल न आए, या खून का थक्का जमने के लक्षण जैसे पिंडली में सूजन और दर्द दिखें।
विस्तार से
प्रमाण दिखाते हैं कि हर्निया सर्जरी के बाद दर्द, थकान, और स्थानीय सूजन जैसे छोटे-मोटे साइड इफेक्ट आम हैं और आमतौर पर एक हफ्ते में ठीक हो जाते हैं।
सेरोमा, घाव के नीचे तरल जमा होना, सबसे आम जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) है और अक्सर बिना दखल के ठीक हो जाता है। घाव का संक्रमण (इन्फेक्शन), खून बहना, आंत को चोट, डीप वेन थ्रोम्बोसिस, या सेप्सिस जैसी गंभीर जटिलताएं दुर्लभ हैं लेकिन तुरंत इलाज मांगती हैं।
स्रोत खास खतरे के संकेत बताते हैं: बुखार, बेअसर दर्द, मल या गैस न निकलना, और खून का थक्का या सेप्सिस के लक्षण। आपकी सर्जिकल टीम छुट्टी से पहले इन रेड फ्लैग की लिखित सूची देगी।
एक आम धारणा
कई लोग सोचते हैं कि किसी भी दर्द का मतलब कुछ गड़बड़ है, लेकिन थोड़ी तकलीफ अपेक्षित है।
असल में क्या होता है
खतरे के संकेत खास हैं: बुखार, बेअसर दर्द, आंत या मूत्राशय में बदलाव, और खून का थक्का जमने के लक्षण। फ़र्क जानने से बेवजह घबराहट और खतरनाक देरी दोनों रुकती हैं।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
पहले दो हफ्ते इमरजेंसी नंबर हाथ में रखें। सलाह के मुताबिक दर्द की दवा लें, दिन में कई बार हल्के से टहलें, और ज़ोर न लगाएं।
अगर कोई खतरे का लक्षण दिखे, तो इंतज़ार न करें — नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएं या जयपुर हॉस्पिटल को कॉल करें। आपका सर्जन पहली फॉलो-अप में, आमतौर पर सात से दस दिन में, आपकी रिकवरी (ठीक होना) देखेगा।
जयपुर हॉस्पिटल में परामर्श बुक करें ताकि आपके निजी जोखिम कारकों पर चर्चा हो और आपको विस्तृत ऑपरेशन के बाद की देखभाल शीट मिले।
सवाल-जवाब
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी: सवाल और जवाब
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पूरी जानकारी
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी: ज़रूरी जानकारी
नाभि का हर्निया क्या है और यह कैसे होता है
- नाभि पर कमज़ोर जगह
- नाभि के आसपास पेट की दीवार में कमज़ोरी
- चर्बी या आंत वाली गांठ
- थैली कमज़ोरी से बाहर निकलती है
- अपने आप ठीक नहीं होता
- वयस्कों के हर्निया को इलाज चाहिए
नाभि का हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) पेट की दीवार में एक कमज़ोरी है जो नाभि के अंदर और आसपास विकसित होती है। हर्निया में, कोई अंग उस मांसपेशी या ऊतक की दीवार को पार कर जाता है जो उसे थामे रखती है।
चर्बी या आंत वाली एक गांठ या थैली उस कमज़ोरी से बाहर निकल आती है, जिससे कभी-कभी नाभि "बाहर निकली" (आउटी) दिखती है। नाभि के हर्निया वाले अधिकांश मरीज़ सबसे पहले नाभि पर गांठ या बेचैनी महसूस करते हैं।
समय के साथ ये हर्निया बड़े और अधिक तकलीफदेह हो सकते हैं क्योंकि हर्निया की थैली पेट के अंदर से बाहर की ओर धकेली जाती है। दूसरे हर्निया की तरह, वयस्कों में नाभि का हर्निया इलाज के बिना अपने आप ठीक नहीं होता या बेहतर नहीं होता।
नाभि के हर्निया के लक्षण और वे चेतावनी संकेत जिनमें उसी दिन तत्काल देखभाल चाहिए
- तेज़ दर्द, मतली, उल्टी हर्निया अटका या इन्कार्सरेटेड हो सकता है
- गैस या मल न निकलना आंत की रुकावट का संभावित संकेत
- दवा के बाद भी दर्द कम न हो डॉक्टर से संपर्क करें या तत्काल देखभाल लें
- बुखार संक्रमण का संकेत हो सकता है
- पैर में खून का थक्का के लक्षण इमरजेंसी रूम जाएं
- सेप्सिस के लक्षण इमरजेंसी रूम जाएं
आपको नाभि के पास एक गांठ दिख या महसूस हो सकती है। वह जगह छूने पर दुख सकती है, और आपको महसूस हो सकता है:
- दबाव
- बेचैनी
- या दर्द
हर्निया अप्रिय लक्षण भी पैदा कर सकते हैं, जैसे दबाव, बेचैनी या दर्द।
अगर हर्निया अटक जाए या "इन्कार्सरेटेड" हो जाए, तो आपको हो सकता है:
- तेज़ दर्द
- मतली
- उल्टी
- या मलद्वार से गैस न निकल पाना
ये चेतावनी संकेत हैं जिनमें उसी दिन तत्काल देखभाल चाहिए। सर्जरी के बाद, कुछ दिनों तक दर्द रहना आम है। आपकी नाभि के आसपास का हिस्सा सूजा हुआ हो सकता है। आप थकान भी महसूस कर सकते हैं और सामान्य से कम ऊर्जा महसूस कर सकते हैं।
अभी अपने डॉक्टर से संपर्क करें या तत्काल चिकित्सा सहायता लें अगर दर्द दवा लेने के बाद भी बेहतर न हो, अगर बुखार हो, या अगर आप मल या गैस न निकाल पा रहे हों। इमरजेंसी रूम जाएं अगर आपको पैर में खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) के लक्षण दिखें या सेप्सिस के लक्षण दिखें।
नाभि के हर्निया के कारण और किन्हें अधिक जोखिम है
- पेट का दबाव बढ़ना
- कमज़ोरी पैदा या बढ़ा सकता है
- लिवर सिरोसिस के साथ एसाइटिस
- भारी दबाव हर्निया को तेज़ी से बड़ा करता है
- सिरोसिस में अधिक पाया जाता है
- ऐसे 20% मरीज़ों में नाभि का हर्निया होता है
हर्निया तब बनता है जब कोई अंग उसे थामे रखने वाली मांसपेशी या ऊतक की दीवार को पार कर जाता है। पेट के अंदर बढ़ा हुआ दबाव इस कमज़ोरी को पैदा कर सकता है या बढ़ा सकता है।
लिवर सिरोसिस और एसाइटिस वाले मरीज़ों में, पेट के अंदर का भारी दबाव नाभि के हर्निया को तेज़ी से बड़ा और जटिल बना देता है। लिवर सिरोसिस के साथ एसाइटिस होने पर 20% मरीज़ों में नाभि का हर्निया होता है। अधिकांश हर्निया पेट या जांघ के जोड़ (ग्रोइन) में बनते हैं।
सभी हर्निया को तत्काल इलाज की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन अधिकांश को अंततः इलाज चाहिए होता है क्योंकि वे आमतौर पर समय के साथ बिगड़ते हैं। अगर हर्निया लक्षण पैदा करे या आपको जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) के जोखिम में डाले, तो आपको सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।
नाभि के हर्निया की पहचान कैसे होती है: जांच और टेस्ट
नाभि के हर्निया की पहचान आपका डॉक्टर आपकी हिस्ट्री सुनकर और पूरी शारीरिक जांच करके कर सकता है। किसी शंका की स्थिति में, पेट का अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) कराकर निदान की पुष्टि की जा सकती है। आपका स्वास्थ्य सेवा प्रदाता तय करेगा कि आप हर्निया सर्जरी के लिए उपयुक्त हैं या नहीं और कौन सी सर्जरी आपके लिए सही है।
बिना सर्जरी के इलाज के विकल्प और नाभि के हर्निया की सर्जरी कब करवानी चाहिए
वयस्कों में नाभि का हर्निया इलाज के बिना अपने आप ठीक नहीं होता या बेहतर नहीं होता। इन्कार्सरेशन के जोखिम और नाभि के हर्निया से होने वाले लक्षणों के कारण, अधिकांश मरीज़ों के लिए सर्जरी से मरम्मत की सलाह दी जाती है। सर्जरी हर्निया का सबसे आम इलाज है।
हर्निया सर्जरी में आपका सर्जन अंग और बाहर निकले ऊतक को वापस जगह पर रखता है और उसे थामे रखने वाली दीवार को टांकों या सर्जिकल मेश (जाली) से मज़बूत करता है।
हर्निया की सर्जरी के मुख्य प्रकार हैं:
- ओपन
- लेप्रोस्कोपिक (न्यूनतम चीरा वाली)
- और रोबोटिक मरम्मत
1 से 4 सेमी के नाभि के हर्निया के लिए मेश (जाली) से मरम्मत की सलाह दी जाती है। बहुत छोटे डिफेक्ट के लिए टांके से मरम्मत एक विकल्प हो सकता है। आपका सर्जन बताएगा कि कौन सी तकनीक आपके लिए सही है।
एसाइटिस वाले मरीज़ों में, एसाइटिस को काबू करना हर्निया के दोबारा होने और ऑपरेशन के बाद की जटिलताओं (कॉम्प्लिकेशन) को कम करने का मुख्य आधार है। अगर आपका ट्रांसप्लांट 3 से 6 महीने में होने की अच्छी संभावना है, तो हर्नियोरैफी ट्रांसप्लांट के दौरान ही की जानी चाहिए।
नाभि के हर्निया की सर्जरी की तैयारी
करें
- कुछ दवाएं बंद करें
- नियमित टेस्ट पूरे करें
- अटेंडेंट और कागज़ात साथ लाएं
- ढीले कपड़े पहनें
आपका सर्जन उन दवाओं के बारे में पूछेगा जो आप नियमित रूप से लेते हैं, जिनमें खून पतला करने वाली दवाएं, एस्पिरिन, या हर्बल सप्लीमेंट शामिल हैं। कुछ दवाओं को ऑपरेशन से कुछ दिन पहले बंद करना पड़ सकता है।
आमतौर पर आपको कुछ नियमित टेस्ट कराने होंगे जैसे खून की जांच, ईसीजी, और कभी-कभी छाती का एक्स-रे यह देखने के लिए कि आप एनेस्थीसिया (बेहोशी) के लिए फिट हैं। अगर आपको डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी अन्य बीमारियां हैं, तो आपका डॉक्टर सर्जरी के दिन से पहले उन्हें अच्छी तरह काबू में करेगा।
अगर आपको जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) या स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न) दी जानी है, तो प्रक्रिया से कम से कम छह घंटे पहले आपको कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। लोकल एनेस्थीसिया (सिर्फ उस जगह को सुन्न करना) के लिए हल्का खाना लेने की छूट हो सकती है, लेकिन आपका सर्जन इसकी पुष्टि करेगा।
ढीले, आरामदायक कपड़े पहनें जो नाभि पर न दबें। एक अटेंडेंट साथ लाएं जो आपके साथ रह सके और बाद में आपको घर ले जा सके। अपनी नियमित दवाएं, बीमा या योजना के कार्ड, और एक फोटो आईडी साथ रखें।
अगर आप बाइंडर या पेट का सपोर्ट इस्तेमाल करते हैं, तो उसे भी साथ लाएं क्योंकि ऑपरेशन के बाद उसकी ज़रूरत पड़ सकती है।
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी कैसे की जाती है
- भर्ती और जांच वार्ड या डे-केयर यूनिट, आईडी बैंड
- एनेस्थीसिया दी गई जनरल, स्पाइनल या लोकल विद सेडेशन
- सर्जन ने हर्निया रिपेयर किया दीवार मजबूत करने के लिए मेश या टांके इस्तेमाल हुए
- रिकवरी रूम में निगरानी पूरी तरह होश आने तक वाइटल साइन पर नजर
ऑपरेशन आमतौर पर 30 से 60 मिनट का होता है। आपको या तो जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) दी जाएगी, या स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न करना)। बहुत छोटे हर्निया के लिए लोकल एनेस्थीसिया (उस जगह को सुन्न करना) और सेडेशन का इस्तेमाल हो सकता है। आपका सर्जन बताएगा कि आपके लिए कौन सी एनेस्थीसिया ठीक है।
तीन आम तरीके हैं। ओपन रिपेयर विद मेश (चीरे वाली सर्जरी और जाली) ज्यादातर वयस्कों के 1 सेंटीमीटर से बड़े हर्निया के लिए स्टैंडर्ड विकल्प है। सर्जन नाभि के पास एक चीरा लगाते हैं, हर्निया की सामग्री को पेट के अंदर वापस धकेलते हैं, और कमजोर जगह पर एक सिंथेटिक मेश (जाली) रखकर दीवार को मजबूत करते हैं।
सूचर रिपेयर में केवल टांकों से छेद बंद किया जाता है और यह आमतौर पर बहुत छोटे डिफेक्ट के लिए रखा जाता है। लेप्रोस्कोपिक रिपेयर (दूरबीन से सर्जरी) में कई छोटे कट और एक कैमरा इस्तेमाल होता है; मेश को पेट के अंदर से रखा जाता है। यह तरीका अक्सर बड़े या दोबारा हुए हर्निया के लिए चुना जाता है।
आपका सर्जन आपके हर्निया के आकार, पहले रिपेयर हुआ है या नहीं, और आपकी सेहत के हिसाब से सही तकनीक बताएंगे।
सर्जरी वाले दिन आपको वार्ड या डे-केयर यूनिट में भर्ती किया जाएगा। नर्सिंग टीम आपकी डिटेल चेक करेगी, कलाई पर पहचान बैंड लगाएगी, और आपको मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर ले जाएगी। एनेस्थीसिया असर करने के बाद सर्जन रिपेयर करते हैं। त्वचा को टांकों, स्टेपल्स या स्किन ग्लू से बंद करके ड्रेसिंग लगाई जाती है।
फिर आप रिकवरी रूम जाएंगे जहां स्टाफ आपके वाइटल साइन पर नजर रखेगा जब तक आप पूरी तरह होश में न आ जाएं।
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी के जोखिम और संभावित जटिलताएं
- 35 से 58 प्रतिशत सेरोमा दर
- मेश से कम मेश बनाम सूचर दोबारा होना
किसी भी ऑपरेशन की तरह, खून बहना, संक्रमण (इन्फेक्शन), आंत में चोट, खून के थक्के, या दिल या फेफड़ों की समस्या जैसी जटिलताएं (कॉम्प्लिकेशन) हो सकती हैं। नाभि के हर्निया की सर्जरी के बाद सबसे आम जटिलता सेरोमा है, यानी घाव के नीचे तरल जमा होना।
अध्ययनों में सेरोमा लगभग 35 से 58 प्रतिशत मरीजों में पाया गया, यह इस पर निर्भर करता है कि लेप्रोस्कोपिक रिपेयर के दौरान फेशियल डिफेक्ट बंद किया गया था या नहीं। घाव का संक्रमण, हेमेटोमा, और लंबे समय तक दर्द भी सामने आए हैं।
ओपन और लेप्रोस्कोपिक तकनीकों की तुलना करने वाले शोध में संक्रमण, सेरोमा बनना, या हेमेटोमा की दरों में कोई खास अंतर नहीं पाया गया। मेश रिपेयर का दोबारा होने (रिकरेंस) की दर सूचर रिपेयर से कम होती है, लेकिन कुछ अध्ययनों में मेश के साथ सर्जिकल साइट इन्फेक्शन की दर थोड़ी ज्यादा देखी गई।
तीन महीने से ज्यादा चलने वाला दर्द, जिसे पोस्ट-हर्नियोरैफी न्यूराल्जिया कहते हैं, कुछ लोगों में हो सकता है। पुरुषों में ग्रोइन एरिया की हर्निया सर्जरी से कभी-कभी नसों या रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है जिससे अंडकोष में दर्द या बांझपन हो सकता है, हालांकि यह ग्रोइन हर्निया के लिए ज्यादा प्रासंगिक है, नाभि के हर्निया के लिए नहीं।
अगर आपको बुखार आए, दवा से आराम न मिलने वाला बढ़ता दर्द हो, घाव से लाली या डिस्चार्ज हो, मल या गैस न निकले, या पिंडली में सूजन आए, तो तुरंत जयपुर हॉस्पिटल से संपर्क करें या इमरजेंसी विभाग जाएं।:
- बुखार
- दवा से आराम न मिलने वाला बढ़ता दर्द
- घाव से लाली या डिस्चार्ज
- मल या गैस न निकलना
- या पिंडली में सूजन
ये संक्रमण, आंत की रुकावट, या खून के थक्के के लक्षण हो सकते हैं।
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी के बाद रिकवरी और देखभाल
- उसी दिन या एक रात ज्यादातर मरीज घर जाते हैं
- 24 से 48 घंटे डॉक्टर मानें तो नहा सकते हैं
- एक से दो हफ्ते डेस्क का काम शुरू कर सकते हैं
- चार से छह हफ्ते भारी सामान और मेहनत वाला काम सुरक्षित
- फॉलो-अप विजिट दो हफ्ते, तीन, बारह और चौबीस से तीस महीने पर
ज्यादातर मरीज उसी दिन घर चले जाते हैं या एक रात हॉस्पिटल में रुकते हैं। आपको घर ले जाने के लिए दर्द की दवा दी जाएगी। इसे बताए अनुसार लें और अगर एंटीबायोटिक्स दी गई हैं तो उन्हें जल्दी बंद न करें।
डॉक्टर की सहमति हो तो सर्जरी के 24 से 48 घंटे बाद नहा सकते हैं, लेकिन पहले दो हफ्ते टब में नहाने (सोकिंग) से बचें। रोजाना गुनगुने साबुन वाले पानी से जगह को हल्के से धोएं और थपथपाकर सुखाएं। चीरे पर हाइड्रोजन पेरोक्साइड या अल्कोहल न लगाएं। ड्रेसिंग रोज बदलें या गीली/गंदी होने पर बदलें। अगर टेप स्ट्रिप्स या स्किन ग्लू लगा है, तो उन्हें खुद गिरने दें।
आप अपना सामान्य खाना खा सकते हैं। खूब पानी पिएं और कब्ज़ से बचें; जरूरत हो तो लैक्सेटिव लेने की सलाह दी जा सकती है। खांसते या छींकते समय चीरे पर तकिया दबाकर रखें।
ऐसा कुछ न उठाएं जिससे जोर पड़े, और जॉगिंग, वेट लिफ्टिंग, या एरोबिक एक्सरसाइज जैसी मेहनत वाली गतिविधियां तब तक न करें जब तक सर्जन सुरक्षित न बताएं। सर्जरी के अगले दिन से चलना-फिरना बढ़ावा दिया जाता है और इसे धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं।
डेस्क का काम आमतौर पर एक से दो हफ्ते में शुरू कर सकते हैं। भारी सामान उठाना या मेहनत वाला काम चार से छह हफ्ते इंतजार करना चाहिए। सूजन और दर्द कम करने के लिए एक बाइंडर दिया जा सकता है।
आपका फॉलो-अप अपॉइंटमेंट होगा, आमतौर पर दो हफ्ते पर, फिर तीन, बारह, और चौबीस से तीस महीने पर जांच के लिए। अगर बुखार, बढ़ता दर्द, घाव से डिस्चार्ज, या लैक्सेटिव लेने के बाद भी मल न निकले जैसे चेतावनी संकेत दिखें, तो हॉस्पिटल कॉल करें या इमरजेंसी विभाग जाएं।
नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी के नतीजे और दोबारा होने की दरें
अध्ययनों में वयस्कों के नाभि के हर्निया की मेश रिपेयर में सूचर रिपेयर से कम दोबारा होना (रिकरेंस) पाया गया। लगभग 25 महीने के मीडियन फॉलो-अप वाले एक बड़े ट्रायल में मेश के साथ 2 साल की रिकरेंस अनुमान 3.6 प्रतिशत थी, जबकि सूचर रिपेयर में 11.4 प्रतिशत।
एक रिकरेंस रोकने के लिए मेश से इलाज करने वाले मरीजों की संख्या लगभग 13 थी। लेप्रोस्कोपिक रिपेयर के दौरान फेशियल डिफेक्ट बंद करने से लंबे समय की रिकरेंस भी कम हुई, क्लोजर ग्रुप में 2 साल की संचयी रिकरेंस 7 प्रतिशत थी बनाम बिना क्लोजर 19 प्रतिशत।
लेप्रोस्कोपिक रिपेयर का घाव के संक्रमण, घाव खुलना (वाउंड डिहिसेंस), और रिकरेंस का जोखिम ओपन रिपेयर से कम हो सकता है, हालांकि कुछ विश्लेषणों में दोनों तरीकों की रिकरेंस दरों में कोई अंतर नहीं मिला। कुछ स्रोतों में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के साथ रिकरेंस का थोड़ा ज्यादा जोखिम भी नोट किया गया है।
कुल मिलाकर, हर्निया सर्जरी को एक सुरक्षित प्रक्रिया माना जाता है जो ज्यादातर लोगों में हर्निया ठीक कर सकती है और उसके दोबारा होने को रोक सकती है। रिकरेंस दर सर्जरी के प्रकार, हर्निया के आकार, और मरीज के कारकों पर निर्भर करती है। आपका सर्जन आपकी खास स्थिति के लिए सबूत क्या कहते हैं, इस पर चर्चा करेंगे।
जयपुर में नाभि के हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया) की सर्जरी का खर्च और बीमा
जयपुर हॉस्पिटल में नाभि के हर्निया की सर्जरी की आम कीमत ₹40,000 से ₹1,10,000 के बीच है। अंतिम खर्च इस्तेमाल की गई तकनीक (ओपन या लेप्रोस्कोपिक), मेश के प्रकार, एनेस्थीसिया के तरीके, आप एक रात रुकते हैं या उसी दिन जाते हैं, और किसी अतिरिक्त जांच या दवा की जरूरत पर निर्भर करता है।
ओपन रिपेयर आमतौर पर लेप्रोस्कोपिक रिपेयर से कम खर्चीला होता है। आपके सर्जन द्वारा हर्निया का मूल्यांकन करके योजना पर चर्चा करने के बाद अनुमानित खर्च बताया जाएगा।
जयपुर हॉस्पिटल कई सरकारी और निजी योजनाओं के पैनल में है।
इनमें शामिल हैं:
- RGHS
- मा योजना
- और CGHS
- साथ ही निजी बीमाकर्ताओं और थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर्स (TPAs) का एक पैनल
अगर आप इनमें से किसी योजना के तहत कवर हैं, तो अपना योजना कार्ड और रेफरल दस्तावेज लाएं। हॉस्पिटल का बीमा डेस्क कवरेज वेरिफाई करने और प्री-ऑथराइजेशन प्रोसेस करने में मदद कर सकता है। खुद भुगतान करने वाले मरीजों के लिए हॉस्पिटल नकद, कार्ड, और डिजिटल भुगतान स्वीकार करता है।
इन-हाउस फार्मेसी और डायग्नोस्टिक लैब होने से ज्यादातर दवाएं और जांचें साइट पर ही उपलब्ध होती हैं, जिससे बिलिंग आसान हो सकती है।